Ravi Pandey
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📰GK & करेंट अफेयर्स Students💡 - भारत की प्रमुख लोक चित्रकला शैलियाँ चित्रकला / शैली 7|54 मधुबनी ( मिथिला ) बिहार कांगड़ा चित्रकला हिमाचल प्रदेश নমিলনাভ্তু तंजावुर पेंटिंग  $sfaAceT राजस्थान IV पश्चिम बँंगाल कालीघाट पेंटिँग आंध्र प्रदेश कलमकारी VI 3ilfs2IT पट्टचित्र VI ು गोँड कला मध्य प्रदेश VI faeR মসুণা ক্রলা वारली पेँटिंग महाराष्ट्र पिथोरा चित्रकला  गुजरात & मध्य प्रदेश  चेरिथल स्क्रॉल तेलंगाना X परीक्षा बिंदु চনীমগন  XI   सुआ चित्र भारत की प्रमुख लोक चित्रकला शैलियाँ चित्रकला / शैली 7|54 मधुबनी ( मिथिला ) बिहार कांगड़ा चित्रकला हिमाचल प्रदेश নমিলনাভ্তু तंजावुर पेंटिंग  $sfaAceT राजस्थान IV पश्चिम बँंगाल कालीघाट पेंटिँग आंध्र प्रदेश कलमकारी VI 3ilfs2IT पट्टचित्र VI ು गोँड कला मध्य प्रदेश VI faeR মসুণা ক্রলা वारली पेँटिंग महाराष्ट्र पिथोरा चित्रकला  गुजरात & मध्य प्रदेश  चेरिथल स्क्रॉल तेलंगाना X परीक्षा बिंदु চনীমগন  XI   सुआ चित्र - ShareChat
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📰GK & करेंट अफेयर्स Students💡 - भारतीय चित्रकला , लोक चित्रकला , गुफा चित्रकला उत्तराखंड ತಗೇ ಞaxT पहाड़ी चित्रकला राजस्थान चौकपूर्ति चित्रकला  নিম্ভায फड़ चित्रकला  गुलेर चित्रकला  पिचवाई चित्रकला चित्रकला कांगड़ा चित्रकला मधुबनी  पटना कला चित्रकला मंडाना चित्रकला मंजूषा चित्रकला  कजली चित्रकला  चित्रकला  बगरू पश्चिम बंगाल कालीघाट चित्रकला गुजरात आलपना चित्रकला रोगन चित्रकला  पिथोरा चित्रकला झारखंड पैकर चित्रकला कोहबर चित्रकला  सोहराई चित्रकला महाराष्ट्र जादोपटिया चित्रकला वारली चित्रकला छत्तीसगढ़ रोजा चित्रकला কীলাস अजंता गुफा चित्रकला गोंड चित्रकला केसर चित्रकला নলযানা Sure Study ओडिशा चेरियाल चित्रकला चित्रकला  पट्टचित्र निर्मल चित्रकला ओडिशा लोक चित्रकला सौर चित्रकला कर्नाटक रघुराजपुर चित्रकला गंजिफा चित्रकला # चित्रकला নমিলনাত্তু आंध्र प्रदेश  तंजावुर (तंजोर ) चित्रकला " श्रीकलाहस्ती कलमकारी কল चित्रकला सीताम्बरम चित्रकला  कलमेजुथु  चित्रकला  मुगल चित्रकला  कोलम चित्रकला लेपाक्षी मंदिर चित्रकला अरसमलाई चित्रकला  भारतीय चित्रकला , लोक चित्रकला , गुफा चित्रकला उत्तराखंड ತಗೇ ಞaxT पहाड़ी चित्रकला राजस्थान चौकपूर्ति चित्रकला  নিম্ভায फड़ चित्रकला  गुलेर चित्रकला  पिचवाई चित्रकला चित्रकला कांगड़ा चित्रकला मधुबनी  पटना कला चित्रकला मंडाना चित्रकला मंजूषा चित्रकला  कजली चित्रकला  चित्रकला  बगरू पश्चिम बंगाल कालीघाट चित्रकला गुजरात आलपना चित्रकला रोगन चित्रकला  पिथोरा चित्रकला झारखंड पैकर चित्रकला कोहबर चित्रकला  सोहराई चित्रकला महाराष्ट्र जादोपटिया चित्रकला वारली चित्रकला छत्तीसगढ़ रोजा चित्रकला কীলাস अजंता गुफा चित्रकला गोंड चित्रकला केसर चित्रकला নলযানা Sure Study ओडिशा चेरियाल चित्रकला चित्रकला  पट्टचित्र निर्मल चित्रकला ओडिशा लोक चित्रकला सौर चित्रकला कर्नाटक रघुराजपुर चित्रकला गंजिफा चित्रकला # चित्रकला নমিলনাত্তু आंध्र प्रदेश  तंजावुर (तंजोर ) चित्रकला " श्रीकलाहस्ती कलमकारी কল चित्रकला सीताम्बरम चित्रकला  कलमेजुथु  चित्रकला  मुगल चित्रकला  कोलम चित्रकला लेपाक्षी मंदिर चित्रकला अरसमलाई चित्रकला - ShareChat
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📰GK & करेंट अफेयर्स Students💡 - प्रमुख चित्रकला और संबंधित राज्य" "भारत की चित्रकला चित्रकला राज्य যাডখ उडीसा हिमाचल प्रदेश पट्टचित्र अरोफ कालीघाट केरल पश्चिम बंगाल कलमा जट्टू वारली ऐपन उत्तराखंड महाराष्ट्र যানালী कर्नाटक उत्तर प्रदेश चौक पूर्णा 1 पिथोरा TISUTT गुजरात राजस्थान चिनकारी लखनऊ फड राजस्थान 1 कलमकारी आंध्र प्रदेश लघु राजस्थान যীভ आंध्र प्रदेश मध्यप्रदेश S farr अरिपन मध्यप्रदेश बाघ बिहार নসিলনাত্তু कोल्लम मधुबनी 9 तमिलनाडु तंजौर [ புள் अल्पना चैरियल নলযানা अथिया गुजरात रंगोली फलकारी पंजाब H6RIE प्रमुख चित्रकला और संबंधित राज्य" "भारत की चित्रकला चित्रकला राज्य যাডখ उडीसा हिमाचल प्रदेश पट्टचित्र अरोफ कालीघाट केरल पश्चिम बंगाल कलमा जट्टू वारली ऐपन उत्तराखंड महाराष्ट्र যানালী कर्नाटक उत्तर प्रदेश चौक पूर्णा 1 पिथोरा TISUTT गुजरात राजस्थान चिनकारी लखनऊ फड राजस्थान 1 कलमकारी आंध्र प्रदेश लघु राजस्थान যীভ आंध्र प्रदेश मध्यप्रदेश S farr अरिपन मध्यप्रदेश बाघ बिहार নসিলনাত্তু कोल्लम मधुबनी 9 तमिलनाडु तंजौर [ புள் अल्पना चैरियल নলযানা अथिया गुजरात रंगोली फलकारी पंजाब H6RIE - ShareChat
