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Kishan Kumar

आई लव शेयरचैट

16 दिसंबर को भारत विजय दिवस मना रहा है --16 दिसंबर 1971 को हमने उस समय के पूर्वी पाक को भारत ने वीर सैनिकों के बल पर केवल 13 दिनों में मुक्त करवाया था -बंगला देश का निर्माण व पाकिस्तान की निर्णायक हार हुई थी --पाक के जनरल नियाजी के नेतृत्व में 95000 पाक सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया था --उस गौरवान्वित समय को याद करते हुए हम वीर जवानों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते है व देश वासियों को बधाई देते है परंतु पाक से शिमला में समझौता वार्ता में राजनीतिक गलतियां हुई जिसके कारण आज काश्मीर समस्या और बंगला देश की समस्याएं भी भारत की सर दर्द है -कृपया इस लेख को अवश्य पढ़िए भारतीय राजनैतिक घटनाए ,जैसी मैंने देखी ,सुनी और समझी ~~( 8 )~~ **** ऐसो को उदार जग मांही ****समझौते की मेज पर भारतीय नेताओं ने सब कुछ गंवा दिया -**** 28 जून 72 से शिमला में शुरू हुई श्री मती इंदिरा जी और J A भुट्टो के बीच शान्ति वार्ता में 2 जुलाई तक कोई समझौता नही होने का समाचार आया था पर अचानक जाने क्या हुआ ~इंदिरा जी के साथ गए हुए संजय गांधी और पाकिस्तानी प्रेसिडेंट भुट्टो के साथ आयी हुई उनकी पुत्री -बेनजीर भुट्टो का जादू इंदिरा जी पर चल गया और एक अप्रत्याशित समझौते का 3 जुलाई 1972 को एलान हुआ । 1~ समझौते के मुताबिक़ भारत ने जीती हुई सभी जमीन , बिना किसी शर्त के पाकिस्तान को वापस करने का एलान किया 2~काश्मीर को भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय समस्या मानते हुए ~बिना किसी देश के दखल के आपस में बातचीत से हल करने की बात कही गयी ~आज भी पाकिस्तान काश्मीर मसला में मध्यस्ता की बात उठाता है और भारत इसे शिमला समझौते के अनुसार हल करने की बात करता है ,दोनों देशो में बाते कभी होती है ,कभी काशमीरी उग्रवादी देशद्रोहियो को शामिल करने की बात होती है ~कभी गोली और बात साथ न होने की बात होती है न 2 के उपर्युक्त निर्णय को समझिये ~~सन् 72 के पहले भारत का स्पष्ट स्टैंड था कि काश्मीर का स्वामित्व कोई समस्या नही है ~महाराजा के विलय पत्र पर हस्ताक्षर के बाद काश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और 47 में पाकिस्तान के हमले और कब्जे से ही समस्या पैदा हुई है ,संयुक्त राष्ट्र में मामला पाकिस्तान नही भारत ले गया था और पाक से POK खाली कराने की प्रार्थना की थी ~समस्या केवल यह है की पाक कैसे POK खाली करे ~जब जब पश्चिमी देश पाक के समर्थन में सिक्योरिटी काउंसिल में बोले ,सोवियत रूस ने भारत के पक्ष में वीटो लगा देता था - कितने ताज्जुब की बात ~विजयी देश जिसके पास सभी तुरुप् के पत्ते थे उसने यह क्या कर डाला ~**** पाकिस्तान पर दबाब बनाकर उससे पाक अधिकृत काश्मीर POK को वापस लेने और हमेशा के लिए समस्या ख़त्म करने की बजाय सारी जीती जमीन बिना शर्त वापस कर दी और तो और काश्मीर को DISPUTED मान लिया ***जिसे दोनों देशो में बात कर हल करना तय हुआ ~जो आज भी सरदर्द है ~ फैसला न कभी बिना युद्ध के हो पाया है ,न कभी होगा गजब है , ***बैक गेयर, तो हमेशा केवल भारत की फौजिओ की गाडियो में यहां की सरकारो ने लगाये है ,***पाक ने हमारे POK पर कब्जा कर लिया ,CHINA ने हमारी हजारो KM जमीन कब्जा कर ली ,उन्होंने जमीन वापस करने की बात कभी सोची तक नही , और हमारे नेता जवानो के खून से सींची हुई जमीन जो किसी दुसरे देश की जमीन न होकर, हमारे अखंड भारत की बटवारे में गंवायी हुई हमारी अपने देश की जमीन है , तुरंत वापस करने में एक मिनट भी नही सोचते !! दुनिया मे क्या कही ऐसे दानवीर मिलेंगे ** 1 लाख युद्ध बन्दियों के बारे में इस समझौते में कुछ नही कहा गया था परंतु कुछ महीनो बाद इंदिरा जी ने एकतरफा सभी 1 लाख युद्ध बंदियो को सम्मान के साथ छोड़ दिया ,दुबारा भारत से लड़ने के लिए फिर पाकिस्तान जाने दिया ~युद्ध के समय पाकिस्तान द्वारा बन्दी बनाये गए सैनिकों को वापस लाने की बात समझौते में तय ही नही की गयी --TV के समाचारों के अनुसार आज भी उस समय के करीब 46 भारतीय युद्ध बंदी हमारे जवान पाकिस्तान की जेलों में 46 वर्षो से नारकीय प्रताड़ना युक्त जीवन जी रहे है --है न गजब -- ~सभी को पता है सेकेंड वर्ड वॉर के बाद जीते मित्र देशो ने युद्धबंदियो पर केस चलाये थे ,तमाम को मौत की भी सजा दी गयी थी ~~परंतु हम तो अहिंसावादी है ,वही जनरल नियाजी और उनके साथी ,जिन्होंने बंगला देश में महिलाओ बच्चों व् हिंदूओ पर रूह कांपने वाले अत्याचार किये थे ,सभी को माफ़ कर ससम्मान वापस भेज दिया ~किसी को सजा देने की बात सोची भी नही ~ पुराने समय में पृथ्वीराज ने गौरी को कई बार माफ़ कर, दुबारा हमला करने को आने दिया था ,फिर क्या परिणाम हुआ ~ गौरी ने पृथ्वीराज की हार के बाद उसे छोड़ने की बात दूर, उनके साथ क्या किया ~ सभी जानते है ,उसी इतिहास को दोहराते हुए श्री मती इंदिरा जी ने ~सेना द्वारा हासिल की गयी निर्णायक जीत , समझौता वाता की मेज पर कैसे गंवा दी , और इसी कारण, आज फिर देश फिर कितनी संकटपूर्ण परिस्थितियो में है ~~
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भारतीय सेना

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2 साल पहले
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मैं इस पोस्ट का विरोध करता हूँ, क्योंकि ये पोस्ट...
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