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#🙏🏻सीता राम
🙏🏻सीता राम - हम अक्सर जीवन में किसी के साथ जुड़ते हैं तो अपने स्वार्थ की पूर्ति को ध्यान में रख कर जुड़ते हैं और उस समय हमें उस व्यक्ति के अन्दर सिर्फ अच्छाइयां ही नज़र आती हैं, उसके अन्दर की बुराइयां हमें नजर ही नहीं आती हैं क्योंकि हमारी आंखों पर स्वार्थ काचस्मा चढ़ा होता है, लेकिन जैसे ही हमारी स्वार्थपूर्ति होना बंद हो जाती हैतो हमें उसी व्यक्ति के अन्दर सिर्फ बुराइयां नज़र आने लगतीं हैं और उसके अन्दरकी समस्त अच्छाइयों का स्मरण भी नहीं करना चाहते हैंऔर सिर्फ उसका बुरा कैसे होे केबल यही विचार हमारे मस्तिष्क में स्थान बना लेते हैं और यहीं से हमारे सम्पूर्ण ब्यक्तित्व के ख़राब होने की शुरुआत हो जाती है, क्या जुड़ते समय का और अलग होने पर अच्छाइयों बुराईयों चाहिए का ध्यान नहीं रखना स्वयं विचार 4 कीजिए हम अक्सर जीवन में किसी के साथ जुड़ते हैं तो अपने स्वार्थ की पूर्ति को ध्यान में रख कर जुड़ते हैं और उस समय हमें उस व्यक्ति के अन्दर सिर्फ अच्छाइयां ही नज़र आती हैं, उसके अन्दर की बुराइयां हमें नजर ही नहीं आती हैं क्योंकि हमारी आंखों पर स्वार्थ काचस्मा चढ़ा होता है, लेकिन जैसे ही हमारी स्वार्थपूर्ति होना बंद हो जाती हैतो हमें उसी व्यक्ति के अन्दर सिर्फ बुराइयां नज़र आने लगतीं हैं और उसके अन्दरकी समस्त अच्छाइयों का स्मरण भी नहीं करना चाहते हैंऔर सिर्फ उसका बुरा कैसे होे केबल यही विचार हमारे मस्तिष्क में स्थान बना लेते हैं और यहीं से हमारे सम्पूर्ण ब्यक्तित्व के ख़राब होने की शुरुआत हो जाती है, क्या जुड़ते समय का और अलग होने पर अच्छाइयों बुराईयों चाहिए का ध्यान नहीं रखना स्वयं विचार 4 कीजिए - ShareChat
#🙏🏻सीता राम
🙏🏻सीता राम - हम सभी ने अक्सर " देवता " और  राक्षस " इनकी तमाम कहानियां अपने जीवन में सुनी होंगी और सुनते ही रहते हैं, वास्तव में ये दोनों ही अलग ्अलग किरदार हैं, लेकिन यह दोनों एक साथ रहते हैं यह कभी नहीं सुना होगा परन्तु मनुष्य यानि हम सभी ऐसे प्राणी हैं जिसमे यह दोनों ही किरदार निवास करते हैं जब कभी भी हमारे अंदर क्रोध , घृणा, द्वेष छल कपट, काम वासना लोभ, किसी का बुरा करने के विचार, किसी का कुछ अनैतिक तरीके से छीनने के विचार, हमारे ऊपर हावी रहते हों में ही होते हैं उस समय हम राक्षस रूप लेकिन जब कभी 9, करुणा दया, किसी की भी पीडा देख उसकी मदद करने बाले எasasசி frr की ढूसरों & खुशी से खुशी होती हो तब हम देवता रूप में होते हैं तो हम किस रूप में ज्यादा जीवन जीते हैं? . स्वयं विचार कीजिए हम सभी ने अक्सर " देवता " और  राक्षस " इनकी तमाम कहानियां अपने जीवन में सुनी होंगी और सुनते ही रहते हैं, वास्तव में ये दोनों ही अलग ्अलग किरदार हैं, लेकिन यह दोनों एक साथ रहते हैं यह कभी नहीं सुना होगा परन्तु मनुष्य यानि हम सभी ऐसे प्राणी हैं जिसमे यह दोनों ही किरदार निवास करते हैं जब कभी भी हमारे अंदर क्रोध , घृणा, द्वेष छल कपट, काम वासना लोभ, किसी का बुरा करने के विचार, किसी का कुछ अनैतिक तरीके से छीनने के विचार, हमारे ऊपर हावी रहते हों में ही होते हैं उस समय हम राक्षस रूप लेकिन जब कभी 9, करुणा दया, किसी की भी पीडा देख उसकी मदद करने बाले எasasசி frr की ढूसरों & खुशी से खुशी होती हो तब हम देवता रूप में होते हैं तो हम किस रूप में ज्यादा जीवन जीते हैं? . स्वयं विचार कीजिए - ShareChat
#🙏🏻सीता राम
🙏🏻सीता राम - जब हम इस संसार से अपनी जीवन यात्रा पूरी विदा लेते हैं तो हम सभी ने देखा है कि करजब अमुक व्यक्ति द्वारा उपयोग में लाए जाने वाले सभी कपड़ों को उसके विस्तर को घर से बाहर निकाल कर फेंक देते हैं, परन्तु अगर कुछ सोने के आभूषण पहने हों तो उनको उतार कर रख लेते हैं और उसके द्वारा कमाए धन से प्रोपर्टी, BR, पैसा , सम्पत्ति सभी को संभाल कर रखते हैं , सोचिए रिश्ता किन चीजों से होता है, लेकिन हमारे पुण्य , परोपकार, ईश्वर भक्ति, हमारे अच्छे कर्म, हमारा व्यवहार,को कोई नहीं छीन सकता न ही बांट सकता , इसलिए क्यों न ऐसा कर्म करें ऐसी कमाई भी करें कि मरने के बाद हमें धन की वजह से नहीं, हमारे मन की वजह से, हमारे व्यवहार की वजह से ही लोग हमें याद करें स्वयं विचार कीजिए जब हम इस संसार से अपनी जीवन यात्रा पूरी विदा लेते हैं तो हम सभी ने देखा है कि करजब अमुक व्यक्ति द्वारा उपयोग में लाए जाने वाले सभी कपड़ों को उसके विस्तर को घर से बाहर निकाल कर फेंक देते हैं, परन्तु अगर कुछ सोने के आभूषण पहने हों तो उनको उतार कर रख लेते हैं और उसके द्वारा कमाए धन से प्रोपर्टी, BR, पैसा , सम्पत्ति सभी को संभाल कर रखते हैं , सोचिए रिश्ता किन चीजों से होता है, लेकिन हमारे पुण्य , परोपकार, ईश्वर भक्ति, हमारे अच्छे कर्म, हमारा व्यवहार,को कोई नहीं छीन सकता न ही बांट सकता , इसलिए क्यों न ऐसा कर्म करें ऐसी कमाई भी करें कि मरने के बाद हमें धन की वजह से नहीं, हमारे मन की वजह से, हमारे व्यवहार की वजह से ही लोग हमें याद करें स्वयं विचार कीजिए - ShareChat