Mousmi kumari
ShareChat
click to see wallet page
@564374296
564374296
Mousmi kumari
@564374296
I Love Sharechat :)
#😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख
😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख - पेंशन सिर्फ चंद हजार रुपये नही होती... बल्कि एक चादर होती हैं बुढ़ापे की, जिसमे एक रिटायर आदमी अपनी इज्जत को ढंकता हैं ताकि उसकी औलाद उसे बोझ ना समझे.. एक ख़्वाब पेंशन सिर्फ चंद हजार रुपये नही होती... बल्कि एक चादर होती हैं बुढ़ापे की, जिसमे एक रिटायर आदमी अपनी इज्जत को ढंकता हैं ताकि उसकी औलाद उसे बोझ ना समझे.. एक ख़्वाब - ShareChat
#🌷शुभ सोमवार
🌷शुभ सोमवार - ऊँ नमःशिवाय Cood moming ऊँ नमःशिवाय Cood moming - ShareChat
#🙏 प्रेरणादायक विचार
🙏 प्रेरणादायक विचार - पापा और पति के प्यार में फर्क पापा पैसे देने के बाद भी नही पूछते की क्या करोगी. . पति पैसे देने से पहले ही की पैसे का क्या करोगी. . 100 पूछेगा पापा और पति के प्यार में फर्क पापा पैसे देने के बाद भी नही पूछते की क्या करोगी. . पति पैसे देने से पहले ही की पैसे का क्या करोगी. . 100 पूछेगा - ShareChat
#☝अनमोल ज्ञान
☝अनमोल ज्ञान - बुरा लग जाए ऐसा सत्य जरूर बोलो लेकिन सत्य लगे ऐसा झूठ कभी मत बोलो - बुरा लग जाए ऐसा सत्य जरूर बोलो लेकिन सत्य लगे ऐसा झूठ कभी मत बोलो - - ShareChat
#🌸शुभ शुक्रवार🙏
🌸शुभ शुक्रवार🙏 - प्रातःव दन शुभ शुक्रवार सुप्रभात எளனி Good morning प्रातःव दन शुभ शुक्रवार सुप्रभात எளனி Good morning - ShareChat
#😂फनी जोक्स🤣
😂फनी जोक्स🤣 - ठण्ड में एक और समस्या होती है॰ ரq#46 531 तो ठण्ड लगने लगती है और धूप में बैठ जाओ मोबाइल का डिस्प्ले గా नहीं दिखता ठण्ड में एक और समस्या होती है॰ ரq#46 531 तो ठण्ड लगने लगती है और धूप में बैठ जाओ मोबाइल का डिस्प्ले గా नहीं दिखता - ShareChat
#☝अनमोल ज्ञान
☝अनमोल ज्ञान - जन्म से लेकर मरण तक हजार रिश्ते बनते होंगे , परंतु पिता के जैसा देखरेख करने वाला और मां जैसा प्रेम करने वाला दोबारा कभी नहीं मिलता जन्म से लेकर मरण तक हजार रिश्ते बनते होंगे , परंतु पिता के जैसा देखरेख करने वाला और मां जैसा प्रेम करने वाला दोबारा कभी नहीं मिलता - ShareChat
#🙏सुविचार📿
🙏सुविचार📿 - बचपन में जिन हाथों ने संभाला, अब उनके कांपते हाथों को थाम लीजिए, क्योंकि थकना अब उनका हक है, और थामना , अब हमारी जिम्मेदारी , बुढ़ापा दूसरा बचपन ही तो है, उन्हें उसी नाज़ से पालो , जैसे उन्होंने तुम्हें पाला था, सेवा कोई एहसान नहीं , यह वो कर्ज़ है जो कभी चुकाया नहीं जा सकता , बस निभाया जा सकता है " बचपन में जिन हाथों ने संभाला, अब उनके कांपते हाथों को थाम लीजिए, क्योंकि थकना अब उनका हक है, और थामना , अब हमारी जिम्मेदारी , बुढ़ापा दूसरा बचपन ही तो है, उन्हें उसी नाज़ से पालो , जैसे उन्होंने तुम्हें पाला था, सेवा कोई एहसान नहीं , यह वो कर्ज़ है जो कभी चुकाया नहीं जा सकता , बस निभाया जा सकता है " - ShareChat