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📰GK & करेंट अफेयर्स Students💡 - जनसत्ता सरोकार वि विमर्श दो जनसत्ता | 24 मई , 2026 शक्ति संतुलन में बदलाव के संकेत श्व की राजनीति में शक्ति के ध्रुव में परिवर्तन अचानक नहीं होता है वह धीरे - धीरे आर्थिक प्रभाव और कूटनीतिक अवसरों के माध्यम से आकार लेता है । हाल ही में चीन की यात्रा पर पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उसके बाद रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का पहुंचना केवल औपचारिक कूटनीतिक घटनाएं नहीं थीं । चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उनकी मुलाकातों और उसके बाद हुई घोषणाओं ने दुनिया को यह स्पष्ट संकेत दिया है कि चीन एक आर्थिक शक्ति से आगे बढ़कर वैश्विक शक्ति संतुलन में अमेरिका के बड़े प्रतिद्वंदी के रूप में तेजी से उभर रहा है । वहीं पुतिन और जिनपिंग ने संयुक्त रूप से बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की वकालत की तथा दबाव , वर्चस्ववादी राजनीति और अंतरराष्ट्रीय नियमों के एकतरफा उपयोग पर गहरी चिंता जताई । चीन और रूस खुद को पश्चिमी प्रभाव के समानांतर एक वैकल्पिक शक्ति केंद्र के रूप में प्रस्तुत करना चाहते हैं । अमेरिका की दशकों पुरानी सहयोग और साझेदारी पर आधारित कूटनीति को पीछे छोड़कर आर्थिक हितों पर केंद्रित ट्रंप की बेचैनी और रूस तथा चीन की हस्तक्षेपवादी नीतियों से यह प्रश्न सामने है कि भविष्य की विश्व व्यवस्था किन मूल्यों और शक्ति संतुलन पर आधारित होगी । अमेरिका की केंद्रीय भूमिका द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद अमेरिका ने खुद को एक शक्तिशाली राष्ट्र के | रूप में स्थापित कर वैश्विक व्यवस्था के संरक्षक के रूप में भी अपनी भूमिका की उसने अंतरराष्ट्रीय व्यापार , सुरक्षा , वित्तीय संस्थाओं और सामरिक गठबंधनों का ऐसा ढांचा खड़ा किया , जिसने दशकों तक विश्व राजनीति की दिशा तय की संयुक्त राष्ट्र , उत्तर अटलांटिक संधि संगठन , अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष तथा विश्व बैंक जैसी संस्थाओं में अमेरिका की केंद्रीय भूमिका रही है । डालर वैश्विक अर्थव्यवस्था की मुख्य मुद्रा बना , अमेरिकी तकनीक और बाज़ार दुनिया के विकास का आधार बने और उसकी सैन्य उपस्थिति ने अनेक क्षेत्रों में शक्ति संतुलन बनाए रखा । इसी कारण दुनिया के कई देशों ने अपनी सुरक्षा , व्यापार और आर्थिक स्थिरता के लिए अमेरिका पर भरोसा किया । पि अमेरिका सैन्य शक्ति के साथ वैश्विक नियमों , मुक्त व्यापार और कूटनीतिक संतुलन का प्रमुख केंद्र भी बना मगर ट्रंप के दौर में शुल्क संघर्ष अंतरराष्ट्रीय समझौतों से दूरी , सहयोगी देशों पर सार्वजनिक दबाव और वैश्विक संस्थाओं के प्रति अनिश्चित रवैये ने अमेरिका की उस छवि को कमजोर किया है , जो दशकों तक विश्व व्यवस्था के अं प्रभावित प्रसंगवश ट्रंप का रवैया नकारात्मक रहा । इससे यूरोप में यह चिंता बढ़ी कि अमेरिका अब पहले जैसा भरोसेमंद सुरक्षा साझेदार नहीं रहा वर्ष 2015 में ईरान के साथ अमेरिका , रूस , चीन , फ्रांस , ब्रिटेन , जर्मनी तथा होर्मुज जलमार्ग बंद होने से वैश्विक ब्रह्मदीप अलूने यूरोपीय संघ के बीच हुआ परमाणु में रजनीतिक स्वायत्तता की चर्चा तेज हुई है , जबकि कई देशों ने चीन और तरराष्ट्रीय संबंध केवल शक्ति नहीं , बल्कि विश्वास और सम्मान से भी संचालित होते है और यही मानक ट्रंप की नीतियों से सबसे अधिक हुआ है । वेनेजुएला के नेतृत्व को अस्थिर करने के प्रयासों , कठोर आर्थिक प्रतिबंधों और