
Ravinder Bhargava
@422889067
l am Sergeant Ravinder Bhargava Retd. From IAF
यह कहानी है एक जर्मन महिला की नाम था एमिली शेंकल (Emilie Schenkl)। पता नहीं आप में से कितनों ने ये नाम सुना है और अगर नहीं सुना है तो आप दोषी नहीं, इस नाम को इतिहास से खुरच कर निकाल फेंका गया है।
श्रीमती एमिली शेंकल ने 1937 में भारत मां के सबसे लाडले बेटे से विवाह किया और एक ऐसे देश को ससुराल के रूप में चुना जिसने कभी इस बहू का स्वागत नहीं किया। न बहू के आगमन में किसी ने मंगल गीत गाये और न उसकी बेटी के जन्म पर कोई सोहर गायी गयी। कभी कहीं जनमानस में चर्चा तक नहीं हुई के वो कैसे जीवन गुज़ार रही है।
सात साल के कुल वैवाहिक जीवन में सिर्फ 3 साल ही उन्हें अपने पति के साथ रहने का अवसर मिला फिर उन्हें और नन्हीं सी बेटी को छोड़ पति देश के लिए लड़ने चला आया इस वादे के साथ, कि पहले देश को आज़ाद करा लूं फिर तो सारा जीवन तुम्हारे साथ वहां बिताना ही है।
पर ऐसा हुआ नहीं और 1945 में एक कथित विमान दुर्घटना में वो लापता हो गए...!
उस समय एमिली शेंकल बेहद युवा थीं चाहतीं तो यूरोपीय संस्कृति के हिसाब से दूसरा विवाह कर सकतीं थीं, पर उन्होंने ऐसा नहीं किया और सारा जीवन बेहद कड़ा संघर्ष करते हुए बिताया।
एक तारघर की मामूली क्लर्क की नौकरी और बेहद कम वेतन के साथ वो अपनी बेटी को पालतीं रहीं न किसी से शिकायत की न कुछ मांगा।
भारत भी तब तक आज़ाद हो चुका था और वे चाहती थीं कम से कम एक बार उस देश में आएं जिसकी आजादी के लिए उनके पति ने जीवन दिया।
भारत का एक अन्य राजनीतिक परिवार इतना भयभीत था इस एक महिला से, कि जिसे सम्मान सहित यहां बुला देश की नागरिकता देनी चाहिए थी, उसे कभी भारत का वीज़ा तक नहीं दिया गया।
आखिरकार बेहद कठिनाइयों भरा, और किसी भी तरह की चकाचौंध से दूर रह बेहद साधारण जीवन गुज़ार श्रीमती एमिली शेंकल ने मार्च 1996 में गुमनामी में ही जीवन त्याग दिया।
श्रीमती एमिली शेंकल का पूरा नाम था "श्रीमती एमिली शेंकल बोस" जो इस देश के सबसे लोकप्रिय जननेता नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की धर्मपत्नी थीं
Ajai Singh Talk की 2013 मैं लिखी बेहद चर्चित पोस्ट
नोट: यह विवरण उपलब्ध ऐतिहासिक दस्तावेज़ों, शोधकर्ताओं के लेखों और एमिली शेंकल बोस व उनकी पुत्री के साक्षात्कारों पर आधारित है। कुछ बातें आज भी आधिकारिक सरकारी दस्तावेज़ों में पूर्ण रूप से दर्ज नहीं हैं और इतिहासकारों के बीच विचाराधीन हैं।
,,,स्पष्टीकरण: यह लेख प्रमाणित तथ्यों के साथ-साथ उन ऐतिहासिक पहलुओं को भी प्रस्तुत करता है, जिन पर दस्तावेज़ सीमित हैं या जिन पर अलग-अलग मत मौजूद हैं। उद्देश्य किसी निष्कर्ष को थोपना नहीं, बल्कि एक उपेक्षित मानवीय पक्ष को सामने लाना है।
( विदेशी माटी पर जन्मी, पर रूह हिंद की मानी थी,
वो एमिली शेंकल थी, जिसने हर मुश्किल पहचानी थी।
सुभाष के संकल्पों में, जिसने खुद को मौन रखा,
एक हाथ में देश का झंडा, दूजे में अपना प्यार रखा।
दूरी की उस आग में जलकर, प्रेम का फर्ज निभाया था,
बोस के उस महा-बलिदान में, अपना सब कुछ गँवाया था।
इतिहास भले चुप रह जाए, पर युगों-युगों तक गूँजेगा,
वो त्याग जो परदे के पीछे, आजादी के सपने बुनेगा।)
जानकारी अच्छी लगी हो तो पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें,,,
#सुप्रभात #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #🌞सुप्रभात सन्देश #💐फूलों वाली शुभकामनाएं🌹 #🌞 Good Morning🌞
👉एक महिला ने AIIMS बनाया। कांग्रेस ने उनका नाम मिटा दिया।नेहरू ने श्रेय ले लिया।
AIIMS राजकुमारी अमृत कौर ने बनाया।
इतिहास की किताबें लिखती हैं— “नेहरू ने AIIMS बनाया”।
यह पंक्ति इतिहास नहीं, प्रोपेगेंडा है।
Jawaharlal Nehru ने AIIMS नहीं बनाया।
AIIMS Rajkumari Amrit Kaur की वजह से अस्तित्व में आया।
