"Heart Appeals"
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Often the heart rate
Increases just like
The wave of ocean,
And it raise gently
With someone without
Any boundaries yourself !
When the poor heart
Dickey felt helpless,
Someone ask from eyes
To express their desires !
Yes teasings is not
Always in anyone's nature,
But the heart is compelled
Live to him with patient !
When the steps
Become uncountable,
Just to show you
The charms of deep feelings !
When all those colors
Which cary rings of freaks,
Just jump and jump
Inside to the barn of appeals !
When you look there
For longing eyes,
To explain the reflections
And heartbeat to someone !
Then everyone lost
Their senses and
Looked intoxicated,
Birds become eager
To fall any condition
In love and saturation!💕💞
...✍️Ravi Pratap Singh("पंकज")🍒
🌳🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳🌳
#🥰लव शायरी😘 #❤️ आई लव यू #🌹प्यार के नगमे💖 #💔पुराना प्यार 💔 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
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ओकर अंखियां में प्यार के,
चमक गजब जान लेवत है...
गंहीर गलिया संग जब जब,
मुस्कियात गजब जान लेवत है...
करत है घायल नरम नखरा से,
उछलत कूदत गजब जान लेवत है....
पता नही कईसे आसमान गिरल
बिजली जईसे करके जान लेवत है...
जईसे पुरे तालाब में महकत है मेहँदी,
पगली जब लऊकत है गजब जान लेवत है 💕💞
~रवि~
🌳🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳🌳
#🌹प्यार के नगमे💖 #❤️ आई लव यू #💔पुराना प्यार 💔 #💝 शायराना इश्क़ #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
"कायल"
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प्यार के बूँद बूँद दानों से तुम,
जब दिल को मेरे भिगाती हो।
ऐ पगली तुम कितनी प्यारी,
दिल में भीतर तक घुँस जाती हो।
ऐ बगरी जब बजती पायल तुम्हरी,
हमको यूँ छमछम करके जाती हो।
तब भरता नही दिल पता नही क्योँ,
सबकुछ हमदम खाली कर के जाती हो।
जब खनकाती तुम ये कंगन चूड़ी,
तब धड़कन पे तरंग छेड़ जाती हो।
दिखो न तुम तो मन बेसुध हो जाए,
मनमोहक धुनों से यूँ खेल जाती हो।
चैन न रहता एकपल को भी तब,
तुम इतना कायल करके जाती हो।
ओठों के ठंढी गहरी लाली से,
मन को अंदरतक घायल करके जाती हो।
नाक में नथिया कानों में झुमके,
सच में कहर बहुत बरपाती हो।
बोलो कितने में ख़रीदा है इनको,
जिनसे हमरे दिल में आग लगाती हो।
पगली बोलो कितने में खरीद है तुमने...
जिनसे हमरे दिल में प्यार जगाती हो।💕💞
.......✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
🌳🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳🌳
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"कहानी"
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जो फुर्सत में कभी होना,
अपनी भी कहानी लिखना।
ओठों के नगमों को,
अपनी तुम जुबानी लिखना।
नजरें जब उलझने लगे,
पुरानी कुछ रवानी लिखना।
गुदगुदाते इस दिल से,
तुम तो बस पानी-पानी लिखना।
नाको की नथिया लिखना,
कानों की तुम बाली लिखना।
लटकते-झटकते बालों के संग,
गालों की शर्माती लाली लिखना।