ईरान के खिलाफ सैन्य एवं आर्थिक दबाव की अमेरिकी नीतियों • वैश्विक अर्थव्यवस्था तथा अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार को बुरी तरह प्रभावित किया है । स्थिर नेतृत्वकर्ता की रही थी वहीं चीन ने स्वयं को स्थिरता , निवेश और वैकल्पिक साझेदारी के केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया है । यही वजह है कि आज कई देश बेजिंग की ओर हाथ बढ़ाते दिखाई दे रहे हैं । वे चीन के साथ व्यापार करना चाहते हैं , इसके साथ ही बदलते शक्ति संतुलन में अपनी नई रणनीतिक स्थिति भी तलाश रहे हैं । चीन अभी पूरी तरह अमेरिका का विकल्प न बना हो , लेकिन बीते डेढ़ दशक में उसने यह अवश्य दिखा दिया है कि वह विश्व की संबंधों की शक्ति राजनीति , वैश्विक व्यापार और सामरिक समीकरणों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है दुनिया के अनेक देशों को अब यह महसूस भी होने लगा है कि आने वाले समय में वैश्विक व्यवस्था केवल अमेरिका केंद्रित नहीं रहेगी । आर्थिक दबाव की रणनीति ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ने कूटनीति को वैश्विक दृष्टिकोण से हटाकर घरेलू राजनीतिक लाभों तक सीमित कर दिया है । ट्रंप ने यूरोप , कनाडा , मैक्सिको और भारत सहित कई देशों पर शुल्क लगाए । अमेरिका के सहयोगियों को यह महसूस हुआ कि वाशिंगटन अब मित्र और प्रतिद्वंदी के बीच स्पष्ट अंतर नहीं कर पा रहा । यूरोपीय देशों ने इसे आर्थिक दबाव राजनीति के रूप में देखा । नाटी को लेकर कसौटी पर परीक्षा छले सप्ताह जयपुर में केंद्रीय शिक्षा मंत्री के खिलाफ कांग्रेस ने प्रदर्शन किया । धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो के नारे सुनने में आए और प्रधानमंत्री पर भी अंगुली उठाई गई नीट में फिर प्रश्नपत्र लीक होने को लेकर आक्रोश इतना था प्रदर्शनकारियों में कि आंसू गैस छोड़नी पड़ी भीड़ को काबू में लाने के लिए भीड़ को देख कर मेरे मन में एक ही सवाल उठा बार - बार और वह यह कि इतना आक्रोश क्यों नहीं हम देख रहे हैं उन छात्रों में , जिनको दोबारा परीक्षा देनी पड़ेगी । दो साल पहले जब इसी तरह पेपर लीक हुआ था , तो शिक्षा मंत्री ने पहले तो स्वीकार ही नहीं किया कि पेपर लीक हुआ है जब ' लीक ' साबित हुई , तो मंत्रीजी ने प्रेस ' बार्ता बुला कर माफी मांगी , लेकिन उसके बाद सुधार के तौर पर अगर कोई कदम उठाए गए हैं , तो इतने चुपके से कि किसी को पता तक नहीं लगा । सुधरी कक्षाएं होती हैं , अध्यापक होते हैं जो एक विषय को पढ़ाने के लिए ही रखे जाते हैं । पुस्तकालय होते हैं , खेलकूद के मैदान होते हैं और आज के दौर में एआइ की मदद लेकर आधुनिक पढ़ाई होती है क्या ऐसा सरकारी स्कूल देखा है आपने भारत में ? होते ऐसे स्कूल , तो क्या नेता और आला अधिकारी अपने बच्चों को निजी स्कूलों में डालते जब शिक्षा की सीढ़ी की पहली पौड़ी ही इतनी कमजोर हो , तो आगे की सीढ़ी कैसे बच्चों में दिमाग की कोई कमी नहीं है । अभाव है अगर किसी चीज का तो अच्छे शिक्षा संस्थानों का है । ऐसा हाल अचानक नहीं हुआ है दशकों से हमारे विश्वविद्यालयों का हाल बदतर होता गया है इसलिए कि इन पर नियंत्रण रखते हैं नेता अपनी राजनीतिक जरूरतों के लिए , बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए नहीं । शिक्षा पर राजनेताओं का नियंत्रण मजबूत करने के लिए ही नरेंद्र मोदी के दौर में 2017 में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी बनाई गई । यानी जो वक्त की नब्ज तवलीन सिंह लाइसेंस राज पहले से ही था . शिक्षा क्षेत्र में उसको और भी अधिक मजबूत किया गया है । आज जरूरत है इस लाइसेंस राज को समाप्त कर शिक्षा के क्षेत्र में आजादी की ताजी हवा लाने की हर राज्य को * पूरा अधिकार होना चाहिए शिक्षा संस्थाओं को अपने तरीके से चलाने का बिना केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के ऐसा जब होगा तो राज्यों में स्पर्धा शुरू हो जाएगी बेहतर शिक्षा संस्थाओं का निर्माण करने की निजी तौर पर मैं मानती हूं कि राज्य सरकारों के हाथ में भी ये संस्थाएं नहीं होनी चाहिए । अमेरिका में