Kanchan Chaurasiya
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#😂फनी जोक्स🤣
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#😂फनी जोक्स🤣 #😁फनी वीडियो📽
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#🤗जया किशोरी जी🕉️ #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
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#😎 Attitude कोट्स ✍ #😂फनी जोक्स🤣 #😁फनी वीडियो📽 #😆 कॉमेडी एक्टिंग
😎 Attitude कोट्स ✍ - ShareChat
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#🍶Bottle Art🎨 #🤗 राशिद खान #😎 Attitude कोट्स ✍
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00:20
#👼बेबी हेल्थ केयर टिप्स
👼बेबी हेल्थ केयर टिप्स - बनाम गुनगुना पानी पुनः उपयोग होने वाला : घर का बनाया फेस् कवर या  इसके असर मास्क पहनें ठंडा पानी गुनगुना पानी हज़म करने में मदद करता है हज़म होना धीमा हो जाता है अंदर तक हाइड्रेट नहीं करता  अंदर तक हाइड्रेट करता है में खून " কমম  কী সমা ঐনা & शरीर का बहाव बढ़ाता है गंदगी बाहर निकालने में शरीर को कम पोषण मदद करता है मिलता है 7~0a1 बनाम गुनगुना पानी पुनः उपयोग होने वाला : घर का बनाया फेस् कवर या  इसके असर मास्क पहनें ठंडा पानी गुनगुना पानी हज़म करने में मदद करता है हज़म होना धीमा हो जाता है अंदर तक हाइड्रेट नहीं करता  अंदर तक हाइड्रेट करता है में खून " কমম  কী সমা ঐনা & शरीर का बहाव बढ़ाता है गंदगी बाहर निकालने में शरीर को कम पोषण मदद करता है मिलता है 7~0a1 - ShareChat
#📗प्रेरक पुस्तकें📘 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #😇 चाणक्य नीति
📗प्रेरक पुस्तकें📘 - बेटा रोज कहता था पापा र्मै आपका कर्ज उतारना चाहता हूं। बताइए आपका क्या कर्ज ह मुझ पर? " एक दिन पिता ने कर्ज की डायरी र्में लिखकर बेटे को दे दिया। उस्में लिखा था जव तू छोटा  था तव रात मैं तुझे अपने सीने पर सुलाता था। तब  मे 5 तू नींद मेरे ऊपर पेशाब भी कर दिया करता था। गीला होने के बाद भी तेरी नींद खराब न हो जाए भें तुझे सुलाए रखता था। एक बार नहीं सेकड़ो बार ऐसा हुआ। ये कर्ज हे मेरा तुझ पर। गांव या गांव के आसपास जब भी कोई मेला लगता था तब पूरा मेला मैं तुझे अपने  कंधे पर बेठ कर दिखाया करता था। कंधा दर्द करने भी मैं तुझे नीचे नर्हीं उतारता था। ये লযানা থা দিং कर्ज हे मेरा भी तू बीमार पडता था तब तुझपे।  जव सारी रात मुझे नींद नहीं आती थी। बार बार तुझे छू देखता था।ये कर्ज है मेरा तुझ पर। जब तुमने कर बाडक दिलवाने की रट लगार्ड थी तब सेठ से उधार लेकर मैं तुझे बाइक दिलवाई थी। वो उधार हे पैसा लिए तीन साल मेने ओवर टाइम किया था के चुकाने सेठ की दुकान पर।ये कर्ज हे गेरा तुझ पर। तू गलत लिए जाए। इसके  মান ম ন স ৪য মপব নিনা पड़ में पड़ कर तुझे बुरे लड़कों से दूर रखने के लिए तेरे आगे पीछे घूमता था।