Saba
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مجھے فالو کری
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💐 آداب 👐 - वो शहर ए मोहब्बत जहां मुस्तफा हैं वही घर बनाने को दिल चाहता है चो सोने सी कंकर, चो चाँदी सी मिट्टी नज़र में बसाने को दिल चाहता है जिहाद ए॰्मोहब्बत की आवाज गूंगी कहा हंज़ला ने ये दुल्हन से अपनी इजाज़त अगर दो तो जाम एन्शहादत लबों से लगाने का दिल चाहता हे जो पूछा नबी ने कि कुछ घर भी छोड़ा तो सिद्दीक अकबर के होंठों पे आया वहां माल ओ दौलत की क्या ज़रूसत जहां दिल का दिल चाहता हे लुटाने  सितारों से ये चाँद कहता है हर दम तुम्हें क्या बताएँ वो टुकड़ों का आलम इशारे में आका के इतना मज़ा था कि फिर टूट जाने का दिल चाहता है वो नन्हा सा असगर, चो ऐरी रगड़ कर यही कह रहा है चो ख़ेमे में रो कर ए बाबा, मैं पानी का प्यासा नहीं हूँ मेरा सर कटाने का दिल चाहता हे जो देखा है रू ए जमाल ए रिसालत तो अरशद उमर मुस्तफा से ये बोले बडी आपसे दश्मनी थी मगर अब वो शहर ए मोहब्बत जहां मुस्तफा हैं वही घर बनाने को दिल चाहता है चो सोने सी कंकर, चो चाँदी सी मिट्टी नज़र में बसाने को दिल चाहता है जिहाद ए॰्मोहब्बत की आवाज गूंगी कहा हंज़ला ने ये दुल्हन से अपनी इजाज़त अगर दो तो जाम एन्शहादत लबों से लगाने का दिल चाहता हे जो पूछा नबी ने कि कुछ घर भी छोड़ा तो सिद्दीक अकबर के होंठों पे आया वहां माल ओ दौलत की क्या ज़रूसत जहां दिल का दिल चाहता हे लुटाने  सितारों से ये चाँद कहता है हर दम तुम्हें क्या बताएँ वो टुकड़ों का आलम इशारे में आका के इतना मज़ा था कि फिर टूट जाने का दिल चाहता है वो नन्हा सा असगर, चो ऐरी रगड़ कर यही कह रहा है चो ख़ेमे में रो कर ए बाबा, मैं पानी का प्यासा नहीं हूँ मेरा सर कटाने का दिल चाहता हे जो देखा है रू ए जमाल ए रिसालत तो अरशद उमर मुस्तफा से ये बोले बडी आपसे दश्मनी थी मगर अब - ShareChat
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💐 آداب 👐 - नात शरीफ मैं सो जाऊँ या मुस्तफ़ा कहते कहते खुले आँख सल्ले अला कहते कहते हबीब ए ख़ुदा का नज़ारा करूँ मैं दिल ओ जान उन पर निसारा करूँ मैं मैं सो जाऊँ या मुस्तफ़ा कहते कहते आँख सल्ले - अला कहते कहते खुले तेरे दरके होते कहाँ जाऊँ, प्यारे कहाँ अपना दामन पसारा करूँ मैं 30.16 मैं सो जाऊँ या मुस्तफ़ा कहते कहते BAII VAKASUI खुले आँख सल्ले - अला कहते कहते 105 316్) तेरा ज़िक्र लब पर, ख़ुदा दिल के ज़िंदगानी गुज़ारा करूँ मैं যুঁচী मैं सो जाऊँ या मुस्तफ़ा कहते कहेतेहज़ार  आँख सल्ले - अला कहते कहततेतर खुले ख़ुदा खैर से लाएवो दिन भी॰ नूरी 75 FIR मदीने की गलियाँ बुहारा करूँ मैं मैं सो जाऊँ या मस्तफ़ा कहते कहते नात शरीफ मैं सो जाऊँ या मुस्तफ़ा कहते कहते खुले आँख सल्ले अला कहते कहते हबीब ए ख़ुदा का नज़ारा करूँ मैं दिल ओ जान उन पर निसारा करूँ मैं मैं सो जाऊँ या मुस्तफ़ा कहते कहते आँख सल्ले - अला कहते कहते खुले तेरे दरके होते कहाँ जाऊँ, प्यारे कहाँ अपना दामन पसारा करूँ मैं 30.16 मैं सो जाऊँ या मुस्तफ़ा कहते कहते BAII VAKASUI खुले आँख सल्ले - अला कहते कहते 105 316్) तेरा ज़िक्र लब पर, ख़ुदा दिल के ज़िंदगानी गुज़ारा करूँ मैं যুঁচী मैं सो जाऊँ या मुस्तफ़ा कहते कहेतेहज़ार  आँख सल्ले - अला कहते कहततेतर खुले ख़ुदा खैर से लाएवो दिन भी॰ नूरी 75 FIR मदीने की गलियाँ बुहारा करूँ मैं मैं सो जाऊँ या मस्तफ़ा कहते कहते - ShareChat
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💐 آداب 👐 - 8:42 PM ٥ m t fallll -भोजपुरी कलाम दूर सगरी   मुसीबत होगईल हमार मुस्तफा जान ए रहमत से प्यार हो गईल मुस्कुरा देहने जब आमिना के ललन बी हलीमा के रौशन दुआर   हो गईल चूम के तोहरे चरनन के कहलन उमर a ज़िन्दगी   मोर सगरी तोहार हो गईल ঢিত মইল নান ৪সং ননী কী সদং मन ब्याकुल के पल में क़रार  हो गईल " रन में कह देहनी  जब या अली या अली पल में मैदान सगरी ৪সাং ৪ী মইল जोगी जयपाल रोरो के लग ले कहे हमपे ख्वाजा की कृपा अपार हो गईल् तरसे दर्शन के नैना तसददुक  सदा इश्क़ में जिब से मन बेक़रार हो गईल 0591 तसददुक खान रिज़वी फ़ॉलो करें aqeel_khan_qadri 8:42 PM ٥ m t fallll -भोजपुरी कलाम दूर सगरी   मुसीबत होगईल हमार मुस्तफा जान ए रहमत से प्यार हो गईल मुस्कुरा देहने जब आमिना के ललन बी हलीमा के रौशन दुआर   हो गईल चूम के तोहरे चरनन के कहलन उमर a ज़िन्दगी   मोर सगरी तोहार हो गईल ঢিত মইল নান ৪সং ননী কী সদং मन ब्याकुल के पल में क़रार  हो गईल " रन में कह देहनी  जब या अली या अली पल में मैदान सगरी ৪সাং ৪ী মইল जोगी जयपाल रोरो के लग ले कहे हमपे ख्वाजा की कृपा अपार हो गईल् तरसे दर्शन के नैना तसददुक  सदा इश्क़ में जिब से मन बेक़रार हो गईल 0591 तसददुक खान रिज़वी फ़ॉलो करें aqeel_khan_qadri - ShareChat