AIIMS इसलिए बना क्योंकि एक महिला ने
ज़मीन दी, पैसा जुटाया, सिस्टम से लड़ी और काम करवा कर दिखाया—
जबकि कांग्रेस देखती रही और बाद में ब्रांडिंग कर गई।
वह ज़मीन, जिसका ज़िक्र कभी नहीं होता
AIIMS दिल्ली, अंसारी नगर की लगभग 190 एकड़ की कीमती ज़मीन पर खड़ा है।
यह ज़मीन:
न सरकार ने खरीद न अधिग्रहित की
यह राजकुमारी अमृत कौर की पारिवारिक संपत्ति थी—
जो उन्होंने दान में दी।
आज के मूल्य पर यह ज़मीन हज़ारों-हज़ार करोड़ रुपये की है।
कांग्रेस ने इस पर एक रुपया भी खर्च नहीं किया।
वह पैसा, जो नेहरू के पास नहीं था
आज़ादी के बाद भारत आर्थिक रूप से टूटा हुआ था।
कांग्रेस के पास न संसाधन थे, न तैयारी—सिर्फ़ नारे थे।
तब अमृत कौर ने:
न्यूज़ीलैंड से विदेशी सहायता जुटाई
अंतरराष्ट्रीय मेडिकल सहयोग लाया
उपकरण, प्रशिक्षण और विशेषज्ञता की व्यवस्था की
अगर कांग्रेस सक्षम होती, तो विदेशी मदद की ज़रूरत ही क्यों पड़ती?
वह क़ानून, जिसे कांग्रेस टालती रही
AIIMS अधिनियम, 1956
नेहरू की तत्परता से नहीं,
अमृत कौर के लगातार दबाव से पास हुआ।
उन्होंने लड़ाई लड़ी:
अफ़सरशाही की सुस्ती से
मंत्रिमंडल की उदासीनता से
कांग्रेस की ढिलाई से
फाइलें चलीं क्योंकि उन्होंने ज़बरदस्ती चलवाईं।
नेहरू ने वास्तव में क्या किया?
पहले से बने काम को मंज़ूरी दी
भाषण दिए
फीते काटे
इसे संस्थान-निर्माण नहीं कहते।
इसे ऑप्टिक्स कहते हैं।
कांग्रेस ने उन्हें क्यों भुला दिया?
क्योंकि यह सच तीन मिथक तोड़ देता है:
कांग्रेस ने भारत बनाया
नेहरू ने संस्थान खड़े किए
सत्ता = योगदान
AIIMS इन सबका उलटा प्रमाण है।
एक शाही महिला ने
अपनी विरासत जनस्वास्थ्य के लिए कुर्बान कर दी।
कांग्रेस ने श्रेय हड़प लिया।
हकीकत
AIIMS राजकुमारी अमृत कौर की विरासत है।
कांग्रेस ने सिर्फ़ नामपट्टिका लगाई।
बलिदान किसी और का।
इश्तिहार कांग्रेस का।
✍🏻 #सुप्रभात #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #🌞सुप्रभात सन्देश #🌞 Good Morning🌞 #💐फूलों वाली शुभकामनाएं🌹
. देश के प्रति गाँधी के अपराध
"""""""""""”"""""""""""""""""""""""""""
👉मन्दिर में कुरान पाठ, लेकिन मस्जिद में गीता नहीं
🎯मुसलमानों के प्रति गाँधी के घोर पक्षपात के कई उदाहरण आप पिछले भागों में पढ़ चुके हैं। ऐसे ही उदाहरण उनके द्वारा लगभग जबर्दस्ती मन्दिरों में कुरान का पाठ करने के हैं, हालांकि वे जीवन में एक बार भी किसी मस्जिद में गीता या रामचरितमानस का पाठ नहीं कर पाये।
वास्तव में वे केवल हिन्दुओं का ही मानसिक और भावनात्मक भयादोहन करते थे और उसका लाभ कटासुरों (मुसलमानों) को पहुँचाते थे।
💥 वे जहाँ भी रहते थे, वहाँ सायंकाल अपनी प्रवचन सभाओं में कई धर्मों की प्रार्थनाओं का पाठ कराया करते थे। उनका मानना था कि ऐसा करने से सभी में धार्मिक एकता पैदा होगी।
उन्होंने मूल ‘राम धुन’ को अपने विचारों के अनुसार विकृत करके उसमें ‘अल्लाह’ शब्द भी घुसेड़ दिया था और उस तथाकथित ‘राम धुन’ को सभी हिन्दुओं से गवाया करते थे, क्योंकि उनकी सभा में एक-दो को छोड़कर प्र्रायः सभी हिन्दू ही होते थे। वे कभी मुसलमानों की किसी सभा में यह ”ईश्वर-अल्ला धुन“ नहीं गवा सके।
🤔कहने की आवश्यकता नहीं कि उनकी इस मूर्खतापूर्ण उदारता का किसी मुसलमान पर कोई सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता था और उनकी धर्मांधता में कोई कमी नहीं आती थी।
इतने पर भी गाँधी अपने हठधर्मीपूर्ण विचारों को बदलने की कोशिश नहीं करते थे। ऐसी ही एक घटना का वर्णन वैद्य गुरुदत्त ने देश के बँटवारे पर लिखी अपनी पुस्तक ‘विश्वासघात’ में किया है, जिसका किसी ने आज तक खंडन नहीं किया है।
⛔️ एक बार वाल्मीकि बस्ती के मंदिर में गाँधी कुरान का पाठ करा रहे थे।
तभी भीड़ में से एक औरत ने उठकर गाँधी को ऐसा करने को मना किया।
गाँधी ने पूछा- ‘क्यों?’
