गीत
****
(सोनी शुक्ला क्रांति की आवाज नारी शक्ति के लिए)
नारी तू कमज़ोर नहीं, तू शक्ति का ही रूप है,
कहीं शीतल चांदनी है, कहीं कड़कती धूप है।
सोनी की इस आवाज़ को, अब जग ने पहचाना है,
तुझसे ही इस सृष्टि का, हर जन्म का वास्ता।
सहनशीलता गहना तेरा, पर अब रण की बारी है,
अन्याय के विरुद्ध खड़ी, तू आज क्रांतिकारी है।
सोनी के साथ कदम मिलाकर, आगे बढ़ना है,
अधर्म की इन दीवारों को, तेरे आगे झुकना है।
आँखों में अंगार लिए, तू खुद अपनी मशाल बन,
सोए हुए इस समाज की, तू आज फिर मिसाल बन।
सोनी का यह पैगाम है, रुकना नहीं अब,
તેરી हिम्मत ही अब जग में, नया सवेरा लाएगी।
जागो ओ भारत की शक्ति, अपना मान पहचानो तुम,
सोनी का संदेस है, हर नारी महान हो तुम।
इस युग के हर अंधियारे में, सूरज सा उजाला हो तुम।
तुम काली हो तुम दुर्गा हो तुम नरसंहागरी हो तुम शक्ति हो।।
जनहित सर्व समाज सेवा समिति संस्थापक/ राष्ट्रीय अध्यक्ष लेखिका /कवित्री सोनी शुक्ला (क्रांति) लखनऊ उत्तर प्रदेश #🚀SC बूस्ट के साथ Views को सुपरचार्ज करें #✡️सितारों की चाल🌠
गीत
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(सोनी शुक्ला क्रांति की आवाज नारी शक्ति के लिए)
नारी तू कमज़ोर नहीं, तू शक्ति का ही रूप है,
कहीं शीतल चांदनी है, कहीं कड़कती धूप है।
सोनी की इस आवाज़ को, अब जग ने पहचाना है,
तुझसे ही इस सृष्टि का, हर जन्म का वास्ता।
सहनशीलता गहना तेरा, पर अब रण की बारी है,
अन्याय के विरुद्ध खड़ी, तू आज क्रांतिकारी है।
सोनी के साथ कदम मिलाकर, आगे बढ़ना है,
अधर्म की इन दीवारों को, तेरे आगे झुकना है।
आँखों में अंगार लिए, तू खुद अपनी मशाल बन,
सोए हुए इस समाज की, तू आज फिर मिसाल बन।
सोनी का यह पैगाम है, रुकना नहीं अब,
તેરી हिम्मत ही अब जग में, नया सवेरा लाएगी।
जागो ओ भारत की शक्ति, अपना मान पहचानो तुम,
सोनी का संदेस है, हर नारी महान हो तुम।
इस युग के हर अंधियारे में, सूरज सा उजाला हो तुम।
तुम काली हो तुम दुर्गा हो तुम नरसंहागरी हो तुम शक्ति हो।।
जनहित सर्व समाज सेवा समिति संस्थापक/ राष्ट्रीय अध्यक्ष लेखिका /कवित्री सोनी शुक्ला (क्रांति) लखनऊ उत्तर प्रदेश #🚀SC बूस्ट के साथ Views को सुपरचार्ज करें
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(सोनी शुक्ला क्रांति की आवाज नारी शक्ति के लिए)
नारी तू कमज़ोर नहीं, तू शक्ति का ही रूप है,
कहीं शीतल चांदनी है, कहीं कड़कती धूप है।
सोनी की इस आवाज़ को, अब जग ने पहचाना है,
तुझसे ही इस सृष्टि का, हर जन्म का वास्ता।
सहनशीलता गहना तेरा, पर अब रण की बारी है,
अन्याय के विरुद्ध खड़ी, तू आज क्रांतिकारी है।
सोनी के साथ कदम मिलाकर, आगे बढ़ना है,
अधर्म की इन दीवारों को, तेरे आगे झुकना है।
आँखों में अंगार लिए, तू खुद अपनी मशाल बन,
सोए हुए इस समाज की, तू आज फिर मिसाल बन।
सोनी का यह पैगाम है, रुकना नहीं अब,
તેરી हिम्मत ही अब जग में, नया सवेरा लाएगी।
जागो ओ भारत की शक्ति, अपना मान पहचानो तुम,
सोनी का संदेस है, हर नारी महान हो तुम।
इस युग के हर अंधियारे में, सूरज सा उजाला हो तुम।
