शीला मिश्रा
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शीला मिश्रा
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सागर से भी गहरी मां ममता #like #share #viral #follow
like - <4ಖ112691೨ 311 7 11 C माल्रआचलस्सागरकीममवालह२ड &I=அGTZT तेरी म्मगकी  &+IT ত্মম্যশ্রাত্ िटने डेरा जवल पच्मंजट 91 ~Ts Zए लेरटयाटकोरहराड काऱ्या फत्छेसकून सेहलप TITBIS; TTEITJTT .!=5<5+)~ CTU S)oयrसत्य 72-G1JTGTTE सकतश्ू॰ 3 परगरलदमत्क शीगाद वह ؟[؟ '[চণু कतट हर आरव 9 यट्रजह 2c' खकरि बडी कहार ६ 31/60 | JITch 3fal कोई बन्धु नहीं है। CIச धर्मसे बढकर <4ಖ112691೨ 311 7 11 C माल्रआचलस्सागरकीममवालह२ड &I=அGTZT तेरी म्मगकी  &+IT ত্মম্যশ্রাত্ िटने डेरा जवल पच्मंजट 91 ~Ts Zए लेरटयाटकोरहराड काऱ्या फत्छेसकून सेहलप TITBIS; TTEITJTT .!=5<5+)~ CTU S)oयrसत्य 72-G1JTGTTE सकतश्ू॰ 3 परगरलदमत्क शीगाद वह ؟[؟ '[চণু कतट हर आरव 9 यट्रजह 2c' खकरि बडी कहार ६ 31/60 | JITch 3fal कोई बन्धु नहीं है। CIச धर्मसे बढकर - ShareChat
मां तेरे आंचल में सागर सी ममता लहरायी मेरी पोस्ट #like #share #viral #follow
like - सागर से भी ज्यादा है मां की ममता की गहराई जिसने भी देखा उनकी आंखें भर आईं कोई नहीं मां सकता है मां तेरी ममता की गहराई माना मौत आईऔर लपेट लिया फिरमां ने अपने लाल को गोदी में ही समेट लिया जा जाहिर मौत आ सकती है पर मां के आंचल से वह लाल नहीं ले भले सकती है जीते जी मां इंसान क्या यमराज है भी लड़ सकतीं पर कभी न आंचल से वहलाल अलग कर सकती हैं मां दुर्गा है मां काली है शेर सवारी जो करती मां वहबल वाली है पर जननी मां भी सबसे अधिक बलशाली हैमां तुझे प्रणाम सागर से भी ज्यादा है मां की ममता की गहराई जिसने भी देखा उनकी आंखें भर आईं कोई नहीं मां सकता है मां तेरी ममता की गहराई माना मौत आईऔर लपेट लिया फिरमां ने अपने लाल को गोदी में ही समेट लिया जा जाहिर मौत आ सकती है पर मां के आंचल से वह लाल नहीं ले भले सकती है जीते जी मां इंसान क्या यमराज है भी लड़ सकतीं पर कभी न आंचल से वहलाल अलग कर सकती हैं मां दुर्गा है मां काली है शेर सवारी जो करती मां वहबल वाली है पर जननी मां भी सबसे अधिक बलशाली हैमां तुझे प्रणाम - ShareChat
जय श्री मन नारायण #like #share #viral #follow
like - 8:52 Ltu  *46I * Your month in review 00:20 00:14 8:52 Ltu  *46I * Your month in review 00:20 00:14 - ShareChat
जय माता दी #like #share #viral #follow
like - 6.45 Vడu *46   *! Vyah Karwa.. 0 0 Add a Lens Post Sendto 6.45 Vడu *46   *! Vyah Karwa.. 0 0 Add a Lens Post Sendto - ShareChat
स्वरचित पंक्ति #like #share #viral #follow
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स्वरचित पंक्ति अर्थ गोल मटोल #like #share #viral #follow
