Dr Abdulgani Mehsania
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હું શેરચેટ ને પ્રેમ કરું છુ.
#🌟જીવનમાં ખુશ કેવી રીતે થવું❓ #Islam and We #islam guide us in every field of life #Porphetic Guidance #🤝 દોસ્તી શાયરી
🌟જીવનમાં ખુશ કેવી રીતે થવું❓ - *खुशहाल ज़िंदगी कैसे जिएँ?* 28/6/26 *(१ ) सबसे बेहतरीन सदक़ा वह है जो उस* *रिश्तेदार को दिया जाए जो आपसे रखता* ?## *हो या* *आपसे*रिश्ते तोड़ चुका हो।* संदर्भः इमाम तबरानी, अल-्मु।जम अल-्कबीर (विभिन्न संस्करणों में हदीस का नंबर अलग हो सकता है)| *(२) अच्छी बात कहो, तो उसका लाभ पाओ; और यदि फ़ितने ( अशांति और विवाद) का माहौल हो, तो ख़ामोश रहो, इससे तुम सुरक्षित रहोगे।* शब्दावली के साथ Sahih नोटः यह वाक्य इसी al-Bukhari 6136 ಭT Sahih Muslim 47 # ಫ मिलता। सही और प्रमाणिक हदीस यह हैः *"जो व्यक्ति अल्लाह और आख़िरत के दिन पर * ईमान रखता है, उसे चाहिए कि वह भली बात कहे या फिर ख़ामोश रहे। "* z೯f: Sahih al-Bukhari 6136, Sahih Muslim 47. 01 10.14 *खुशहाल ज़िंदगी कैसे जिएँ?* 28/6/26 *(१ ) सबसे बेहतरीन सदक़ा वह है जो उस* *रिश्तेदार को दिया जाए जो आपसे रखता* ?## *हो या* *आपसे*रिश्ते तोड़ चुका हो।* संदर्भः इमाम तबरानी, अल-्मु।जम अल-्कबीर (विभिन्न संस्करणों में हदीस का नंबर अलग हो सकता है)| *(२) अच्छी बात कहो, तो उसका लाभ पाओ; और यदि फ़ितने ( अशांति और विवाद) का माहौल हो, तो ख़ामोश रहो, इससे तुम सुरक्षित रहोगे।* शब्दावली के साथ Sahih नोटः यह वाक्य इसी al-Bukhari 6136 ಭT Sahih Muslim 47 # ಫ मिलता। सही और प्रमाणिक हदीस यह हैः *"जो व्यक्ति अल्लाह और आख़िरत के दिन पर * ईमान रखता है, उसे चाहिए कि वह भली बात कहे या फिर ख़ामोश रहे। "* z೯f: Sahih al-Bukhari 6136, Sahih Muslim 47. 01 10.14 - ShareChat
https://youtube.com/watch?v=vdnCSdlXZac&si=zd5SiMpvxlzjM8uz #सोचने वाली बात #points to ponder
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https://youtube.com/watch?v=bQHO_qmWl-E&si=T52c26uxZ2xgdMBF #આવું પણ બને છે. #આવું પણ બને છે #ऐसा भी होता है
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https://youtube.com/shorts/frcsspcv19U?si=LpnsPChKzVPeB58_*27/6/26* *Qur'an 22:45* *"और कितनी ही बस्तियाँ हैं जिन्हें हमने तबाह कर दिया, जबकि वे ज़ुल्म कर रही थीं — सो वे अपनी छतों पर उलटी पड़ी हैं, और कितने ही कुएँ वीरान पड़े हैं, और कितने ही महल खंडहर बन गए हैं!"* *Qur'an 22:46* *"तो क्या उन्होंने धरती में सफ़र नहीं किया कि उनके दिल ऐसे होते जिनसे वे समझते, या कान होते जिनसे वे सुनते? सच तो यह है कि आँखें अंधी नहीं होतीं, बल्कि वे दिल अंधे हो जाते हैं जो सीनों में हैं।"* #🌟જીવનમાં ખુશ કેવી રીતે થવું❓
https://www.facebook.com/share/v/1EP3Qm5zd2/ગુસ્સો કર્યા વિના આવી જ રીતે પણ સમજાવી શકાય છે #ऐसा भी होता है #समझाने की उत्तम पद्धति
#सोचने वाली बात #Point to ponder
सोचने वाली बात - को रुलाकर जिंदगी के दूसरों मजे लेने वालों , सब्र रखों जिंदगी भी मजे लेगी.. एक दिन तुम्हारे को रुलाकर जिंदगी के दूसरों मजे लेने वालों , सब्र रखों जिंदगी भी मजे लेगी.. एक दिन तुम्हारे - ShareChat
#सोचने वाली बात #islam guide us in every field of life #Islam and We #points to ponder
सोचने वाली बात - The Difference Between] Witnessing Sin and Approving It 25/6/26 Narrated Al-'Urs bin 'Amirat al-Kindi: The Prophet (#) said: When sin is done in the earth he who sees it and disapproves  of it will be taken like onel who was not present, but he who is not present and approves of it will be like him who sees. Hasan (AI-Albani) Referencel Sunanxx Abi- .'* Dawud *4345 The Difference Between] Witnessing Sin and Approving It 25/6/26 Narrated Al-'Urs bin 'Amirat al-Kindi: The Prophet (#) said: When sin is done in the earth he who sees it and disapproves  of it will be taken like onel who was not present, but he who is not present and approves of it will be like him who sees. Hasan (AI-Albani) Referencel Sunanxx Abi- .'* Dawud *4345 - ShareChat
#islam guide us in every field of life #Islam and We #points to ponder #सोचने वाली बात
islam guide us in every field of life - गुनाह को देखना और उसे पसंद दोनों में फर्क ೫T _ 25/6/26 अल-्उर्स बिन उमैरह अल-किंदी (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत हैः ননী :৬; ন ক্ধংসাযা: "जब ज़मीन में कोई गुनाह किया जाए॰ तो जो व्यक्ति उसे देखे और उसे बुरा समझे (उसका विरोध करे), वह ऐसा है जैसे वह वहाँ मौजूद ही मौजूद न था। लेकिन जो व्यक्ति वहाँ न हो और फिर भी उस गुनाह को पसंद करे, तो वह ऐसा है जैसे उसने उसे अपनी आँखों से देखा हो।" हसन ( अल-अलबानी) संदर्भः सुनन अबू दाऊद, हदीस ४३४५ गुनाह को देखना और उसे पसंद दोनों में फर्क ೫T _ 25/6/26 अल-्उर्स बिन उमैरह अल-किंदी (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत हैः ননী :৬; ন ক্ধংসাযা: "जब ज़मीन में कोई गुनाह किया जाए॰ तो जो व्यक्ति उसे देखे और उसे बुरा समझे (उसका विरोध करे), वह ऐसा है जैसे वह वहाँ मौजूद ही मौजूद न था। लेकिन जो व्यक्ति वहाँ न हो और फिर भी उस गुनाह को पसंद करे, तो वह ऐसा है जैसे उसने उसे अपनी आँखों से देखा हो।" हसन ( अल-अलबानी) संदर्भः सुनन अबू दाऊद, हदीस ४३४५ - ShareChat