Shilpa Mohit Saini
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#❤️जीवन की सीख #🚩जय श्री खाटूश्याम 🙏
❤️जीवन की सीख - सास का होना भी जरुरी है क्योंकि उनके रहते कोई भी रिश्तेदार हम पर हावी नहीं होता.. जिनके घरों मे सास नहीं होती उनके घरों मे हर कोई सास बनने की कोशिश करता है माँ जीवन देती है सास जीना सिखाती है..!! १७८ सास का होना भी जरुरी है क्योंकि उनके रहते कोई भी रिश्तेदार हम पर हावी नहीं होता.. जिनके घरों मे सास नहीं होती उनके घरों मे हर कोई सास बनने की कोशिश करता है माँ जीवन देती है सास जीना सिखाती है..!! १७८ - ShareChat
#🚩जय श्री खाटूश्याम 🙏
🚩जय श्री खाटूश्याम 🙏 - "समय की ताक़त तो देखिए. 443 लिए কল নক্ষ নিমক लड़ रहे थे, आज वह भी आप नहीं चाहते " !! कौन कितना सही और कितना ग़लत है, इसमें वक्त बर्बाद करने के बजाय 'अपने काम सही हो उस पर ही ध्यान दो' , इसीलिए तो... कहते हैं कि " खुद की ज़िंदगी में क्या सही और ग़लत है" इसकी परवाह करो तो आप सफ़ल हो जाओगे।।। ध्यान रहे कि अपना कीमती वक्त बर्बाद मत करो दिखावे में, वर्ना ऐसा भी वक्त आएगा जब जिंदगी बितानी पड़ेगी पछतावे में।।l ओम शांति "समय की ताक़त तो देखिए. 443 लिए কল নক্ষ নিমক लड़ रहे थे, आज वह भी आप नहीं चाहते " !! कौन कितना सही और कितना ग़लत है, इसमें वक्त बर्बाद करने के बजाय 'अपने काम सही हो उस पर ही ध्यान दो' , इसीलिए तो... कहते हैं कि " खुद की ज़िंदगी में क्या सही और ग़लत है" इसकी परवाह करो तो आप सफ़ल हो जाओगे।।। ध्यान रहे कि अपना कीमती वक्त बर्बाद मत करो दिखावे में, वर्ना ऐसा भी वक्त आएगा जब जिंदगी बितानी पड़ेगी पछतावे में।।l ओम शांति - ShareChat
#🚩जय श्री खाटूश्याम 🙏
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#🚩जय श्री खाटूश्याम 🙏
🚩जय श्री खाटूश्याम 🙏 - 2322113 02 2024] [तर्जःमेरी सुनकर करुण पुकार] मोहे चढ़ गया श्याम का रंग,सखी री में क्या करूँ क्या करूँ जी में क्या करुँ में कैसे रहूँ में॰ श्याम बिन अब पीडा़ मन की किसको कहुँ में॰ मोहपे छाई ऐसी उमंग सखी री में क्या करूँ।। श्याम नाम की ओढ़ चुनरिया, हुई हुई में तो हुई रे बावरिया, जैसे पी ली हो मैंने भंग, सखी री में क्या करूँ।। श्याम नाम की मेहंदी लगाऊँ , बालों में अब गजरा सजाऊं चाहे दुनिया रह जाये दंग, सखी री में क्या करुँ।। श्याम पीया की दुल्हन बन गई 'केशव" तेरे रंग में रंग गई। मोहे मिला श्याम का संग सखी री में क्या करँ।। भजन लेखकः मनीष शर्मा " केशव  जोरहाट आसााम 9854429098 2322113 02 2024] [तर्जःमेरी सुनकर करुण पुकार] मोहे चढ़ गया श्याम का रंग,सखी री में क्या करूँ क्या करूँ जी में क्या करुँ में कैसे रहूँ में॰ श्याम बिन अब पीडा़ मन की किसको कहुँ में॰ मोहपे छाई ऐसी उमंग सखी री में क्या करूँ।। श्याम नाम की ओढ़ चुनरिया, हुई हुई में तो हुई रे बावरिया, जैसे पी ली हो मैंने भंग, सखी री में क्या करूँ।। श्याम नाम की मेहंदी लगाऊँ , बालों में अब गजरा सजाऊं चाहे दुनिया रह जाये दंग, सखी री में क्या करुँ।। श्याम पीया की दुल्हन बन गई 'केशव" तेरे रंग में रंग गई। मोहे मिला श्याम का संग सखी री में क्या करँ।। भजन लेखकः मनीष शर्मा " केशव  जोरहाट आसााम 9854429098 - ShareChat
#🚩जय श्री खाटूश्याम 🙏
🚩जय श्री खाटूश्याम 🙏 - 231]2]29-01-2024] [तर्जःम्हाने पिहरीयो सो लागे खाटू धाम] म्हाने खाटू तो बुलाले बाबा श्याम, थांरी याद घणी आवे हे।। जल बिन मछली तड़पे जईया तड़पु दिन ओर रात, कागलो मुंडेर पे बैठ्यो , करुँ बिसु थांरी बात, म्हाने जल्दी स्युं भिजवा दे रे पैगाम , थांरी याद....० 0 संगी साथी आवे थारें जीव जलावे , म्हारों म्हासुं कांई बेर हे थाँरो, क्युं ना मन्नै बुलावे, कदै ले ले तु भी होंठा सु म्हारों नाम, थांरी याद..... "केशव" ईब तो बतादे म्हाने , कद बारी आसी, म्हारी मनड़े ने बस देऊँ तसल्ली इबकी बार बुलासी, म्हाने करनो हे जी थांसु राम-राम, थांरी याद.. भजन लेखकः मनीष शर्मा "केशव" जोरहाट (आसाम) 9854429898 7002084982 231]2]29-01-2024] [तर्जःम्हाने पिहरीयो सो लागे खाटू धाम] म्हाने खाटू तो बुलाले बाबा श्याम, थांरी याद घणी आवे हे।। जल बिन मछली तड़पे जईया तड़पु दिन ओर रात, कागलो मुंडेर पे बैठ्यो , करुँ बिसु थांरी बात, म्हाने जल्दी स्युं भिजवा दे रे पैगाम , थांरी याद....