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#🎤सिंगिंग ADDA😎 #😍स्टेटस की दुनिया🌍 #😃 शानदार स्टेटस #🤟 सुपर स्टेटस
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00:29
#😃 शानदार स्टेटस #🤟 सुपर स्टेटस #🎤सिंगिंग ADDA😎 #😍स्टेटस की दुनिया🌍
😃 शानदार स्टेटस - ShareChat
00:15
#🤟 सुपर स्टेटस #😍स्टेटस की दुनिया🌍 #😃 शानदार स्टेटस #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #👀रोमांचक कहानियाँ 🕵️‍♂️
🤟 सुपर स्टेटस - कल्लू क मन म सदह अर ।जजञ।स। उत्पa हुइ अर वह स्वय यह देखने मंदिर पहुँचा। कल्लू ने देखा कि तेनालीराम भैरवनाथ की प्रतिमा के सामने बैठकर प्रार्थना कर रहे हैं - "हे भैरवनाथ! मुझे ऐसी शक्ति दो कि मेरी एक ही पटकनी में विरोधी के प्राण निकल जाएँ।" उसी समय प्रतिमा के पीछे से भारी आवाज आई तेनालीराम! चिंता मत करो। मेरी कृपा से तुम अब अजेय एक वार में कोई भी मर जाएगा। " గTI 35R कल्लू यह सब सुनते ही डर गया। उसे लगा कि तेनालीराम अब अलौकिक शक्ति से युक्त हो चुके हैं। भय के कारण वह मलयुद्ध से एक दिन पहले ही विजयनगर छोड़कर भाग गया। अगले दिन जब तेनालीराम अखाड़े में पहुँचे तो कल्लू का कोई अता-्पता नहीं था। काफी इंतजार के बाद उसे विजेता घोषित कर दिया गया। विजय का यह समाचार सुनकर राजा अत्यंत खुश हुए। बाद में उन्होंने तेनालीराम से पूछा, सब तुमने कैसे किया? " "तेनालीराम! यह तेनालीराम मुस्कुराए और बोले , " महाराज, मैंने बस उसके डर प्रतिमा के पीछे मैंने अपने एक विश्वसनीय का लाभ उठाया व्यक्ति को छिपा दिया था। वही मेरी बातों का जवाब दे रहा था। कल्लू ने इसे सच मान लिया और डर के कारण भाग নিব্ধলা|'  बुद्धिमानी की भूरी-भूरी प्रशंसा की राजा ने तेनालीराम की और उन्हें धन, सम्मान और उपाधि देकर पुरस्कृत किया। कल्लू क मन म सदह अर ।जजञ।स। उत्पa हुइ अर वह स्वय यह देखने मंदिर पहुँचा। कल्लू ने देखा कि तेनालीराम भैरवनाथ की प्रतिमा के सामने बैठकर प्रार्थना कर रहे हैं - "हे भैरवनाथ! मुझे ऐसी शक्ति दो कि मेरी एक ही पटकनी में विरोधी के प्राण निकल जाएँ।" उसी समय प्रतिमा के पीछे से भारी आवाज आई तेनालीराम! चिंता मत करो। मेरी कृपा से तुम अब अजेय एक वार में कोई भी मर जाएगा। " గTI 35R कल्लू यह सब सुनते ही डर गया। उसे लगा कि तेनालीराम अब अलौकिक शक्ति से युक्त हो चुके हैं। भय के कारण वह मलयुद्ध से एक दिन पहले ही विजयनगर छोड़कर भाग गया। अगले दिन जब तेनालीराम अखाड़े में पहुँचे तो कल्लू का कोई अता-्पता नहीं था। काफी इंतजार के बाद उसे विजेता घोषित कर दिया गया। विजय का यह समाचार सुनकर राजा अत्यंत खुश हुए। बाद में उन्होंने तेनालीराम से पूछा, सब तुमने कैसे किया? " "तेनालीराम! यह तेनालीराम मुस्कुराए और बोले , " महाराज, मैंने बस उसके डर प्रतिमा के पीछे मैंने अपने एक विश्वसनीय का लाभ उठाया व्यक्ति को छिपा दिया था। वही मेरी बातों का जवाब दे रहा था। कल्लू ने इसे सच मान लिया और डर के कारण भाग নিব্ধলা|'  बुद्धिमानी की भूरी-भूरी प्रशंसा की राजा ने तेनालीराम की और उन्हें धन, सम्मान और उपाधि देकर पुरस्कृत किया। - ShareChat
#👀रोमांचक कहानियाँ 🕵️‍♂️ #😃 शानदार स्टेटस #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #🤟 सुपर स्टेटस #😍स्टेटस की दुनिया🌍