ये कर्ज ह मेरा तुझ पर.॰॰ बाप की चिंता ओर फिक्र के किस्सों से डायरी भरी पड़ी थी पढ़ते पढ़ते बेटे की आंखों से आंसू बहने लगे। वह समझ गया कि बाप के कर्ज चुकाना कठिन ही नहीं असंभव हे। सही कहा तो लाइक ओर शेयर एक प्यारा कर्मेंट बाप के नाम का I बेटा रोज कहता था पापा र्मै आपका कर्ज उतारना चाहता हूं। बताइए आपका क्या कर्ज ह मुझ पर? " एक दिन पिता ने कर्ज की डायरी र्में लिखकर बेटे को दे दिया। उस्में लिखा था जव तू छोटा  था तव रात मैं तुझे अपने सीने पर सुलाता था। तब  मे 5 तू नींद मेरे ऊपर पेशाब भी कर दिया करता था। गीला होने के बाद भी तेरी नींद खराब न हो जाए भें तुझे सुलाए रखता था। एक बार नहीं सेकड़ो बार ऐसा हुआ। ये कर्ज हे मेरा तुझ पर। गांव या गांव के आसपास जब भी कोई मेला लगता था तब पूरा मेला मैं तुझे अपने  कंधे पर बेठ कर दिखाया करता था। कंधा दर्द करने भी मैं तुझे नीचे नर्हीं उतारता था। ये লযানা থা দিং कर्ज हे मेरा भी तू बीमार पडता था तब तुझपे।  जव सारी रात मुझे नींद नहीं आती थी। बार बार तुझे छू देखता था।ये कर्ज है मेरा तुझ पर। जब तुमने कर बाडक दिलवाने की रट लगार्ड थी तब सेठ से उधार लेकर मैं तुझे बाइक दिलवाई थी। वो उधार हे पैसा लिए तीन साल मेने ओवर टाइम किया था के चुकाने सेठ की दुकान पर।ये कर्ज हे गेरा तुझ पर। तू गलत लिए जाए। इसके  মান ম ন স ৪য মপব নিনা पड़ में पड़ कर तुझे बुरे लड़कों से दूर रखने के लिए तेरे आगे पीछे घूमता था।ये कर्ज ह मेरा तुझ पर.॰॰ बाप की चिंता ओर फिक्र के किस्सों से डायरी भरी पड़ी थी पढ़ते पढ़ते बेटे की आंखों से आंसू बहने लगे। वह समझ गया कि बाप के कर्ज चुकाना कठिन ही नहीं असंभव हे। सही कहा तो लाइक ओर शेयर एक प्यारा कर्मेंट बाप के नाम का I - ShareChat
#📗प्रेरक पुस्तकें📘 #😇 चाणक्य नीति
📗प्रेरक पुस्तकें📘 - बेटी को इतना मजवत बनाओ  कि ट्ूटे समाज के ताने सह जाए दुनिया उसे कमज़ोर समझे   बेटी चो उसी दुनिया से आगे निकल जाए। e उसे सिर्फ रोटी बेलना मत सिखाओ बेटी अपने हक़ के लिए चोलना भी सिखाओ  6ಘ  जो आख उठे उसकी इज्ज़त पर उस ऑखमें ऑख हालना शी सिखाओ। क्योंकि आजःभी कईपरोंमें बेटी जन्म से पहले डर जाती ह॰ i ಾ1 mlu 1 t1 3laY , समाज की सोच से मर जाती है। भी दहेज के तराजू में॰ आज उसकी कीमत तोली जाती 6 बेटी बोझ नहीं, जिस बेटी सेघरमें रीनक हो आज की जरूरत है वही बोझ बोली जाती हे। कल का भबिष्य है। उसेये मत समझ्ाना केवल  कि " ससुराल ही तेरा घर होगा॰. उसे उडने दो यल्कि इतना आत्मसम्मान देना वो आसमान बदल देगी | कि जहॉ रहे वही उसका घर होगा।  पढाई सिर्फ़ नौकरी तक सीमित न हो॰ पटाई उसे पहचान दिलाए कोई रिश्ता , कोई मर्दः कोई समाज  उसकी उड़ान कभी रोक न Tn | उसे चुप रहना मत सिखाना cil  अक्सर हार बन जाती ६ चुष्पी  जो सहती रहती है हर जुल्म   चो अंदर ही अंदर राख बन जाती हे।  