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#🌅सूर्य देव🙏 #🪁संक्रांति Coming Soon⌛ #🔯संक्रांति स्पेशल राशिफल⭐ #🪁मकर संक्रांति स्पेशल सॉन्ग्स🎶🎼
🌅सूर्य देव🙏 - संक्रांति के पावन पर्व पर सूर्य देव की उपासना का अत्यंत गहरा मकर आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व है। यहाँ इसके मुख्य कारण दिए गए हैंः १. उत्तरायण का प्रारंभ संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते मकर हैं। इसी दिन से सूर्य ' दक्षिणायन' से ' उत्तरायण होते हैं। शास्त्रों में उत्तरायण के समय को " देवताओं का दिन" माना गया है, जो सकारात्मकता और प्रकाश का प्रतीक है। ranti पितान्पुत्र 2. का मिलन पौराणिक कथाओं के अनुसार, सूर्य देव का अपने पुत्र शनि देव (जो मकर राशि के स्वामी है) से मतभेद था। लेकिन मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव स्वयं अपने पुत्र  के घर मिलने जाते हैं। इसलिए यह दिन कड़वाहट भुलाकर रिश्तों में प्रेम और मिठास घोलने का संदेश देता है। ३. अंधकार से प्रकाश की ओर वैज्ञानिक दृष्टि से इस दिन के बाद से दिन बड़े होने लगते हैं और रातें छोटी। यह इस बात का प्रतीक है कि अब अंधकार कम होगा और प्रकाश बढ़ेगा| सीधी किरणें धरती पर पड़ने से ठंड का प्रकोप कम होने लगता सूर्य की और नई ऊर्जा का संचार होता है। ४. आरोग्य और संपन्नता सूर्य को "जगत की आत्मा " और " आरोग्य का देवता" कहा जाता है। मकर संक्रांति पर सूर्य की पूजा और उन्हें अर्घ्य देने से शरीर को विटामिन D और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। नई फसल के आगमन की खुशी में सूर्य देव को में सुख ्समृद्धि आती है। धन्यवाद दिया जाता है, जिससे घर ५. मोक्ष का द्वार भीष्म पितामह ने भी अपने प्राण त्यागने के लिए उत्तरायण (मकर संक्रांति) का ही इंतज़ार किया था, क्योंकि माना जाता है कि इस दौरान त्यागने वाले प्राणों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। लिए गुड़ , दिन सूर्य देव को प्रसन्न करने के तिल, खिचड़ी दान का महत्वः इस और कंबल का दान करना बेहद फलदायी माना जाता है। संक्रांति के पावन पर्व पर सूर्य देव की उपासना का अत्यंत गहरा मकर आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व है। यहाँ इसके मुख्य कारण दिए गए हैंः १. उत्तरायण का प्रारंभ संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते मकर हैं। इसी दिन से सूर्य ' दक्षिणायन' से ' उत्तरायण होते हैं। शास्त्रों में उत्तरायण के समय को " देवताओं का दिन" माना गया है, जो सकारात्मकता और प्रकाश का प्रतीक है। ranti पितान्पुत्र 2. का मिलन पौराणिक कथाओं के अनुसार, सूर्य देव का अपने पुत्र शनि देव (जो मकर राशि के स्वामी है) से मतभेद था। लेकिन मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव स्वयं अपने पुत्र  के घर मिलने जाते हैं। इसलिए यह दिन कड़वाहट भुलाकर रिश्तों में प्रेम और मिठास घोलने का संदेश देता है। ३. अंधकार से प्रकाश की ओर वैज्ञानिक दृष्टि से इस दिन के बाद से दिन बड़े होने लगते हैं और रातें छोटी। यह इस बात का प्रतीक है कि अब अंधकार कम होगा और प्रकाश बढ़ेगा| सीधी किरणें धरती पर पड़ने से ठंड का प्रकोप कम होने लगता सूर्य की और नई ऊर्जा का संचार होता है। ४. आरोग्य और संपन्नता सूर्य को "जगत की आत्मा " और " आरोग्य का देवता" कहा जाता है। मकर संक्रांति पर सूर्य की पूजा और उन्हें अर्घ्य देने से शरीर को विटामिन D और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। नई फसल के आगमन की खुशी में सूर्य देव को में सुख ्समृद्धि आती है। धन्यवाद दिया जाता है, जिससे घर ५. मोक्ष का द्वार भीष्म पितामह ने भी अपने प्राण त्यागने के लिए उत्तरायण (मकर संक्रांति) का ही इंतज़ार किया था, क्योंकि माना जाता है कि इस दौरान त्यागने वाले प्राणों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। लिए गुड़ , दिन सूर्य देव को प्रसन्न करने के तिल, खिचड़ी दान का महत्वः इस और कंबल का दान करना बेहद फलदायी माना जाता है। - ShareChat
मकर संक्रांति #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #☝ मेरे विचार #🪁संक्रांति Coming Soon⌛ #🔯संक्रांति स्पेशल राशिफल⭐ #🪁मकर संक्रांति स्पेशल सॉन्ग्स🎶🎼
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - स अत्यत पावन माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो ' पुण्य काल' का प्रारंभ होता किए है। इस विशेष समय में गए दान, स्नान और जाप का फल अन्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक प्राप्त होता है। दान का आध्यात्मिक पक्षः ग्रह दोष निवारणः इस दिन तिल और गुड का दान करने से शनि और सूर्य देव प्रसन्न होते हैं, जिससे जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। गरीबों की सेवाः ऊनी वस्त्र , कंबल और अनाज का दान करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है और घर में सुख समृद्धि आती है। अक्षय पुण्यः माना जाता है कि इस दिन दिया गया दान सीधे ईश्वर को समर्पित होता है और वह कभी समाप्त न होने বালা (अक्षय) फल प्रदान करता है। पूजा का विधानः दिन सूर्य देव की विशेष पूजा की जाती है। तांबे के लोटे इस में जल लाल चंदन और तिल मिलाकर अर्घ्य देने से तेज और स अत्यत पावन माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो ' पुण्य काल' का प्रारंभ होता किए है। इस विशेष समय में गए दान, स्नान और जाप का फल अन्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक प्राप्त होता है। दान का आध्यात्मिक पक्षः ग्रह दोष निवारणः इस दिन तिल और गुड का दान करने से शनि और सूर्य देव प्रसन्न होते हैं, जिससे जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। गरीबों की सेवाः ऊनी वस्त्र , कंबल और अनाज का दान करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है और घर में सुख समृद्धि आती है। अक्षय पुण्यः माना जाता है कि इस दिन दिया गया दान सीधे ईश्वर को समर्पित होता है और वह कभी समाप्त न होने বালা (अक्षय) फल प्रदान करता है। पूजा का विधानः दिन सूर्य देव की विशेष पूजा की जाती है। तांबे के लोटे इस में जल लाल चंदन और तिल मिलाकर अर्घ्य देने से तेज और - ShareChat
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> संकट कटे मिटे सब पीरा 🙏 🚩 #🌷शुभ रविवार #🙏शाम की आरती🪔 #🔊सुन्दर कांड🕉️
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