arvind kumar
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#🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गीता ज्ञान🛕 - क्रोघ से मनुष्य की बुद्धि श्रमित हो जाती है। श्रम होने पर सही गलत की स्मृति नष्ट्र हो जाती है। स्मृति नष्ट्र होने से बुद्धि का नाश हो जाता है। और जव बुद्धि नष्ट्र हो जाती है, तो मनुष्य अपने जीवन , चरित्रऔर मार्ग से गिर जाता है। अर्थात उसका पूर्ण पतन हो जाता है। क्रोघ से मनुष्य की बुद्धि श्रमित हो जाती है। श्रम होने पर सही गलत की स्मृति नष्ट्र हो जाती है। स्मृति नष्ट्र होने से बुद्धि का नाश हो जाता है। और जव बुद्धि नष्ट्र हो जाती है, तो मनुष्य अपने जीवन , चरित्रऔर मार्ग से गिर जाता है। अर्थात उसका पूर्ण पतन हो जाता है। - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गीता ज्ञान🛕 - !! एकांत !! अंत ही आरंभ है, वासना ही मोह है, इच्छा ही लालच है, समझ ही ज्ञान है, अपेक्षाए दुख है, एकांत ही सुख है।। !! एकांत !! अंत ही आरंभ है, वासना ही मोह है, इच्छा ही लालच है, समझ ही ज्ञान है, अपेक्षाए दुख है, एकांत ही सुख है।। - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गीता ज्ञान🛕 - अहकार वश मनुष्य कभी कभी अपने आप को परमात्मा से भी श्रेष्ठ समझने लगता है , यही इसकी गिरावट और का मुख्य कारण है..!! दुःखों ; अहकार वश मनुष्य कभी कभी अपने आप को परमात्मा से भी श्रेष्ठ समझने लगता है , यही इसकी गिरावट और का मुख्य कारण है..!! दुःखों ; - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गीता ज्ञान🛕 - श्रीकृष्ण जय 4 कर्मकी गठरी बाँध कर जग में फिरे इंसान जैसा करे वैसा भरे विधिका यही विधान ! ~ ०थर्म कर्म॰ {9ಘ   श्रीकृष्ण जय 4 कर्मकी गठरी बाँध कर जग में फिरे इंसान जैसा करे वैसा भरे विधिका यही विधान ! ~ ०थर्म कर्म॰ {9ಘ - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गीता ज्ञान🛕 - जो व्यक्ति स्वार्थ और लोभ में का साथ छोड़ता है फंसकर अपनों उसको कोई अपना नहीं बनता अंत में उसे पछताना ही पड़ता है ! जो व्यक्ति स्वार्थ और लोभ में का साथ छोड़ता है फंसकर अपनों उसको कोई अपना नहीं बनता अंत में उसे पछताना ही पड़ता है ! - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गीता ज्ञान🛕 - करो किसी को कुछ भी देकर अहकार मत क्या पता तू दे रहा है या कर्जा चुका रहा है। पिछले जन्म का करो किसी को कुछ भी देकर अहकार मत क्या पता तू दे रहा है या कर्जा चुका रहा है। पिछले जन्म का - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गीता ज्ञान🛕 - GRTR) कृष्ाप श्री कृष्ण कहते है कि प्रशंसा चाहे कितनी भी fehd' करो अपमान बहुत ही सोच समझकर eex करना चाहिए क्योंकि अपमान वह ऋण है, जो हर कोई अवसर मिलने परब्याज सहित जरूर चुकाता है। Jlleou राधे कृष्ण राधे कृष्ण.. कृष्ण कृष्ण राधे राधे..! GRTR) कृष्ाप श्री कृष्ण कहते है कि प्रशंसा चाहे कितनी भी fehd' करो अपमान बहुत ही सोच समझकर eex करना चाहिए क्योंकि अपमान वह ऋण है, जो हर कोई अवसर मिलने परब्याज सहित जरूर चुकाता है। Jlleou राधे कृष्ण राधे कृष्ण.. कृष्ण कृष्ण राधे राधे..! - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गीता ज्ञान🛕 - जिस प्रकार जल में रहकर भी कमल अछूता रहता है, उसी प्रकार संसार में रहते हुए ' भी मन को मोह से मुक्त  खखना चाहिए। जिस प्रकार जल में रहकर भी कमल अछूता रहता है, उसी प्रकार संसार में रहते हुए ' भी मन को मोह से मुक्त  खखना चाहिए। - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गीता ज्ञान🛕 - ೩ nstagram |okamma { டகரிக் | 3 सृष्टि कर्म क्षेत्र है, बिना कर्म के यहाँ यह ೩ कुछ भी हासिल नहीं ह्ो सकता | श्रीमद भगवद गीता ಶ ೩ ೭ ೩ nstagram |okamma { டகரிக் | 3 सृष्टि कर्म क्षेत्र है, बिना कर्म के यहाँ यह ೩ कुछ भी हासिल नहीं ह्ो सकता | श्रीमद भगवद गीता ಶ ೩ ೭ - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गीता ज्ञान🛕 - कृण्ण वापी II I मतुण्य चाहे कितना भी द्रूट क्यों न जाए, उसे हमेशा याद रखना चहिए : उसके जीवन के रथ की डोर प्रभु के हाथ्षमें है. और इतिहास गवाहरु है कि थीकृष्ण जिसका रथ चलाते हैं विजय उसी की होती है. II कृण्ण ज्ञान ।l कृण्ण वापी II I मतुण्य चाहे कितना भी द्रूट क्यों न जाए, उसे हमेशा याद रखना चहिए : उसके जीवन के रथ की डोर प्रभु के हाथ्षमें है. और इतिहास गवाहरु है कि थीकृष्ण जिसका रथ चलाते हैं विजय उसी की होती है. II कृण्ण ज्ञान ।l - ShareChat