क्युँकि शब्द केवल ध्वनि नहीं होते बल्कि वे सीधे किसी के हृदय पर प्रहार करने वाली अदृश्य धार होते है-- तुम जो कह देते हो-वो तुम्हारे लिए क्षणिक हो सकता है पर सामने वाले के भीतर वही वाक्य वर्षों तक गूंजता रहता है- जीभ से निकला एक कठोर शब्द, आत्मा पर वैसा ही घाव छोड़ देता है जैसा कोई नुकीला औज़ार देह पर देता है-- अंतर बस इतना है कि देह के घाव दिख जाते है, हृदय के नही और विडम्बना देखो-- लोग अपने शब्दों की जिम्मेदारी से बच जाते है पर सुनने वाला उन्हें जीवन भर ढोता है!-कभी-कभी हम क्रोध, अहंकार या क्षणिक आवेश मे वो कह जाते है जो वास्तव में कहना नहीं चाहते थे --पर जो कह दिया वो लौटता नहीं-- शब्दों का कोई “Undo” नहीं होता-- एक बार बोला गया वाक्य सामने वाले की चेतना में अपना घर बना लेता है!इसलिए बोलो पर ठहरकर; कहो पर करुणा के साथ; व्यक्त करो पर संवेदना के स्पर्श से क्युँकि संबंध संवाद से बनते है और असावधानी से टूट भी जाते है-- सबसे पहले विचारों को परिष्कृत करो-- फिर उन्हें शब्द दो वरना तुम्हारी वाणी ही तुम्हारे अपने प्रियजनों के हृदय पर पट्टियाँ चिपकाने की नौबत ला देगी!--हम सभी कुछ भी कह देते है - ऐसा समझ कर की हमे क्या - वो सामने वाली की परेशानी है - पर वास्तव मे समझना चाहिए की शब्द का चयन कैसा हो- इसलिए मै हमेशा ओवरथिंकर लोग के फेवर मे ही लिखती हूँ..कई चीजें जो वे समझकर कहेंगे वो लगभग सत्य हो ही जाती है!- तकलीफ सभी को होती है इसलिए कहने से पहले सोचिए -- हाँ! ये मुझपर भी लागू होता ही है!- #🙂सत्य वचन #👍लाईफ कोट्स #🙂Motivation #💭माझे विचार #meri jindagi