Vikash ‘aks’
ShareChat
click to see wallet page
@3823330961
3823330961
Vikash ‘aks’
@3823330961
"मौलिक विचार, मानवीय संस्कार।" 🙏
"नारी कमजोर नहीं, वो तो सृजन और शक्ति का दूसरा नाम है।" #📜महिला दिवस कोट्स✍️💭 #👩नारी शक्ति💪🙎‍♀️ #📓 हिंदी साहित्य
📜महिला दिवस कोट्स✍️💭 - सिर्फ एक दिन के सम्मान की मोहताज़ नहीं है वो, हर रोज़ जो घर और बाहर को संवारती है। कभी नीव की ईंट बनकर खड़ी रहती है चुपचाप, तो कभी आसमान छूकर दुनिया को निहारती है। नक्ट भी एक उसकी चुपी में  शोर है, गहरा वो कमज़ोर नहीं, शक्ति का ही एक और छोर है। आज उसे बस बधाई मत देना ऐ दोस्त, उसे वो हक देना , जिसकी वो असल हकदार है। vikas aks सिर्फ एक दिन के सम्मान की मोहताज़ नहीं है वो, हर रोज़ जो घर और बाहर को संवारती है। कभी नीव की ईंट बनकर खड़ी रहती है चुपचाप, तो कभी आसमान छूकर दुनिया को निहारती है। नक्ट भी एक उसकी चुपी में  शोर है, गहरा वो कमज़ोर नहीं, शक्ति का ही एक और छोर है। आज उसे बस बधाई मत देना ऐ दोस्त, उसे वो हक देना , जिसकी वो असल हकदार है। vikas aks - ShareChat
बधाई नहीं, उसे उसका हक और पहचान दें। #👩नारी शक्ति💪🙎‍♀️ #👧महिला दिवस Status⏳ #✍️ साहित्य एवं शायरी
👩नारी शक्ति💪🙎‍♀️ - अंतर्र्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 3ef शक्ति, समाज का आधार सृजन 3ণস' सशक्तिकरण. Haam TఅIITIT अंतर्र्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 3ef शक्ति, समाज का आधार सृजन 3ণস' सशक्तिकरण. Haam TఅIITIT - ShareChat
#📲मेरा पहला पोस्ट😍 "मर्यादा की बेड़ियाँ सिर्फ एक पक्ष के लिए क्यों? मर्यादा सुरक्षा है या बंधन? सोचिएगा ज़रूर। #📓 हिंदी साहित्य #समाज_की_सच्चाई #अक्स #👩नारी शक्ति💪🙎‍♀️
📲मेरा पहला पोस्ट😍 - शीर्षकः मर्यादा का 'चौथ' कैसी ये विडंबना है! नारी के जीवन पर ही, मर्यादा का बंधन है। पुरुष ने रची कैसी ये रचना है, कि  मर्यादा' ही नारी की विवेचना है। इसको भंग करे जो नारी , पड़ती ज़माने पर वो भारी, इसीलिए पहनाई मर्यादा की बेड़ी। । "मर्यादा में रहोगी, तभी सुरक्षित रहोगी" ~ ಹಗT ೯ಶ3HIHTI पर कौन पूछे इनसे? कि किनसे मिलेगी सुरक्षा? अत्याचारी कौन? किस आंगन में पलता! तुम्ने तो ' मर्यादा' को ही चौथ' मर्यादा ননা হালাI चौथ वो तो कपड़ों से ढकी भी रहे, ये तो बस पर्दा है मगर अफ़सोस... मानसिकता नंगी ही रहती। तुम्हारी  हवसी नज़रों से हर जगह ताड़ी जाती , छोटी बच्ची भी कहाँ बच पाती! नीति-नियम की लकीरें बस अक्स शीर्षकः मर्यादा का 'चौथ' कैसी ये विडंबना है! नारी के जीवन पर ही, मर्यादा का बंधन है। पुरुष ने रची कैसी ये रचना है, कि  मर्यादा' ही नारी की विवेचना है। इसको भंग करे जो नारी , पड़ती ज़माने पर वो भारी, इसीलिए पहनाई मर्यादा की बेड़ी। । "मर्यादा में रहोगी, तभी सुरक्षित रहोगी" ~ ಹಗT ೯ಶ3HIHTI पर कौन पूछे इनसे? कि किनसे मिलेगी सुरक्षा? अत्याचारी कौन? किस आंगन में पलता! तुम्ने तो ' मर्यादा' को ही चौथ' मर्यादा ননা হালাI चौथ वो तो कपड़ों से ढकी भी रहे, ये तो बस पर्दा है मगर अफ़सोस... मानसिकता नंगी ही रहती। तुम्हारी  हवसी नज़रों से हर जगह ताड़ी जाती , छोटी बच्ची भी कहाँ बच पाती! नीति-नियम की लकीरें बस अक्स - ShareChat