समाज आज भी बेटों को चारिस, और बेटियों को ज़िम्मेदारी कहता ह मगर सच तोये हेकि॰ मे चही बेटी सबसे पहले हाथ पकड़ता ह। बुढ़ापे  जव बेटा " अपना घर " कहकर अलग हो जाता हे बेटी ही मां की धड़कन बन जाती ह॰ तय जिसे पराया कहकर विदा किया था बही आखिरमे सबसे अपना कहलाती ह। उसे इंतजार नही अपने पैरों पर खड़ा होना सिखाओ  किसी के नाम से नहीं मैं बेटी हू॰ अपने नामसेजाना जाना सिखाओ। कमज़ोर नहीः क्योकि चेटी अगर शिधित होगी सशक हूँ समर्य हूँ तोपूरा समाज बदल जाएगा  मैं बदलूँगी जिस दिन बेटी डरना छोड देगी उस दिन अत्याचार जल जाएगा। ~mcl.. 0 बेटी को सिर्फ़ संस्कार नहीं  संघर्ष की आग॰भी देना चो झुके नहीं किसी अन्याय पर राकेश गुप्ता  उसे ऐसा स्वाभिगान भी देना।  25/05/2026 बेटी को इतना मजवत बनाओ  कि ट्ूटे समाज के ताने सह जाए दुनिया उसे कमज़ोर समझे   बेटी चो उसी दुनिया से आगे निकल जाए। e उसे सिर्फ रोटी बेलना मत सिखाओ बेटी अपने हक़ के लिए चोलना भी सिखाओ  6ಘ  जो आख उठे उसकी इज्ज़त पर उस ऑखमें ऑख हालना शी सिखाओ। क्योंकि आजःभी कईपरोंमें बेटी जन्म से पहले डर जाती ह॰ i ಾ1 mlu 1 t1 3laY , समाज की सोच से मर जाती है। भी दहेज के तराजू में॰ आज उसकी कीमत तोली जाती 6 बेटी बोझ नहीं, जिस बेटी सेघरमें रीनक हो आज की जरूरत है वही बोझ बोली जाती हे। कल का भबिष्य है। उसेये मत समझ्ाना केवल  कि " ससुराल ही तेरा घर होगा॰. उसे उडने दो यल्कि इतना आत्मसम्मान देना वो आसमान बदल देगी | कि जहॉ रहे वही उसका घर होगा।  पढाई सिर्फ़ नौकरी तक सीमित न हो॰ पटाई उसे पहचान दिलाए कोई रिश्ता , कोई मर्दः कोई समाज  उसकी उड़ान कभी रोक न Tn | उसे चुप रहना मत सिखाना cil  अक्सर हार बन जाती ६ चुष्पी  जो सहती रहती है हर जुल्म   चो अंदर ही अंदर राख बन जाती हे।  समाज आज भी बेटों को चारिस, और बेटियों को ज़िम्मेदारी कहता ह मगर सच तोये हेकि॰ मे चही बेटी सबसे पहले हाथ पकड़ता ह। बुढ़ापे  जव बेटा " अपना घर " कहकर अलग हो जाता हे बेटी ही मां की धड़कन बन जाती ह॰ तय जिसे पराया कहकर विदा किया था बही आखिरमे सबसे अपना कहलाती ह। उसे इंतजार नही अपने पैरों पर खड़ा होना सिखाओ  किसी के नाम से नहीं मैं बेटी हू॰ अपने नामसेजाना जाना सिखाओ। कमज़ोर नहीः क्योकि चेटी अगर शिधित होगी सशक हूँ समर्य हूँ तोपूरा समाज बदल जाएगा  मैं बदलूँगी जिस दिन बेटी डरना छोड देगी उस दिन अत्याचार जल जाएगा। ~mcl.. 0 बेटी को सिर्फ़ संस्कार नहीं  संघर्ष की आग॰भी देना चो झुके नहीं किसी अन्याय पर राकेश गुप्ता  उसे ऐसा स्वाभिगान भी देना।  25/05/2026 - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🌞 Good Morning🌞
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#❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #💝 शायराना इश्क़
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