आज अगर दुनिया की सबसे बढ़िया उच्च शिक्षा संस्थाएं हैं , तो इसलिए कि उनको पूरी आजादी है अपना काम अपने तरीकों से करने की भारत में उल्टा हाल है । हर कदम पर मिलते हैं आपको अधिकारी या सरकारी नौकर जो सुधार होने नहीं देते हैं शिक्षा में कुछ ऐसे हैं जो रिश्वत खाने के बाद हट जाते हैं रास्ते से , लेकिन कुछ ऐसे हैं जो रिश्वत लेने के बाद भी नहीं हटते हैं । भारत का विकसित होने का रास्ता तब तक बंद रहेगा , जब तक हम अपने बच्चों के लिए अच्छे स्कूल - कालेज नहीं तैयार करते । इसलिए मैं बहुत दिनों से बेहाल शिक्षा संस्थाओं पर लिखती | आई हूं । जब भी ग्रामीण भारत के दौरों पर जाती हूं तो प्रयास करती हूं हर गांव में पहले सरकारी स्कूल का हाल जानने की । सो यकीन मानिए आज तक मैंने एक भी सरकारी स्कूल नही देखा है जिसकी तुलना अके निजी स्कूलों से की जा सकती हो । राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ( एनटीए ) अपने सारे काम चोरी - छिपे क्यों करती है कि किसी को मालूम नहीं चलता है , लेकिन अब सवाल उठने लगे हैं इतने सारे उस पर कि पर्दे के पीछे से इस संस्था को सामने आना ही पड़ेगा , आज नहीं तो कल इस बार नौबत आ सकती है शिक्षा मंत्री को त्यागपत्र देने की दिल्ली के आला राजनीतिक गलियारों में चर्चा यह है कि धर्मेंद्र प्रधान को प्रधानमंत्री के करीबियों में माना जाता है , इसलिए उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है अभी तक , लेकिन भारतीय उच्च शिक्षा की समस्याएं न उनके रहने से हल होंगी और न ही उनके जाने से । मेरा मानना है कि भारत का विकसित होने का रास्ता तब तक बंद रहेगा जब तक हम अपने बच्चों के लिए अच्छे स्कूल कालेज नहीं तैयार करते । इसलिए मैं बहुत दिनों से अपनी बेहाल शिक्षा संस्थाओं पर लिखती हूं । जब भी ग्रामीण भारत के दौरों पर जाती हूं . तो प्रयास करती है हर गांव पहले सरकारी स्कूल का हाल जानने की । सो यकीन मानिए आज तक मैंने एक भी सरकारी स्कूल नहीं देखा है जिसकी तुलना अच्छे निजी स्कूलों से की जा सकती हो । निजी स्कूलों में साफ- ता मजबूत हो सकती है ? हमारी समस्या यह है कि राजनेताओं ने शुरू से शिक्षा की अहमियत नहीं समझी नेहरूजी जब प्रधानमंत्री बने , तो उन्होंने उच्च शिक्षा पर ध्यान जरूर दिया , लेकिन भूल कर कि आइआइटी जैसी संस्थाओं में वही बच्चे पहुंच सकेंगे जिनकी अच्छे स्कूलों में पढ़ाई हुई हो । ऐसा ही हुआ है । कुछ मुट्ठी भर भारतीय बच्चे ही शिक्षा की सीढ़ी चढ़ पाए हैं ऊपर तक अफसोस कि इनमें से कई लाख जो सबसे काबिल हैं , जल्दी भाग जाते हैं देश छोड़ कर किसी विकसित पश्चिमी देश में काम ढूंढने हाल यह है कि विदेशों से आकर जो डॉक्टर काम कर रहे हैं अमेरिका में उनमें से बीस फीसद भारतीय मूल के हैं यानी बीस डाक्टरों में से एक भारतीय मूल का होता है . सिलिकान वैली में भी ज्यादातर जो विदेशी कंप्यूटर वैज्ञानिक हैं , वे भारत से ही गए हैं । कहने का मतलब यह है मेरा कि हमारे पमान बढ़ा विपक्ष का पारा चढ़ा- शिक्षा मंत्री को हटाओ ... शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें ... ' नीट ' में गड़बड़ी ... लीक में प्रोफेसर शामिल .. ! फिर एक खबर ' सीएनजी के दाम तीन रुपए बढ़े और विपक्ष का विरोध शुरू से वसूली है ... किश्तों में वसूली लेकिन मॉडल और अभिनेत्री त्विषा की हत्या / आत्महत्या की सनसनीखेज कहानी चलती रही । चैनल दर चैनल विषा के पिता रोते रहे कि हमारी कोई सुनने वाला नहीं ... चार दिन से धरने पर , लेकिन कोई सुनता नहीं ... ये ताकतवर लोग हैं ... सब मिले हुए हैं ... हमारी मांग है कि दूसरा पोस्टमार्टम हो ... पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कमियां ... मृतका त्विषा के गले पर खून के निशान ... शरीर पर चोट ... मुकदमा दिल्ली स्थानांतरित हो ... हमें न्याय मिले । त्विषा का पति समर अग्रिम जमानत पर और अग्रिम जमानत पर सास का मीडिया पर त्विषा के खिलाफ एक प्रकार का मीडिया ट्रायल ' जारी कि त्विषा नशा करती थी ... वह मनोरोगी थी ... कि उसने गर्भपात कराया .. ! त्विषा की बहन रो - रोकर न्याय की मांग