उस औरत ने कहा कि यह हमारे धर्म के विरुद्ध है।
गाँधी ने कहा- ‘मैं तो ऐसा नहीं मानता।’
औरत ने जवाब दिया कि हम आपको धर्म में व्यवस्था देने के योग्य नहीं मानते।
तब गाँधी ने कहा कि इसमें यहाँ उपस्थित लोगों का मत ले लिया जाये।
औरत ने जवाब दिया- ‘क्या धर्म के विषय में वोटों से निर्णय लिया जा सकता है?’
गाँधी बोले कि आप मेरे धर्म में बाधा डाल रही हैं।
औरत ने जवाब दिया कि आप तो करोड़ों हिंदुओं के धर्म में नाजायज दखल दे रहे हैं।
गाँधी बोले- ‘मैं तो कुरान सुनूँगा।’
✊औरत बोली- ‘मैं इसका विरोध करूँगी।’ और तब औरत के पक्ष में सैकड़ों वाल्मीकि युवक खड़े हो गये, और कहने लगे कि मंदिर में कुरान पढ़वाने से पहले किसी मस्जिद में गीता या रामायण का पाठ करके दिखाओ तो जानें।
🧘गाँधी ने इस बात का कोई उत्तर नहीं दिया और विरोध बढ़ते देखकर पुलिस बुला ली। पुलिस आयी और विरोध करने वालों को पकड़ ले गयी, और उनके विरुद्ध दफा 107 का मुकदमा दर्ज करा दिया गया। इसके पश्चात गाँधी ने पुलिस सुरक्षा में उसी मंदिर में कुरान पढ़ी।
यह थी गाँधी की ‘धर्मनिरपेक्षता’,
जिसको मैं शर्मनिरपेक्षता कहता हूँ।
वे बड़ी बेशर्मी से हिन्दुओं का विरोध करते थे और
मुसलमानों का पक्ष लेते थे।
उनका सारा जीवन ऐसी अनेक घटनाओं से भरा पड़ा है। #💐फूलों वाली शुभकामनाएं🌹 #🌞सुप्रभात सन्देश #🌞 Good Morning🌞 #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #सुप्रभात
👉गांधी मुस्लिम समुदाय के समर्थक क्यों थे
प्रो. के एस नारायणाचार्य ने अपने पुस्तक में कुछ संकेत दिए हैं .
#नेहरू और इंदिरा मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखते थे। लेकिन बहुत कम ही लोग गांधीजी की जातिगत जड़ों को जानते हैं..
मोहनदास गांधी करमचंद गांधी की चौथी पत्नी पुतलीबाई के पुत्र थे।
#पुतलीबाई मूल रूप से प्रणामी संप्रदाय की थीं । यह प्रणामी संप्रदाय हिंदू भेष में एक इस्लामिक संगठन है...।
मि. घोष की पुस्तक "द कुरान एंड द काफिर" में भी गांधी की उत्पत्ति का उल्लेख है...।
#मोहनदासगांधी जी के पिता #करमचंद एक मुस्लिम जमींदार के अधीन काम करते थे । एक बार उसने अपने जमींदार के घर से पैसे चुराए और भाग गया । फिर मुस्लिम जमींदार करमचंद की चौथी पत्नी पुतलीबाई को अपने घर ले गया और उसे अपनी पत्नी बना लिया । मोहनदास के जन्म के समय करमचंद गान्धी तीन साल तक छिपे रहे..।
गांधीजी का जन्म और पालन- पोषण गुजराती मुसलमानों के बीच में ही हुआ था।
. कॉलेज (लंदन लॉ कॉलेज) तक की उनकी स्कूली शिक्षा का सारा खर्च उनके मुस्लिम पिता ने ही उठाया !!
