Ashok Anand
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#👉 लोगों के लिए सीख👈 #❤️जीवन की सीख #🙏 प्रेरणादायक विचार #☝अनमोल ज्ञान #🙏गणपति बप्पा मोरया💥
👉 लोगों के लिए सीख👈 - लेसन्स फ्रॉम ग्रेट थिंकर्स 3নমং নিনা কানিলিযন किसी काम की नहीं है अनजानी राहों पर केवल वीर पुरुष ही आगे  नेपोलियन बोनापार्ट बढ़ा करते हैं कायर तो परिचित राह पर ही तलवार चलाते हैं अवसर के बिना काबिलियत किसी काम की नहों है। 59I शेर द्वारा संचालित भेड़ों की सेना , संचालित शेरों की सेना से हमेशा जीतेगी | लीडर से भरपूर उम्मीद की जाती है। वह एक उम्मीद का व्यापारी होता है। किसो भी इंसान को अपनी साख बनाए रखने के लिए हर दस साल में अपनी रणनीति बदल लेनी चाहिए। नम॰ १५ अगस्त १७६९ निधन 5 मई १८२१ एक तस्वीर हजार शब्दों के बराबर होती है। एक सच्चा आदमी कभी किसी से नफरत फ्रांस में नई विधि नहीं कर सकता | संहिता लागू की, शरीर का सबसे अच्छा इलाज है शांत मन। जिसे नेपोलियन वोजो प्रशंसा करना जानता है, अपमानित करना की संहिता कहा भी जानता है। है। इतिहास जाता किसी कार्य को खूबसूरती से करने के लिए के महान विजेताओं मनुष्य को उसे स्वयं करना चाहिए। असंभव शब्द केवल मूर्खों के शब्दकोश में ही में से एक थे। पाया जाता है। लेसन्स फ्रॉम ग्रेट थिंकर्स 3নমং নিনা কানিলিযন किसी काम की नहीं है अनजानी राहों पर केवल वीर पुरुष ही आगे  नेपोलियन बोनापार्ट बढ़ा करते हैं कायर तो परिचित राह पर ही तलवार चलाते हैं अवसर के बिना काबिलियत किसी काम की नहों है। 59I शेर द्वारा संचालित भेड़ों की सेना , संचालित शेरों की सेना से हमेशा जीतेगी | लीडर से भरपूर उम्मीद की जाती है। वह एक उम्मीद का व्यापारी होता है। किसो भी इंसान को अपनी साख बनाए रखने के लिए हर दस साल में अपनी रणनीति बदल लेनी चाहिए। नम॰ १५ अगस्त १७६९ निधन 5 मई १८२१ एक तस्वीर हजार शब्दों के बराबर होती है। एक सच्चा आदमी कभी किसी से नफरत फ्रांस में नई विधि नहीं कर सकता | संहिता लागू की, शरीर का सबसे अच्छा इलाज है शांत मन। जिसे नेपोलियन वोजो प्रशंसा करना जानता है, अपमानित करना की संहिता कहा भी जानता है। है। इतिहास जाता किसी कार्य को खूबसूरती से करने के लिए के महान विजेताओं मनुष्य को उसे स्वयं करना चाहिए। असंभव शब्द केवल मूर्खों के शब्दकोश में ही में से एक थे। पाया जाता है। - ShareChat
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❤️जीवन की सीख - da भास्कर कुछ भी लिखने से पहले श्री  गणेशाय नमः ' क्यों लिखते हैं ? लेखन एक सृजनात्मक कार्य है, श्वी गणशाटनमः  [ यानी हम अपने लेखन से नई कविता, कहानी या अन्य रचनाएं करते हैं। सृजन की शुरुआत गणेश जी का ध्यान करते हुए करने से हमारी रचनात्मकता निखरती है। गणपति लेखन विद्या के धनी हैं। वेदव्यास की प्रार्थना पर गणपति ने महाभारत ग्रंथ लिखा था। व्याकरण में ` गण' शब्द आता है। अक्षरों को भी ` गण' कहा जाता है और गणपति इन गणों यानी अक्षरों के भी स्वामी हैं। जब हम अक्षरों से जुड़ा कोई काम करते हैं, तो उनके स्वामी भगवान गणेश का ध्यान करते हैं। ऐसा करने के पीछे यह भाव होता है कि गणेश जी हमारे लेखन को रचनात्मक बनाएं और हमारे लेख में कोई गलती न हो। da भास्कर कुछ भी लिखने से पहले श्री  गणेशाय नमः ' क्यों लिखते हैं ? लेखन एक सृजनात्मक कार्य है, श्वी गणशाटनमः  [ यानी हम अपने लेखन से नई कविता, कहानी या अन्य रचनाएं करते हैं। सृजन की शुरुआत गणेश जी का ध्यान करते हुए करने से हमारी रचनात्मकता निखरती है। गणपति लेखन विद्या के धनी हैं। वेदव्यास की प्रार्थना पर गणपति ने महाभारत ग्रंथ लिखा था। व्याकरण में ` गण' शब्द आता है। अक्षरों को भी ` गण' कहा जाता है और गणपति इन गणों यानी अक्षरों के भी स्वामी हैं। जब हम अक्षरों से जुड़ा कोई काम करते हैं, तो उनके स्वामी भगवान गणेश का ध्यान करते हैं। ऐसा करने के पीछे यह भाव होता है कि गणेश जी हमारे लेखन को रचनात्मक बनाएं और हमारे लेख में कोई गलती न हो। - ShareChat