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Different colors Muzaffar nagar Uttar pradesh
#🌞 Good Morning🌞 आज की तस्वीर
🌞 Good Morning🌞 - {LntdIlL {LntdIlL - ShareChat
#🌞 Good Morning🌞 व्यंग
🌞 Good Morning🌞 - महिला आरशषण की मृगतृष्णा की उलझन रतीय राजनीति के रंगमंच पर इन থা दिनों एक नया अध्याय जन्म लेते ही दम तोड़ दिया। जिसका नाम है नारी शक्ति वंदन और आरक्षण का लेप चंदन। इस अध्याय की पटकथा इतनी  बेमिसाल है कि इसमें सस्पेंस का ऐसा तड़का  लगाया है जिसे देखकर कब्र में लेटी भूतनियां  करवटें बदल वापिस लौटना चाहें। वर्षों से सूर्यदीप कुशवाहा  धूल फांक रही महिला आरक्षण की फाइल को अचानक चिराग रगड़ कर निकाला गया उसपे पड़ी धूल झाड़ा गया और फिर बड़े तीखी नजर गाजे-बाजे के साथ उसे कानून का जामा पहनाने की असफल कोशिश की गई। लेकिन ठहरिए, यह कानून अभी हवा में है, जमीन पर उतरने के लिए इसे विपक्ष को दानवरूप में पेश करना है। हमारे राजनेता महिला सशक्तिकरण के इतने भूखे हैं कि वे महिलाओं को तक कि वर्तमान में कुर्सियों आरक्षण तो देना चाहते हैं , लेकिन तब तक नहीं जब पर चिपके माननीयों की दाढ़ी सफेद न हो जाए। यह आरक्षण बिल्कुल वैसा ही  है जैसे किसी जेब फटिल्ले भूखे व्यक्ति को पांच सितारा होटल का मेन्यू कार्ड थमा दिया जाए और कहा जाए, भईया ! खाना तो शानदार है, बस पैसे हों। वर्तमान परिदृश्य में महिला आरक्षण एक ऐसी भविष्य की तारीख वाला चेक बन गया है, जिसे लिए महिलाओं को अभी कई वर्षों तक बैंक की পুনান ক  স বরভা % TTT राजनीति मंचों से दहाड़ते हैं कि अब लाइन रहना हागा। चूल्हा चौका छोड़ो, संसद संभालो, लेकिन जैसे ही टिकट बांटने का समय आता है. उन्हें अचानक याद आ जाता है कि अमुक सीट पर तो बाहुबली का पलडा भारी है। विडंबना देखिए, जिस देश में देवी की पूजा के लिए पंडाल सजते हैं, वहां  संसद की ३३ प्रतिशत सीटों के लिए तारीख पर तारीख मिलती है। नेता जी कहते हैं, बहनों , हमने तुम्हें अधिकार दे दिया। बहनें पूछती हैं , लागू कब होगा ? नेता जी मुस्कुरा कर कहते हैं कि जब विपक्ष का साथ मिले। आरक्षण के सितारे  गर्दिश से निकलेंगे और उस दिन सूरज उगेगा। यानी सा़फ है-ना नौ मन तेल होगा, ना राधा नाचेगी। एक और दिलचस्प पहलू पंचायत मॉडल का है। अगर आरक्षण मिल भी गया, तो डर इस बात का है कि कहीं संसद में भी सांसद पति और विधायक पति का कल्चर न पनप जाए। सदन में महिला माननीय मौन बैठी होंगी और पोछे से उनके पति परमेश्वर पर्ची थमा रहे होँगे। आरक्षण का असली मकसद तो तब पूरा होगा जब महिला केवल एक चेहरा न बनकर निर्णय लेने वाली ताकत बनेगी। महिला आरक्षण लॉलीपॉप की तरह है, जिसे दिखाकर वोट बटोरे जा रहे हैं । महिलाएं खुश हैं कि उन्हें कुछमिला है, और पुरुष राजनेता खुश हैं कि उन्हें फिलहाल कुछ देना नहीं पड़ा है। राजनीति का यह सर्कस जारी है, जहां शेरनियां पिंजरे के बाहर खडी होकर अपनी बारी का इंतजार कर रही हैं, और रिंगमास्टर अभी नियमों की किताब में खोया है। अंत में यही कहा जा सकता है