दक्षिण अफ्रीका में गांधी की कानूनी प्रक्टिस ओर वकालत करवाने वाले भी मुसलमान थे !!
. लंदन में गांधी अंजुमन-ए- इस्लामिया संस्थान के भागीदार थे...।
इसलिए, यह
आश्चर्यजनक नहीं है कि गांधीजी का झुकाव मुस्लिम समुदाय की तरफ क्यों था
भले ही हिंदुओं को मुसलमानों द्वारा मार दिया जाए, हिंदु चुप रहें उनसे नाराज न हों।
हमें मौत से नहीं डरना चाहिए। आइए हम एक वीर मौत मरें।"
इसका क्या मतलब है?
स्वतंत्रता संग्राम के किसी भी चरण में गांधीजी ने हिंदुत्ववादी रुख नहीं अपनाया । वह मुसलमानों के पक्ष में ही बारंबार बोलते रहे।
जब भगत सिंह और अन्य देशभक्तों को फाँसी दी गई तो गांधीजी ने उन्हें फांसी न देने की याचिका पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया ।
हमें ध्यान देना चाहिए कि ऐनी बेसेंट ने खुद इसकी निंदा की थी...
मोहन दास गांधी के और कुछ स्टैंड ::
#स्वामीश्रद्धानंद के हत्यारे अब्दुल रशीद का बचाव किया...
तुर्की में मुस्लिम खिलाफत आंदोलन का समर्थन किया था । जिससे डा. हेगड़ेवार ने गांधी से नाता तोड़ लिया और आर.एस.एस. की स्थापना की..!
#सरदारवल्लभभाई पटेल के पास पूर्ण बहुमत होने पर भी गांधी ने एक कट्टर मुस्लिम जवाहरलाल खान नेहरू को प्रधानमंत्री बनाया..!!
तत्कालीन 40 करोड़ भारतवासियों को बेवकूफ बनाकर उस मुस्लिम के नाम के पीछे पंडित का तमगा लगाया , ताकि मूर्ख अज्ञानी हिंदुओं को पागल बनाया जा सके...!!
पाकिस्तान विभाजित को 55 करोड़ रुपए देने के लिए अनशन भी किया..!!
हमेशा मुसलमानों का तुष्टीकरण किया ओर हिंदुओं का अपमान किया...॥
हिन्दुओं को भारत में छोटे दर्जे का नागरिक माना...!! जो आज भी उसके गांधीवादी राजनीतिज्ञों द्वारा जारी रखा जा रहा है..
"द कुरान एंड द काफिर" को आप किसी लाइब्रेरी में जाकर अध्ययन कर सकते हैं...॥_
#सुप्रभात #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #🌞 Good Morning🌞 #💐फूलों वाली शुभकामनाएं🌹 #🌞सुप्रभात सन्देश
खोंग्रेस् का इतिहास भगवान का शुक्र है कि उस दौर में सोशल मीडिया नहीं था नहीं तो राहुल गांधी से भी बड़े थे राजीव गांधी।
आज कुछ किस्से मै आपको बताने जा रहा हूं जिसे पढ़कर आप दंग रह जाएंगे कि राजीव गांधी जैसे लोग इतने बड़े देश के प्रधानमंत्री भी थे..?
उनके पास सिर्फ एक ही योग्यता थी कि वो फिरोज गांधी के बेटे थे... उफ्फ माफ करना... वो पंडित नेहरू के नाती (नवासे) थे।
पूरा लेख कमेंट में है अंत तक पढ़िए....
5-7 मिनट लगेगा... पर आज राजीव गांधी के बारे में ऐसी बातें जानेंगे कि जो आपको पहले से पता नहीं होगीं..
राजीव गांधी कोई पढ़ाई लिखाई में अच्छे नहीं थे 5 सितारा दून स्कूल से स्कूलिंग के बाद 1961 में उन्हें इंजियनीरिंग पढ़ने लन्दन के ट्रिनिटी कॉलेज कैब्रिज भेजा गया,
यहीं पर राजीव से एडवीज अंतोनियो अल्बिना माइनो जिन्हें आज हम सोनिया गांधी के नाम से जानते हैं के सम्पर्क में आये,
1965 तक वो प्यार में डूबे रहे निरंतर फेल होते रहे और पास नहीं हो सके जिसके बाद कॉलेज ने राजीव को निकाल दिया,
फिर राजीव ने 1966 में लन्दन स्थित इम्पीरियल कॉलेज में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया, किन्तु वहां भी फेल हुए,
उसी वर्ष राजीव की मां इंदिरा प्रधानमंत्री बनी और राजीव भारत आ गए, 1966 में दिल्ली फ्लाइंग क्लब ज्वाइन किया और प्लेन उड़ाना सीखा...