० 0 संगी साथी आवे थारें जीव जलावे , म्हारों म्हासुं कांई बेर हे थाँरो, क्युं ना मन्नै बुलावे, कदै ले ले तु भी होंठा सु म्हारों नाम, थांरी याद..... "केशव" ईब तो बतादे म्हाने , कद बारी आसी, म्हारी मनड़े ने बस देऊँ तसल्ली इबकी बार बुलासी, म्हाने करनो हे जी थांसु राम-राम, थांरी याद.. भजन लेखकः मनीष शर्मा "केशव" जोरहाट (आसाम) 9854429898 7002084982 - ShareChat
#🚩जय श्री खाटूश्याम 🙏
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#🚩जय श्री खाटूश्याम 🙏
🚩जय श्री खाटूश्याम 🙏 - 30 वहम की बीमारी एक व्यक्ति को भ्रम हो गया कि वह मनुष्य नहीं है बल्कि अनाज का दाना है। बह बाहर निकलता है तो पक्षियों को देखकर छिप जाता है कि कहीं वे उसे चुग न लें। चक्की के पास से गुजरता तो उसका दिल धड़कने लगता है कि कहीं बह पिस न जाए, बारिश | होती है तो उसे डर लगता है कि कहीं उसमें से अंकुर न फूट जाएं। आखिर उसे एक मनोरोग विशेषज्ञ के पास ले जाया गया। काफी देर तक संवाद करने के बाद विशेषज्ञ उसे यह यकीन दिलाने में सफल हो गया कि बह अनाज नहीं मनुष्य है। क्योंकि बोलना , चलना , सोचना ऐसे तमाम काम हैं, जो वह कर सकता है, लेकिन एक अनाज का दाना नहीं कर सकता। वह विशेषज्ञ का आभार प्रकट करके चला गया। दो ही मिनट बीते थे कि वह भागता हुआ आया और बिशेषज्ञ की मेज के नीचे छिप गया। उसने पूछा कि क्या हुआ तो मरीजॅ ने बताया कि बाहर एक मुर्गा है, जो उसकी ओर बढ रहा था। विशेषज्ञ ने उसे डांटा और बोला कि तुम्हें पता है। कि तुम अनाज नहीं बल्कि एक इंसान हो। आपकी बात सही है। साहव, वह हांफते हुए बोला , मुझे तो आपने समझा दिया, लेकिन मुगें को तो यह बात नहीं पता होगी न। सार- बहम का कोई इलाज नहीं होता। যল্লনাক্;ন্মী} ক্ী ব্বুমী  हमें सिखाती है कि तर्क और समझ से किसी की सीखः यह कहानी किया जा सकता है, लेकिन अगर किसी के मन में डर या वहम गहरा बैठ जाए, 1 तरह से निकालना बहुत मुश्किल होता है। आत्म विश्वास और सही ज्ञान ही बहम का असली समाथान है। हमारे पेज से जुड़ने के लिए फॉलो करना न भूले 30 वहम की बीमारी एक व्यक्ति को भ्रम हो गया कि वह मनुष्य नहीं है बल्कि अनाज का दाना है। बह बाहर निकलता है तो पक्षियों को देखकर छिप जाता है कि कहीं वे उसे चुग न लें। चक्की के पास से गुजरता तो उसका दिल धड़कने लगता है कि कहीं बह पिस न जाए, बारिश | होती है तो उसे डर लगता है कि कहीं उसमें से अंकुर न फूट जाएं। आखिर उसे एक मनोरोग विशेषज्ञ के पास ले जाया गया। काफी देर तक संवाद करने के बाद विशेषज्ञ उसे यह यकीन दिलाने में सफल हो गया कि बह अनाज नहीं मनुष्य है। क्योंकि बोलना , चलना , सोचना ऐसे तमाम काम हैं, जो वह कर सकता है, लेकिन एक अनाज का दाना नहीं कर सकता। वह विशेषज्ञ का आभार प्रकट करके चला गया। दो ही मिनट बीते थे कि वह भागता हुआ आया और बिशेषज्ञ की मेज के नीचे छिप गया। उसने पूछा कि क्या हुआ तो मरीजॅ ने बताया कि बाहर एक मुर्गा है, जो उसकी ओर बढ रहा था। विशेषज्ञ ने उसे डांटा और बोला कि तुम्हें पता है। कि तुम अनाज नहीं बल्कि एक इंसान हो। आपकी बात सही है। साहव, वह हांफते हुए बोला , मुझे तो आपने समझा दिया, लेकिन मुगें को तो यह बात नहीं पता होगी न। सार- बहम का कोई इलाज नहीं होता। যল্লনাক্;ন্মী} ক্ী ব্বুমী  हमें सिखाती है कि तर्क और समझ से किसी की सीखः यह कहानी किया जा सकता है, लेकिन अगर किसी के मन में डर या वहम गहरा बैठ जाए, 1 तरह से निकालना बहुत मुश्किल होता है। आत्म विश्वास और सही ज्ञान ही बहम का असली समाथान है। हमारे पेज से जुड़ने के लिए फॉलो करना न भूले - ShareChat
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