"मौशम-ए-अंगराई"
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कहीं मुस्कुराओ तुम अपने,
गुनगुनाते हुए लिखे छंदों पे!
और फिर रूठकर ही अपने,
खिले-खिले लाल-पिले हाल कह दो!
न उलझाओ अपने बालों को,
जानबूझकर ही इन महीनों में..
बस लाल टमाटर से प्याज,
और फिर दिल के सलाद कह दो!
कसकर बंद कर लो आँखे अपनी,
तुम उड़ते यादों के बैलूनों से...
और स्विमिंग पूल में कूदकर ही,
सीधे-सीधे इश्क है बिंदास कह दो!
आजकल भला क्या फिक्र है तुम्हे,
गर्मी है फंखा है ऐसी है खिड़की है...
पसीना पोंछो झटके में और बस,
सिर्फ अपना खूबसूरत ख्याल कह दो!
बस छमककर कभी पायल सी बन,
तुम यूँ गुलाबजामुन सी होकर...
साम्भर में थिरकते कलछी की तरह,
मुस्कुराते-खिलखिलाते चाल कह दो!
आज मौशम के अंगराइयों पे ये मन,
पल दो पल को बस मचल ही बैठे...
फूलमती अपनी गोलगप्पे वाली ही,
कुछ दिल के उलझे हुए राज कह दो!
छेड़े कभी कोई और फिर इतराए कहीं,
तुम लाल गालों से जो शर्माओ कभी...
लोल बस उठो चलो बलखाओ और फिर,
अपनी अदाओं से दिल बेहाल कह दो!
कहो प्यार है हमे आलू फूलगोभी,
हर मौषम के सब्जी से पगली.....
और चूम चूमकर ही यूँ इश्क हमें भी,
हरदिन ही सौ दोसौ बार कह दो!!💕💞
......✍️Mgr.Er.साह-जू-चेरुआ("मोर्गन")🍒
🌳🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳🌳
#💝 शायराना इश्क़ #❤️ आई लव यू #🌹प्यार के नगमे💖 #💔पुराना प्यार 💔 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
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फूल दिल में जैसे ही खिले,
मुस्कुरा कर वो अपने घर ले गई!
लूट गया साँसे बढ़ते धड़कनों से,
हँसकर ही वो सारे गम ले गई!
मै बचाता रहा हर राज दिल के,
और वो फिर से एक लहर ले गई!
मैं बैठा ही रहा यहाँ अकेला,
और वो चुपके से ये मन ले गई!
पहचान है अजब है इश्क है,
बावला सा है अपने शहर ले गई!
क्या करे उसकी नजर में,
कुछ अजीब सा ही जादू है!
हुनर धरा का धरा रह गया और परिंदा बस,
इश्क कहके ही दिल का भी पर ले गई!💕💞
........✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
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"वसंत"
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उपवन ने पहने वस्त्र नये,
धरा आज सजी हुई।
ऐ वसंत मनोहर तुम संग,
हृदय डोर भी बँधी हुई।
ना आकाश मे धूँध है,
नाही छाए बादल हैं।
एक सुनहरी ब्यार चढ़ी है,
और मधुर स्पर्श की चादर है।
धूप चढ़े तो लगती है गर्मी,
और छाँव मे ठण्ढी है।
ऐसे प्रित बढ़ाते हो ,
दिल मे उठती नरमी है।
तुम्हारे भू पे आते ही,
कलियाँ भी खिल जाते हैं।
स्वर्ग सी लगे ये हरियाली,
देख जीव-जगत इठलाते हैं।
ऐ रितु के राजा आज,
आखिर तुम भी बोले हो।
धूप-छाँव के मिश्रण मे,
नयण को अपने खोले हो।
काश बिते जीवन समग्र,
अकसर संग मे घुमा करते।
हमेशा रहते धरा पे तुम,
साथ-साथ ही झूमा करते।
ना तपिस से भूमि सिहरती,
ना ठण्ढ कहर बरपा पाती।
बारिश भी सीमित होती,
प्यास भी ना फिर तड़पा पाती।
काश जगत भाव हो तुम सा,
प्रित भाव फिर सजग पाते।
विहीन विलीन मनोवृत्ति छोर,
प्रखर प्रेम को समझ जाते।
सिर्फ तुम तो कितना पाते,
अनेक होते तब बीच हमारे।
तीमीर बुझती फिर घर-घर से,
और दुनिया जीती प्रेम सहारे।
हमें आशा है रितु न्यारे,
एक दिन सब यूँ बोलेंगे।
संगी साथ जब होंगे तब,
हृदय द्वार भी खोलेंगे।
फूल यही पत्तियाँ यही,
मानव भेश मे डोलेंगे।
एक प्यास जो पशु भी ढुँढे,
वही मिठास फिर घोलेंगे।
ऐ वसंत देखोगे रोज,
मनुज रितु को भाएँगे।
और रहे ना जग मे गम ही,
तब धड़कन उपवन पे छाएँगे।
एक सुखद मुस्कान होगी,
अनेक पुष्प खिल जाएँगे।
इस स्वर्ग सी धरा पे तब,
वो देव भी अमृत बरसाएँगे।
वो देव भी अमृत बरसाएँगे।।।।।💕💞
......✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
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आज फिर मैं जितनी देर,
तेरी यादों के साथ रहा!