तुम काली हो तुम दुर्गा हो तुम नरसंहागरी हो तुम शक्ति हो।।
जनहित सर्व समाज सेवा समिति संस्थापक/ राष्ट्रीय अध्यक्ष लेखिका /कवित्री सोनी शुक्ला (क्रांति) लखनऊ उत्तर प्रदेश
गीत
॥ महा-काल का उद्घोष: सोनी की चेतावनी ॥
(तर्ज: तांडव और वीर रस - अत्यंत आक्रामक)
दुश्मनों की सरहदों में अब, तबाही हम लाएंगे,
सोनी की इस चेतावनी से, तख्त सब हिल जाएंगे।
ब्राह्मणों! अपनी आंखों से, अब ये पर्दा हटा दो तुम,
दबे हुए उस स्वाभिमान की, ज्वाला फिर से जगा दो तुम ॥
जो समझते हैं कि ब्राह्मण, अब निरीह और लाचार है,
देख लो ये नारी शक्ति, अब म्यान से बाहर तलवार है।
तुम्हारी हर इक चाल का, हम जड़ से अंत करेंगे,
परशुराम के अपमान का, हम भीषण दंड भरेंगे।
सुन लो ओ गद्दारों तुम! अब खैर तुम्हारी नहीं है,
ब्राह्मण के इस कोप से, अब कहीं भी खुशहाली नहीं है ॥
तिलक और जनेऊ को तुम, जो समझते हो बस धागा है,
भूल गए तुम इतिहास को, जो शत्रुओं के लहू से सागा है।
आंखें खोलो विप्रों अपनी, सत्ता तुम्हें छला करती,
तुम्हारी ही तो शक्ति पर, ये दुनिया सारी पला करती।
जो चुप रहे तुम आज तो, फिर कल न कोई बचेगा,
हर घर में अब परशुराम का, एक नया सूर्य सजेगा ॥
'सोनी शुक्ला क्रांति' का ये, शत्रुओं को पैगाम है,
ब्राह्मण को जो ललकारेगा, उसका काम तमाम है।
जनहित का ये महायज्ञ, अब ज्वाला बन के दहकेगा,
परशुराम का हर इक बच्चा, अब सिंह की तरह महकेगा।
प्रतिमा घर-घर पहुँचाएंगे, नया भारत हम बनाएंगे,
जो आँख दिखाएगा हमको, उसकी आँख हम निकालेंगे ॥
सोनी शुक्ला 'क्रांति'
लेखिका एवं कवयित्री
संस्थापक/राष्ट्रीय अध्यक्ष: जनहित सर्व समाज सेवा समिति संपूर्ण भारत
लखनऊ, उत्तर प्रदेश #🚀SC बूस्ट के साथ Views को सुपरचार्ज करें
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॥ महा-काल का उद्घोष: सोनी की चेतावनी ॥
(तर्ज: तांडव और वीर रस - अत्यंत आक्रामक)
दुश्मनों की सरहदों में अब, तबाही हम लाएंगे,
सोनी की इस चेतावनी से, तख्त सब हिल जाएंगे।
ब्राह्मणों! अपनी आंखों से, अब ये पर्दा हटा दो तुम,
दबे हुए उस स्वाभिमान की, ज्वाला फिर से जगा दो तुम ॥
जो समझते हैं कि ब्राह्मण, अब निरीह और लाचार है,
देख लो ये नारी शक्ति, अब म्यान से बाहर तलवार है।
तुम्हारी हर इक चाल का, हम जड़ से अंत करेंगे,
परशुराम के अपमान का, हम भीषण दंड भरेंगे।
सुन लो ओ गद्दारों तुम! अब खैर तुम्हारी नहीं है,
ब्राह्मण के इस कोप से, अब कहीं भी खुशहाली नहीं है ॥
तिलक और जनेऊ को तुम, जो समझते हो बस धागा है,
भूल गए तुम इतिहास को, जो शत्रुओं के लहू से सागा है।
आंखें खोलो विप्रों अपनी, सत्ता तुम्हें छला करती,
तुम्हारी ही तो शक्ति पर, ये दुनिया सारी पला करती।
जो चुप रहे तुम आज तो, फिर कल न कोई बचेगा,
हर घर में अब परशुराम का, एक नया सूर्य सजेगा ॥
'सोनी शुक्ला क्रांति' का ये, शत्रुओं को पैगाम है,
ब्राह्मण को जो ललकारेगा, उसका काम तमाम है।
जनहित का ये महायज्ञ, अब ज्वाला बन के दहकेगा,
परशुराम का हर इक बच्चा, अब सिंह की तरह महकेगा।
प्रतिमा घर-घर पहुँचाएंगे, नया भारत हम बनाएंगे,
