"क्यों"
●●●●●
🌹🌱🌾
ऐ चिंटु की मम्मी आखिर,
कुछ भी क्यों नही कहती हो?
दूर नजर से होकर के,
यूँ गुमसुम भी क्यों रहती हो?
चुपचाप रहकर के यूँ,
गुस्सा तुम दिखलाती हो।
धुनक-तुनक के पास ना आती,
यूँ दूर क्यों चली जाती हो।
माना थोड़े बेदर्दी हैं,
पर थोड़ा-थोड़ा तो लड़ते ही हैं।
चलो सरारत करते हैं पर,
तुमपे ही तो मरते भी हैं।
भले मुँह से कुछ ना बोलें,
पर नजरों से तो कहते ही हैं।
साथ नही हरदम को ही पर,
आखिर दिल मे तो रहते ही हैं।
चलो अब मुँह खोलो भी,
यूँ तिखापन दिखलाओ ना।
रोष दिखा के शाँस बढ़ा के,
हमको यूँ धमकाओ ना।
डाँट भी लो अब छोड़ो भी,
यूँ जोरों से झटकाओ ना।
मर ही जाएँगे यूँ ऐंठे-बैठे,
अब हमको यूँ तडपाओ ना।
क्या हुआ जो हरदम हमसे,
यूँ बहकी-बहकी रहती हो।
ऐ चिंटु की मम्मी आखिर क्यों,
मुँह से कुछ नही कहती हो?
पगलीं मुँह से कुछ नही कहती हो...😋
.........✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
🌳🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳🌳
#💝 शायराना इश्क़
#❤️ आई लव यू #💔पुराना प्यार 💔 #🌹प्यार के नगमे💖 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
"Vapid Time"
●●●●●●●●●
🌹🌱🌾
These unique
Garden will smell,
After blooms of
The beautiful buds.
The golden lights
Will spread,
After the soft
Hearts ray will arrives.
These waiting eyes
Will never forget,
After the laughter of
Tempting deflagration.
The half feel glasses
Will overflow,
From joining the ways
Eyes to hearts.
Days and nights
Will be colorful,
After spending
The time together.
A shower of happiness
Will flow in deep,
After falling in love
With a degree jade.
I have a right
To love you,
Let me tease
You little today.
These times will also
Bloom in the hearts,
After you deeming
& smile as you wish.💕💞
....✍️Ravi Pratap Singh("पंकज")🍒
🌳🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳🌳
#🌹प्यार के नगमे💖 #❤️ आई लव यू #💔पुराना प्यार 💔 #i miss you 💞 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
#💝 शायराना इश्क़ #❤️ आई लव यू #🌹प्यार के नगमे💖 #💔पुराना प्यार 💔 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
"दर्पण"
●●●●●
🌹🌱🌾
सीखना है तुझे कुछ खाश,
तो खड़े आईने से सिख,
हर बात बताता है जिंदगी में,
जिसे तू जानता भी नहीं है,
बिना झूठ बोले चुपके चुपकेे।
दुनिया लालच में बतलाती है,
उन्हें भी तेरे हक़ में,
जिसके तू कभी काबिल नहीं,
ये तेरी हर हकीकत बयाँ करता है,
बिना डरे बस चुपके चुपके।
क्या कर सकता है तू,
कहाँ तक जा सकता है तू,
अपने हौसलो से,
क्या क्या पा सकता है तू,
सबकुछ बताता है बस चुपके चुपके।
तेरे चेहरे का नूर,
तेरे कामयाबी का गुरुर,
तेरे हर पिने का पैमाना,
तेरे फिर जीने का सुरूर,
कह देता है बिना कुछ लिए,
अजनबी सा बन बस चुपके चुपके।
अजीब है ये भी,
इंसान घबरा गया था....
इतना कड़वा सच भी,
कैसे छुपा रहा था.....
जानबूझ ये जहर को,
कैसे पचा रहा था....
आसमान में उड़ने वाला,
समुन्दर में तैर रहा था...
दिलों में जलने वाला,
अंगारो पे चल रहा था....
सबकुछ बता बैठाता जब,
बस यूँ ही चुपके चुपके।
ये आईना है दिल में भी,
पर काँच का टुकड़ा नही...
जब बंद आँख करके देखो,
हर सवाल बुझा देता है...
अपनों के ऊपर अपना,
ये हक जता देता है,
मुस्कुराकर बस चुपके चुपके।।💕💞
......✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳
#💝 शायराना इश्क़ #❤️ आई लव यू #💔पुराना प्यार 💔 #🌹प्यार के नगमे💖 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
"Primeness"
●●●●●●●●●
🌹🌱🌾
Whenever you smile,
O heartless one,
Then the heart
becomes lonely.
