सुनील जैन
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☝ मेरे विचार - .1 गोलोक धाम चाकसू निमोड़िया में सिद्धचक्र महामंडल विधान का पांचवां दिन गोशाला में ५०० गायों का करेंगे संरक्षण, २० हजार फल व पौधे लगाने का संकल्प गोलोक चाकसू धाम जयपुर निमोड़िया में चल रहे सिद्धचक्र महामंडल विधान के पांचवें दिन और शनिवार को भक्ति, সসা का संगम देखने को जीव-दया मिला। तपोभूमि प्रणेता आचार्य  प्रज्ञासागर मुनिराज के सान्निध्य में शांतिधारा का सौभाग्य तेजकरण, अक्षय चंदलाई वालों को मिला, ಥ 11   37 गोलोक सिद्धचक्र विधान की आचार्य  धाम जबकि गुरुदेव के पाद  प्रक्षालन पर्यावरण संरक्षण को लेकर काम श्रीपाल সক্কিসা   ননান   ভ্ভৎ का सौभाग्य ललिता देवी, सुरेश राजा है। समिति के अनुसार और   मैना सुंदरी  की प्रेरक कथा चल रहा को बाकलीवाल एव   स्नेहलता यहां ५०० गायों के संरक्षण का लक्ष्य पुण्यार्जक परिवार सोधर्म  सुनाई।  प्राप्त हुआ।  तय किया गया है। यहां गिर नस्ल अमित विधानाचार्य पंडित श्रेयश जैन पवन পামেনল इंद्र की गायों के संवर्धन पर विशेष बाकलीवाल की ओर से आयोजित (पिंडरई ) के निर्देशन और जैनम जोर रहेगा। परिसर और आसपस कार्यक्रम में कोषाध्यक्ष रोहित जैन, जैन ( इंदौर ) के भजनों के बीच २० हजार छायादार व फलदार पौधे कार्याध्यक्ष दीपक जैन और अरुण श्रद्धालुओं   ने মভল 128 पर लगाने का लक्ष्य रखा गया है। गोनेर सहित अन्य लोग मौजूद रहे। किए। अर्घ्य समर्पित धर्मसभा में .1 गोलोक धाम चाकसू निमोड़िया में सिद्धचक्र महामंडल विधान का पांचवां दिन गोशाला में ५०० गायों का करेंगे संरक्षण, २० हजार फल व पौधे लगाने का संकल्प गोलोक चाकसू धाम जयपुर निमोड़िया में चल रहे सिद्धचक्र महामंडल विधान के पांचवें दिन और शनिवार को भक्ति, সসা का संगम देखने को जीव-दया मिला। तपोभूमि प्रणेता आचार्य  प्रज्ञासागर मुनिराज के सान्निध्य में शांतिधारा का सौभाग्य तेजकरण, अक्षय चंदलाई वालों को मिला, ಥ 11   37 गोलोक सिद्धचक्र विधान की आचार्य  धाम जबकि गुरुदेव के पाद  प्रक्षालन पर्यावरण संरक्षण को लेकर काम श्रीपाल সক্কিসা   ননান   ভ্ভৎ का सौभाग्य ललिता देवी, सुरेश राजा है। समिति के अनुसार और   मैना सुंदरी  की प्रेरक कथा चल रहा को बाकलीवाल एव   स्नेहलता यहां ५०० गायों के संरक्षण का लक्ष्य पुण्यार्जक परिवार सोधर्म  सुनाई।  प्राप्त हुआ।  तय किया गया है। यहां गिर नस्ल अमित विधानाचार्य पंडित श्रेयश जैन पवन পামেনল इंद्र की गायों के संवर्धन पर विशेष बाकलीवाल की ओर से आयोजित (पिंडरई ) के निर्देशन और जैनम जोर रहेगा। परिसर और आसपस कार्यक्रम में कोषाध्यक्ष रोहित जैन, जैन ( इंदौर ) के भजनों के बीच २० हजार छायादार व फलदार पौधे कार्याध्यक्ष दीपक जैन और अरुण श्रद्धालुओं   ने মভল 128 पर लगाने का लक्ष्य रखा गया है। गोनेर सहित अन्य लोग मौजूद रहे। किए। अर्घ्य समर्पित धर्मसभा में - ShareChat
