*ओम् शांति प्रभु प्रिय आत्मन*
*शुभ वेला याद 🧘🧎🧘♀️🧘♂️*
🇲🇰🙏🫳🧚♀️🌞🥳🚩
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#🌞 Good Morning🌞 ...*हर परिस्थिति में श्रेष्ठ स्थिति का बैलेंस*....💦
♦️ *आज मनुष्यों के अन्दर दुःख का भाव भरा हुआ है तो दूसरों को देगा क्या? जैसे अग्नि गरमाइश देती है, जल शीतलता देता है - ऐसे ही जो मनुष्य अन्दर से दुःखों से भरा हुआ है तो वह सबको दुःख की ही फीलिंग कराता है। अब परमात्म-याद और ज्ञान के चिन्तन से दुःख के भाव को निकालना ही सर्वश्रेष्ठ पुरुषार्थ है*।
♦️ *आत्मा के ओरिजनल संस्कारों को बार-बार स्मृति में लाओ तो विघ्नों का जन्म नहीं होगा। विघ्न आते ही हैं पुराने दैहिक संस्कारों से*।
♦️ *सहज राजयोग के चार बिन्दु*
1. *श्वासों-श्वास परमात्मा को याद करना अर्थात् मनमनाभव होने के लिए श्वास को साध्य कर, मन को परमात्मा के साथ जोड़ देना*
2. *भोजन शुद्ध और अल्पहार अर्थात् जीने के लिए जितना आवश्यक हो उतना भोजन ग्रहण करना*
3. *मौन ( *मुख और मन दोनों का* ) *अधिक बोलना सेहत के लिए हानिकारक होता है। मन में अधिक संकल्प चलने से मानसिक सन्तुलन बिगड़ने की सम्भावना बढ़ जाती है इसलिए आध्यात्मिक मार्ग में सफल होना है तो मन और मुख दोनों का मौन और*
4. *निर्दोष दृष्टि। हमारी दृष्टि पवित्र और रूहानियत से सम्पन्न हो*।
♦️ *जीवन में कैसी भी परिस्थिति आ जाए, कुछ भी मार्ग न भी दिखाई दे तो भी अपने आत्म-विश्वास और साहस को कभी कम न होने दें, आप तभी सफल बन सकते हैं*।
♦️ *शुभभावना, शुद्ध संकल्प और आत्मिक दृष्टि, इन सबका आधार है - पवित्रता। यदि पवित्रता नहीं तो किसी का आन्तरिक परिवर्तन नहीं कर सकते हैं*।
♦️ *शुद्ध संकल्प और मन की एकाग्रता के लिए अन्तर्मुखता का अभ्यास चाहिए। साथ-साथ खान-पान, व्यवहार और आचरण की शुद्धता और संकल्प, बोल की रॉयल्टी चाहिए। सारे दिन में, मन की दिनचर्या की टाइम-टेबल हो, तब मन को संयमित कर सकते हैं तथा मन की शक्ति प्रत्यक्ष रूप में देख सकते हैं*।
♦️ *कठिन-से-कठिन परिस्थितियों में अपनी ईश्वरीय धारणाओं को कायम रखना। धारणा ही पात्रता योग्य बनाती है। ईश्वरीय दुआओं का पात्र बनना यह सबसे बड़ा भाग्य है*।
♦️ *बड़े-से-बड़ी परिस्थितियों में सहज तरीके से विजयी बनने के लिए तीन गुणों के धारणों की आवश्यकता होती है, वे हैं – स्थिरता, - धैर्यता और निर्भयता। बुद्धि को स्थिर रखने से परिस्थितियों को समझना सहज हो जाता है। धैर्य होने से आत्म-विश्वास और मनोबल बढ़ता है और निर्भय बनने से दृढ़ता आती है*।