खिलती हुई यौवन लिखना,
चाहत हर मस्तानी लिखना।
फुलझरियों की बातों संग,
कुछ हमरी दिल बेनामी लिखना।
काली-काली आँखें लिखना,
कातिल नजर शराबी लिखना।
मदहोश बनाती जो हमको,
तुम अपनी होठ गुलाबी लिखना।
कुछ अपने नखरे लिखना,
कुछ प्रीत सुहानी लिखना।
कुछ तो हमारी शरारतें लिखना,
और फिर बहकती हुई जवानी लिखना।
अपनी चोचलों के आगे,
कुछ हमरी भी बदहाली लिखना।
प्यारी प्यारी तितलियों के संगत में,
कुछ अपने दिल की बेईमानी लिखना।
सबकुछ आजमाने के चक्कर में,
कुछ अपनी ताना-तानी लिखना।
हुल्लड़ के कुछ मतलब लिखना,
कुछ घर की भी सानी-पानी लिखना।
मुख से निकले बेबस हो जब,
वो मिश्री जैसी गाली लिखना।
डर लगता है कोमल सी जिससे,
वो टाँय-ठाँय दोनाली लिखना।
अपनो मोटी-मोटी बूंदें लिखना
फिर बोलों की सुनामी लिखना
झुँझलाती झनझनाती फिर,
भुनभुनाती हुई तूफानी लिखना।
अपनी बढ़ती हर चाहत लिखना,
यूँ बेताब दिल दिवानी लिखना।
बस बतीस-तेतीस ही बच्चे लिखना,
और बाकी हर इश्क पुरानी लिखना।
उफ्फ्फ अपनी वो जलवे लिखना,
मेरे दिल की कुछ खामी लिखना।
बहकती हुई फिर धड़कन लिखना,
अपनी चुपी-छुपी वो हामी लिखना।
खिलखिलाते चेहरे के संग,
बलखाती हरएक खुमारी लिखना।
पगली दिल के हरएक झोंके को,
गमकती हुई एक फुलवारी लिखना।
मुस्कुराते ओठो से सच,
एक ऐसी तुम निशानी लिखना।
जो फुर्सत में कभी होना तुम,
अपनी भी एक कहानी लिखना।
कुछ यूँ भी तुम जुबानी लिखना,
और सुंदर सी एक निशानी लिखना।।।💕💞
.......✍️ रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
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"प्रेम गामिनी"
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प्रेमपास और गल बाहों संग,
रिमझिम-रिमझिम जब बातें हों।
उसकी ठंढ फुहारों के संग जब,
बेबस दिल स्वयं ही गुनगुनाते हों।
बढ़ते धड़कन को थामे ऐसे,
मन मे अब कोई फाँस नही।
कहे नजरों से कुछ ऐसे भी,
जाने दो अब कोई बात नही।
हर अंगड़ाई और झोंकों पे,
ये मन बेसुध सा हो जाए।
हर बूँद-बूँद सिर्फ प्रेम करे और,
पगली मुस्कुराए व खिलखिलाए।
मधुर-मधुर मुस्कान पे जब,
चित-चंचल मन खोने लगे।
भिगो दे फिर अंग-प्रत्यंग,
दिल विवश हो उसी का होने लगे।
पहुँच कर अन्तः द्वार तक,
अब भीनी भीनी तकरार करें।
छूकर अधरों को जब पूछे कोई,
सच कहो कितना अब प्यार करें।
तब कहे ये दिल हे प्राणेश्वरी,
बरसकर ऐसे ही उपकार करो।
नित्य नए कँवल कलेवर संग,
बस तुम्ही इस दिल पे अधिकार करो।
भरी यौवन कली कोंपल को,
ये चित नित्य ही तरसती रहे।
मैं प्रेम पथिक तुम प्रेम गामिनी,
बस ये प्रेम सुधा ही बरसती रहे।
मैं प्रेम पथिक तुम प्रेम गामिनी,
बूँदों की ये प्रेम सुधा सिर्फ बरसती रहे।।💕💞
......✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
🌳🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳🌳
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जब धड़कन बढ़ जाए यूँ ही अक्सर,
किसी के साथ को खुद से बढ़ाने को!
बेबस लगे जब बेदम मन बेचारा,
अपनी हर आरजू को जताने को!
मुस्कुराना किसी की फितरत न हो,
पर दिल में सुरूर हों संग निभाने को!
कदम बेहिसाब से हो जाए जब,
यूँ सपनों के आशियाने दिखाने को!
ये मसमस्त हसरतों के रंग जब,
भीतर उछलते कूदते हो बलखाने को!
चाहत भरी नजरें जब ढूंढती हो,
किसी को अपनी जिंदगी समझाने को!
