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#🙏हनुमान जयंती की शुभकामनाएं🚩 #🙏🌺जय बजरंगबली🌺🙏
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#👍All The Best #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
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#🛕मंदिर दर्शन🙏
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#🙏🏻गुरबानी #👍All The Best
🙏🏻गुरबानी - प्राचीन भारत की हैरान करने वाली तकनीक विज्ञान भी आज तक नहीं सुलझा पाया इन निर्माणों का रहस्य! आधुनिक  निर्माण खासियत जो विज्ञान को अजूबा स्मारक II हैरान करती है काल खुले आसमान के नीचे रहने के दिल्ली का दिल्ली बॉवजूद आज तक इसमें जंग 1600+ যাল लौह स्तंभ (Rust) नहीं लगा है। ही विशाल पहाड़ को ऊपर से 0 एलोरा कैलाश मंदिर 8वीं सदी নীব (Top-down) কী নক্ষে (HERRIE) कटकर बनाया गया। इन पत्थर के खंभों को थपथपाने fಷಗೆಷ೯ মম্পী १५वीं सदी पर संगीत के सातों सुर (सारेगामा ) (कर्नाटक) के खंभे निकलते हैं। ७० खंभों में से 1 खंभा हवा में लेपाक्षी मंदिर आंध प्रदेश १६वीं सदी fege झूलता है, जो जमीन को का खंभा नहीं छूता।  पत्थर के पहियों पर पड़ने वाली कोणार्क मंदिर १३वीं सदी ओडिशा परछाई से आज भी समय ( मिनटों की सूर्यघड़ी तक) का सटीक पता चलता है। ८० टन का सिंगल ग्रेनाइट पत्थर बृहदेश्वर मंदिर तंजावुर ११वीं सदी २१६ फीट ऊंचे शिखर पर बिना किसी (तमिलनाडु) का शिखर क्रेन के कैसे रखा गया? मुख्य द्वार पर ताली बजाने पर आवाज गोलकंडा किले की हैदराबाद १६वीं सदी १ किलोमीटर दूर पहाड़ी के सबसे ध्वनि तकनीक सुनाई देती है। ऊपरी महल तक सा़फ १२ खंभे १२ राशियों को दर्शाते हैं, सूर्य शृंगेरी विद्याशंकर मंदिर १४वीं सदी की किरणें हर महीने सटीक उसी के खंभे (ಹಗಣ) खंभे पर पड़ती हैं। पानी और हवा के प्रवाह (Water आमेर किले का जयपुर १६वीं सदी channels) का ऐसा डिज़ाइन जो भयंकर ॰एयर कंडीशनिंग ' (राजस्थान) गर्मी में भी महल को ठंडा रखता था। बिना चूने या सीमेंट के इंटरलॉकिंग' मोढेरा सूर्य मंदिर ११वीं सदी तकनीके से बना पूरी तरह भूकंपरोधी गुजरात (Earthquake-proof) নিমণি] ಊronin' RHune यिन्ातन वमरतित नानागत सआपक प्राचीन भारत की हैरान करने वाली तकनीक विज्ञान भी आज तक नहीं सुलझा पाया इन निर्माणों का रहस्य! आधुनिक  निर्माण खासियत जो विज्ञान को अजूबा स्मारक II हैरान करती है काल खुले आसमान के नीचे रहने के दिल्ली का दिल्ली बॉवजूद आज तक इसमें जंग 1600+ যাল लौह स्तंभ (Rust) नहीं लगा है। ही विशाल पहाड़ को ऊपर से 0 एलोरा कैलाश मंदिर 8वीं सदी নীব (Top-down) কী নক্ষে (HERRIE) कटकर बनाया गया। इन पत्थर के खंभों को थपथपाने fಷಗೆಷ೯ মম্পী १५वीं सदी पर संगीत के सातों सुर (सारेगामा ) (कर्नाटक) के खंभे निकलते हैं। ७० खंभों में से 1 खंभा हवा में लेपाक्षी मंदिर आंध प्रदेश १६वीं सदी fege झूलता है, जो जमीन को का खंभा नहीं छूता।  