👀रोमांचक कहानियाँ 🕵️‍♂️ - तभी सभा में बैठे तेनालीराम उठ खड़े हुए। वे राजा के प्रिय, बुद्धिमान और चतुर मंत्री थे। उन्होंने कहा, "महाराज! हो तो मैं कल्लू पहलवान से मलयुद्ध यदि आपकी अनुमति करूँगा। " यह सुनकर सभा में ठहाका गूँज उठा [ राजा भी मुस्कुराए और बोले, " तेनालीराम! क्या उस राक्षस जैसे तुमने कल्लू को देखा है? क्या तुम उससे लड़ सकोगे?" तेनालीराम गंभीर स्वर में बोले, " महाराज, मैं अपनी जान की किए बिना विजयनगर की प्रतिष्ठा की रक्षा करूँगा। " परवाह राजा उनकी निष्ठा से प्रसन्न हुए और प्रदान कर दी। अनुमति अगले ही दिन घोषणा कर दी गई कि तेनालीराम और कल्लू के बीच मलयुद्ध होगा। तेनालीराम इस घोषणा के बाद रोज़ शहर के बाहर स्थित भैरवनाथ मंदिर जाने लगे और वहाँ तंत्र-साधना जैसा अभिनय करने लगे। यह खबर सुनकर में संदेह और जिज्ञासा उत्पन्न हुई और वह स्वयं कल्लू के मन यह देखने मंदिर पहुँचा। कल्लू ने देखा कि तेनालीराम भैरवनाथ की प्रतिमा के सामने बैठकर प्रार्थना कर रहे हैं ~ "हे भैरवनाथ! मुझे ऐसी शक्ति दो कि मेरी एक ही पटकनी में विरोधी के प्राण निकल जाएँ। " उसी समय प्रतिमा के पीछे से भारी आवाज आई तेनालीराम! चिंता मत करो। मेरी कृपा से तुम अब अजेय हो। तुम्हारे एक वार में कोई भी मर जाएगा। " कल्लू यह सब सुनते ही डर गया। उसे लगा कि तेनालीराम  अब अलौकिक शक्ति से युक्त हो चुके हैं। भय के कारण वह मलयुद्ध से एक दिन पहले ही विजयनगर छोड़कर भाग गया। तभी सभा में बैठे तेनालीराम उठ खड़े हुए। वे राजा के प्रिय, बुद्धिमान और चतुर मंत्री थे। उन्होंने कहा, "महाराज! हो तो मैं कल्लू पहलवान से मलयुद्ध यदि आपकी अनुमति करूँगा। " यह सुनकर सभा में ठहाका गूँज उठा [ राजा भी मुस्कुराए और बोले, " तेनालीराम! क्या उस राक्षस जैसे तुमने कल्लू को देखा है? क्या तुम उससे लड़ सकोगे?" तेनालीराम गंभीर स्वर में बोले, " महाराज, मैं अपनी जान की किए बिना विजयनगर की प्रतिष्ठा की रक्षा करूँगा। " परवाह राजा उनकी निष्ठा से प्रसन्न हुए और प्रदान कर दी। अनुमति अगले ही दिन घोषणा कर दी गई कि तेनालीराम और कल्लू के बीच मलयुद्ध होगा। तेनालीराम इस घोषणा के बाद रोज़ शहर के बाहर स्थित भैरवनाथ मंदिर जाने लगे और वहाँ तंत्र-साधना जैसा अभिनय करने लगे। यह खबर सुनकर में संदेह और जिज्ञासा उत्पन्न हुई और वह स्वयं कल्लू के मन यह देखने मंदिर पहुँचा। कल्लू ने देखा कि तेनालीराम भैरवनाथ की प्रतिमा के सामने बैठकर प्रार्थना कर रहे हैं ~ "हे भैरवनाथ! मुझे ऐसी शक्ति दो कि मेरी एक ही पटकनी में विरोधी के प्राण निकल जाएँ। " उसी समय प्रतिमा के पीछे से भारी आवाज आई तेनालीराम! चिंता मत करो। मेरी कृपा से तुम अब अजेय हो। तुम्हारे एक वार में कोई भी मर जाएगा। " कल्लू यह सब सुनते ही डर गया। उसे लगा कि तेनालीराम  अब अलौकिक शक्ति से युक्त हो चुके हैं। भय के कारण वह मलयुद्ध से एक दिन पहले ही विजयनगर छोड़कर भाग गया। - ShareChat
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😍स्टेटस की दुनिया🌍 - अपने राज्य में तो कोई उसके सामने टिक ही नहीं पाता था। इसलिए कल्लू को अपनी शक्ति पर इतना अभिमान हो गया कि वह सोचने लगा कि पूरे दक्षिण भारत में उसके जैसा  कोई नहीं| उसने विजयनगर साम्राज्य की गौरवशाली प्रतिष्ठा के बारे में सुन रखा  था और मन में चाह रखता था कि वहाँ जाकर वह अपनी शक्ति का लोहा मनवाए। इसी दंभ में वह विजयनगर पहुँच गया और वहाँ के नागरिकों को खुलेआम मलयुद्ध की चुनौती देने लगा।  