तब होश न रहे हरकोई नशे में डूबा दिखे,
परिन्दें बेकरार रहें हाल-ए-दिल बताने को!💕💞
.............✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
🌳🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳🌳
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"रिमझिम मृदङ्ग"
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बूँद-बूँद बनकर लबों से,
छू-छूकर बल खाने लगी।
आज फिर हवा झोंकों संग,
पगली फिर मुस्कुराने लगी।
किंचित अधरों से रोम-रोम,
यूँ भिगभिग निहाल हुए।
धीमे-धीमे कभी झमाझम,
हर ओर से ही तकरार हुए।
कुछकुछ समझ मे आया भी,
ये रंग भी जाने पहचाने हैं।
आवरण भले ही नए लगे हैं,
पर हर अंदाज वही पुराने हैं।
फुहारों के भीनी मक्रन्दों से,
बेसुध हुआ फिर ये तनमन।
हृदयगामिनी फिर से पहुँची,
अंतरंग द्वार हो चितचितवन।
कुछ शरारतों के संग ही,
बदरी रिमझिम गुलजार लगे।
वही ठिठोली वही बावलापन,
दिल मे ठंढक मिश्रीधार लगे।
सिर से लेकर पाँव तक,
एकाएक जो यूँ भिगोने लगी।
मैं स्तब्ध और धड़कन भी..…
अपने चाहत में यूँ डुबोने लगी।
रुनझुन मोहक नूपुर बजे,
लथपथ हो गए अंग प्रत्यंग।
गगन ढककर आँचल से,
बरसने लगी यूँ बन मृदङ्ग।
अनुरागिनी ये अदा तुम्हारी,
दिल फिर से बेहाल हुए।
दिन बीते साल भी बीते पर,
प्रेम गहरे हो और लाल हुए।
मन के बागों में यूँ ही झुमझूम,
झमाझम ही बलखाती रहना....
वर्षारानी तुम ये अमृतधार लिए,
हमसे मिलने हरदम ही आती रहना।
हो तन बूढ़ा पर मन यौवन,
हरसाल यूँ ही इठलाती रहना।
छूकर मेरे हर अंग प्रत्यंग...
बस हमपे यूँ ही प्रीत लुटाती रहना।
प्रियतमे यूँ ही....
तुम हरदम खिलखिलाती रहन।💕💞
......✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
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"वक़्त"
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महकेगी ये गुलसन ऐसे,
कली के खिल जाने के बाद।
जैसे रोशनी बिखरती है,
किरण के आजाने के बाद।
बिसरेंगी नही ये आँखे,
हँसी के छाजाने के बाद।
छलकेंगे जाम नजरों से,
दिल से दिल मिलाने के बाद।
रंगीन होंगे दिन और रात,
साथ-साथ बिताने के बाद।
बरसेंगी फूलझरी खुशियों की,
संगी संग दिल लगाने के बाद।
हक है मेरा तुझे पे अपनापन का,
थोड़ा-थोड़ा छेड़ लेने दे आज।
गुलजार होंगे फिर ये वक्त भी,
तुम्हारे.........मुस्कुराने के बाद।L 💕💞
........✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
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ओठलाली पायल झुमके,
काजल कंगन बिंदिया!
.
दो लब्जों में जो कहो तो,
इश्क बहुत ही आसान है!!
अब जो मुस्कुराए तो,
रसमलाई गुलाबजामुन!
.
नही तो बस दिल भी,
परेशान का परेशान है!!💕💞
~रवि~
🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳
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"Crazy Night"
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When the night comes,
The sound keeps touch.
Sometimes something,
Comes out from somewhere.
The moon has endured,
The sun dawned and set.
But now the heart fire,
Keeps on rise and rise.
Mind full of happiness,
Descend in the heart.
Only the same thirst,
Awakens in the eyes.
I have seen the moon
In the beautiful face,
Time flies without,
Closing these eyes.
When eyelids packed itself,
Then the rose smile again.
Night comes with remembrance,
And heart goes far away.
Crazy nights come & smile again.💕💞
....✍ Ravi Pratap Singh("पंकज")🍒
🌳🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳🌳
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