With some sweet wave
On the sound,
The body and soul
Become boundless.
From this world to
That world in such a way,
The restlessness flows
Out itself everywhere.
Then every happiness
Seems colorful,
Life gets expressed
In love like deep smell.
Now what is the use of words
When it touch in deep,
My heart beautiful desire
& sorrow becomes a medicine.
When emotions find a
Place in your heart,
Life gets lost in unrequited
Love and the thing sweet smile💕💞
....✍️Ravi Pratap Singh("पंकज")🍒
🌳🌳🌳🌳Manmohan🌳🌳🌳🌳🌳
#💝 शायराना इश्क़ #❤️ आई लव यू #💔पुराना प्यार 💔 #🌹प्यार के नगमे💖 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
"संस्करण"
●●●●●●●
🌹🌱🌾
कुछ छुपा हुआ मुझमे,
उलझा हुआ ओझल सा,
कचोटता हुआ मेरे प्रतिबिंब जैसा,
अधछाँव प्रकाश लिये हुए,
थोड़ा लंबा फिर सिमटा हुआ।
जैसे बता रहा है,
अनछुए कुछ पहलुओं को,
ढहते हुए ढांचे को बनते हुए ढांचे को,
प्रकृति के वश हो प्रवृत्ति के विरुद्ध हो,
अंतर अनुभूति मे जलता हुआ,
साँय-साँय अँधेरे मे चलता हुआ।
एक आवेग एक उद्वेग बढ़ता सा,
कणकण को झंकझोरता
और कुछ कहता,
जो था अब नही है
जो नही था वो अब है,
आखिर कैसे हुआ ये कब हुआ ये,
विवश हुआ विचलित हुआ
समयवश हुआ,
या किंचित उचित प्रेमवश हुआ।
चमकते हुए तलवारों के संग,
रुनझुन नूपुरों के झंकार उपज गए।
गूंजते हुए ठहाकों के संग,
आँसूओ के भी मोती चार उपज गए।
अनुराजि प्रत्यक्षदर्शी मे,
वैरागी में अनुराग उपज गए।
लटकते हुए झूलते हुए,
ठोस फिर ठेठ प्रभावी मे
अनुभव के संस्कार उपज गए।
कुछ है छुपा हुआ मुझमे,
उलझा हुआ ओझल सा,
अँधेरे में चलता हुआ,
अंतर अनुभूति में जलता हुआ,
उजालों की ओर बढ़ता हुआ,
स्वतःकण में बहता हुआ,
कई कई मन को पढ़ता हुआ,
अन्तरंगो में रंगता हुआ,
पुनः-पुनः अंतःकण में बहता हुआ।💕💞
......✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳
#🌹प्यार के नगमे💖 #❤️ आई लव यू #💔पुराना प्यार 💔 #💝 शायराना इश्क़ #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
"प्रेम रोग"
●●●●●
🌹🌱🌾
प्रेम किसे कहते हैं जग मे,
कैसी ये कहानी है।
चुलबूल चुहल बचपना है,
या चढती उम्र जवानी है।
धूप छाँव की आँख मिचौली,
पवन चाल मस्तानी है।
पाने की ये जिद कहें या,
प्यास बूझे वो पानी है।
व्यग्र दिमाग की इच्छा है,
मौसम बसंत सुहानी है।
या चाहत की गाँठ बँधी है,
स्वस्थ मधूबन की रानी है।
धड़कन बढ़ जाती है जिसमे,
साँसें भी चढ़ती है पल पल मे।
नयण से बिसरे जो ना क्षणभर,
क्या यही प्रेम इंसानी है।
आँख मिले जब सोंच ना पावे,
मन बोले मुख खोल ना पावे।
दिल ही दिल मे आह भरे,
क्या यही प्रेम परवानी है।
कभी शर्म से सुर्ख हो जाए,
कभी ना आँख मे पानी है।
आँख बंद फिर निन्द ना आवे,
क्या यही प्रेम दिवानी है।
प्रेम पथिक की राह कहुँ,
या वट वृक्ष की छाँव कहुँ।
मेघ बरसते तृप्त तृष्णा को,
क्या इसे ही प्रेम की भाव कहुँ।
प्रेम उदित सुरज सा दिखता,
या रात सा जग मे बिछता।
जिस खुशी से मोर नाचता,
तपती भूमि को मेघ जो सिंचता।
एक झलक पाने को जो,
घण्टो तक घुटनो पे टिकता।
क्या इसे ही प्रेम की भाव कहुँ,
जो एक ही सुरत जग है ढुँढता।
बहुत जग ढूँढा मैने,
प्रेम की बहुत कहानी है।
ना बचपना ना ही जवानी,
प्रेम चाहत की वाणी है।
लोलीमति लड्डू से विरह को पाते,
बासमती को सिर्फ बतासा ही भाते।
प्रेम प्रेम है जिसमें सबकुछ,
प्रेम ही सिर्फ इंसानी है।
और ये प्रेम ही सिर्फ इंसानी है।।💕💞
......✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
🌳🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳🌳
#💝 शायराना इश्क़ #❤️ आई लव यू #💔पुराना प्यार 💔 #🌹प्यार के नगमे💖 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
"दिल अनपढ़"
●●●●●●●●
🌹🌱🌾
इतराते हुए नगमों पे,
इठलाते हुए कदमों पे,
ये दिल न फिसले....
