इन श्लोकों में अर्जुन का विषाद
पूर्ण रूप से प्रकट हो जाता है। यह युद्ध केवल शत्रुओं से नहीं, अपने ही लोगों से है।
अर्जुन समझता है कि राज्य, सत्ता और भोग— सब व्यर्थ हो जाते हैं यदि उनकी कीमत
रिश्तों और विवेक से चुकानी पड़े।
📌 *जो हमें अपनों से छीन ले, वह विजय नहीं कहलाती।* #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏गुरु महिमा😇 #🕉️सनातन धर्म🚩