करती रही . लेकिन कुछ हासिल नहीं फिर एक दिन खबर कि हाईकोर्ट ने दोबारा पोस्टमार्टम की अपील नहीं मानी । एक चैनल ने मुकदमे को गोद लिया और अपने शो में पिता को बिठाकर आश्वस्त किया कि आप हमें एक अपील दें , हम सुप्रीम कोर्ट को कल सुबह देंगे और हम चाहेंगे कि गिरिबाला की अग्रिम रही बात पेपर के लीक होने की , तो ऐसा इतनी बार हुआ है कि समझना मुश्किल है कि अभी तक इस गलत चलन को रोकने में सफल क्यों नहीं हुई है केंद्र सरकार ? क्या इसलिए कि इस क्षेत्र में सुधार नाम की कोई चीज नहीं हुई है ? ऐसा मेरा मानना है इसलिए कि मैंने ये दिन देखे हैं जब दूसरे देशों से भारत आया करते थे छात्र पढ़ाई करने , खासकर दक्षिण - पूर्वी एशिया से अफसोस कि आज हमारे बच्चे जाते हैं चीन , सिंगापुर और मलेशिया शिक्षा हासिल करने अफसोस कि इस क्षेत्र में ये देश हमसे बहुत आगे निकल गए हैं । समझौता एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि माना गया था । इस समझौते से अमेरिका का शहर था । इससे यह संदेश गया कि बाहर निकलना सहयोगियों के लिए बड़ा अमेरिका अंतरराष्ट्रीय समझौतों को घरेलू राजनीतिक प्राथमिकताओं के अनुसार बदल सकता है । इसी तरह विश्व स्वास्थ्य संगठन और पेरिस समझौते जैसे वैश्विक ढांचों से दूरी बनाने के फैसलों ने भी अमेरिका को बहुपक्षीय नेतृत्वकर्ता की छवि को कमजोर किया । अंतरराष्ट्रीय संबंध केवल शक्ति से नहीं , बल्कि विश्वास और सम्मान से हुआ है । वेनेजुएला के नेतृत्व को अस्थिर करने के प्रयासों , कठोर आर्थिक भी संचालित होते है और यही मानक ट्रंप की नीतियों से सबसे अधिक प्रभावित प्रतिबंधों और ईरान के खिलाफ सैन्य एवं आर्थिक दबाव की अमेरिकी नीतियों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था तथा अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार को बुरी तरह प्रभावित किया है । वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देशों में से एक है । वहां की राजनीतिक अस्थिरता , प्रतिबंधों और सत्ता संघर्ष ने तेल उत्पादन को गंभीर रूप से प्रभावित किया । इसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल कीमतों पर पड़ा , जिससे कई विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा । इसी तरह ईरान पर हमलों से स्थितियां ज्यादा बिगड़ गई दे पर तेल की आपूर्ति बाधित हुई है । पिछले कुछ वर्षों में कई देश वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों , स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और बहुध्रुवीय आर्थिक व्यवस्था को लेकर गंभीर हो गए हैं चीन और रूस ने इसी असंतोष का लाभ उठाकर डालर निर्भरता कम करने और वैकल्पिक आर्थिक ढांचों को बढ़ावा देने की कोशिश की है । यूरोप रूस के साथ संतुलित संबंध बनाने की दिशा में कदम बढ़ाएं हैं । ट्रंप की नीतियों से उत्पन्न वैश्विक असंतोष और चीन तथा रूस की वैकल्पिक शक्ति केंद्र बनने की कोशिशों के बीच विश्व व्यवस्था का भविष्य सवालों में है । अब चुनौती यह है कि क्या नई उभरती शक्तियां केवल अमेरिकी प्रभुत्व का विरोध कर रही हैं , या वे वास्तव में अधिक न्यायपूर्ण , पारदर्शी और संतुलित वैश्विक व्यवस्था प्रस्तुत कर सकती है । विश्व व्यवस्था की स्थिरता शक्ति के साथ विश्वास , नियमों और संस्थागत विश्वसनीयता से तब होती है । नीतिगत राजनीतिक संरचनाएं इसमें दोराय नहीं कि अमेरिका की नीतियों का विरोध घरेलू मोर्चे पर भी खुलकर होता है । इसके विपरीत चीन और रूस की राजनीतिक संरचनाएं केंद्रीकृत और नियंत्रण आधारित मानी जाती हैं चीन में एकदलीय व्यवस्था है , जहां राजनीतिक असहमति , मीडिया स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों पर व्यापक नियंत्रण देखने को मिलता है । इसी प्रकार रूस में भी विपक्ष , मीडिया और राजनीतिक असहमति के प्रति कठोर रवैये की आलोचना होती रही है । चीन और रूस स्वयं को पश्चिमी वर्चस्व के विकल्प के रूप में प्रस्तुत कर रहे है , लेकिन वहां उदार लोकतंत्र के वैकल्पिक माडल के किसी भी रूप का नामोनिशान तक नहीं है , जो वैश्विक स्तर पर शांतिप्रिय और वैधानिक