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उनके नजर के रस्क पे,
कसक बोल बैठे!
जीना यही है तो,
फिर मरणा क्या है?
****
यूँ बार-बार फिर से,
चाहत-ए-बाग नही सजेंगे!
दे भी दीजिए दिल का ये,
बेमोल खरीदार आखिरी है!
****
दिल की ही सुनिए मगर,
जरा सा तौल के जनाब!
लागत कुछ भी नही...
पर कीमत लाजवाब होते हैं!
****
कमान खिंचे कहीं से और
कितने निशान हो गए,
बिजली गिरी कयामत हुए,
और सारे दिल परेशान हो गए!
****
सामने में ख्वाब दिखने लगे,
कुछ इस कदर कि...
हर गुजरती इनायत ही,
खूबसूरत ख्वाब लगने लगी है!
****
अँधेरी रात सी ये जिंदगी....
और फिर चांदनी सी तुम!
पगली इश्क न करते तो....
गुनहगार हो जाते खूद के!!
****
लग गई ठण्ढ इस धड़कन में,
जानबूझ ही आजमाने में!
बहुत कुछ पिघल जाता है,
नाजुक कली से दिल लगाने में!
****
खामोश नजरों से सुनिए,
धड़कनों के साये....
सबकुछ समझ आए,
बस दीवानगी के सिवाय!!
****
ठंढ लग गई कलेजे में,
और समझ न आए!
ये वफ़ा-ए-इश्क की,
एकमुश्त दवा क्या है!
****
दिल लूट लिया उसने बिन पूछे ही,
भला अब अर्जी भी करें तो कहाँ करें,
हर पंखुरियाँ सामिल हैं कयामत में,
अब कैसे मन हर अकेले को मना करें!
****
कभी कहीं किसी चेहरे पे....
टिक जाते हैं इस कदर।
दिल मना भी करे.....
पर नजर जवाब दे जाते हैं।💕💞
****
.....✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳
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नजर चुरा के नजर मिलाना तेरा,
उफ़्फ़ नजर फेरकर मुस्कुराना तेरा!
****
हाँ तुम्हारे शहर में पगली,
अब हुआ सर्द-ए-मर्ज बहुत है!
चलूँ कम्बल ओढ़कर,
बस चुपके से सो जाना अच्छा है!
****
खुश्क चाहतों की गर्मियाँ,
जब छूने लगें होठों को!
तब जनाब समझ लीजिए,
दिल का मामला हुआ संगीन है!
****
जोर से न मारिये अब,
हर धक्का यूँ जनाब!
दिल-नजर के चोट पे...
ये दिल बेहिसाब होता है!
****
तुम्हारा ये लब्ज-ए-इलजाम,
दिल न संभले जान भी ले ले!
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गजब सरारत तुम्हरी और,
सहम दिल हमारे गए!
बगरी चाहतों के दौर में,
बेवजह ही हम मारे गए!
****
तुम गुजर जाओ धड़कनों से,
कुछ इस कदर कि....
पलक झुककर नजर से,
इश्क में बढ़कर बेकरार कहे!
****
बेचैन रातें बिताकर मैं,
किश्तें चुकाता रहा....!
बस कुछ यूँ मुस्कुराकर
उसने कर्ज़दार कर दिया....!!
****
और भी बहाने लाख हैं पर,
ये मन के भी खास हैं!
जान रूठो या मुस्कुराओ,
दिल पर बस तुम्हरे ही राज हैं!!
****
कुछ यूँ खामोशी से,
चित्रों में करार कर!
चलो फिर मुहब्बत से,
हम भी इबादत लिखते हैं!
****
दिल पे ही ठहर जाते हैं
लोल लड्डू बूँदी के,
कमबख्त नजर को भी,
अब समझाना हुआ मुश्किल है! 💕💞
****
.....✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
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"होली-रंगोली"
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मेरे संग आओ , मनावेंगे होली...
मुठ्ठी में भरकर रंग चले हैं,
आज सारे गालों पर कैनवस धरे हैं,
कोई गुलाब है , कोई सहेली ,
इंतज़ार में है , कोई युवती अकेली ,
मेरे संग आओ , मनावेंगे होली।
सतरंगी हिलोर में बहकते चले हैं ,
तन कहकहों से भीगते चले हैं ,
वहाँ मेरे अपने , कितने रंगों में रसें हैं ,
यहाँ हम गुलाली बादलों के प्यासे हैं ,
मेरे दोस्तों , हम भी बनावेंगे टोली ,
मेरे संग आओ , मनावेंगे होली।
बचपन में यारों मैं निर्बल बड़ा था ,
होली के एक दिन कीचड़ में पड़ा था ,
गुबार आँखों में , होठों पे हाय ,
मिट्टी हुआ था , मेरा रंग हाय ,
फिर पांच दोस्त कूदे मेरे पीछे ,
उस लंगूरों को भी लिए घसीटे ,
बोलो अब जोर से हुल्लड़ बोली,
मेरे संग आओ , मनावेंगे होली।
बेपरवाह लपक थी , मेरे जुस्तजू में ,
बस एक झलक भर की आरजू में ,
गुलाल माथे पर , बसंत की पूनम ,
स्वप्न सुंदर बने , न बने विगोयगन ,
फिर तुम आई , हाथ में मेहँदी,
देखता ही रहा, और तुम लगी बरबोली ,
सुंदर नवरस लिए मेरे घर - आँगन,
और तुम्हरे संग की सिंदूरी सहेली ,
सच यारों , मिलेगी तुम्हें भी हमजोली ,
मेरे संग आओ , मनावेंगे होली।
मेरे संग आओ, हम मनावेंगे अब होली....🍒
बिछते दिल के रंगोली में ,
बुरा न मानो चढ़ते रंग के होली में!💕💞
🌳🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳🌳
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"मीठा प्यार"
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हर ख्वाहिशों के दरम्यान,
जो महफ़िल में है...