अब 1970 में प्रधानमंत्री इंदिरा ने जुगाड़ लगवा कर राजीव को सरकारी एयरलाइंस एयर इंडिया में कमर्शियल पायलट के तौर पर नौकरी में लगवा दिया,
1971 में भारत पाक युद्ध हुआ भारतीय सेना व् वायु सेना को लाजिस्टिक स्पोर्ट के लिए पायलट्स की आवश्यकता थी और एयर इंडिया के कमर्शियल पायलट्स को रसद व् हथियार एयर ड्राप करने हेतु बुलाया गया,
सारे के सारे पायलट्स तुरन्त युद्ध क्षेत्र में सेवाएं देने को आ गये सिवाय एक के और वो राजीव गांधी थे
जो डर के मारे सोनिया गांधी संग व् इटली के दूतावास में जा छिपे थे,
1980 में संजय गांधी की मृत्यु के बाद राजीव राजनीती में आये...
1984 में इंदिरा गांधी को उनके अंगरक्षकों ने दोपहर में गोली मार दी, राजीव गांधी ने भावनाओं से ऊपर उठकर शोक संताप में समय लगाने के बजाय उसी दिन शाम को भारत के प्रधानमंत्री की कुर्सी पर अपनी तशरीफ़ रख दी,
और कांग्रेसियों को सिखों का नरसंहार करने का आदेश दे डाला, कांग्रेसियों ने स्कूलों के रजिस्टरों और वोटर लिस्ट निकाल निकाल कर सिखों के घर खोजे और घरों में घुसकर हजारों सिखों को काटा.. 😭
महिलाओं से दुष्कर्म किया.. 😭
कई गर्भवती महिलाओं को जीवित ही जला दिया,
कांग्रेस नेताओं के पेट्रोल पंपों से तेल सप्पलाई किया गया सिखों को उनके बच्चो को उनकी सम्पत्तियों को फूंकने हेतु, सड़क चलते सिखों के गले में टायर डालकर जला दिया गया,
यहाँ तक की राष्ट्रपति जैल सिंह को भी नहीं बख्शा गया और जब वो गाड़ी में थे तो उनपर भी कांग्रेसियों ने हमला किया,
गाड़ी के कांच तोड़ दिए गए,
दिल्ली में कांग्रेसियों का हिंसा का तांडव शुरू हुआ और शीघ्र ही ये देश के कोने कोने में फ़ैल गया
और राजीव गांधी ने देश भर में हजारों निर्दोष सिखों को मौत के घाट उतरवाकर इंदिरा की मृत्यु का बदला लिया,
और बाद में राजीव गांधी ने उसे “बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है” वाला ब्यान देकर उसे न्यायोचित ठहरा दिया,
खैर अगले चुनाव हुए और जनता ने राजीव द्वारा करवाये सिख नरसंहार को महत्व दिए बिना राजीव को इंदिरा की सहानुभूति के नाम पर 411 सीटें देकर असीम शक्ति दे दी..
और राजीव ने निरंकुश होकर उस बहुमत का दुरूपयोग किया,
1985 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा शाहबानो को न्याय देकर मुस्लिम महिलाओं के लिए तीन तलाक से बचने और गुजारे भत्ते का जो मार्ग खोला था उसपर आतातायी राजीव ने अपनी अक्ल पर पड़ा बड़ा वाला भीमकाय पत्थर दे मारा..
और अपुर्व बहुमत का प्रयोग कर मुस्लिम तुष्टिकरण का नया अध्याय लिखा और सुप्रीम कोर्ट का निर्णय पलटकर मुस्लिम महिलाओं को पुनः गुलाम बना दिया
भोपाल गैस कांड हुआ हजारों निर्दोष लोगों के हत्यारे यूनियन कार्बाइड के मालिक वारेन एंडरसन को राजीव ने अमेरिकी सरकार से सौदेबाजी कर सुरक्षित अमरीका भेज दिया,
राजीव में न वैश्विक कूटनीति की समझ थी न सैन्य शक्ति के सदुपयोग की अतः अपनी सिमित विवेक क्षमता से ग्रस्त राजीव गांधी ने श्रीलंका में LTTE से लड़ने भारतीय फोर्सेज जबर्दस्ती भेज दीं
और इंडियन पीस कीपिंग फोर्सेस के 1400 सैनिक मरवाये और 3000 सैनिक घायल करवाये
हलांकि बाद में राजीव को थूककर चाटना पड़ा
और सैनिकों को वापस बुलाना पड़ा,
राजीव को अपनी उस गलती के कारण ही श्रीलंका दौरे पर श्रीलंकाई सैनिक द्वारा हमला किया गया था,
और वो पहले व् एकमात्र प्रधानमंत्री बने जिन्हें विदेशी धरती पर विदेशी सैनिक द्वारा अपमानित होना पडा!