व्यवस्था की मूलभूत जरूरत है आवश्यकता किसी एक महाशक्ति के समर्थन विरोध से अधिक इस बात की है कि दुनिया ऐसी संतुलित और उत्तरदायी वैश्विक व्यवस्था विकसित करे , जिसमें शक्ति के साथ सहयोग , जवाबदेही और मानवीय मूल्यों का स्थान भी सुरक्षित रहे । व्यवस्था की नाकामी श में जब भी किसी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होता है , तो जांच के आदेश के बाद मुख्य साजिशकर्ता की गिरफ्तारी ' और ' दोबारा परीक्षा की तारीख ' जैसी बातों के शोर - शराबे के पीछे एक ऐसा कड़वा सच छिप जाता है । नीट परीक्षा के इस अंतहीन तमाशे और बार - बार होने वाले प्रश्नपत्र लीक ने भारत में एक नए किस्म के पलायन को जन्म दे दिया है । अब तक देश का युवा डाक्टर बनने के बाद विदेश जाता था , लेकिन अब इस परीक्षा तंत्र से तंग आकर देश के मेधावी विद्यार्थी बारहवीं पास करते ही भारत छोड़ रहे हैं । वे एक अनिश्चित और भ्रष्ट दलदल में अपनी उम्र के कीमती साल बर्बाद नहीं करना चाहते नीट का प्रश्नपत्र लीक होना सिर्फ एक परीक्षा का रद्द होना नहीं है , बल्कि यह देश के उस भरोसे का टूटना है , जो एक विद्यार्थी अपनी व्यवस्था पर करता है । देश के भीतर चिकित्सा व्यवस्था के सुदृढीकरण का दम भरने वाला शासन क्या इस कड़वे सच सक र आत्ममंथन करने का साहस दिखाएगा कि उसने अपनी ही नई पीढ़ी को इस कदर बेगाना और विरक्त कर दिया है इस चौंकाने वाले पलायन , जनता के आक्रोश और व्यवस्था की गिरती साख को बचाने के लिए ' लोक परीक्षा ( अनुचित साधन निवारण ) अधिनियम , 2024 पूरे देश में लागू किया गया था । कागज पर यह कानून बेहद सख्त दिखाई देता है , लेकिन सत्ता के गलियारों में बैठे नीति - नियंताओं से यह पूछा 1 जाना जरूरी है कि यह कानून लागू होने के बाद भी क्या परीक्षा माफिया और उन्हें राजनीतिक संरक्षण देने वालों में कोई वास्तविक खौफ पैदा हुआ है ? क्या इस तथाकथित कड़े कानून के तहत अब तक किसी एक भी बड़े शिक्षा माफिया , सांठगांठ करने वाले शीर्ष अधिकारियों या प्रश्नपत्र बेचने वाले संगठित गिरोह के सरगना को ऐसी सजा मिली है , जो एक नजीर बन सके ? सच यह है कि जब तक कानून केवल फाइलों की शोभा बढ़ाते हैं , तब तक यह पूरी कवायद केवल एक प्रशासनिक दिखाये और जनता के गुस्से को शांत करने वाला ' प्रायोजित प्रबंधन ' ही साबित होती है परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित , आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के पूर्व प्रमुख के राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था , जिसने अपनी रिपोर्ट में 101 अत्यंत महत्त्वपूर्ण सिफारिशें की थीं मगर विडंबना यह है कि उन सिफारिशों को ठंडे बस्ते के हवाले कर दिया गया । इस तरह की नीतिगत और प्रशासनिक विफलता की सबसे कारूणिक कीमत उस मध्यवर्गीय परिवार को चुकानी पड़ती है , जिसके जीवन का संघर्ष सत्ता के वातानुकूलित कमरों में बैठे हाकिमों को कभी नजर नहीं आता । उस घर की दहलीज पर कदम रखकर देखा जा सकता है , जहां बेटे या के कमरे की मेज पर अभी भी आधी खुली हुई किताबें , कलम और कापियां हैं , लेकिन आंखों के आगे पसरे घने अंधेरे के कारण पढ़ाई रुक चुकी है । उस मां के भीतर की चीख को सुनना चाहिए , जिसने अपने गहने गिरवी रखकर कोचिंग की मोटी फीस भरी थी और उस पिता के आंसूओं का हिसाब लगाना चाहिए , जिसने अपनी पुश्तैनी जमीन का एक टुकड़ा सिर्फ इसलिए बेच दिया , ताकि उसका बच्चा समाज में सिर उठाकर कह सके कि वह ' डाक्टर ' बनने जा रहा है । भारत का मेडिकल कोचिंग क्षेत्र स्कूलों को ' डमी ' संस्थाओं में बदलकर एक समांतर , अनियंत्रित और शोषक व्यवस्था बन चुका है । ग्यारहवीं और बारहवीं की सामान्य , जीवंत स्कूली जिंदगी को खत्म करके हमने एक पूरी पीढ़ी के सामाजिक और मानसिक विकास की बलि चढ़ा दी है । हमने बच्चों को संवेदनशील इंसान बनाने के बजाय केवल एक ' बहुवैकल्पिक प्रश्नपत्र ' को हल करने वाले और रैंक की अंधी दौड़ में दौड़ने वाले रोबोट में तब्दील कर दिया है सबसे ज्यादा मार उन गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि की मेधावी