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#🙏सुविचार📿
🙏सुविचार📿 - नियत साफ़ और मकसद सही हो तो भगवान आपकी मदद किसी न किसी रूप में जरूर करता है। नियत साफ़ और मकसद सही हो तो भगवान आपकी मदद किसी न किसी रूप में जरूर करता है। - ShareChat
#🌸 सत्य वचन #❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #🙏सुविचार📿
🌸 सत्य वचन - जिस प्रकार॰० वृक्ष की खूबसूरती फूल और पत्तों में निर्भर करती है C ठीक उसी प्रकार. इंसान की खूबसूरती उसके विचार और व्यवहार पर निर्भर करती है..! जिस प्रकार॰० वृक्ष की खूबसूरती फूल और पत्तों में निर्भर करती है C ठीक उसी प्रकार. इंसान की खूबसूरती उसके विचार और व्यवहार पर निर्भर करती है..! - ShareChat
#🌙 गुड नाईट #🌃 तारों संग शुभ रात्रि ✨
🌙 गुड नाईट - जीवन जो शेष है वो ही विशेष है मानो तो मौज है. वरना समस्या तो रोज है। शुभ रात्रि Sueet ge Oreams உ0- जीवन जो शेष है वो ही विशेष है मानो तो मौज है. वरना समस्या तो रोज है। शुभ रात्रि Sueet ge Oreams உ0- - ShareChat
#संत कबीर दास जी 🙏
संत कबीर दास जी 🙏 - हिंदी बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर पंछी को छाया नहीं फल लागे अति दूर। हिंदी बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर पंछी को छाया नहीं फल लागे अति दूर। - ShareChat
#संत कबीर दास जी 🙏
संत कबीर दास जी 🙏 - SHRl krishnal Mac गुरु गोविंद दोउ खड़े काके लागूं पांय बलिहारी गरु आपनो गोविंद दियो बताय SHRl krishnal Mac गुरु गोविंद दोउ खड़े काके लागूं पांय बलिहारी गरु आपनो गोविंद दियो बताय - ShareChat
#संत कबीर दास जी 🙏
संत कबीर दास जी 🙏 - HindiSoch Com संत कबीर के दोहे - ऐसी वाणी बोलिए मन का आप खोये औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होए अर्थ इंसान को ऐसी भाषा बोलनी चाहिए जो सुनने वाले के मन को बहुत अच्छी लगे। लोगों को तो सुख पहुँचाती ही है ऐसी भाषा মুংগ इसके साथ खुद को भी बड़े आनंद का अनुभव होता है HindiSoch Com संत कबीर के दोहे - ऐसी वाणी बोलिए मन का आप खोये औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होए अर्थ इंसान को ऐसी भाषा बोलनी चाहिए जो सुनने वाले के मन को बहुत अच्छी लगे। लोगों को तो सुख पहुँचाती ही है ऐसी भाषा মুংগ इसके साथ खुद को भी बड़े आनंद का अनुभव होता है - ShareChat
#संत कबीर दास जी 🙏
संत कबीर दास जी 🙏 - मल मल धोए शरीर को, धोए न मन का मैल। नहाए गंगा गोमती , रहे बैल के बैल। | को तो बहुत लोग अपने शरीर अर्थ अच्छी तरह सा़फ करते हैं। लेकिन, मन के मैल की सफाई नहीं करते हैं। वे गंगा और गोमती जैसे नदी में नहाकर खुद को पवित्र मानते है, लेकिन वे मूर्ख ही रहते हैं। मल मल धोए शरीर को, धोए न मन का मैल। नहाए गंगा गोमती , रहे बैल के बैल। | को तो बहुत लोग अपने शरीर अर्थ अच्छी तरह सा़फ करते हैं। लेकिन, मन के मैल की सफाई नहीं करते हैं। वे गंगा और गोमती जैसे नदी में नहाकर खुद को पवित्र मानते है, लेकिन वे मूर्ख ही रहते हैं। - ShareChat
#संत कबीर दास जी 🙏
संत कबीर दास जी 🙏 - कबीर दास के देहे बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर। 317ಥl पंछो को छाया नहोंफल लागे कबीर दास के देहे बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर। 317ಥl पंछो को छाया नहोंफल लागे - ShareChat
#संत कबीर दास जी 🙏
संत कबीर दास जी 🙏 - चिंता से चतुराई घटे , दुःख से घटे RR, पाप से लक्ष्मी घटे , कह गए दास कबीर । संत कबीर चिंता से चतुराई घटे , दुःख से घटे RR, पाप से लक्ष्मी घटे , कह गए दास कबीर । संत कबीर - ShareChat
#संत कबीर दास जी 🙏
संत कबीर दास जी 🙏 - धीरे-्धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय। माली सींचे सौ घड़ा , ऋतु आए फल होय।। संत कबीरदास धीरे-्धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय। माली सींचे सौ घड़ा , ऋतु आए फल होय।। संत कबीरदास - ShareChat