कि नारी शक्ति का अहसास तो हो गया है, बस तब तक के लिए महिलाएं खास हैं | आरक्षण की मृगतृष्णा में उलझन की सुलझन का इंतजार है। महिला आरशषण की मृगतृष्णा की उलझन रतीय राजनीति के रंगमंच पर इन থা दिनों एक नया अध्याय जन्म लेते ही दम तोड़ दिया। जिसका नाम है नारी शक्ति वंदन और आरक्षण का लेप चंदन। इस अध्याय की पटकथा इतनी  बेमिसाल है कि इसमें सस्पेंस का ऐसा तड़का  लगाया है जिसे देखकर कब्र में लेटी भूतनियां  करवटें बदल वापिस लौटना चाहें। वर्षों से सूर्यदीप कुशवाहा  धूल फांक रही महिला आरक्षण की फाइल को अचानक चिराग रगड़ कर निकाला गया उसपे पड़ी धूल झाड़ा गया और फिर बड़े तीखी नजर गाजे-बाजे के साथ उसे कानून का जामा पहनाने की असफल कोशिश की गई। लेकिन ठहरिए, यह कानून अभी हवा में है, जमीन पर उतरने के लिए इसे विपक्ष को दानवरूप में पेश करना है। हमारे राजनेता महिला सशक्तिकरण के इतने भूखे हैं कि वे महिलाओं को तक कि वर्तमान में कुर्सियों आरक्षण तो देना चाहते हैं , लेकिन तब तक नहीं जब पर चिपके माननीयों की दाढ़ी सफेद न हो जाए। यह आरक्षण बिल्कुल वैसा ही  है जैसे किसी जेब फटिल्ले भूखे व्यक्ति को पांच सितारा होटल का मेन्यू कार्ड थमा दिया जाए और कहा जाए, भईया ! खाना तो शानदार है, बस पैसे हों। वर्तमान परिदृश्य में महिला आरक्षण एक ऐसी भविष्य की तारीख वाला चेक बन गया है, जिसे लिए महिलाओं को अभी कई वर्षों तक बैंक की পুনান ক  স বরভা % TTT राजनीति मंचों से दहाड़ते हैं कि अब लाइन रहना हागा। चूल्हा चौका छोड़ो, संसद संभालो, लेकिन जैसे ही टिकट बांटने का समय आता है. उन्हें अचानक याद आ जाता है कि अमुक सीट पर तो बाहुबली का पलडा भारी है। विडंबना देखिए, जिस देश में देवी की पूजा के लिए पंडाल सजते हैं, वहां  संसद की ३३ प्रतिशत सीटों के लिए तारीख पर तारीख मिलती है। नेता जी कहते हैं, बहनों , हमने तुम्हें अधिकार दे दिया। बहनें पूछती हैं , लागू कब होगा ? नेता जी मुस्कुरा कर कहते हैं कि जब विपक्ष का साथ मिले। आरक्षण के सितारे  गर्दिश से निकलेंगे और उस दिन सूरज उगेगा। यानी सा़फ है-ना नौ मन तेल होगा, ना राधा नाचेगी। एक और दिलचस्प पहलू पंचायत मॉडल का है। अगर आरक्षण मिल भी गया, तो डर इस बात का है कि कहीं संसद में भी सांसद पति और विधायक पति का कल्चर न पनप जाए। सदन में महिला माननीय मौन बैठी होंगी और पोछे से उनके पति परमेश्वर पर्ची थमा रहे होँगे। आरक्षण का असली मकसद तो तब पूरा होगा जब महिला केवल एक चेहरा न बनकर निर्णय लेने वाली ताकत बनेगी। महिला आरक्षण लॉलीपॉप की तरह है, जिसे दिखाकर वोट बटोरे जा रहे हैं । महिलाएं खुश हैं कि उन्हें कुछमिला है, और पुरुष राजनेता खुश हैं कि उन्हें फिलहाल कुछ देना नहीं पड़ा है। राजनीति का यह सर्कस जारी है, जहां शेरनियां पिंजरे के बाहर खडी होकर अपनी बारी का इंतजार कर रही हैं, और रिंगमास्टर अभी नियमों की किताब में खोया है। अंत में यही कहा जा सकता है कि नारी शक्ति का अहसास तो हो गया है, बस तब तक के लिए महिलाएं खास हैं | आरक्षण की मृगतृष्णा में उलझन की सुलझन का इंतजार है। - ShareChat