.
बस ठीक उतनी देर ही,
मेरा दिल भी मेरे पास रहा!
लगा जैसे हवा संग कोई,
हमसाया हुआ बैठा है!
.
गुजरकर दिल की गलियों से,
कोई पलपल ही बेहिसाब रहा!
कहूँ क्या हुआ जो पलक,
बार-बार मचले उठे बैठे!
.
कोई चिपटा रहा धड़कनों से,
जैसे हर साँसों में ही खाश रहा!
अजब थी एक बहक थी,
बस घूमता रहा बदन सारा!
.
जैसे आज दिनभर ही कोई,
इन होंटों पे बन के प्यास रहा!
बस तुम्हारे किए वादों पे ही,
दिल ने किया कुछ यूँ इंतजार!
.
आज जिंदगी में पहलीबार इसतरह,
कई घण्टों तक मीठा-मीठा उपवास रहा!💕💞
..........✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
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कोई अब अकेला न रहा,
मेरा दिल अब मेरा न रह!!
***
इन आँखों के नींद उड़ गए हैं जनाब,
धड़कते हुए दिल अब बेजुबान नही हैं!
***
शायरी के शौक ने,
इतना तो काम कर दिया।
जहाँ नही जानते थे हमे,
वहाँ भी बदनाम कर दिया।
***
कुछ बातें हैं झूठें,
और कुछ आदतें भी अधूरी हैं।
खुश रहने के लिए यूँ,
कुछ गलतफहमियाँ भी जरूरी हैं।
***
लबों से निकल कर शब्द
नजरों को छूते गए,
दिल-ए-चाहत की
निशानी कुछ ऐसी रही!
***
मै करूँ शिकायत तुमसे,
तुम मुझसे बेहिसाब करो।
इश्क में दिल बहलाने का,
यूँ सिलसिला अब रहने दो।
***
अफसाने उल्फ़त दिल,
मुहबत अश्क गम वफ़ा।
कम्बख्त जिंदगी में आई,
और यूँ शायर बना गई।।
***
शब्दों के घुंघरुओं कोे गूँथ,
पाजेब बन जो झनकार करे।
उड़ने लगे है पंछी ही....
जो गरजते शब्दों संग दिल पे राज करे।
***
कोई करे जिक्र कोई तकरार करे,
चुपके से कोई अक्सर सवाल करे।
कोई करे यूँ बातें ये दिल न सम्भले,
कोई आहिस्ते से ही हमे बेकरार करे।
***
कुछ दिनों से ढूँढ रहा था....
दिल बहलाने के तरीके हजार!
फिर सामने तुम्हारा नाम आया....
और कमबख्त ख्याल बदल गए!
***
जोर से न मारिये अब
धक्का यूँ जनाब,
नजर के चोट पे...
ये दिल बेहिसाब होता है।
***
मार देते गोली जालिम,
कुछ तो आराम होता।
लोल नजरों के तीर से
दिल यूँ न परेशान होता।
***
ओश की बूँदें सँवर कर चाँद हो गए,
देखकर ये दिल यूँ बेहिसाब हो गए!