#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - எS்aனனிள்ன்ஔனனன் महिलाओँ को बना रहे आत्मनिर्भर; एक साल में १२०० नए सदस्य जोड़ने का लक्ष्य मेँ ३५० से अधिक महिलाओं की भास्कर न्यूज | जवपर उपस्थिति रही। इसके बाद बैठक महिला सशक्तीकरण की दिशा मेँ ম   মকিলাঙ্জী த बचत 7٤ व्यवसाय,   स्वरोजगार योजनाओं एक नया इतिहास रचते हुए लाडो और वित्तीय प्रबंधन पर जानकारी  अपनी बचत घर योजना महिला दी गई। मालपुरा मेँ इस नई शाखा  सहकारी समिति ने अपनी तीसरी से आसपास के क्षेत्रों की ಹ ক্িমা| खुलने  शाखा शुभारंभ यह का महिलाओं को अब सुरक्षित बचत  विस्तार   महिलाओं आर्थिक की और सुलभ ऋण की সুনিঙা  घर M fಹ r ओर की एक के पास ही उपलब्ध होगी। यह मजबूत कदम माना जा रहा है। पहल न केवल आर्थिक विकास शाखा का उद्घाटन संस्था की को गति देगी॰ बल्कि सामाजिक सचिव एवं मुख्य अतिथि मोनिका परिवर्तन की दिशा में भी एक मील " व संगीता गौड़ ने फीता गप्ता का पत्थर साबित होगी। किया। उद्घाटन समारोह काटकर எS்aனனிள்ன்ஔனனன் महिलाओँ को बना रहे आत्मनिर्भर; एक साल में १२०० नए सदस्य जोड़ने का लक्ष्य मेँ ३५० से अधिक महिलाओं की भास्कर न्यूज | जवपर उपस्थिति रही। इसके बाद बैठक महिला सशक्तीकरण की दिशा मेँ ম   মকিলাঙ্জী த बचत 7٤ व्यवसाय,   स्वरोजगार योजनाओं एक नया इतिहास रचते हुए लाडो और वित्तीय प्रबंधन पर जानकारी  अपनी बचत घर योजना महिला दी गई। मालपुरा मेँ इस नई शाखा  सहकारी समिति ने अपनी तीसरी से आसपास के क्षेत्रों की ಹ ক্িমা| खुलने  शाखा शुभारंभ यह का महिलाओं को अब सुरक्षित बचत  विस्तार   महिलाओं आर्थिक की और सुलभ ऋण की সুনিঙা  घर M fಹ r ओर की एक के पास ही उपलब्ध होगी। यह मजबूत कदम माना जा रहा है। पहल न केवल आर्थिक विकास शाखा का उद्घाटन संस्था की को गति देगी॰ बल्कि सामाजिक सचिव एवं मुख्य अतिथि मोनिका परिवर्तन की दिशा में भी एक मील " व संगीता गौड़ ने फीता गप्ता का पत्थर साबित होगी। किया। उद्घाटन समारोह काटकर - ShareChat
#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - विज्ञान धर्मका अक्षत गुप्ता, लेखक व पौराणिक विषयों के ज्ञाता  akshat supta0204@8mail.com; होली सिर्फ रंगों का खेल नहीं , सूक्ष्म वैज्ञानिक सर्जरी' भी अक्सर हम होली को केवल हुड़दंग और गुलाल तक सीमित कर देते हैँ लेकिन अगर हम अपने प्राचीन ग्रंथों को खंगालें तो पता चलता है कि होली दरअसल ऋतु परिवर्तन के समय शरीर और मन को   रीसेट करने की एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है। हमारे शास्त्रों में होली को नवान्नेष्टि यज्ञ' कहा गया है। