Savita Mahata
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#❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - माँ और बेट माँ ने बेटे से कहा - एक "बेटा जब तू छोटा था, हर डर में ' माँ' पुकारता था, और मैं तुझे सीने से लगा लेती थी... সাত নু নভ্া ক্ী যমা ই, पर जिम्मेदारियाँ भी बढ गई हैं, बस फर्क इतना है... अब तू चुप रहता है, पर दर्द छुपाकर सहता है...' बेटे ने मुस्कुराकर कहा - "माँ, मैंने तुमसे ही सीखा है, में मजबूत हर हाल रहना... ٩ ٤٤ ಈ 3TT எக், तो तुम्हें कौन संभालेगा... उस दिन माँ समझ गई- बेटा सिर्फ सहारा नहीं, माँ की ताकत भी बन जाता है. अगर आप अपनी माँ से प्यार करते हैं तो कमेंट में "माँ [సI जरूर माँ और बेट माँ ने बेटे से कहा - एक "बेटा जब तू छोटा था, हर डर में ' माँ' पुकारता था, और मैं तुझे सीने से लगा लेती थी... সাত নু নভ্া ক্ী যমা ই, पर जिम्मेदारियाँ भी बढ गई हैं, बस फर्क इतना है... अब तू चुप रहता है, पर दर्द छुपाकर सहता है...' बेटे ने मुस्कुराकर कहा - "माँ, मैंने तुमसे ही सीखा है, में मजबूत हर हाल रहना... ٩ ٤٤ ಈ 3TT எக், तो तुम्हें कौन संभालेगा... उस दिन माँ समझ गई- बेटा सिर्फ सहारा नहीं, माँ की ताकत भी बन जाता है. अगर आप अपनी माँ से प्यार करते हैं तो कमेंट में "माँ [సI जरूर - ShareChat
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - मेरा दिमाग कभी शांत नहीं रहता कहूँ तो, 4 मेरा दिमाग कभी भी शांत नहीं रहता हैं। बाहर से चाहे मैं कितना भी normal दिखूँ, लेकिन अंदर..? हर वक्त कुछ ना कुछ, चलता ही रहता है। बातें , तो कभी अधूरे सवाल, कभी पुरानी कभी- कभी तो उसकी ही ख्याल, जिनका कोई मतलब भी नहीं होता। रात को जब सब सो जाते हैं ना, तब मेरा दिमाग सबसे ज़्यादा जागता है। आँखें बंद करता हूँ तो ऐसा लगता है। जैसे हजारों आवाज़ें एक साथ बोल रही हों। मैं खुद को समझाने की कोशिश करता हूँ, फोन चलाता हूँ, गाने भी सुनता हूँ॰ लोगों से बात भी कर लेता हूँ | लेकिन कुछ देर बाद फिर वही बेचैनी लौट आती है। 84833,| মনব্ধী লনা लेकिन सच तो ये होता हैं। कि मैं हर रोज़ अपने ही दिमाग से लड़ रहा होता हूँ इतना सोचते - सोचते। থক্ধ যমা ৪ু, যা২ कभी-कभी बस मन करता है, कि थोड़ी देर g के सब कुछ रुक जाए। भागदौड़, ये ख्याल, ये शोर, ये अंदर की क्योंकि अब मुझे खुद के अंदर भी सुकून नहीं मिलता हैं। मेरा दिमाग कभी शांत नहीं रहता कहूँ तो, 4 मेरा दिमाग कभी भी शांत नहीं रहता हैं। बाहर से चाहे मैं कितना भी normal दिखूँ, लेकिन अंदर..? हर वक्त कुछ ना कुछ, चलता ही रहता है। बातें , तो कभी अधूरे सवाल, कभी पुरानी कभी- कभी तो उसकी ही ख्याल, जिनका कोई मतलब भी नहीं होता। रात को जब सब सो जाते हैं ना, तब मेरा दिमाग सबसे ज़्यादा जागता है। आँखें बंद करता हूँ तो ऐसा लगता है। जैसे हजारों आवाज़ें एक साथ बोल रही हों। मैं खुद को समझाने की कोशिश करता हूँ, फोन चलाता हूँ, गाने भी सुनता हूँ॰ लोगों से बात भी कर लेता हूँ | लेकिन कुछ देर बाद फिर वही बेचैनी लौट आती है। 