छात्राओं पर नाउम्मीदी बढ़ गई है इस कदर जमानत निरस्त हो .... कोशिश करेंगे कि मुकदमा सुप्रीम कोर्ट देखे हमारे दर्शक और हमारा चैनल आपको न्याय दिलवाकर रहेगा .. ! वकील पर वकील बहस कर चुके वकीलों के भी दो धड़े बन गए । एक कहता कि पोस्टमार्टम 1 की प्रक्रिया में कमियां ... फिर भी रिपोर्ट के खुलासे कि गर्दन पर खून के निशान ... कई जगह चोट कि जिस बेल्ट से लटकी , वह जमा नहीं की गई । दूसरा पोस्टमार्टम जल्दी हो वरना शब के खराब होने का खतरा । दूसरा पक्ष कहता कि समर और गिरिबाला का मीडिया ट्रायल किया प बाखबर सुधीश पचौरी • धानमंत्री ने मेलोनी को दी ' मेलोडी ' चाकलेट और चैनलों ने इसे ऐसा उठाया कि वीडियो सुर्खियों में आ गया । इससे पहले नायें में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक संवाददाता सम्मेलन से जाने लगे , तो एक पत्रकार ने भारत में मीडिया की स्वतंत्रता पर कुछ कहा ! जा रहा है .. ! चैनलों ने मुद्दे को तूल तो दिया है , लेकिन मीडिया में हर मुद्दा एक हद के बाद अपनी मौत मर जाता है । क्या इसके साथ भी यही होने वाला है ? आगे - आगे देखिए होता है क्या ! सत्ता ग्रहण के पहले दो सप्ताह में ही बंगाल के भाजपा मुख्यमंत्री शुभेदु अधिकारी के कुछ ताबड़तोड़ फैसले बंगाल को सुर्खियों में रखे हुए हैं । ' चिकेन नेक ' की जमीन को बीएसएफ को देना , बांग्लादेश की | सीमा पर बाड़ लगाने के लिए बीएसएफ को जमीन देना ... गोकशी पर प्रतिबंध , मंदिर- मस्जिदों आदि से लाउडस्पीकर के शोर की सीमा तय ... स्कूलों मदरसों में ' वंदे मातरम् ' का गान अनिवार्य कई विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रियाएं कि अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकारों का दमन किया जा रहा है । इस बीच तमिलनाडु से एक बार फिर सनातन के प्रति नफरत की बरसात हुई एक ने ' सनातन को नष्ट करने ' की पुरानी बात दोहराकर खबर बनाई , तो दूसरे नेता ने इसे दोहरा कर नफरत को आगे बढ़ाया । फिर एक दिन तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री विजय ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या आरोपी ' एलटीटीई ' के चीफ दिवंगत प्रभाकरण की याद में एक्स पर पोस्ट लिखा , तो भाजपा ने कटाक्ष किया कि इस पर कांग्रेस चुप क्यों ... क्या सत्ता के लिए कोई कुछ भी सहेगा .. लेकिन जैसी मजेदार खबरें इटली की में पड़ती है , जिनकी पढ़ाई रुकने का मतलब सिर्फ एक साल का नुकसान नहीं , बल्कि सामाजिक दबाव में उनकी शादी कर दिए जाने या उनके सपनों का हमेशा के लिए दफन हो जाना होता है । अगर ऐसा ही चलता रहा , तो वे दिन दूर नहीं , जब इस पूरे संकट का सबसे भयावह , आत्मघाती और दूरगामी असर देश की भावी चिकित्सा व्यवस्था की गुणवत्ता और जन स्वास्थ्य पर पड़ेगा जो विद्यार्थी इस मानसिक आघात , व्यवस्था के प्रति उपजे गहरे आक्रोश , अवसाद और ' बिकाऊ तंत्र ' के साए में चिकित्सा की पढ़ाई शुरू करेगा , वह भविष्य में मरीजों के प्रति अपना कैसा दृष्टिकोण रखेगा ? जब एक पूरी पीढ़ी यह सीखकर बड़ी होगी कि रसूख , पैसा और पहुंच ही अंतिम सत्य हैं , तो उस डाक्टर से एक ' सहानुभूतिपूर्ण और संवेदनशील मसीहा ' बनने की उम्मीद करना ही बेमानी है जिसने खुद तंत्र के ज शिक्षा | मणिमाला शर्मा सने खुद तंत्र के हाथों आर्थिक और मानसिक शोषण झेला हो , वह डाक्टर बनने के बाद सबसे पहले अपनी उस पूंजी और उस प्रताड़ना का ब्याज वसूलने की कोशिश • करेगा । यह चक्र देश के स्वास्थ्य ढांचे को पूरी तरह से संवेदनहीन , अनैतिक और व्यावसायिक बनाने की ओर धकेलेगा , जिसकी अंतिम परिणति गरीब मरीजों की मौत और बर्बादी में होगी । हाथों आर्थिक और मानसिक शोषण झेला हो , वह डाक्टर बनने के बाद सबसे पहले अपनी उस पूंजी और उस प्रताड़ना का ब्याज वसूलने की कोशिश करेगा । वह चक्र देश के स्वास्थ्य ढांचे को पूरी तरह से संवेदनहीन , अनैतिक और व्यावसायिक बनाने की ओर धकेलेगा , जिसकी अंतिम परिणति गरीब मरीजों की मौत और बर्बादी में होगी । यह ढांचा अपने आप में गहरी क्षेत्रीय और आर्थिक असमानता पैदा करता है अमीर और साधन संपन्न