कैसे सम्भले धड़कन समझ न आए,
कली खिलकर जैसे ही गुलाब हो गए!💕💞
***
......✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳
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अनजाने ही पूछ लिया,
जो दिल-ए-हाल तुमने।
दिल के चौराहे पे........
कसम से कंगाल हो गए हम।
.......
जो फिसल गए कभी तो कोई बात नही,
जो दिल में उतर गए गुनहगार हो गए।।
........
लब करें गुफ्तगूं और नजरें सवाल करें,
खामोश इश्क एक-दूजे को बेहाल करे।
..........
सरसराते हुए बदन को छू गई फिर से,
बमुश्किल ही सम्भाल पाए यूँ खुदको!
बेलगाम दिल तब सम्भलता नही,
ऐ दिल बता फिर धड़कन की रजा क्या है?
..........
तू लिखे तो गजल हम लिखें तो बवाल है,
जिंदगी तेरे कलम के भी नखरे हजार हैं!
..........
खुद से हीे रूठे खुद कोे ही मनाए,
बदमाश ये दिल यूँ चूपके से मुस्कुराए!
..........
तुम्हारा ये लब्ज-ए-इलजाम,
दिल न संभले जान भी ले ले।
.................
ठंढ लग गई कलेजे में समझ नही आता,
वफ़ा-ए-इश्क की एकमुश्त दवा क्या है।
..................
बस वो इस तरफ ही यूँ निगाह कर गए,
सिर्फ इश्क करके ही हमे तबाह कर गए।💕💞
.................
..........✍ रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
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कोई तो बात बनी है अभी,
पायल यहाँ खनकी है अभी!
देख के चाँद को गलिओं में,
तिश्नगी दिल में उठी है अभी!
वो वादियों में बन के खुशबू,
पूर-जोश यहाँ महकी है अभी!
जगा के ख्वाबो से, दोस्तों ने,
बताया चाँदनी खिली है अभी!
आग़ोश में भर लेते उसे मगर,
बामुश्किल झिझक हटी है अभी!
मुस्कुराए ऐसे जैसे बेमिसाल,
कसमकस से दिल सम्भाल रखी है अभी!💕💕
(साभार)
🌳🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳🌳
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जो यूँ ही हजारो बार ली हैं,
तलाशियाँ तुमने जिस दिल की,
बताओ कभी कुछ मिला भी है,
किसी अगली-पगली के सिवाय!
.........
रंगदारी के संग,
मुहब्बत निभाने का!
सच ये सलीका अच्छा है,
दिल डूबकर लगाने का!
.........
गुलाबी धमकियों में भी,
खनकते इश्क का सुरूर है!
पता चला प्यार के हाँथों,
ये दिल होता कितना मजबूर है!
................
दिलों कोे तुमने यादों संग यूँ पिरो दीए,
सुकून मिला दिल को......
कल भी थे तुम्हारे,
आज फिर से तुम्हारे ही हम हो लिए!!
...........
फूल जाओ तुम कोई बात नही,
दिल में ठंढ है पगली बरसात नही!
...........
इतनी सादगी से जो,
कोई कह जाए खुद को!
दिल कायल हो जाए,
और भी क्या-क्या न करे...
.........
समझ पाए कुछ इश्क में,
ऊँचाइयों के मरम!
मन रखिये बर्फ और
दिल को रखिये गरम!
..............
हमारे राह नरम हैं और,
राह गरम हैं तुम्हारे...
कुछ तुम नरम हो हमसे,
कुछ बातें गरम हैं हमारे!
..........
मैं होऊँ तुम हो या वो हो,
हर समय हर जगह साँसें चलते रहे!
इनायत उसकी हो या अपनी हो,
इश्क-ए-जिंदगी में हमेशा काश चलते रहे!
..............
जो दिल के मासूमियत पे,
तुम्हें ऐतवार नही...
फिर बताओ तुम्हीं,
जिंदगी में बेखबर क्या है?
.................
अँधेरी रात सी ये जिंदगी....