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि जब सर्दी खत्म होती है और वसंत का आगमन होता है, तो हवा में बैक्टीरिया की संख्या तेजी से बढ़ती है। जब हम होलिका दहन के चारों ओर परिक्रमा करते हैं॰ तो उस अग्नि का तापमान लगभग ५०२६० तक पहुंच जाता है। इतनी गर्मी में हमारे शरीर के रोम छिद्र खुल जाते हैं और पसीने के जरिए विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं। प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, इस दौरान अग्नि में  हवा में मौजूद सूक्ष्म कीटाणु मर  कपूर' और ` गोबर के कंडे जलाने से जाते हैं, जिससे पूरा इलाका सैनिटाइज हो जाता है। क्रोमोथैरैपी काप्राचीन रूप आयुर्वेद और ' क्रोमोथेरेपी ' (रंग चिकित्सा ) के अनुसार, रंगों का हमारे  अंतःस्रावी तंत्र पर सीधा प्रभाव पड़ता है। वसंत के समय शरीर में की अधिकता होती है जिससे आलस और सुस्ती बढ़ती है। कफ पीले और लाल रंग शरीर में ऊर्जा का संचार करते हैं और ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाते हैं समय में पलाश ( टेसू ) के फूलों का रंग पुराने इस्तेमाल होता था, जो त्वचा के रोगों के लिए सबसे अचूक दवा है। यह रंग न केवल बाहर से चढ़ता था, बल्कि त्वचा के जरिए अवशोषित होकर हमारी  बढ़ाता था। इम्युनिटी पानी और कीचड़ प्राकृतिक औषधिभी  कुछ प्राचीन ग्रंथों में होली पर मिट्टी और कीचड़ से खेलने का भी वर्णन है।  मेडिकल रिसर्च भी कहती है कि ` मड बाथ' से शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है और शरीर रिलेक्स मोड में हो जाता है। होली के दौरान जब हम अपनों से मिलते हैं॰ गले लगते हैं और सामूहिक रूप से उत्सव मनाते हैं तो मस्तिष्क में ' ऑक्सीटोसिन ( लव हार्मोन ) और  डोपामाइन का स्तर बढ़ जाता है। यह तनाव को जड़ से मिटाने की एक प्राकृतिक औषधि है। संगीत और हौली का तालमेल होली के गीतों में ढोल और नगाड़ों का इस्तेमाल क्यों होता है ? दरअसल  ढोल की तेज आवाज और कंपन हमारे नसों के ब्लॉकेज खोलने में मदद करते हैं। यह एक तरह की साउंड हीलिंग है, जो हमें अवसाद से बाहर निकालती है। परपरा कासम्मान होली मनाना केवल रस्म नहीं है बल्कि पूर्वजों द्वारा  दिया गया एक   हेल्थ पैकेज' है। जब हम केमिकल प्राकृतिक रंगों और प्रेम के साथ होली मनाते  छोडकर हैं तो हम न केवल परंपरा को जीवित रखते है बल्कि शरीर और प्रकृति का भी भला करते हैं। इस कॉलम को मोबाइल पर सुनने अगली बार जब आप गुलाल छुएं तो याद रखिएगा  कि आप केवल रंग नहीं लगा रहे बल्कि खुशियों के लिए QR कोड को स्कैन करें।  और स्वास्थ्य का संचार कर रहे हैं। विज्ञान धर्मका अक्षत गुप्ता, लेखक व पौराणिक विषयों के ज्ञाता  akshat supta0204@8mail.com; होली सिर्फ रंगों का खेल नहीं , सूक्ष्म वैज्ञानिक सर्जरी' भी अक्सर हम होली को केवल हुड़दंग और गुलाल तक सीमित कर देते हैँ लेकिन अगर हम अपने प्राचीन ग्रंथों को खंगालें तो पता चलता है कि होली दरअसल ऋतु परिवर्तन के समय शरीर और मन को   रीसेट करने की एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है। हमारे शास्त्रों में होली को नवान्नेष्टि यज्ञ' कहा गया है। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि जब सर्दी खत्म होती है और वसंत का आगमन होता है, तो हवा में बैक्टीरिया की संख्या तेजी से बढ़ती है। जब हम होलिका दहन के चारों ओर परिक्रमा करते हैं॰ तो उस अग्नि का तापमान लगभग ५०२६० तक पहुंच जाता है। इतनी गर्मी में हमारे शरीर के रोम छिद्र खुल जाते हैं और पसीने के जरिए विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं। प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, इस दौरान अग्नि में  हवा में मौजूद सूक्ष्म कीटाणु मर  कपूर' और ` गोबर के कंडे जलाने से जाते हैं, जिससे पूरा इलाका सैनिटाइज हो जाता है। क्रोमोथैरैपी काप्राचीन रूप आयुर्वेद और ' क्रोमोथेरेपी ' (रंग चिकित्सा ) के अनुसार, रंगों का हमारे  अंतःस्रावी तंत्र पर सीधा प्रभाव पड़ता है। वसंत के समय शरीर में की अधिकता होती है जिससे आलस और सुस्ती बढ़ती है। कफ पीले और लाल रंग शरीर में ऊर्जा का संचार करते हैं और ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाते हैं समय में पलाश ( टेसू ) के फूलों का रंग पुराने इस्तेमाल होता था, जो त्वचा के रोगों के लिए सबसे अचूक दवा है। यह रंग न केवल बाहर से चढ़ता था, बल्कि त्वचा के जरिए अवशोषित होकर हमारी  बढ़ाता था। इम्युनिटी पानी और कीचड़ प्राकृतिक औषधिभी  कुछ प्राचीन ग्रंथों में होली पर मिट्टी और कीचड़ से खेलने का भी वर्णन है।  मेडिकल रिसर्च भी कहती है कि ` मड बाथ' से शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है और शरीर रिलेक्स मोड में हो जाता है। होली के दौरान जब हम अपनों से मिलते हैं॰ गले लगते हैं और सामूहिक रूप से उत्सव मनाते हैं तो मस्तिष्क में ' ऑक्सीटोसिन ( लव हार्मोन ) और  डोपामाइन का स्तर बढ़ जाता है। यह तनाव को जड़ से मिटाने की एक प्राकृतिक औषधि है। संगीत और हौली का तालमेल होली के गीतों में ढोल और नगाड़ों का इस्तेमाल क्यों होता है ? दरअसल  ढोल की तेज आवाज और कंपन हमारे नसों के ब्लॉकेज खोलने में मदद करते हैं। यह एक तरह की साउंड हीलिंग है, जो हमें अवसाद से बाहर निकालती है। परपरा कासम्मान होली मनाना केवल रस्म नहीं है बल्कि पूर्वजों द्वारा  दिया गया एक   हेल्थ पैकेज' है। जब हम केमिकल प्राकृतिक रंगों और प्रेम के साथ होली मनाते  छोडकर हैं तो हम न केवल परंपरा को जीवित रखते है बल्कि शरीर और प्रकृति का भी भला करते हैं। इस कॉलम को मोबाइल पर सुनने अगली बार जब आप गुलाल छुएं तो याद रखिएगा  कि आप केवल रंग नहीं लगा रहे बल्कि खुशियों के लिए QR कोड को स्कैन करें।  और स्वास्थ्य का संचार कर रहे हैं। - ShareChat