परिवारों के बच्चे महंगे कोचिंग संस्थानों में पढ़कर मुकाम हासिल कर लेते हैं , जबकि ग्रामीण और गरीब पृष्ठभूमि का मेधावी विद्यार्थी शुरुआत से ही इस दौड़ में पिछड़ जाता है । इसलिए समाधान भी अब सतही या तत्कालिक नहीं हो सकते । असली काम परीक्षा प्रणाली को तकनीकी रूप से अभेद्य बनाना है एक ही परीक्षा पर देश की निर्भरता को कम करने के लिए साल में अनेक प्रवास और बारहवीं के अंकों के वैकल्पिक मूल्यांकन जैसे विकल्पों पर नीतिगत स्तर पर गंभीरता से विचार करना होगा । साथ ही , राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को वर्तमान ढांचे से मुक्त कर संसद के अधीन एक स्वायत्त और पूरी तरह जवाबदेह संस्था बनाना होगा , जैसा कि देश के कई शिक्षाविद मांग कर रहे हैं आज असली परीक्षा इस देश को चलाने वाले शासकों की राख , नीयत और उनके इकबाल की है । जिस समाज में शिक्षा और न्याय केवल एक औपचारिकता बन जाएं , वहां देश का भविष्य केवल एक संयोग बनकर रह जाता है , कोई गौरवशाली नियति नहीं । प्रधानमंत्री जार्जिया मेलोनी से भारत के प्रधानमंत्री की मुलाकात ने बनाई वैसी उनकी नायें या स्वीडन या अरब यात्रा ने न बनाई प्रधानमंत्री ने मेलोनी को दी ' मेलोडी ' चाकलेट और चैनलों ने इसे ऐसा उठाया कि वीडियो सुर्खियों में आ गया एक से एक टिप्पणियां आती दिखीं । इससे पहले नायें में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक संवाददाता सम्मेलन से जाने लगे , तो अचानक एक पत्रकार हेली ने भारत में मीडिया की स्वतंत्रता पर कुछ कहा , तो प्रधानमंत्री उसे अनसुना करते निकल गए । यहां के कुछ विपक्षी नेताओं ने इसे मुद्दा बना लिया और कहने लगे कि देखा , प्रधानमंत्री डर गए और भाग गए ... प्रधानमंत्री ने आज तक कोई संवाददाता सम्मेलन नहीं किया एक सत्ता प्रवक्ता कहिन कि यह चीन प्रेरित था ... एक एकर कहिन कि यहां तो लोग कुछ भी बोलते रहते हैं , लेकिन क्या किसी को बोलने से रोका गया ! एक और एंकर कहिन कि विदेश में हमारी बेइज्जती हो तो हमारे यहां कुछ लोग परम सुखी । इसके बाद फिर बरसे कुछ ' आत्मीय सुभाषित ' कि ये कहीं भी चला जाता है ... देखना दो - तीन महीने में पता लग जाएगा ... बवंडर ... वो कहेगा मेरी गलती नहीं .. बता रहा हूं कि ये एक महीने के अंदर रोएगा ... संविधान में सबका खून है .. हमें बचाता है .. ! यह तो सर जी ' दाग ' वाली बात हो गई कि ' रंज की जब गुफ्तगू होने लगी ... आप से तुम , तुम से तू होने लगी ../ नाउम्मीदी बढ़ गई है इस कदर , आरजू की आरजू होने लगी ! ' epaper.jansatta.com - ShareChat
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📰GK & करेंट अफेयर्स Students💡 - দচ দযানস भारत सरकार हमारी जनगणना মনামা নিকাম जनगणना २०२७ का पहला चरण मकानसूचीकरण एवं मकानों की गणना जनगणना २०२७ जनगणनाः गोपनीयता कीगारंटी MIHIMಹilaRIM आपकी जानकारी, पूरी तरह सुरक्षित सही जानकारी दे निडर होकरदे 6  अधिनियमः १९४८ क तहत पूरी देश के विकास मे साथ दे मणत गोपनीयता ~ নিহিমল ২৪  Mಾmurasc सुरक्षित आपकी जानकारी सुरक्षित रहेगी  रिपोर्टमै सिफ कुल आकड़ प्रकाशित होते ह गोपनीय रहेगी नापनपता किसी कोनिही दिया जाता सिर्फ राष्ट्र निर्माण के काम आयेगी " टेक्सः पुलिस या जांच मे उपयोग नही [ चलो निभाएं अपनी जिम्मेदारी 5 करें जनगणना में भागीदारी arn- 1855 Cenu nda02 দচ দযানস भारत सरकार हमारी जनगणना মনামা নিকাম जनगणना २०२७ का पहला चरण मकानसूचीकरण एवं मकानों की गणना जनगणना २०२७ जनगणनाः गोपनीयता कीगारंटी MIHIMಹilaRIM आपकी जानकारी, पूरी तरह सुरक्षित सही जानकारी दे निडर होकरदे 6  अधिनियमः १९४८ क तहत पूरी देश के विकास मे साथ दे मणत गोपनीयता ~ নিহিমল ২৪  Mಾmurasc सुरक्षित आपकी जानकारी सुरक्षित रहेगी  रिपोर्टमै सिफ कुल आकड़ प्रकाशित होते ह गोपनीय रहेगी नापनपता किसी कोनिही दिया जाता सिर्फ राष्ट्र निर्माण के काम आयेगी " टेक्सः पुलिस या जांच मे उपयोग नही [ चलो निभाएं अपनी जिम्मेदारी 5 करें जनगणना में भागीदारी arn- 1855 Cenu nda02 - ShareChat
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