झुकी-झुकी है उस नज़र में,
अब करार है की नही?
उफान मरता ही नही,
बड़ी कसमकश सी है...
दबा दबा सा ही सही,
दिल में इकरार है की नही?
जवाँ धडकनों को कोई,
गिन-गिन के बताए...
फिरकी से दिलों में,
चौगुनी रफ्तार है की नही?
वो जो पल-पल जिसमें,
यूँ मोहब्बत जवाँ है...
उलझे पलकों को,
पुरजोर इंतज़ार है की नही?
उम्मीदों पे ये दुनिया,
बड़ी कमसिन सी हुई है...
सच बताओ भी सही,
कहीं तकरार है कि नही?
इस दिल को अदाओं पे,
है भला ऐतवार कहाँ...
जो दिल चुराकर ले गए,
उन्हें ख्याल है कि नही?
कोई दवा काम न आए,
कमबख्त मर्ज हो ऐसा...
हमदम कोई बताए,
पायलें वो बेहाल है कि नही?
उफनते पैमाने कहीं,
पार न कर जाएँ नेमत...
अब बहकते हुए साँसों को,
भला संभाल है कि नही?
इन ख्वाबों में जो भरे रंग,
अपनी चाहत से हरदम...
सच मुस्कुराते नज़र में,
मीठा-मीठा प्यार है की नही?
इधर तो पता नही लाल दिल,
कब पूरे गुलाबी हो गए...
पर गुलाब के दिल भी असल मे,
खिलकर हुए बेकरार हैं कि नही??💞💞
.....✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳
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ढूंढता रहा दिल के गलियों में
आजकल दर-दर जो,
वो खुद ही आ बैठे
यूँ झिलमिलाने के बाद!
बड़ी कोशिश से मुश्किल से
मिली यूँ भी हमदम,
अपना सब गंवाने
सबकुछ लुटाने के बाद!
पता नही बारबार ही दिल
ये बहके फिर से,
किसी कमसिन कली के
गुनगुनाने मुस्कुराने के बाद।
यों तो ये हँसीं नज़र से
खो भी गए थे कभी,
पर फिर खिलखिलाए
उसके नज़र आने के बाद!
बस समझ न आए ये
खींचतान तरकस कमान,
अदाओं कलाबाजियों के
संग गुजर जाने के बाद!
कमबख्त जिंदगी फिर
जान लेकर ही मानेगी,
उसके प्यार के घी में
यूँ ही लड्डू बनाने के बाद!
पता नही कितनो से
मोहब्बत की रही ख्वाहिश,
इन्तेहाँ बेइन्तहा
और भी क्या-क्या लेकिन...
फलसफा दिल को ऐसे
महसूस हुआ उसके,
गरजकर लरजकर
हमपर ही बरस जाने के बाद!💕💞
...............✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
🌳🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳🌳
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"बलजोरी"
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बहुत काम से थक गए हैं,
आज नही है कुछ खास प्रिय।
कर लेना बलजोरी पर,
कल लेकिन नही आज प्रिय।
जाने भी दो अब छोरो भी,
अपने दिल की ये मनमानी।
मन नही सब खाली सा है,
आज करो न आनाकानी।
रोज-रोज ये भारी कसरत,
अब हमसे ना होता है।
तुम्हरी इस झकझोर प्रेम पे,
दिल बेदर्दी रोता है।
एक दिन न प्यार करें तो,
कही होती नही बदनामी है।
हार जाते हैं तुम्हरे आगे,
आज दिल से तनिक न हामी है।
पता नही जो ससुरे ने,
ये कौन सा माल मिलाया है।
या ससुरी ने घोंट-घोंट,
बहुत गाढ़ा दूध पिलाया है।
माफ करो अब न्यूट्रल हो जाओ,
आज टॉप गियर को रहने दो।
शान्तचीत हो संग अपने,
हमे नींद आलिंगन को सहने दो।
प्रिय हो तुम न्यारी हो,
तुम तो भोली-भाली हो।
दया करो इस दीन दुखी पर,
सच कहता हूँ तुम बड़ी प्यारी हो।
ये अँगुली ये छेड़खानी,
सब करलेना खुलेआम प्रिय।
बहुत थके हैं सो आज नही,
अब करने दो आराम प्रिय।
कर लेना बलजोरी पर,
कल लेकिन नही आज प्रिय......