1989 में बोफोर्स का घोटाला खुला
जिसमे पता चला की राजीव गांधी ने सोनिया के “करीबी मित्र” जिसे सोनिया अपने संग इटली से दहेज़ में लायी थी और जो सोनिया राजीव के घर में ही रहता था
उस ओटावियो कवात्रोची के द्वारा बोफोर्स सौदे में राजीव ने दलाली खायी थी,
राजनितिक नौटँकियां करने में भी राजीव किसी से पीछे न थे,
टीवी पर आने वाले रामायण सीरियल में राम का पात्र निभाने वाले अरुण गोविल को लेकर राजनितिक यात्राएं शुरू की
हिंदुओं को मुर्ख बनाकर उन्हें उनकी आस्था द्वारा विवश कर उनका वोट हथियाने हेतु,
1991 में Schweizer Illustrierte नामक स्विस मैगज़ीन ने काले धन वाले उन लोगों के नाम का खुलासा किया जिनका अवैध धन स्विट्ज़रलैंड के बैंकों में जमा था
और उसमें राजीव गांधी का भी नाम था...
मैगज़ीन ने खुलासा किया कि राजीव गांधी के 2.5 बिलियन स्विस फ्रैंक स्विट्ज़रलैंड के बैंक के एक अकाउंट में जमा हैं
1992 में टाइम्स ऑफ़ इंडिया और द हिन्दू ने खबरें छापीं की राजीव गांधी को सोवियत ख़ुफ़िया एजेंसी KGB से निरंतर धन मिलता था,
और रूस ने इस खबर की पुष्टि भी की थी और सफाई में कहा था कि सोवियत विचारधारा के हितों की रक्षा हेतु ये पैसे दिए जाते रहे हैं,
1994 में येवगिनिया अल्बट्स और कैथरीन फिट्ज़पेट्रिक ने KGB प्रमुख विक्टोर चेब्रिकोव के हस्ताक्षर युक्त पत्र प्रस्तुत कर ये खुलासा किया कि राजीव के बाद राजीव के परिवार सोनिया और राहुल को KGB की ओर से धन उपलब्ध करवाया जाता रहा है
और KGB गांधी परिवार से निरन्तर कॉन्टैक्ट में रहती है,
अब यदि आप पूरा आकलन करें तो पाएंगे कि राजीव एक औसत से कम समझदार वो व्यक्ति थे जिसने निर्दोष सिख मरवाये,
भोपाल गैस कांड में हजारों निर्दोषों के हत्यारे को भगाया,
मुस्लिमों महिलाओं का जीवन नर्क बनाया,
रक्षा सौदों में दलाली खायी,
KGB जैसी एजेंसी के वो खुद एजेंट थे और उससे पैसे लेते थे, कूटनीति की समझ नहीं थी
और मूर्खतावश श्रीलंका में 1400 भारतीय सैनिकों की बलि चढ़वाई और देश का नाम कलंकित किया,,
क्या यह क्वात्रोची की दूसरी कोपी है ?
#🌞सुप्रभात सन्देश #💐फूलों वाली शुभकामनाएं🌹 #🌞 Good Morning🌞 #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #सुप्रभात इतिहास से जुड़ी पोस्ट पढ़ने के लिए धन्यवाद
*📢सवा लाख से एक लड़ाऊं, चिड़ियन ते मैं बाज तुड़ाऊं, तबै गुरु गोबिंद सिंह नाम कहाऊं! गुरु गोविंद सिंह की जयंती पर भावपूर्ण नमन्*
*📲महान संत एवं धर्मयोद्धा, साहस #🌞सुप्रभात सन्देश #सुप्रभात #💐फूलों वाली शुभकामनाएं🌹 #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #🌞 Good Morning🌞 और त्याग की प्रतिमूर्ति, खालसा पंथ के संस्थापक, दशमेश पिता गुरु श्री गोबिन्द सिंह जी महाराज के पावन प्रकाश पर्व पर उन्हें कोटि-कोटि नमन*
*🙏अन्याय व अधर्म के विरुद्ध आपका संघर्ष और धर्मरक्षा का संदेश संपूर्ण मानवता को सत्य, निष्ठा एवं निर्भीकता के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है*
कांग्रेस के सबसे बड़े मालिक ऐक्सीडेंटल हिन्दू #🌞 Good Morning🌞 #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #💐फूलों वाली शुभकामनाएं🌹 #सुप्रभात #🌞सुप्रभात सन्देश चचा नेहरू द्वारा किए गए कार्यो की चर्चा करते हैं।
1. सन 1950-51 में नेपाल के राजा त्रिभुवन ने नेपाल को भारत में विलय करने की प्रस्ताव दिया था। चाचा ने इन्कार कर दिया था।
2. 1948 में बलुचिस्तान के नवाब खान ने चाचा को पत्र लिखकर बाकायदा अनुरोध किया था कि बलुचिस्तान को भारत के साथ शामिल करने की कृपा करें। हम भारत के साथ रहना चाहते हैं। चचा ने इन्कार कर दिया।