और फिर चांदनी सी तुम!
पगली इश्क न करते तो....
गुनहगार हो जाते खूद के!
.................
तुम्हारी उलझी निगाहें
कुछ पूछ लेतीं हैं जब,
ये दिल धड़कते चौराहे पे
बस नीलाम हो जाते हैं!💕💞
.....✍ रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
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लेकर हाथों से जाम,
लब इस अंदाज़ से बोले....
कमी क्या है इन आँखोंं में,
जो तुम भी शराब पीते हो!
***
उनके मुहब्बत का
भला कैसे हिसाब हो,
जो गले लगाकर कहे...
तुम बहुत ही खराब हो!
***
ये जादूगरी भी हमे
समझ नही आता है,
जब नजरों से कोई
गजल गुनगुनाता है!
***
खता ऐसी भी नहीं यारों,
यूँ भी क्या करते!
बहुत चाहने वाले थे,
किस किस से वफ़ा करते!!🍇
***
होली का बचा हुआ,
यूँ "गुलाल" रखा है!
पुराना "इश्क़" है,
अभीतक संभाल रखा है!
***
पागल है दिल यूँ ही ख्याल करे,
बस ये जब भी करे कमाल करे!
***
कहीं दिल न आजाए
आप पे सनम,
यूँ खुद को नजर में
डूबाना अच्छा नही!
***
दिल को ही सुन लेते,
इतने सवाल न होते!
धड़क रहे थे बेचारे,
बहुत परेशान न होते!
***
दिल ने तो प्यार में,
ज़िन्दगी भर इंतज़ार किया!
और उस इंतज़ार में,
ना जाने कितनो से प्यार किया!
***
बन्द आँख और तैर जाएँ दरिया,
जो ना गिरें तो समझिए इश्क है!
***
दिल की ही सुनिए....
मगर जरा सा तौल के!
लागत कुछ भी नही,
पर कीमत लाजवाब होते हैं!
***
यूँ बार-बार फिर.......
चाहत-ए-बाग नही सजेंगे!
बस ले ही लीजिए,
ये दिल का गुलाम आखिरी है!
***
दिल ही गुलाम हैं
इन शुष्क अंदाज के,
उदास इश्क यूँ भी
लाइलाज होते हैं!!
***
मुहब्बत की रश्में
सिख ही गए आखिर,
सच नब्ज-ए-इश्क का
ये हुनर अच्छा है!
***
हमने कभी सोंचा न था......
जिंदगी दिनोदिन इतनी हसीन होगी!
जबजब गुजरेगी सामने से,
पहले से ज्यादा ही कमसीन होगी!💕💞
***
......✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳
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इसकदर दिल से टूटकर
हरदम हो जो इंतजार करे,
कोई तो है जो गहराई में
डूबकर भी यूँ प्यार करे।
...........
सितमगर कायनात में
दिल के चोर बहुत हैं,
हुस्न माफ करे अब
खुद पे मेरा जोर नही है।
.......
बस शौख था सीखने का
कुछ इस कदर जनाब,
फिर शुरू किया इश्क
और सीखता ही रह गया।
................
ये दिल लगने के बहाने हजार,
और न लगने के सिर्फ तुम हो!
................
बस दो शब्द ही दिल पे हुए कुछ ऐसे,
मुस्कुराते लबों के हम तलबगार हो गए।
..........
बंद आँखों में भी अगर
जो याद आए कोई,
टटोलिये अंदर दिल मे
कोई बेहिसाब जिंदा है।
................
यूँ सिखा दिया दिल को मुहब्बत तुमने,
ये जब भी करेगा लाजवाब करेगा!!🍇
..................
खामोश धूनों पे जो
सम्भलने का भी होश ना दे,
खुली जुल्फें झुकी नजरें
कोई दिल को भी दोष ना दे।
..................
नजर हर चीज पे आखिर क्या बात है?
बदमाश दिल है या बेपनाह जज्बात है!
..................
इस कदर भी क्या जरूरत थी,
सबके दिल में आग लगाने की।
एक तीर कितने निशाने.......
जालिम सबको ही तड़पाने की।।💕💞
........
................✍रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
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