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#🙏🏻सीता राम
🙏🏻सीता राम - नानक चिंता क्यों करें चिंता से क्या होये मेरी चिंता प्रभु करें 97 T1೯ कोए चिंता ना तु चिंतन प्रभु की कर, प्रभु चिंतन करे तोहि नानक चिंता क्यों करें चिंता से क्या होये मेरी चिंता प्रभु करें 97 T1೯ कोए चिंता ना तु चिंतन प्रभु की कर, प्रभु चिंतन करे तोहि - ShareChat
#🙏🏻सीता राम
🙏🏻सीता राम - पति ने एक दिन गुस्से से कहाः तुम्हारी हैसियत ही क्या है२ आज मेरे खुद की नाम और मेरे कमाए हुए पैसों से ही तो दुनिया तुम्हें जानती और इज्जत देती है! पत्नी ने आँखों में आंसू लिए पर पूरी मजबूती से कहाः मैंने अपना सरनेम , अपना मायका और अपनी सारी ख्वाहिशें इसलिए मिटा दीं ताकि बेफिक्र होकर दुनिया में अपनी 3 पहचान बना सकें। अगर मैं घरकी चारदीवारी, आपके बच्चे और ತvf को ना संभालती, तो आपकी आधी उम्र उलझनों में ही कट जाती। मेरी खोई हुई पहचान ही आपकी इस कामयाबी की नींच है।" क्या आप पत्नी की इस बात से पूरी तरह सहमत हो? पति ने एक दिन गुस्से से कहाः तुम्हारी हैसियत ही क्या है२ आज मेरे खुद की नाम और मेरे कमाए हुए पैसों से ही तो दुनिया तुम्हें जानती और इज्जत देती है! पत्नी ने आँखों में आंसू लिए पर पूरी मजबूती से कहाः मैंने अपना सरनेम , अपना मायका और अपनी सारी ख्वाहिशें इसलिए मिटा दीं ताकि बेफिक्र होकर दुनिया में अपनी 3 पहचान बना सकें। अगर मैं घरकी चारदीवारी, आपके बच्चे और ತvf को ना संभालती, तो आपकी आधी उम्र उलझनों में ही कट जाती। मेरी खोई हुई पहचान ही आपकी इस कामयाबी की नींच है।" क्या आप पत्नी की इस बात से पूरी तरह सहमत हो? - ShareChat
#🙏🏻सीता राम
🙏🏻सीता राम - 66 एक सच्चे इंसान को सबसे dst तब होती है, வGு जब उसे पता चलता है कि उसने अपना लिए जिसके सब कुछ न्योछावर कर दिया उन लोगों के मन में उसके 44, களி लिए लगाव और सम्मान था ही नहीं.. 66 एक सच्चे इंसान को सबसे dst तब होती है, வGு जब उसे पता चलता है कि उसने अपना लिए जिसके सब कुछ न्योछावर कर दिया उन लोगों के मन में उसके 44, களி लिए लगाव और सम्मान था ही नहीं.. - ShareChat
#🙏🏻सीता राम
🙏🏻सीता राम - महकते फूल बने रहना, कभी FOOL न बनना। बेपरवाह बनना पर कभी लापरवाह न बनना। जो इशारे को समझे वो समझदार, जो ना समझे वो अकेले हम बूँद हैं, मिल जाएं तो सागर है। मुर्ख। अकेले हम धागा हैं, मिल जाएं तो चादर है। अकेले हम कागज हैं, मिल जाएं तो किताब है। खुशियां मिल कर रहने में ही है। जलते रहने में और नुस्ख निकालने में कभी एकता नहीं आयेगी। दिल और दिमाग में खुनस रखनेवाले हमेशा ही दुखी दुखी रहते हैं। महकते फूल बने रहना, कभी FOOL न बनना। बेपरवाह बनना पर कभी लापरवाह न बनना। जो इशारे को समझे वो समझदार, जो ना समझे वो अकेले हम बूँद हैं, मिल जाएं तो सागर है। मुर्ख। अकेले हम धागा हैं, मिल जाएं तो चादर है। अकेले हम कागज हैं, मिल जाएं तो किताब है। खुशियां मिल कर रहने में ही है। जलते रहने में और नुस्ख निकालने में कभी एकता नहीं आयेगी। दिल और दिमाग में खुनस रखनेवाले हमेशा ही दुखी दुखी रहते हैं। - ShareChat
#🙏🏻सीता राम