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☝ मेरे विचार - दो दिवसीय पुष्प फाग में कलाकारों ने गायन और वादन से ठाकुरजी को रिझाया " गोविंददेवजी में पुष्प फागोत्सव को होल्ला २५ सालः सांवरिया सरकार खेलो भास्कर न्यूज जयपुर आराध्य देव गोविंददेवजी मंदिर में दो दिवसीय पुष्प  फागोत्सव का जादू शनिवार को गोविंद प्रेमियों के सिर चढ़ कर बोला। राजस्थानी भाषा के फाल्गुनी भजनों ने सुंदर नृत्य " पर कलाकार प्रस्तुत कर माहल को पूरी तरह होली के रंग में रंग दिया। सैकड़ों कलाकारों ने ओर वादन से ठाकुरजी को रिझाया। श्रद्धालुओं  गायन से अटे सत्संग भवन मेँ फूलों और इत्र को खुशबू  से महकते और श्रद्धालुओं से खचाखच भरे सत्संग भवन पुष्पम फाग का साक्षी बना। राधा और सखियों ने ठाकुरजी के साथ होली में भजन पर नृत्य कर उपस्थित लोगों को अपने संग नचाया। भगवान कृष्ण  की होली खेलने की मनोहारी लीलाओं का सुंदर मंचन करते भजनों पर नृत्य कर तालियां बटोरी। वहीं विराट कृष्णा और अन्य कलाकारों ने महारास फूलों को होली और मयूर नृत्य की सुंदर प्रस्तुति दी। कलाकारों ने चंग और ढप की आकर्षक प्रस्तुतियां दी। होली महोत्सव के मौके पर गोविंद धाम में शनिवार श्रीकृष्ण को लड्ड खिलाते हुए यशोदा मैया की सचना झांकी सजाई गईो बता दे कि गोविंदधाम में कोलकाता के श्रीकांत शर्मा पिछले २५ साल से पुष्प फाग  महोत्सव का आयोजन करते आ रहे हैं। फाग गीतों और भजनों की प्रस्तुतियां राधा - कृष्ण के रंग, संकीर्तन और श्रद्धालुओं की आस्था  खोले के हनुमान के मंदिर परिसर में फागोत्सव और होली लोक नृत्य का आयोजन किया गया। नृत्य  राजेंद्र राव और डॉ॰ कविता सक्सेना के गुरु डॉ॰ निर्देशन में यह आयोजन हुआ। कलाकार पूनम शर्मा " औक प्रीति मारवाल ने गणेश वंदना की प्रस्तुृति दी। भजन कर प्राणी की प्रस्तुति डॉ॰ राजेंद्र तू तो राम राव ने युगल नृत्य आओ जी म्हारे हावड़े का पावना और सामूहिक नृत्य चिरमी . कालबेलिया  नृत्य की प्रस्तुति अदिति राठी और स्नेहा गुप्ता ने दी। एयरपोर्ट के सामने स्थित धाकड़ कॉलोनी में फाग उत्सव मनाया गया। कार्यक्रम में फाग गीतों और भजनों की प्रस्तुतियां दीं। अखिल भारतीय  फाल्गुनी शुक्ल एकादशी पर गोविंददेव जी मंदिर में फागोत्सव का आयोजन हुआ। इसमें पं. श्रीकांत शर्मा के भजनों ने फाग के रस भक्तिमय बना दिया। राधा - कृष्ण के रंग संकीर्तन और श्रद्धालुओं की आस्या से धाकड़ महासभा के अध्यक्ष ओमप्रकाश धाकड़  मंदिर प्रांगण भाव विभोर होकर झूम उठा। आयोजक बाल किशन बालासरिया , हरिभाई अग्रवाल, निवर्तमान राजेंद्र सिंह धाकड  सहित जीजाबाई सुनीता निगम चेयरमैन मनोज मुदगल अरुण अग्रवाल सहित अनेक प्रबुद्धजन उपस्यित रहे।  