#🌞 Good Morning🌞 डंकी रूट
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#🌞 Good Morning🌞 शीतल पेय
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#🌞 Good Morning🌞 पढाई खर्च और नौकरी
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#🌞 Good Morning🌞 पत्रिका में प्रकाशित
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#🌞 Good Morning🌞 होरमुज संकट
🌞 Good Morning🌞 - 349<  24-04-2026 ঐনিক भास्कर युद्ध से सहमे होर्मुज के लाल  पर लोगों की जार, जंग और जिंदगी की ர எR ag3i अनसुनी  होर्मुज की अनोखी दुनियाः ` हवा के जिन्न' से बचने के लिए महिलाएं मूंछों जैसा नकाब पहनती हैं, पेड़ेों को ठिकाना मानते हैं लोग; बम से बचने की दुआएं कुछलोग पेड़ों परही रहतेहैं तोकुछ कुछभली हवाएं शैतानी जिन्न वली शैतानी आत्माओं काडर न्यूयाक  भारकर न्यूज पा्यता ये केश्म द्वीप को रहने वाली सलिमेर हें। उन्होने मूछों जैेसा नकाब पहन रखा केश्म और होमुज के कुछ लोग पेडों पर ही रहते रें॰ क्योकि ऐसी मान्यत अमेरका ओर ईरान कै बोच छिडी जंग  है। यह हवा को बुरी आत्माओं से बचने का जतन हे। दरअसल, मान्यता " के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य चर्चा है कि कुछ तरह के पेड़ों के नीचे सोने से शैतानी आत्मा पकड लेेगी। यानी है कि कुछ हवाएं शैतानी या जिन्न में है। लेकिन ईरान के दक्षिणी द्वीप हवा की शकित व्यकि्त पर हावी हो सकती हे। अफशार ने अपनी किताब  वालो होती है जवकि कुछ भलो। केश्म और होर्मुज में रहने बाले लोगों को जिंदगो और उनके जोने का अनूठा  जार " नाम को हवा के चारे में कहा  मे केश्म और होर्मुज स्पोक द चिंड अंदाज कौतृहल पैदा करता है। खनिजों जाता है कि वह शरोर में घुस सकती  को अनूठी मान्यताओं और आस्थाओं से भरपूर यहां को रेत लाल  है। बेचैनी या बोमारी दे सकती है। के नारे में बताया है। अफशार बताती गुलावी नारंगी जैसे चमकते रं। जमोन जितनो हैं कि कई निवासी अफ्रीको मूल के - ये नकान ' जार' को धोखा देनेके विविधरंगी और मनमोहक है॰ उतने हो हैं। पर यह पहचान अक्सर छिपाई  लिए पहना जाता है। मकसद यह कि आकर्षक लोग, संस्कृति और पारंपरिक दिखे। मान्यना के जाती हे या नकारी जाती हे। वजह- पुरुप जेसी  मरिला  विश्वास आस्था रे। इगना फोटोग्राफर  मरिलाए ॅजार के प्रति ज्यादा असुरक्षित होती ह। अफशार कहता  लबे समय को सामाजिक श्रेणिया हं। जमना कै बलिन में रह रही अफशार  मृँताबिकः बताती हें कि अब टुकडों में वहा की खबरें मिलती हं। भारी सैन्य मौजूदगी।  हवाओं से जुड़ी मान्यताओं की जड़ें पुरानी हे। इन द्वोपों पर ईरानी, अख रोदा अफशार ने यहा को संस्कति और यूरोपीय ताकतों ने दावा किया। इनके तटों पर व्यापारी आए। सैनिक आए।  आस्था मान्यताओं को बखूवी बताया  बमवारी। वर चताता र॰कि एक रिश्तेदार ने बमों के असर को ऐसे बयान प्रवासी आए। पूर्वी अफ़्रोका, अरब प्रायद्वीप और भारतीय उपमहाद्वीप के बीच  भूकंप की तरह शरीर के आर॰पार गुजरने जैसा लगता है। बर्मों- हे। कछको अंधविश्वास गान सकते किया यह से बचने को दुआएं करते हैं।  