🙏🏻सीता राम - हम अक्सर जीवन में किसी के साथ जुड़ते हैं तो अपने स्वार्थ की पूर्ति को ध्यान में रख कर जुड़ते हैं और उस समय हमें उस व्यक्ति के अन्दर सिर्फ अच्छाइयां ही नज़र आती हैं, उसके अन्दर की बुराइयां हमें नजर ही नहीं आती हैं क्योंकि हमारी आंखों पर स्वार्थ काचस्मा चढ़ा होता है, लेकिन जैसे ही हमारी स्वार्थपूर्ति होना बंद हो जाती हैतो हमें उसी व्यक्ति के अन्दर सिर्फ बुराइयां नज़र आने लगतीं हैं और उसके अन्दरकी समस्त अच्छाइयों का स्मरण भी नहीं करना चाहते हैंऔर सिर्फ उसका बुरा कैसे होे केबल यही विचार हमारे मस्तिष्क में स्थान बना लेते हैं और यहीं से हमारे सम्पूर्ण ब्यक्तित्व के ख़राब होने की शुरुआत हो जाती है, क्या जुड़ते समय का और अलग होने पर अच्छाइयों बुराईयों चाहिए का ध्यान नहीं रखना स्वयं विचार 4 कीजिए हम अक्सर जीवन में किसी के साथ जुड़ते हैं तो अपने स्वार्थ की पूर्ति को ध्यान में रख कर जुड़ते हैं और उस समय हमें उस व्यक्ति के अन्दर सिर्फ अच्छाइयां ही नज़र आती हैं, उसके अन्दर की बुराइयां हमें नजर ही नहीं आती हैं क्योंकि हमारी आंखों पर स्वार्थ काचस्मा चढ़ा होता है, लेकिन जैसे ही हमारी स्वार्थपूर्ति होना बंद हो जाती हैतो हमें उसी व्यक्ति के अन्दर सिर्फ बुराइयां नज़र आने लगतीं हैं और उसके अन्दरकी समस्त अच्छाइयों का स्मरण भी नहीं करना चाहते हैंऔर सिर्फ उसका बुरा कैसे होे केबल यही विचार हमारे मस्तिष्क में स्थान बना लेते हैं और यहीं से हमारे सम्पूर्ण ब्यक्तित्व के ख़राब होने की शुरुआत हो जाती है, क्या जुड़ते समय का और अलग होने पर अच्छाइयों बुराईयों चाहिए का ध्यान नहीं रखना स्वयं विचार 4 कीजिए - ShareChat
#🙏🏻सीता राम
🙏🏻सीता राम - हम सभी ने अक्सर " देवता " और  राक्षस " इनकी तमाम कहानियां अपने जीवन में सुनी होंगी और सुनते ही रहते हैं, वास्तव में ये दोनों ही अलग ्अलग किरदार हैं, लेकिन यह दोनों एक साथ रहते हैं यह कभी नहीं सुना होगा परन्तु मनुष्य यानि हम सभी ऐसे प्राणी हैं जिसमे यह दोनों ही किरदार निवास करते हैं जब कभी भी हमारे अंदर क्रोध , घृणा, द्वेष छल कपट, काम वासना लोभ, किसी का बुरा करने के विचार, किसी का कुछ अनैतिक तरीके से छीनने के विचार, हमारे ऊपर हावी रहते हों में ही होते हैं उस समय हम राक्षस रूप लेकिन जब कभी 9, करुणा दया, किसी की भी पीडा देख उसकी मदद करने बाले எasasசி frr की ढूसरों & खुशी से खुशी होती हो तब हम देवता रूप में होते हैं तो हम किस रूप में ज्यादा जीवन जीते हैं? . स्वयं विचार कीजिए हम सभी ने अक्सर " देवता " और  राक्षस " इनकी तमाम कहानियां अपने जीवन में सुनी होंगी और सुनते ही रहते हैं, वास्तव में ये दोनों ही अलग ्अलग किरदार हैं, लेकिन यह दोनों एक साथ रहते हैं यह कभी नहीं सुना होगा परन्तु मनुष्य यानि हम सभी ऐसे प्राणी हैं जिसमे यह दोनों ही किरदार निवास करते हैं जब कभी भी हमारे अंदर क्रोध , घृणा, द्वेष छल कपट, काम वासना लोभ, किसी का बुरा करने के विचार, किसी का कुछ अनैतिक तरीके से छीनने के विचार, हमारे ऊपर हावी रहते हों में ही होते हैं उस समय हम राक्षस रूप लेकिन जब कभी 9, करुणा दया, किसी की भी पीडा देख उसकी मदद करने बाले எasasசி frr की ढूसरों & खुशी से खुशी होती हो तब हम देवता रूप में होते हैं तो हम किस रूप में ज्यादा जीवन जीते हैं? . स्वयं विचार कीजिए - ShareChat