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00:31
सच्ची मगर कड़वी बातें #like #share #viral #follow
like - सब्र भगवान नहीं करते वे इंसाफ़ करते हैं ऊपर वाले की लाठी में आवाज छोट भी जोर कि लगतीं मैंने दुनिया देखा है साहब लोग हमेशा अपमानित करने मैं ही अपना गौरव समझते हैंअरे ओ ए नहीं समझते सबसे पहले वे उसी की नजर में गिर जाते हैं जिसका अपमान करते हैं जब कोई व्यक्ति मन में दर्द सहकर अर्थात कटु वचन को सहन करता है तो उसका प्रतिशोध॒ भगवान लेता है जो तुम्हें न अच्छा लगे वो दूसरे को मत बोलिए सब्र भगवान नहीं करते वे इंसाफ़ करते हैं ऊपर वाले की लाठी में आवाज छोट भी जोर कि लगतीं मैंने दुनिया देखा है साहब लोग हमेशा अपमानित करने मैं ही अपना गौरव समझते हैंअरे ओ ए नहीं समझते सबसे पहले वे उसी की नजर में गिर जाते हैं जिसका अपमान करते हैं जब कोई व्यक्ति मन में दर्द सहकर अर्थात कटु वचन को सहन करता है तो उसका प्रतिशोध॒ भगवान लेता है जो तुम्हें न अच्छा लगे वो दूसरे को मत बोलिए - ShareChat
मेरी मां #like #share #viral #follow
like - काश फिर मिल जाओ मां ही श्रृष्टि मां रचनाकर मां ही पालन करता   मां जीवन का मा आधार मां के बिना है जीवन सूना जीवन है बेकार मां के बिना सब जी लेंगे   खुशियों का संसार पर मां के एक बेटी का जीवन लगता भार जीवन में अनमोल है मां काश फिर मिल जाओ मां ही श्रृष्टि मां रचनाकर मां ही पालन करता   मां जीवन का मा आधार मां के बिना है जीवन सूना जीवन है बेकार मां के बिना सब जी लेंगे   खुशियों का संसार पर मां के एक बेटी का जीवन लगता भार जीवन में अनमोल है मां - ShareChat
सच्ची मगर कड़वी बातें #like #share #viral# Follow# #like #viral #share #follow me guys 👍🙏
like - सच्ची मगर कड़वी बातें आरी लकड़ी कैंची साड़़ी   सरौता से सुपाड़ी ये सब काटते हैं जोड़ते नहीं इसी तरह छल बल को उसी प्रकार चली को कुल  लोग मीठा बोलते समय भी व्यक्ति रिस्ते और भरोसे नमक और नीम काली मिर्च खोल देते हैं सामने मूर्ख और मजबूर है लेकिन ये उसकी स्वयं की नादानी है क्योंकि आपके सामने वाला समझता है बोलना भी जानता है पर ओ इस लिए चुप है क्योंकि वो आपका सम्मान करता है वर्ना पानी और वाणी यदि मर्यादा तोड़ दे तो क्या है साहब सभी जानते हैं अर्थात मान दो सम्मान लो सच्ची मगर कड़वी बातें आरी लकड़ी कैंची साड़़ी   सरौता से सुपाड़ी ये सब काटते हैं जोड़ते नहीं इसी तरह छल बल को उसी प्रकार चली को कुल  लोग मीठा बोलते समय भी व्यक्ति रिस्ते और भरोसे नमक और नीम काली मिर्च खोल देते हैं सामने मूर्ख और मजबूर है लेकिन ये उसकी स्वयं की नादानी है क्योंकि आपके सामने वाला समझता है बोलना भी जानता है पर ओ इस लिए चुप है क्योंकि वो आपका सम्मान करता है वर्ना पानी और वाणी यदि मर्यादा तोड़ दे तो क्या है साहब सभी जानते हैं अर्थात मान दो सम्मान लो - ShareChat