नतीजा पाकिस्तान ने बंदुक के बल पर बलुचिस्तान को कब्जा कर लिया। सोचिए कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी हमें।
3. सन् 1947 में ओमान देश ने ग्वादर पोर्ट को भारत देश को लेने के लिए ऑफर दिया था। चाचा नेहरू ने यह ऑफर को ठुकरा दिया था। नतीजा पाकिस्तान ने ले लिया, फिर चीन को दे दिया।
4. सन् 1950 में चाचा नेहरू ने कोको आइलैंड को बर्मा को दान में दे दिया। जैसे कि उसके पिता की सम्पत्ति है। बर्मा ने चीन को बेच दिया। नतीजा आज चीन हमारे नौसेना की जासूसी करता है।
5. 1952 में चाचा ने अपने स्वार्थ में 22327 वर्ग किलोमीटर का एरिया वर्मा को दान कर दिया था। इस स्थान का नाम है कावाओ वैली। ये कश्मीर के जैसा ही सुंदर और रमणीक स्थल था। बाद में वर्मा ने चीन को बेच दिया। नतीजा आज चीन वहां से हमारे ऊपर जासूसी करता है।
6. सन् 1962 के चीन के साथ युद्ध में भारत के वायुसेना के प्लान के मुताबिक युद्ध लड़ने के लिए मना कर दिया और आत्मसमर्पण कर दिया और चीन को 14000 वर्ग किलोमीटर का एरिया चीन को सौंप दिया भेंट स्वरूप। इस युद्ध में 3000 से अधिक भारत के जवान शहीद हुए थे।
इसी एरिया को अक्साई चिन कहते हैं। सोचिए इस नेहरू ने हमारे देश को कितना क्षतिग्रस्त किया है।
7. देश की आजादी के तुरंत बाद में अमेरिका के राष्ट्रपति ने चाचा नेहरू को कहा था कि आप न्युक्लियर पावर का देश बनने के लिए प्लांट लगाए पर चाचा ने इन्कार कर दिया।
8. भारत को UN सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनने के अवसर मिले लेकिन चचा ने इन्कार कर दिया और चीन को सदस्य बनाया। कितनी बड़ी क्षति हुई है अंदाजा लगाइए।
इसने केवल भारत को क्षतिग्रस्त ही किया है। ये हमारा प्रधानमंत्री था या पाकिस्तान का एक बार सोचिये और यह भी सोचिये की सोशल मीडिया पर बैठे जितने भी देश की चिंता में मोदी जी को भला बुरा कहता है वे कभी भी इस पर चर्चा नही करेगा...
"राष्ट्रहित सर्वोपरि" 💪💪
जय श्री राम 🙏
हर हर महादेव 🔱🙏🚩
दीयों के संग आए खुशियों के रंग,
फूलों की बनाएं रंगोली,
समृद्धि से भरा रहे आपका घर आंगन।
Happy Choti Diwali 2025 #🌞सुप्रभात सन्देश #सुप्रभात #💐फूलों वाली शुभकामनाएं🌹 #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #🌞 Good Morning🌞
खामोश रसोई -
अमेरिका से भारत के लिए एक सांस्कृतिक चेतावनी।
1. जब रसोई खामोश हो जाती है, तो परिवार बिखरने लगता है
• क्या आपने कभी सोचा था कि एक शांत रसोई किसी देश का भविष्य बदल सकती है?
* यह अमेरिका में हुआ था - और अगर हम समय रहते सबक नहीं सीखते हैं तो यह भारत में भी हो सकता है।
2. 1970 के दशक में अमेरिका कैसा दिखता था:
• दादा-दादी, माता-पिता और बच्चे एक साथ रहते थे।
• हर शाम, परिवार खाने की मेज पर घर का बना खाना खाते थे।
• भोजन केवल पोषण नहीं था - यह बंधन और साझा मूल्यों का स्रोत था।
3. 1980 के दशक के बाद: सांस्कृतिक बदलाव
• फास्ट फूड, टेकअवे और रेस्टोरेंट संस्कृति के उदय ने घर के बने खाने की जगह ले ली।
• माता-पिता काम में बहुत व्यस्त हो गए; बच्चे पिज्जा, बर्गर और प्रोसेस्ड फ़ूड की ओर मुड़ गए।
• दादा-दादी की आवाज़ें धीमी पड़ गईं, पारिवारिक बंधन कमज़ोर पड़ गए।
4. चेतावनियों की अनदेखी, दर्दनाक नतीजे
• विशेषज्ञों ने चेतावनी दी थी: "अगर आप अपनी रसोई निगमों को और परिवार की देखभाल सरकारों को सौंप देंगे, तो परिवार बिखर जाएँगे।"
किसी ने नहीं सुना—और भविष्यवाणियाँ सच साबित हुईं।
5. अमेरिका में पारंपरिक पारिवारिक जीवन का पतन
* 1971 में, 71% अमेरिकी घरों में पारंपरिक परिवार (माता-पिता और बच्चे) थे।
• आज, यह संख्या केवल 20% है।
• क्या बचा है?
