Lalita
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#💓 मोहब्बत दिल से
💓 मोहब्बत दिल से - किसी की माँग में सिंदूर  HHI आसान है लेकिन मृश्किल ये है कि उस औरत की जिंदगी के खुशिया भरना सिंद्ूर तो एक पल में लगाया जा सकता है लेकिन उस सिंदूर ; का मानरखना उसे मुस्कुराने की वजह देना यही असली मर्दानगी है हर औरत को सिर्फ प्यार नहीं बल्कि' सुकून और सम्मान चाहिए होता है किसी की माँग में सिंदूर  HHI आसान है लेकिन मृश्किल ये है कि उस औरत की जिंदगी के खुशिया भरना सिंद्ूर तो एक पल में लगाया जा सकता है लेकिन उस सिंदूर ; का मानरखना उसे मुस्कुराने की वजह देना यही असली मर्दानगी है हर औरत को सिर्फ प्यार नहीं बल्कि' सुकून और सम्मान चाहिए होता है - ShareChat
#💓 मोहब्बत दिल से
💓 मोहब्बत दिल से - किसी की माँग में सिंदूर' भरना आसान है लेकिन मृश्किल ये है कि उस औरत की ज़िंदगी के खुशिया भरना सिंदूर तो एक पल में लगाया जा सकता है लेकिन उस सिंदूर ; का मानरखना उसे मुस्कुराने की वजह देना यही असली मर्दानगी है हर औरत को सिर्फ प्यार नहीं बल्कि सुकून और सम्मान चाहिए होता है किसी की माँग में सिंदूर' भरना आसान है लेकिन मृश्किल ये है कि उस औरत की ज़िंदगी के खुशिया भरना सिंदूर तो एक पल में लगाया जा सकता है लेकिन उस सिंदूर ; का मानरखना उसे मुस्कुराने की वजह देना यही असली मर्दानगी है हर औरत को सिर्फ प्यार नहीं बल्कि सुकून और सम्मान चाहिए होता है - ShareChat
#😎मज़ेदार पोस्ट 🤩 #💓 मोहब्बत दिल से
😎मज़ेदार पोस्ट 🤩 - मुझे ऐसा लगता है कि गुज़रते हुए दिनों अब के साथ साथ मैं अपना मानसिक संतुलन भी धीरे धीरे खो रहीं हू जैसे कि यू ही बैठे बैठे आखें नम हो जाना बहुत जायदा सोचना मे पडे़े रहना किसी अपनों की उलझनों ' तलाश की कोइ मुझे समझ सके   कहने को मेरे पास हजारों की भीड़ है हर रिश्ते है फिर भी खुद को अकेला मेहसूस करना ऐसा जैसे मेरा सब कुछ छीन गया हो कुछ WId खो गया हो किसी चीज मे मन नहीं लगता घण्टों सोचना क्या करना है पढ़ने मे मन  दुनिया से डरना लोगों से बात ना नालगना बस दिल करता है कहीं दूर चले जाए कर ऐसी जगा जहा मेरे सिवा कोइ ना हो जहा मैं सास ले सकू खुलकर जी भर खूब रो শুলী सकू मोह माया मतलबी दुनिया रिश्ता पैसा सबसे दर होना चहेती ह शोहरत ' मुझे ऐसा लगता है कि गुज़रते हुए दिनों अब के साथ साथ मैं अपना मानसिक संतुलन भी धीरे धीरे खो रहीं हू जैसे कि यू ही बैठे बैठे आखें नम हो जाना बहुत जायदा सोचना मे पडे़े रहना किसी अपनों की उलझनों ' तलाश की कोइ मुझे समझ सके   कहने को मेरे पास हजारों की भीड़ है हर रिश्ते है फिर भी खुद को अकेला मेहसूस करना ऐसा जैसे मेरा सब कुछ छीन गया हो कुछ WId खो गया हो किसी चीज मे मन नहीं लगता घण्टों सोचना क्या करना है पढ़ने मे मन  दुनिया से डरना लोगों से बात ना नालगना बस दिल करता है कहीं दूर चले जाए कर ऐसी जगा जहा मेरे सिवा कोइ ना हो जहा मैं सास ले सकू खुलकर जी भर खूब रो শুলী सकू मोह माया मतलबी दुनिया रिश्ता पैसा सबसे दर होना चहेती ह शोहरत ' - ShareChat