Sarita Mishra
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#🙏गुरु महिमा😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गुरु महिमा😇 - समझ और सही दिशा हो..तो  हासिल कर IF कुछ भी सकता है। जब आपकी चाहत भावनात्मक' हो जाएकि कोई दूसरा आपको समझे या वहाँ वो आपकी कद्र करे. G कभी नहीं मिलता जो आप चाहते हैं बल्कि चो मिलता है जिसकी कल्पना थी नहीं की बहस , मतभेद ।जैसे होती अपमान और दूरियां!सीखः सुकुन खुद से उम्मीद रखने में है, दूसरों से नहीं। p समझ और सही दिशा हो..तो  हासिल कर IF कुछ भी सकता है। जब आपकी चाहत भावनात्मक' हो जाएकि कोई दूसरा आपको समझे या वहाँ वो आपकी कद्र करे. G कभी नहीं मिलता जो आप चाहते हैं बल्कि चो मिलता है जिसकी कल्पना थी नहीं की बहस , मतभेद ।जैसे होती अपमान और दूरियां!सीखः सुकुन खुद से उम्मीद रखने में है, दूसरों से नहीं। p - ShareChat
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🙏गुरु महिमा😇 - शम भगवान एक ही हैँ इसलिए उनके किसी एक रूप से प्रेम करना चाहिए प्रेम बहुत जगह नहीं होता, है बहुत 7 वह केवल एक ही जगह होता 1 जगहों पर तो केवल व्यवहार होता है जैसे रामकृष्ण परमहंस পী কৃড্া ? जी ने माँ काली में ही को देखा , राम जी को देखा और सबको देखा तुलसीदास जी ने केवल श्री राम को ही अपना सर्वस्व माना और कहा, ९सिया राम मय सब जग जानी भगवान fg से प्रेम करने के उनके किसी एक रूप को स्वीकार कर लें और उन्हीं का नाम जपें , उन्हीं का ध्यान करें और उन्हीं की पूजा करें शम भगवान एक ही हैँ इसलिए उनके किसी एक रूप से प्रेम करना चाहिए प्रेम बहुत जगह नहीं होता, है बहुत 7 वह केवल एक ही जगह होता 1 जगहों पर तो केवल व्यवहार होता है जैसे रामकृष्ण परमहंस পী কৃড্া ? जी ने माँ काली में ही को देखा , राम जी को देखा और सबको देखा तुलसीदास जी ने केवल श्री राम को ही अपना सर्वस्व माना और कहा, ९सिया राम मय सब जग जानी भगवान fg से प्रेम करने के उनके किसी एक रूप को स्वीकार कर लें और उन्हीं का नाम जपें , उन्हीं का ध्यान करें और उन्हीं की पूजा करें - ShareChat
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🙏गुरु महिमा😇 - भक्ति और आस्था के पावन पर्व பfள एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएँ f आपकी हर भगवान मनोकामना पूर्ण करे সাসন भगवद गीता भक्ति और आस्था के पावन पर्व பfள एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएँ f आपकी हर भगवान मनोकामना पूर्ण करे সাসন भगवद गीता - ShareChat
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🙏गीता ज्ञान🛕 - पद्मिनी एकादशी व्रत कथा... विस्तार सेःप्राचीन काल में त्रेतायुग में माता अनुसूया ने रानी पद्मिनी को अधिक पुरुषोत्तम मास ) के शुवल महिष्मती नगरी में कार्तवीर्य ( कीर्तिवीर्य ) मास (मलमास यार पक्ष में आने वाली एकादशी का कखे की चत नाम केएक प्रतापी राजा राज्य करते निर्देशानुसार रानी पद्मिनी विथि॰ बताई। माता के उनकी हजारों पल्ियां थीं॰ लेकिन थे॰ ने पूरी निष्ठा ओर विधि विधान के साथ डस वत को॰ पूरा किया॰ ब्रत के किसी भी रानी से उन्हें कोई संतान समापत णर भवन विष्णु साक्षात् प्रकट ढए ओर रानी से वरदान नहीं थी। संतान सुख से वंचित होने के मांगने को कहा। रानी शगवान से নমান दुखी और चिंतित राजा अत्यंत कारण माप।