वृद्धाश्रमों में बुज़ुर्ग, किराए के फ्लैटों में अकेले युवा, टूटती शादियाँ, अकेलेपन से जूझते बच्चे
6. अमेरिका में तलाक की दरें:
• पहली शादी के लिए 50%
• दूसरी शादी के लिए 67%
• तीसरी शादी के लिए 74%
7. यह सिर्फ़ एक संयोग नहीं है - यह एक शांत रसोई की कीमत है
• घर का बना खाना कैलोरी से कहीं ज़्यादा होता है:
० माँ का स्पर्श
o दादाजी की बुद्धिमत्ता
o दादी माँ की कहानियाँ और साथ में खाने का जादू
• लेकिन अब, खाना स्विगी और ज़ोमैटो से आता है।
• रसोई खत्म हो जाती है, और घर सिर्फ़ एक घर बन जाता है—परिवार नहीं।
8. स्वास्थ्य पर बुरा असर: एक बढ़ता संकट
* अमेरिका में फ़ास्ट फ़ूड की लत के कारण:
मोटापा, मधुमेह, हृदय रोग
• स्वास्थ्य उद्योग इस रोके जा सकने वाली गिरावट पर फलता-फूलता है।
9. लेकिन अभी भी देर नहीं हुई है—हम अपनी रसोई को फिर से जीवंत कर सकते हैं
• जापान में आज भी लोग साथ मिलकर खाना बनाते और खाते हैं—और वे सबसे लंबे समय तक जीवित रहते हैं।
• भूमध्यसागरीय संस्कृतियों में, भोजन पवित्र है—और रिश्ते भी।
10. भारत की चेतावनी: रसोई को खत्म न होने दें
• बाहर के खाने पर बढ़ती निर्भरता
• परिवार के साथ खाने का समय कम होता जा रहा है
• बढ़ता अकेलापन और स्वास्थ्य संबंधी विकार
आज आप क्या कर सकते हैं • अपने रसोई के चूल्हे को फिर से जलाएँ।
• खाना पकाएँ।
• अपने परिवार को खाने की मेज पर बुलाएँ।
* क्योंकि बेडरूम घर बनाते हैं, लेकिन रसोई परिवार बनाती है।
अंतिम विचार:
“क्या आप घर बनाना चाहते हैं—या लॉज चलाना चाहते हैं? चुनाव आपका है।” #🌞 Good Morning🌞 #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #💐फूलों वाली शुभकामनाएं🌹 #सुप्रभात #🌞सुप्रभात सन्देश








![🌞सुप्रभात सन्देश - ]|8 (ು धर्मयोद्धा , साहस और त्याग की प्रतिमूर्ति महान खालसा पंथ के संस्थापक, दशमेश पिता गोबिन्द सिंहजी महाराज गुरु श्री' के पावन प्रकाश पर्व पर उन्हें कोटि-्कोटि नमन ]|8 (ು धर्मयोद्धा , साहस और त्याग की प्रतिमूर्ति महान खालसा पंथ के संस्थापक, दशमेश पिता गोबिन्द सिंहजी महाराज गुरु श्री' के पावन प्रकाश पर्व पर उन्हें कोटि-्कोटि नमन - ShareChat 🌞सुप्रभात सन्देश - ]|8 (ು धर्मयोद्धा , साहस और त्याग की प्रतिमूर्ति महान खालसा पंथ के संस्थापक, दशमेश पिता गोबिन्द सिंहजी महाराज गुरु श्री' के पावन प्रकाश पर्व पर उन्हें कोटि-्कोटि नमन ]|8 (ು धर्मयोद्धा , साहस और त्याग की प्रतिमूर्ति महान खालसा पंथ के संस्थापक, दशमेश पिता गोबिन्द सिंहजी महाराज गुरु श्री' के पावन प्रकाश पर्व पर उन्हें कोटि-्कोटि नमन - ShareChat](https://cdn4.sharechat.com/bd5223f_s1w/compressed_gm_40_img_123983_3417fdcf_1766820122068_sc.jpg?tenant=sc&referrer=user-profile-service%2FrequestType50&f=068_sc.jpg)