84833,| মনব্ধী লনা लेकिन सच तो ये होता हैं। कि मैं हर रोज़ अपने ही दिमाग से लड़ रहा होता हूँ इतना सोचते - सोचते। থক্ধ যমা ৪ু, যা২ कभी-कभी बस मन करता है, कि थोड़ी देर g के सब कुछ रुक जाए। भागदौड़, ये ख्याल, ये शोर, ये अंदर की क्योंकि अब मुझे खुद के अंदर भी सुकून नहीं मिलता हैं। - ShareChat
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - जिस दिन उम्मीद ख़ुद से होगी उस दिन हार नहीं होगी.. जिस दिन उम्मीद ख़ुद से होगी उस दिन हार नहीं होगी.. - ShareChat
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - ज़िंदगी सुखनदुख और संघर्षों से भरा एक खूबसूरत सफ़र है। यह हमें हर मोड़ पर कुछ नया सिखाती है। ज़िंदगी सुखनदुख और संघर्षों से भरा एक खूबसूरत सफ़र है। यह हमें हर मोड़ पर कुछ नया सिखाती है। - ShareChat
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - कभी-कभी दिल इतना भर जाता कि समझ नहीं आता... रोएं॰ ؟٩ ٤ 4 सब कुछ अंदर ही अंदर जमा होता रहता है हर बात. हर याद डर अधूरी दिममीद .. एक दिन.. भारी हो जाता है॰ ক্িন্ু कुछ करने का मन ही नहीं करता. না ক্িমী ম নান কন ক্ষা. ना कुछ समझाने का... बस चुप रहकर सब सहने का... तो क्या सच में॰ িল_ক্া নীহস सबसे ज्यादा भारी होता है...? कभी-कभी दिल इतना भर जाता कि समझ नहीं आता... रोएं॰ ؟٩ ٤ 4 सब कुछ अंदर ही अंदर जमा होता रहता है हर बात. हर याद डर अधूरी दिममीद .. एक दिन.. भारी हो जाता है॰ ক্িন্ু कुछ करने का मन ही नहीं करता. না ক্িমী ম নান কন ক্ষা. ना कुछ समझाने का... बस चुप रहकर सब सहने का... तो क्या सच में॰ িল_ক্া নীহস सबसे ज्यादा भारी होता है...? - ShareChat
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - 66 गर्मियों की छुट्टियां आते ही মন্ গণন মাঁ ক ঘ২ जाने की बातें करते हैं. কীর্ৎ নানী ম মিলন কী স্ত্রুথা ৪, कोई माँ के हाथ का खाना खाने को और मैं... बस चुप होकर सबकी बातें सुंन लेती हूँ॰ क्योंकि अब ना मेरे पास माँ है, ना मेरे बच्चों के पास नानी. कुछ कमी ऐसी होती है जो कभी पूरी नहीं होती.. भाँ सिर्फ एक रिश्ता नहीं , पूरा सुकून होती है.   66 गर्मियों की छुट्टियां आते ही মন্ গণন মাঁ ক ঘ২ जाने की बातें करते हैं. কীর্ৎ নানী ম মিলন কী স্ত্রুথা ৪, कोई माँ के हाथ का खाना खाने को और मैं... बस चुप होकर सबकी बातें सुंन लेती हूँ॰ क्योंकि अब ना मेरे पास माँ है, ना मेरे बच्चों के पास नानी. कुछ कमी ऐसी होती है जो कभी पूरी नहीं होती.. भाँ सिर्फ एक रिश्ता नहीं , पूरा सुकून होती है. - ShareChat