किवेप्ाफ बफले षनक पति Fim विष्णु रहते थे।जिब राजा को कोई उपाय नहीं कार्तवीर्य को॰ बरदान दे॰ ताव sI राजा को एक ऐसा पुत्र प्राप्त होने का आशीर्वाद {51  rl ೩ अपना राजपाट त्याम कर दिया जो तीनों लोकों ्पें अजेय और वीर हो। निकल जंगलों में तपस्या करे के लिए चिष्णु कृपा सेरानी पदिनी को কী 'cl एक पडे़। उनकी प्रिय पत्नी रानी पद्मिनी ने महान पुत्र की॰ प्राप्ति हुई जिसका न कार्तवीर्य अर्जुन ' भी उनका साथ दिया। दोनों गंधमादन का॰ महत्वःरानी dडवत पद्यिनी के नाम पर ही इस तत को पद्यिनी पर्वत पर पहुंच कर कठोर तपस्या   करने Vchcsf m೯l  1Tu. M-uri ೯ ೯ 'i 91 लगे। वर्षों तक तपस्या करे के बाढ भक्त अधिक मासरगे इस व्रत को पूरी शरद्धा से भी॰जिब भगवान प्रसन्न नहीं हुए॰ तो ह॰ उसे uui 7 7  hriri ೯ सभी करता विष्णु की कृपा से मनोवाछित रानी पद्मिनी ने सती Hrl 3ru < 3R ٥ ٧ ٤ ١٢ फाल प्राप्त होते है॰ सहायता   मांगी राधे जी. राधे' पद्मिनी एकादशी व्रत कथा... विस्तार सेःप्राचीन काल में त्रेतायुग में माता अनुसूया ने रानी पद्मिनी को अधिक पुरुषोत्तम मास ) के शुवल महिष्मती नगरी में कार्तवीर्य ( कीर्तिवीर्य ) मास (मलमास यार पक्ष में आने वाली एकादशी का कखे की चत नाम केएक प्रतापी राजा राज्य करते निर्देशानुसार रानी पद्मिनी विथि॰ बताई। माता के उनकी हजारों पल्ियां थीं॰ लेकिन थे॰ ने पूरी निष्ठा ओर विधि विधान के साथ डस वत को॰ पूरा किया॰ ब्रत के किसी भी रानी से उन्हें कोई संतान समापत णर भवन विष्णु साक्षात् प्रकट ढए ओर रानी से वरदान नहीं थी। संतान सुख से वंचित होने के मांगने को कहा। रानी शगवान से নমান दुखी और चिंतित राजा अत्यंत कारण माप।किवेप्ाफ बफले षनक पति Fim विष्णु रहते थे।जिब राजा को कोई उपाय नहीं कार्तवीर्य को॰ बरदान दे॰ ताव sI राजा को एक ऐसा पुत्र प्राप्त होने का आशीर्वाद {51  rl ೩ अपना राजपाट त्याम कर दिया जो तीनों लोकों ्पें अजेय और वीर हो। निकल जंगलों में तपस्या करे के लिए चिष्णु कृपा सेरानी पदिनी को কী 'cl एक पडे़। उनकी प्रिय पत्नी रानी पद्मिनी ने महान पुत्र की॰ प्राप्ति हुई जिसका न कार्तवीर्य अर्जुन ' भी उनका साथ दिया। दोनों गंधमादन का॰ महत्वःरानी dडवत पद्यिनी के नाम पर ही इस तत को पद्यिनी पर्वत पर पहुंच कर कठोर तपस्या   करने Vchcsf m೯l  1Tu. M-uri ೯ ೯ 'i 91 लगे। वर्षों तक तपस्या करे के बाढ भक्त अधिक मासरगे इस व्रत को पूरी शरद्धा से भी॰जिब भगवान प्रसन्न नहीं हुए॰ तो ह॰ उसे uui 7 7  hriri ೯ सभी करता विष्णु की कृपा से मनोवाछित रानी पद्मिनी ने सती Hrl 3ru < 3R ٥ ٧ ٤ ١٢ फाल प्राप्त होते है॰ सहायता   मांगी राधे जी. राधे' - ShareChat
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🙏गीता ज्ञान🛕 - 30) जिंदगी सदा आपकी ऋणी रहेगी महादेव , आपने वहाँ संभाला है जहाँ मैं खुद को संभालने में असमर्थ थी !७ 30) जिंदगी सदा आपकी ऋणी रहेगी महादेव , आपने वहाँ संभाला है जहाँ मैं खुद को संभालने में असमर्थ थी !७ - ShareChat
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