कर लेना बलजोरी पर,
कल लेकिन नही आज प्रिय......💕💞
........✍️ Mgr.Er.
शाह-जू -चेरुआ("मोर्गन")🍒
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"मनप्रीत"
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होगी जब उससे मुलाकात यूँ प्यारी,
तब यूँ दिल खुशियों से भर जाएंगे।।
जब दो अनजाने दिल एकदूजे के,
खिसककर आमने सामने आएँगे।
मिलेंगे फिर नजर से नजर,
मुश्कुरायेंगे गुदगुदाऐंगे कुछ शर्माएँगे।।
होगी जब उससे मुलाकात हर क्यारी,
बस यूँ दिल खुशियों से तर जाएँगे।।
जब लेंगे चाहत के बाहों में,
कुछ मन अपने इठलाएंगे।
जब साथ मिलेंगेे एकदूजे तब,
ये ह्रदय मधुरतम प्रित छलकाऐंगे।।
होगी जब उससे मुलाकात यूँ न्यारी,
सच यूँ दिल खुशियों से फल जाएँगे।।
दूर होंगे हर-पल जुदाई के ,
बस प्यार नजर ही आएंगे।
होंगी बातें अपने इशारों में ,
वो पल कैसे भी ठहर जाएँगे।।
होगी जब उससे मुलाकात यूँ भारी,
चढ़ यूँ दिल खुशियों से उभर जाएँगे।।
चूड़ियाँ खन-खना रही होंगी,
पायल खुशियों के गीत गाएंगे।
धड़कनें अपनेे बज रहे होंगे ,
जबजब झुमके शोर मचाएँगे।।
होगी जब उससे मुलाकात करारी,
पल-पल दिल खुशियों से उमड़ जाएँगे।।
माथे पे बूंदे तो पसीने की ,
जब रह-रह के झिलमिलाएंगे।
अपने मिलते हुए तो मन होंगे ,
सांसे रह-रह के खिल-खिलाएंगे।।
होगी जब उससे मुलाकात अनजानी,
सँवर हर दिल खुशियों से घुमड़ जाएँगे।।
रातें होंगी जैसे दिवाली की,
दिन होली के बन जाएंगे।
भोर होते ही फूलों सी खुशबू ,
शाम दीपों से जगमगाएंगे।।
होगी जब उससे मुलाकात पहचानी,
डूब ही दिल खुशियों से सँवर जाएँगे।।
अंगड़ाइयाँ लेंगे अपनी बाहों में ,
तब पलकों को शरम कुछ आएँगे।
होगी जब उससे मुलाकात दोधारी,
पंछी दिल खुशियों से चहक जाएँगे।।
होगी जब उससे से मुलाकात ये प्यारी
यूँ भी दिल खुशियों से भर-भर जाएँगे।।
हर दिल उछल-कूदकर धूम मचाएँगे।।💕💞
........✍️ रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
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"उल्फत"
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किसी की याद जब सताने लगे,
कोई आँखों में ख्वाब सजाने लगे।
हरवक्त बसे इन ख्यालों में कोई,
ये दिल बेशुध हो खो जाने लगे।
जब पलकें बिछी रहे राहों पे,
जब चाहत पास बुलाने लगे।
हरपल हंसी बनकर लबों पे रहे,
तववसुर में दिल जब मुस्कुराने लगे।
कोई शामिल रहे गीत हर नगमों में,
दिल तन्हाई में कुछ गुनगुनाने लगे।
और रहने लगे दिल यूँ बेकरार,
शख्स अपना चैन भी गँवाने लगे।
जिससे प्यार हरपल करता रहे,
वो खुद ही इकरार बताने लगे।
जिससे रातें कटें करवट बदल,
जब उन्हें भी नींद न आने लगे।
खूबसूरत दिखने दिखाने को,
सज सँवर कर इठलाने लगे।
हर उल्फत पे ये दिल हो रोशन,
कोई चाहत के दिप जलाने लगे।
दिल बच्चों सा जब सरारत करे,
गलतियों को चुपके से बढ़ानेे लगे।
छेरछेर कर हर छुपती हुई नजर,
ये दिल जब खुद को गुदगुदाने लगे।
शब्दों के बारिश में भीगे दिल,
थोड़ा-थोड़ा जब ये मुस्कुरानेे लगे।
कुछ बात है अब संभल जाईए,
दिल जब जोरों से खिलखिलाने लगे।
जब ये दिल हमें पागल बनाने लगे,
और ये दिल हमें पागल बनाने लगे.!!💕💞
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