शाखाः राष्ट्र सेविका समिति की बहनों के साथ महिला - पुरुषों ने भाग लिया। दो दिवसीय पुष्प फाग में कलाकारों ने गायन और वादन से ठाकुरजी को रिझाया " गोविंददेवजी में पुष्प फागोत्सव को होल्ला २५ सालः सांवरिया सरकार खेलो भास्कर न्यूज जयपुर आराध्य देव गोविंददेवजी मंदिर में दो दिवसीय पुष्प  फागोत्सव का जादू शनिवार को गोविंद प्रेमियों के सिर चढ़ कर बोला। राजस्थानी भाषा के फाल्गुनी भजनों ने सुंदर नृत्य " पर कलाकार प्रस्तुत कर माहल को पूरी तरह होली के रंग में रंग दिया। सैकड़ों कलाकारों ने ओर वादन से ठाकुरजी को रिझाया। श्रद्धालुओं  गायन से अटे सत्संग भवन मेँ फूलों और इत्र को खुशबू  से महकते और श्रद्धालुओं से खचाखच भरे सत्संग भवन पुष्पम फाग का साक्षी बना। राधा और सखियों ने ठाकुरजी के साथ होली में भजन पर नृत्य कर उपस्थित लोगों को अपने संग नचाया। भगवान कृष्ण  की होली खेलने की मनोहारी लीलाओं का सुंदर मंचन करते भजनों पर नृत्य कर तालियां बटोरी। वहीं विराट कृष्णा और अन्य कलाकारों ने महारास फूलों को होली और मयूर नृत्य की सुंदर प्रस्तुति दी। कलाकारों ने चंग और ढप की आकर्षक प्रस्तुतियां दी। होली महोत्सव के मौके पर गोविंद धाम में शनिवार श्रीकृष्ण को लड्ड खिलाते हुए यशोदा मैया की सचना झांकी सजाई गईो बता दे कि गोविंदधाम में कोलकाता के श्रीकांत शर्मा पिछले २५ साल से पुष्प फाग  महोत्सव का आयोजन करते आ रहे हैं। फाग गीतों और भजनों की प्रस्तुतियां राधा - कृष्ण के रंग, संकीर्तन और श्रद्धालुओं की आस्था  खोले के हनुमान के मंदिर परिसर में फागोत्सव और होली लोक नृत्य का आयोजन किया गया। नृत्य  राजेंद्र राव और डॉ॰ कविता सक्सेना के गुरु डॉ॰ निर्देशन में यह आयोजन हुआ। कलाकार पूनम शर्मा " औक प्रीति मारवाल ने गणेश वंदना की प्रस्तुृति दी। भजन कर प्राणी की प्रस्तुति डॉ॰ राजेंद्र तू तो राम राव ने युगल नृत्य आओ जी म्हारे हावड़े का पावना और सामूहिक नृत्य चिरमी . कालबेलिया  नृत्य की प्रस्तुति अदिति राठी और स्नेहा गुप्ता ने दी। एयरपोर्ट के सामने स्थित धाकड़ कॉलोनी में फाग उत्सव मनाया गया। कार्यक्रम में फाग गीतों और भजनों की प्रस्तुतियां दीं। अखिल भारतीय  फाल्गुनी शुक्ल एकादशी पर गोविंददेव जी मंदिर में फागोत्सव का आयोजन हुआ। इसमें पं. श्रीकांत शर्मा के भजनों ने फाग के रस भक्तिमय बना दिया। राधा - कृष्ण के रंग संकीर्तन और श्रद्धालुओं की आस्या से धाकड़ महासभा के अध्यक्ष ओमप्रकाश धाकड़  मंदिर प्रांगण भाव विभोर होकर झूम उठा। आयोजक बाल किशन बालासरिया , हरिभाई अग्रवाल, निवर्तमान राजेंद्र सिंह धाकड  सहित जीजाबाई सुनीता निगम चेयरमैन मनोज मुदगल अरुण अग्रवाल सहित अनेक प्रबुद्धजन उपस्यित रहे।  शाखाः राष्ट्र सेविका समिति की बहनों के साथ महिला - पुरुषों ने भाग लिया। - ShareChat