जो आँख दिखाएगा हमको, उसकी आँख हम निकालेंगे ॥
सोनी शुक्ला 'क्रांति'
लेखिका एवं कवयित्री
संस्थापक/राष्ट्रीय अध्यक्ष: जनहित सर्व समाज सेवा समिति संपूर्ण भारत
लखनऊ, उत्तर प्रदेश
आज लखनऊ के विकास नगर में आग लगने की अत्यंत दुःखद एवं हृदयविदारक घटना सामने आई। इस घटना से प्रभावित सभी परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं।
सुनकर बहुत दुख हुआ जो लोग नहीं रहे उनको ईश्वर अपने सर चरणों में स्थान दें और जो लोग बचे हुए हैं उनकी ईश्वर सुरक्षा करें ऐसी मैं ईश्वर से प्रार्थना करती हूं #🚀SC बूस्ट के साथ Views को सुपरचार्ज करें
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(महाक्रांति का शंखनाद: सवर्णों की हुंकार)
कलम उठाओ, मशाल जलाओ, अब न रुकना होगा,
सत्ता के इन काले नियमों को अब झुकना होगा।
15 अप्रैल न्याय की घड़ी है, अब न धीरज खोना,
हक की खातिर जाग खड़ा है, आज सवर्ण का कोना-कोना।
योग्यता की हत्या करके, कैसा न्याय चलाते हो?
प्रतिभा का तुम गला घोंटकर, देश को क्या दिखलाते हो?
UGC का काला कानून, अब वापस तुमको लेना होगा,
सवर्ण समाज की शक्ति का अब, लोहा तुमको मानना होगा।
अगर न बदला फैसला कल तो, वोट की चोट दिखा देंगे,
अहंकार की उस कुर्सी को, हम मिट्टी में मिला देंगे।
अपनी पार्टी, अपना झंडा, अपना मान बनाएंगे,
अब 'सोनी शुक्ला' की टोली संग, नया सवेरा लाएंगे।
जनहित सर्व समाज की शक्ति, भारत भर में गूँजेगी,
अन्याय की हर ईंट से ईंट अब, टकराकर ही टूटेगी।
UGC Rollback करो तुम, वरना सत्ता छोड़ो,
सवर्णों के सब्र का बाँध, अब और न तुम तोड़ो!
आर या पार की जंग छिड़ी है, हम पीछे न हटेंगे,
स्वाभिमान की इस वेदी पर, अब हम नहीं कटेंगे।
उठो सवर्णों! क्रांति करो, यह वक़्त पुकार रहा है,
इतिहास तुम्हारे पौरुष को, आज फिर निहार रहा है।
रचयिता: सोनी शुक्ला 'क्रांति'
राष्ट्रीय अध्यक्ष: जनहित सर्व समाज सेवा समिति
(स्वरचित एवं मौलिक)
15 अप्रैल: न्याय या महाक्रांति?
UGC Rollback नहीं तो वोट नहीं!
सवर्ण समाज तैयार है अपनी पार्टी बनाने को - अब होगा हिसाब!
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श्रद्धांजलि: ज्ञान के प्रणेता आर्यभट्ट
नमन है आर्यभट्ट को, जो ज्ञान के पावन प्रतीक थे,
शून्य का रहस्य समझाकर, दुनिया को दी जिसने नई सीख थे।
ज्योतिर्विज्ञान के वह महान प्रणेता और आकाश के ज्ञाता,
तारों की भाषा पहचानने वाले, वह आधुनिक विज्ञान के विधाता।
उनकी अद्भुत प्रतिभा का, विश्व में कोई सानी नहीं,
इतिहास के स्वर्णिम पन्नों पर, उनकी अमर कहानी बनी।
आज उन्हीं के पदचिन्हों पर चलकर, नया संकल्प उठाते हैं,
ज्ञान और सेवा के मार्ग पर, हम सब मिलकर हाथ बढ़ाते हैं।
हृदय में सेवा का भाव और विचारों में क्रांति लिए,
सोनी शुक्ला ने जनहित में, समर्पण के पावन दीप दिए।
आर्यभट्ट का गौरव और समाज सेवा का यह महान अभियान,
भारत माता के चरणों में, अर्पित है हमारा यह यश-गान।
— लेखिका एवं कवयित्री सोनी शुक्ला "क्रांति"
संस्थापक/अध्यक्ष - जनहित सर्व समाज सेवा समिति
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