पत्थर के पहियों पर पड़ने वाली कोणार्क मंदिर १३वीं सदी ओडिशा परछाई से आज भी समय ( मिनटों की सूर्यघड़ी तक) का सटीक पता चलता है। ८० टन का सिंगल ग्रेनाइट पत्थर बृहदेश्वर मंदिर तंजावुर ११वीं सदी २१६ फीट ऊंचे शिखर पर बिना किसी (तमिलनाडु) का शिखर क्रेन के कैसे रखा गया? मुख्य द्वार पर ताली बजाने पर आवाज गोलकंडा किले की हैदराबाद १६वीं सदी १ किलोमीटर दूर पहाड़ी के सबसे ध्वनि तकनीक सुनाई देती है। ऊपरी महल तक सा़फ १२ खंभे १२ राशियों को दर्शाते हैं, सूर्य शृंगेरी विद्याशंकर मंदिर १४वीं सदी की किरणें हर महीने सटीक उसी के खंभे (ಹಗಣ) खंभे पर पड़ती हैं। पानी और हवा के प्रवाह (Water आमेर किले का जयपुर १६वीं सदी channels) का ऐसा डिज़ाइन जो भयंकर ॰एयर कंडीशनिंग ' (राजस्थान) गर्मी में भी महल को ठंडा रखता था। बिना चूने या सीमेंट के इंटरलॉकिंग' मोढेरा सूर्य मंदिर ११वीं सदी तकनीके से बना पूरी तरह भूकंपरोधी गुजरात (Earthquake-proof) নিমণি] ಊronin' RHune यिन्ातन वमरतित नानागत सआपक - ShareChat
#🙏🏻गुरबानी
🙏🏻गुरबानी - २३ -सीतारामचन्द्रविवाहे गातमः স্সান্বাডযঃ & १७  द्रौपद्यर्जुन   विवाहे ब्यासः त्रचाप्यः १= भानुमतीभोजराजविवाहे , वररुचि श्रा॰ 8 ಗ श्राचार्याः २= कलियुगे सर्वे ब्राह्मणा 9 २३ -सीतारामचन्द्रविवाहे गातमः স্সান্বাডযঃ & १७  द्रौपद्यर्जुन   विवाहे ब्यासः त्रचाप्यः १= भानुमतीभोजराजविवाहे , वररुचि श्रा॰ 8 ಗ श्राचार्याः २= कलियुगे सर्वे ब्राह्मणा 9 - ShareChat
#🙏🏻गुरबानी
🙏🏻गुरबानी - मेदे | वर ल१९ २९ दोनें { बार वर के हाथ स्थापायित्वा घाचार्यान् भूमो अथ द्वादश घायज एरे घोर पें पृ४्घी १२ जगह फिर ६ाघा नीचे लिचे ক্ষম ম पह यत्प्र पढ़ता षावे  १-(प्रथमे) गौरीश्वरविवाहे ब्रह्मा श्रचाय्य २ सावित्री ब्रह्मा विवाहे वृहस्पतिः आचार्य्य ३ लद्मीविष्लुविवाहे   गणपतिः श्राचाय्य ४= वन्हिकाश्यपविवाहे पाराशरः श्राचाय्य ५छायाम्तूर्य बिवाहे   गर्गमुनिः ٥٩١ ६  रेपुकायमदग्निविवाहे वशिष्ठः त्चारय्य ७ मन्दोदरीरावणविवाहे वशिष्ठः त्राचाय्यः ८- रोहिणीचन्द्रविवाहे द्रोणचार्य्य याचार्य्यः मेदे | वर ल१९ २९ दोनें { बार वर के हाथ स्थापायित्वा घाचार्यान् भूमो अथ द्वादश घायज एरे घोर पें पृ४्घी १२ जगह फिर ६ाघा नीचे लिचे ক্ষম ম पह यत्प्र पढ़ता षावे  १-(प्रथमे) गौरीश्वरविवाहे ब्रह्मा श्रचाय्य २ सावित्री ब्रह्मा विवाहे वृहस्पतिः आचार्य्य ३ लद्मीविष्लुविवाहे   गणपतिः श्राचाय्य ४= वन्हिकाश्यपविवाहे पाराशरः श्राचाय्य ५छायाम्तूर्य बिवाहे   गर्गमुनिः ٥٩١ ६  रेपुकायमदग्निविवाहे वशिष्ठः त्चारय्य ७ मन्दोदरीरावणविवाहे वशिष्ठः त्राचाय्यः ८- रोहिणीचन्द्रविवाहे द्रोणचार्य्य याचार्य्यः - ShareChat