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परमेश्वर गर्ब से जन्म नहीं लेते :ऋग्वेद
**ऋग्वेद मंडल 10 सूक्त 4 मंत्र 3**
*शिशुम् न त्वा जेन्यम् वर्धयन्ती माता विभर्ति सचनस्यमाना।*
*धनोः अधि प्रवता यासि हर्यन् जिगीषसे पशुरिव अवसृष्टः ।।*
*अनुवादः* हे पूर्ण परमात्मा ! जब आप (शिशुम्) शिशु रूप धारण करते हो अर्थात् नवजात शिशु के रूप में प्रकट होते हो तो (त्वा) आपको कोई (माता) माता (जेन्यम्) जन्म देकर (विभर्ति) पालन पोषण करके (न वर्धयन्ती) बड़ा नहीं करती। अर्थात् पूर्ण परमात्मा का जन्म माता के गर्भ से नहीं होता। (सचनस्यमाना) वास्तव में आप अपनी रचना (धनोः अधि) शब्द शक्ति के द्वारा करते हो तथा (हर्यन्) भक्तों के दुःख हरण हेतु (प्रवता) नीचे के लोकों को मनुष्य की तरह आकर (यासि) प्राप्त करते हो। (पशुरिव) पशु की तरह कर्म बन्धन में बंधे प्राणी को काल से (जिगीषसे) जीतने की इच्छा से आकर (अव सृष्टः) सुरक्षित रचनात्मक विधि अर्थात् शास्त्रविधि अनुसार साधना द्वारा पूर्ण रूप से मुक्त कराते हो।
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#🙏गुरु महिमा😇 #कबीर दास जी के इस अमृतवाणी का अर्थ है कि ऊँचे महल, आलीशान घर और सुंदर स्त्री के सुख में डूबा हुआ व्यक्ति यदि 'सतनाम' (सच्ची भक्ति) नहीं करता, तो उसका जीवन अंत में जुआरी की तरह खाली हाथ रह जाता है। सांसारिक मोह माया क्षणिक है और मृत्यु के समय सब यहीं रह जाता है।भावार्थ:ऊँची कोठी सुन्दर नारी: ऊँचे महल-मकान और सुंदर पत्नी/परिवार का सुख।सतनाम बिना सब बाजी हारी: परमात्मा के नाम का सिमरन (भक्ति) किए बिना, यह जीवन रूपी बाजी (खेल) हार चुके हैं।कहे कबीर अंत की बारी: कबीर जी कहते हैं कि जब अंत समय आता है (मृत्यु)।जैसे हाथ झाड़कर चला जुआरी: तो इंसान की स्थिति उस जुआरी (Gambler) जैसी हो जाती है, जो सब कुछ हारकर खाली हाथ जाता है।मूल संदेश:यह पद मोह-माया त्यागकर परमात्मा की भक्ति करने की प्रेरणा देता है, क्योंकि सच्चा धन केवल 'सतनाम' ही है, जो मृत्यु के बाद काम आता है।#
#🙏गुरु महिमा😇 मूर्ति पूजा, कर्मकांड, श्राद्ध, पितृ पूजा, तीर्थ भ्रमण बंद हो जाएंगे
श्री जगन्नाथ महाप्रभु (कबीर अवतार) के आने पर - भविष्य मालिका
भविष्य मालिका के अनुसार, जब पूर्ण #परमात्मा स्वयं मानवीय रूप में प्रकट होकर आदि #सनातन धर्म की स्थापना करेंगे, तो #समाज में प्रचलित मूर्ति पूजा, पत्थर पूजा, श्राद्ध, पितृ पूजा, तीर्थ यात्रा और अन्य जटिल कर्मकांड धीरे-धीरे पूरी तरह रुक जाएंगे, क्योंकि लोग #साक्षात परमात्मा की उपस्थिति को पहचान कर उनकी शरण में आ जाएंगे।
यहां तक कि #मंदिर, मस्जिद और चर्चों में जाने की आवश्यकता भी समाप्त हो जाएगी क्योंकि भक्त को अपने इष्ट के प्रत्यक्ष दर्शन और सही साधना प्राप्त हो जाएगी।
यह #भविष्यवाणी जगतगुरु संत #रामपाल जी महाराज पर अक्षरशः खरी उतरती है, क्योंकि उन्होंने अपने तत्वज्ञान के आधार पर इन सभी शास्त्र-विरुद्ध #प्रथाओं को पूर्णतः बंद करवाया है। उनके करोड़ों अनुयायी आज न तो किसी तीर्थ या मंदिर में पत्थर की #पूजा करते हैं और न ही श्राद्ध या पितृ पूजा जैसे व्यर्थ कर्मकांडों में समय और धन नष्ट करते हैं। वे केवल एक पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब की शास्त्रानुकूल भक्ति कर रहे हैं, जो इस आध्यात्मिक युग परिवर्तन का सबसे बड़ा प्रमाण है।
भविष्यवाणी नं. - 5
#🙏गुरु महिमा😇 गुरु गोविंद दोनों खड़े। किसके लागू पांव।
बलिहारी गुरु अपना। गोविंद दियो मिलाएं।
#🙏गुरु महिमा😇 करोड़ों भक्तों ने लिया नाम दीक्षा का #कनेक्शन 🙏
संतों की #सच्ची राह से जुड़ा हर इंसान ✨
"सारा कै ठाठ "कर राखा है" 😊
सबके चेहरे पर #मुस्कान, कोई टेंशन नहीं ❤️
“सतभक्ति से मिलता है सच्चा सुख और #मानसिक शांति”