ऐं लेकिन यहो उनका जीवन ऐव आवाजाहो होती रही। साथमें भपाए आई। रिवाज व अनोखे विश्वास आए। arscl 349<  24-04-2026 ঐনিক भास्कर युद्ध से सहमे होर्मुज के लाल  पर लोगों की जार, जंग और जिंदगी की ர எR ag3i अनसुनी  होर्मुज की अनोखी दुनियाः ` हवा के जिन्न' से बचने के लिए महिलाएं मूंछों जैसा नकाब पहनती हैं, पेड़ेों को ठिकाना मानते हैं लोग; बम से बचने की दुआएं कुछलोग पेड़ों परही रहतेहैं तोकुछ कुछभली हवाएं शैतानी जिन्न वली शैतानी आत्माओं काडर न्यूयाक  भारकर न्यूज पा्यता ये केश्म द्वीप को रहने वाली सलिमेर हें। उन्होने मूछों जैेसा नकाब पहन रखा केश्म और होमुज के कुछ लोग पेडों पर ही रहते रें॰ क्योकि ऐसी मान्यत अमेरका ओर ईरान कै बोच छिडी जंग  है। यह हवा को बुरी आत्माओं से बचने का जतन हे। दरअसल, मान्यता " के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य चर्चा है कि कुछ तरह के पेड़ों के नीचे सोने से शैतानी आत्मा पकड लेेगी। यानी है कि कुछ हवाएं शैतानी या जिन्न में है। लेकिन ईरान के दक्षिणी द्वीप हवा की शकित व्यकि्त पर हावी हो सकती हे। अफशार ने अपनी किताब  वालो होती है जवकि कुछ भलो। केश्म और होर्मुज में रहने बाले लोगों को जिंदगो और उनके जोने का अनूठा  जार " नाम को हवा के चारे में कहा  मे केश्म और होर्मुज स्पोक द चिंड अंदाज कौतृहल पैदा करता है। खनिजों जाता है कि वह शरोर में घुस सकती  को अनूठी मान्यताओं और आस्थाओं से भरपूर यहां को रेत लाल  है। बेचैनी या बोमारी दे सकती है। के नारे में बताया है। अफशार बताती गुलावी नारंगी जैसे चमकते रं। जमोन जितनो हैं कि कई निवासी अफ्रीको मूल के - ये नकान ' जार' को धोखा देनेके विविधरंगी और मनमोहक है॰ उतने हो हैं। पर यह पहचान अक्सर छिपाई  लिए पहना जाता है। मकसद यह कि आकर्षक लोग, संस्कृति और पारंपरिक दिखे। मान्यना के जाती हे या नकारी जाती हे। वजह- पुरुप जेसी  मरिला  विश्वास आस्था रे। इगना फोटोग्राफर  मरिलाए ॅजार के प्रति ज्यादा असुरक्षित होती ह। अफशार कहता  लबे समय को सामाजिक श्रेणिया हं। जमना कै बलिन में रह रही अफशार  मृँताबिकः बताती हें कि अब टुकडों में वहा की खबरें मिलती हं। भारी सैन्य मौजूदगी।  हवाओं से जुड़ी मान्यताओं की जड़ें पुरानी हे। इन द्वोपों पर ईरानी, अख रोदा अफशार ने यहा को संस्कति और यूरोपीय ताकतों ने दावा किया। इनके तटों पर व्यापारी आए। सैनिक आए।  आस्था मान्यताओं को बखूवी बताया  बमवारी। वर चताता र॰कि एक रिश्तेदार ने बमों के असर को ऐसे बयान प्रवासी आए। पूर्वी अफ़्रोका, अरब प्रायद्वीप और भारतीय उपमहाद्वीप के बीच  भूकंप की तरह शरीर के आर॰पार गुजरने जैसा लगता है। बर्मों- हे। कछको अंधविश्वास गान सकते किया यह से बचने को दुआएं करते हैं।  ऐं लेकिन यहो उनका जीवन ऐव आवाजाहो होती रही। साथमें भपाए आई। रिवाज व अनोखे विश्वास आए। arscl - ShareChat
#🌞 Good Morning🌞 शख्शियत
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