कभी खराब न होने वाला औषधि |
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: शहद प्रकृति का एक ऐसा अनमोल उपहार है जो
स्वाद में मीठा, गुणों में औषधीय और विशेषताओं में अद्भुत है। प्राचीन काल से ही शहद को आयुर्वेद में "अमृत" के समान माना #हेल्थ #औषधि गया है। यह शायद दुनिया की एकमात्र ऐसी प्राकृतिक वस्तु है जो कभी खराब नहीं होती। मिस्र के पिरामिडों से हजारों वर्ष पुराना शहद मिला है, जो आज भी सुरक्षित अवस्था में पाया गया। इसका कारण है इसकी प्राकृतिक संरचना, जिसमें नमी बहुत कम होती है और जीवाणुओं के पनपने की संभावना लगभग नहीं के बराबर होती है।
शहद मधुमक्खियों द्वारा फूलों के रस से तैयार किया जाता है। इसमें प्राकृतिक शर्करा, एंजाइम, विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यही कारण है कि शहद केवल मिठास ही नहीं देता, बल्कि शरीर को ऊर्जा भी प्रदान करता है। सुबह गुनगुने पानी के साथ शहद का सेवन पाचन तंत्र को मजबूत करता है, कब्ज दूर करता है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।
औषधि के रूप में शहद का उपयोग सर्दी-खांसी, गले की खराश, घाव भरने और त्वचा संबंधी समस्याओं में सदियों से किया जाता रहा है। इसमें पाए जाने वाले जीवाणुरोधी गुण घावों को जल्दी भरने में सहायक होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार शहद हृदय के लिए लाभकारी है, रक्त को शुद्ध करता है और आंखों की रोशनी बढ़ाने में भी मदद करता है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी के लिए शहद एक सुरक्षित और लाभदायक प्राकृतिक औषधि है।
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77 वां गणतंत्र दिवस |
SA News Chhattisgarh
26-01-2026: गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को भारत के संविधान के लागू होने के उपलक्ष्य मे पूरे देश में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। वर्ष 2026 में भारत का 77 वां गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा। डॉ. बी. आर. अंबेडकर को भारतीय संविधान का जनक माना जाता है।
भारत को 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता मिली। इसके बाद, भारत के संविधान का मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हुई। संविधान को तैयार करने में 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन लगे और अंततः 26 जनवरी 1950 को हमारे देश का संविधान लागू हुआ और भारत एक गणतंत्र बन गया। इसीलिए हम हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं, ताकि इस ऐतिहासिक दिन को याद किया जा सके।
राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों व केंद्रीय मंत्रालयों की झांकियां सांस्कृतिक विरासत, स्वदेशी तकनीक, महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण बदलाव और रक्षा शक्ति को दर्शाएंगी। मायगव और रक्षा मंत्रालय परेड से पहले नागरिकों, विशेषकर युवाओं को, "वंदे मातरम" और "आत्मनिर्भर भारत" की भावना को रचनात्मक रूप से व्यक्त करने में शामिल करने के लिए कला, निबंध, नारा और गीत जैसी राष्ट्रव्यापी ऑनलाइन प्रतियोगिताओं का आयोजन कर रहे हैं। #🌐 राष्ट्रीय अपडेट #गणतंत्र दिवस #🇮🇳गणतंत्र दिवस🇮🇳
बढ़ती मौतों ने बढ़ाई चिंता |
नई दिल्ली | 19-01-2026: जापान में पहली पहचान के डेढ़ दशक
बाद दवा-प्रतिरोधी फंगस कैंडिडा ऑरिस दुनियाभर के अस्पतालों के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है। भारतीय वैज्ञानिकों के नेतृत्व में हुए नए अध्ययन से स्पष्ट हुआ है कि यह फंगस न केवल तेजी से फैल रहा है, बल्कि समय के साथ और अधिक खतरनाक रूप ले रहा है।
कैंडिडा ऑरिस ऐसा फंगस है जो इंसानी त्वचा पर आसानी से बस जाता है और अस्पतालों के वातावरण में लंबे समय तक टिके रहने की क्षमता रखता है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि यह कई एंटीफंगल दवाओं को बेअसर कर देता है, जिससे इलाज जटिल हो जाता है और असर देर से दिखाई देता है। विश्व स्तर पर आक्रामक फंगल संक्रमण तेजी से बढ़ रहे हैं और हर वर्ष लगभग 65 लाख लोग गंभीर संक्रमण की चपेट में आते हैं।
एंटीफंगल इलाज उपलब्ध होने के बावजूद इन मामलों में मृत्यु दर कई बार 50 फीसदी से अधिक दर्ज की जाती है। कैंडिडा ऑरिस प्लास्टिक, धातु और अन्य निर्जीव सतहों पर लंबे समय तक जीवित रह सकता है। यही कारण है कि यह अस्पतालों और आईसीयू में तेजी से फैलता है और संक्रमण का खतरा लगातार बना रहता है।
फंगल संक्रमण के इलाज के लिए वर्तमान में एंटीफंगल दवाओं के चार वर्ग उपलब्ध हैं, जिन्हें बीसवीं सदी के दूसरे हिस्से में विकसित किया गया था। इनका प्रभाव अलग-अलग स्तर का है और कैंडिडा ऑरिस के मामलों में इनमें से कई दवाएं बेअसर भी साबित होती हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि तीन नई दवाएं परीक्षण के चरण में हैं या हाल ही में मंजूरी पा चुकी हैं, जिससे भविष्य में इलाज के विकल्प बढ़ने की उम्मीद जगी है। #🌐 राष्ट्रीय अपडेट #health
जर्जर सड़कों पर जनाक्रोश |
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अम्बिकापुर | 16/1/26 शहर सहित पूरे सरगुजा संभाग में
जर्जर सड़कों को लेकर नागरिकों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। आए दिन विरोध प्रदर्शनों के बावजूद सड़क मरम्मत और नए निर्माण को लेकर जनप्रतिनिधियों व प्रशासन की उदासीनता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसी बीच शासन-प्रशासन तातापानी और मैनपाट महोत्सव की तैयारियों में व्यस्त है, जिस पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जबकि शहर की सड़कें बदहाल हालत में हैं।
इसी मुद्दे को लेकर मंगलवार को सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश #cg ambikapur #छत्तीसगढ़ अंबिकापुर #अंबिकापुर मिश्रा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में नागरिकों ने अम्बिकापुर के घड़ी चौक में प्रदर्शन किया। हाथों में बैनर-पोस्टर लेकर प्रदर्शनकारियों ने सड़कों की तत्काल मरम्मत और नए निर्माण की मांग उठाई। नागरिकों का कहना था कि बरसात समाप्त होने के बाद सड़कों के सुधार का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
प्रदर्शन के दौरान देवीगंज रोड और सदर रोड जैसे प्रमुख मार्गों की जर्जर स्थिति को लेकर खास नाराजगी देखने को मिली। इन मार्गों पर गड्डों और टूटे हिस्सों के कारण रोजाना दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है और आमजन को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
इस अवसर पर कैलाश मिश्रा ने कहा, "महोत्सव तो लगातार मनाए जा रहे हैं, लेकिन सड़क महोत्सव कब मनाया जाएगा?" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बजट में जिन सड़कों को डिवाइडर सहित फोरलेन बनाने की घोषणा की गई थी, उनके लिए न तो पर्याप्त वित्तीय प्रावधान किया गया और न ही काम शुरू हुआ।