लेकिन विजयनगर के लोग शांत स्वभाव के थे। कोई भी कल्लू के सामने आने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। धीरे-धीरे मामला इतना बढ गया कि के मुख्य कल्लू शहर किले के द्वार पर जाकर खडा हो गया और गर्व से चिल्लाता हुआ सबको लडने के लिए ललकारने लगा। यह बात अंततः कृष्णदेव राय तक पहुँची। राजा राजा ने मंत्री और सेनापतियों की सभा और पूछा, SHIS "क्या हमारे राज्य में कोई ऐसा पहलवान नहीं जो इस घमंडी कल्लू को परास्त कर सके? " पर सभी मौन रहे। किसी के पास कोई समाधान नहीं था। राजा ने गंभीर होकर कहा, हमारे पास दो ही विकल्प बचते हैं - या तो हम उसके दुस्साहस के लिए उसे दंड दें , या फिर उसे सम्मान देकर स्वीकार करें कि हमारे राज्य में उसके समान कोई पहलवान नहीं। लेकिन दोनों ही स्थितियों में विजयनगर की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचेगी। " तभी सभा में बैठे तेनालीराम उठ खड़े हुए। वे राजा के प्रिय , बुद्धिमान और चतुर मंत्री थे। उन्होंने कहा, " महाराज! हो तो मैं कल्लू पहलवान से मलयुद्ध यदि आपकी अनुमति में ठहाका गूँज उठा। राजा भी करूँगा । " यह सुनकर सभा मुस्कुराए और बोले , " तेनालीराम! क्या तुमने उस राक्षस जैसे अपने राज्य में तो कोई उसके सामने टिक ही नहीं पाता था। इसलिए कल्लू को अपनी शक्ति पर इतना अभिमान हो गया कि वह सोचने लगा कि पूरे दक्षिण भारत में उसके जैसा  कोई नहीं| उसने विजयनगर साम्राज्य की गौरवशाली प्रतिष्ठा के बारे में सुन रखा  था और मन में चाह रखता था कि वहाँ जाकर वह अपनी शक्ति का लोहा मनवाए। इसी दंभ में वह विजयनगर पहुँच गया और वहाँ के नागरिकों को खुलेआम मलयुद्ध की चुनौती देने लगा।  लेकिन विजयनगर के लोग शांत स्वभाव के थे। कोई भी कल्लू के सामने आने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। धीरे-धीरे मामला इतना बढ गया कि के मुख्य कल्लू शहर किले के द्वार पर जाकर खडा हो गया और गर्व से चिल्लाता हुआ सबको लडने के लिए ललकारने लगा। यह बात अंततः कृष्णदेव राय तक पहुँची। राजा राजा ने मंत्री और सेनापतियों की सभा और पूछा, SHIS "क्या हमारे राज्य में कोई ऐसा पहलवान नहीं जो इस घमंडी कल्लू को परास्त कर सके? " पर सभी मौन रहे। किसी के पास कोई समाधान नहीं था। राजा ने गंभीर होकर कहा, हमारे पास दो ही विकल्प बचते हैं - या तो हम उसके दुस्साहस के लिए उसे दंड दें , या फिर उसे सम्मान देकर स्वीकार करें कि हमारे राज्य में उसके समान कोई पहलवान नहीं। लेकिन दोनों ही स्थितियों में विजयनगर की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचेगी। " तभी सभा में बैठे तेनालीराम उठ खड़े हुए। वे राजा के प्रिय , बुद्धिमान और चतुर मंत्री थे। उन्होंने कहा, " महाराज! हो तो मैं कल्लू पहलवान से मलयुद्ध यदि आपकी अनुमति में ठहाका गूँज उठा। राजा भी करूँगा । " यह सुनकर सभा मुस्कुराए और बोले , " तेनालीराम! क्या तुमने उस राक्षस जैसे - ShareChat
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👀रोमांचक कहानियाँ 🕵️‍♂️ - *तेनालीराम की चतुराई बनाम कल्लू पहलवान की ताकत!* विजयनगर साम्राज्य के पास एक छोटा-सा राज्य था, जहाँ कल्लू नाम प्रसिद्ध पहलवान रहता का एक था। उसका नाम और शरीर - दोनों बेहद प्रभावशाली थे। उसका कद करीब सात फीट, शरीर जैसा কাথী बिल्कुल भारी-भरकम और रंग কালা | अच्छे-अच्छे पहलवान कल्लू का नाम सुनकर ही काँप उठते थे, क्योंकि उसकी एक ही पछाड़ विरोधी की [ काफी होती पसलियाँ तोड़ देने के थी। धीरे-धीरे उसकी ताकत ही उसका घमंड बन थी। चुकी *तेनालीराम की चतुराई बनाम कल्लू पहलवान की ताकत!* विजयनगर साम्राज्य के पास एक छोटा-सा राज्य था, जहाँ कल्लू नाम प्रसिद्ध पहलवान रहता का एक था। उसका नाम और शरीर - दोनों बेहद प्रभावशाली थे। उसका कद करीब सात फीट, शरीर जैसा কাথী बिल्कुल भारी-भरकम और रंग কালা | अच्छे-अच्छे पहलवान कल्लू का नाम सुनकर ही काँप उठते थे, क्योंकि उसकी एक ही पछाड़ विरोधी की [ काफी होती पसलियाँ तोड़ देने के थी। धीरे-धीरे उसकी ताकत ही उसका घमंड बन थी। चुकी - ShareChat
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