तो बताओ फिर क्या करे!
झुकते हुए पलकों पे,
डूबते हुए आँखों में,
ये दिल न पिघले...
तो बताओ फिर क्या करे!
चढ़ते हुए साँसों पे,
बढ़ते हुए धड़कन पे,
ये दिल न मचले...
तो बताओ फिर क्या करे!
लचकते हुए कमर पे,
लहराते हुए चाल पे,
ये दिल न दहके...
तो बताओ फिर क्या करे!
उभरते हुए अंगड़ाई पे,
बलखाते हर तरुणाई पे,
ये दिल न चहके...
तो बताओ फिर क्या करे!
मुस्कुराते हुए होंठों पे,
गहराते हुए गालों पे,
ये दिल न बहके...
तो बताओ फिर क्या करे!
पगलीं बताओ फिर क्या करें!💕💞
.....✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳
#🌹प्यार के नगमे💖 #❤️ आई लव यू #💔पुराना प्यार 💔 #💝 शायराना इश्क़ #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
"दिल-ए-डोर"
●●●●●●●●
🌹🌱🌾
फिजाओं का कुछ पता नही है,
और दिल भी एक परिंदा है...
अपने किन्ही ख़यालों मे हरवक्त,
किसी को कभी बसा कर तो देखिए!
अक्सर सवालों से चलती हैं,
बेवजह ही फितूर ये जिन्दजी...
कभी उम्मीदों के ख्यालों में,
संग सुकून से दोपल बिताकर तो देखिए!
चाहतों के दौर में अक्सर ही,
खिसक जाते हैं हर उम्मीदें...
कई सोंचते है दिल की बातें,
कुछ बातों को आजमाकर तो देखिए!
आवाजें होंगी जरा सा जोरों से,
फूलों के छिटकने के अंदाज में...
उलझे शब्दों के मीठे बोल पे,
किसी के दिल में हाँथ समाकर तो देखिए!
किमत तो नही होती है कभी भी,
एहसासों से बढ़ते धड़कनों की...
दुनिया में बमुश्किल मिलते हैं जो,
अपनी आँखों में सजाकर तो देखिए!
वैसे तो यहाँ सबको ही भाते हैं,
मन के थिरकते साजों के धुन...
कुदरत का करिश्मा है मुस्कुराहट,
अपने दिल के तार बजाकर तो देखिए!
किसको पता है साँसों के हरकतों का,
अपने रंग में ही बहकते रहते हैं...
गम फिसल जाएँगे हाँथों से कहीं दूर,
साँसों को साँसों से टकराकर तो देखिए!
सबके जीने के अपने ही अंदाज हैं,
किस्मत से मिलते हैं डोर से डोर...
ज़िंदगी महकेंगी गुलाबों की तरह यूँ,
एकबार उनके बाँहों मे आकर तो देखिए!
अक्सर हलचल सी बनी रहती है,
कुछ भी मीठा गुनगुनाने के वक्त...
समय बहर जाए अपने ही ओर,
कभी आँखों से आँखें मिलाकर तो देखीए।
कभी गौर करें बीतते हुए इन पलों पे,
अपने अक्स ही अपने भीतर नजर आएँगे...
जिंदगी खड़ी है अपने ही राहों में कबसे,
कभी-कभी उनको सिने से लगाकर तो देखिए!
कभी अपने चाहत को आजमाकर तो देखिए...!!💕💞
.................✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
🌳🌳🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳🌳🌳
#🌹प्यार के नगमे💖 #❤️ आई लव यू #💔पुराना प्यार 💔 #💝 शायराना इश्क़ #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
#🌹प्यार के नगमे💖 #❤️ आई लव यू #💔पुराना प्यार 💔 #💝 शायराना इश्क़ #❤️Love You ज़िंदगी ❤️










