Doodle & dots
ShareChat
click to see wallet page
@544205695
544205695
Doodle & dots
@544205695
let's learn how to make mehandi
#☝ मेरे विचार #🙏गीता ज्ञान🛕 #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #❤️जीवन की सीख
☝ मेरे विचार - ShareChat
00:27
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏गीता ज्ञान🛕 #☝ मेरे विचार
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - ShareChat
00:09
#❤️जीवन की सीख #☝ मेरे विचार #🙏गीता ज्ञान🛕 #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
❤️जीवन की सीख - ShareChat
00:43
#❤️जीवन की सीख #☝ मेरे विचार #🙏गीता ज्ञान🛕 #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
❤️जीवन की सीख - ShareChat
00:58
#📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏गीता ज्ञान🛕 #☝ मेरे विचार #❤️जीवन की सीख
📖जीवन का लक्ष्य🤔 - ShareChat
00:20
Bhakti status # song #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गीता ज्ञान🛕 #📖जीवन का लक्ष्य🤔
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - ShareChat
00:15
#🔊सुन्दर कांड🕉️ #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🔊सुन्दर कांड🕉️ - ShareChat
00:17
Bhakti status #video #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🔊सुन्दर कांड🕉️
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - ShareChat
00:13
#📖जीवन का लक्ष्य🤔 #❤️जीवन की सीख #☝ मेरे विचार
📖जीवन का लक्ष्य🤔 - सुप्रभात बेवजह नहीं होती है किसी से मुलाकातें , चेहरा  कोई न कोई राज़ कह जाता है... हर किसी से मिलकर सोच निखर जाती है, तो कोई चुपचाप जीने का सलीका सिखा जाता है. कुछ लोग किताबों जैसे मिलते हैं, जो पढ़े जाएं तो उम्र भर काम आ जाते हैं... सुप्रभात बेवजह नहीं होती है किसी से मुलाकातें , चेहरा  कोई न कोई राज़ कह जाता है... हर किसी से मिलकर सोच निखर जाती है, तो कोई चुपचाप जीने का सलीका सिखा जाता है. कुछ लोग किताबों जैसे मिलते हैं, जो पढ़े जाएं तो उम्र भर काम आ जाते हैं... - ShareChat
#☝ मेरे विचार #❤️जीवन की सीख #📖जीवन का लक्ष्य🤔
☝ मेरे विचार - मैं बड़ी हो गई लो माँ ( मॉ के दस बार बोलने पर, एक काम जो तब नहीं करती थी मै आज किसी के कुछ कहने से पहले  सब कुछ समेट देती हू मैं॰ ना कोई डॉट अब लगती हे कोई बारन्बारकी पुकार না जिम्मेदारियों के बीच मे बस खुद ही समझ जाती हूँ हर बार वो बचपन की जिदें कहॉ गर्ई वो नादानियाँ खोसी ग्ई आज हर बात में समझदारी है, पर मुस्कान थोड़ी रो सी गई जो काम मैं टाल दिया करती थी॰ कर लेती हूँ॰ आज बिना कहे पर हर बार अंदर ही अंदर लेती हूँ॰ मा की याद रमें भर লীসাঁ मै बड़ी हो ग्ई वो छोटी सी लड़की  पर 867' आज भी कर्हीं अंदर जिंदा हेः मैं बड़ी हो गई लो माँ ( मॉ के दस बार बोलने पर, एक काम जो तब नहीं करती थी मै आज किसी के कुछ कहने से पहले  सब कुछ समेट देती हू मैं॰ ना कोई डॉट अब लगती हे कोई बारन्बारकी पुकार না जिम्मेदारियों के बीच मे बस खुद ही समझ जाती हूँ हर बार वो बचपन की जिदें कहॉ गर्ई वो नादानियाँ खोसी ग्ई आज हर बात में समझदारी है, पर मुस्कान थोड़ी रो सी गई जो काम मैं टाल दिया करती थी॰ कर लेती हूँ॰ आज बिना कहे पर हर बार अंदर ही अंदर लेती हूँ॰ मा की याद रमें भर লীসাঁ मै बड़ी हो ग्ई वो छोटी सी लड़की  पर 867' आज भी कर्हीं अंदर जिंदा हेः - ShareChat