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Dr.Ratan Singh (U.P)Varanasi

🎈 शेयरचैट 🎈⛺ॐ गणेशाय नमः⛺

🎎🌲🐯शुभ नवरात्रि🐯🌲🎎 🔔नवरात्रि का सातवाँ दिन🔔 🐯👣🚩जय माँ कालरात्रि🚩👣🐯 🌋🏖💐सुप्रभात🌻🏖🌋 🏵🌿🌹शुभ शनिवार🌹🌿 🙏मंगलमय सुबह की शुरुआत माता रानी के चरण कमलों के दर्शन के साथ🙏 🏖🏖🏖🏖🏖🏖🏖🏖🏖🏖🏖🏖🏖🏖🏖 7. 🚩🔔👣कालरात्रि👣🔔🚩 🦁एक वेणी जपकर्णपुरा नग्ना खरास्थिता। लम्बोष्ठी कर्णिकाणी तैलभ्यक्तशरीरानी ।। वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टक भूषणा। वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयदकरी ।। 🐯 कालरात्रि का अर्थ है मृत्यु की रात | कालरात्रि, समय रोशनी, जीवन और सब तरह के जीवन के रूप का मिश्रण है | माना जाता है कि काल से भी बड़ा है माँ दुर्गा का स्वरुप कालरात्रि। कालरात्रि माँ दुर्गा का सबसे भयंकर रूप है | इन्होने 2 राक्षस शुम्भ और निशुम्भ का वध करने के लिए कालरात्रि का रूप धारण किया था | नाम से अभिव्यक्त होता है कि माँ दुर्गा की यह सातवीं शक्ति कालरात्रि के नाम से जानी जाती है अर्थात जिनके शरीर का रंग घने अंधकार की तरह बिल्कुल काला है। नाम से ही जाहिर है कि येका रूप भयानक है। सिर के बाल बिखरे हुए हैं और गले में विद्युत की तरह चमकने वाली माला है। अंधकारमय स्थितियों का विनाश करने वाली शक्ति हैं कालरात्रि। काल से भी रक्षा करने वाली यह शक्ति है। माता का स्वरूप इस देवी के तीन नेत्र हैं। यह तीनों ही दृश्य ब्रह्मांड के समान गोल हैं। इनकी सांसों से अग्नि निकती रहती है। यह गर्दभ की सवारी करती हैं। ऊपर उठे हुए दाहिने हाथ की वर मुद्रा भक्तों को वरट्स है। दाहिनी ही ओर का नीचे वाला हाथ अभय मुद्रा में है। यानी भक्तों हमेशा निडर, निर्भय रहो। बायीं तरफ के ऊपर वाले हाथ में लोहे का कांटा और नीचे वाले हाथ में खड्ग है। इनका रूप भले ही भयंकर हो लेकिन यह सदैव शुभ फल देने वाली माता हैं। इसीलिए यह शुभंकरी कहलाईं। अर्थात इनसे भक्तों को किसी भी प्रकार से भयभीत या आतंकवादी होने की कतई आवश्यकता नहीं है। उनके साक्षात्कार से भक्त पुण्य का साक्षात्कार होता है। माता-पिता के स्वरूप का महत्त्व कालरात्रि की उपासना करने से ब्रह्मांड की समस्त सिद्धियों की प्राप्ति होती है और सभी असुरी शक्तियां का नाश होता है इसलिए दानव, दैत्य, राक्षस और भूत-प्रेत उनके स्मरण से ही भाग जाते हैं। यह ग्रह बाधाओं को भी दूर करता है और अग्नि, जल, जंतु, शत्रु और रात्रि भय दूर हो जाते हैं। इनकी कृपा से भक्त हर तरह के भय से मुक्त हो जाता है। 🔔 मंत्र: :- 🚩ऊँ देवि कालरात्रिाय नमः 🚩🚩काल देवी कालरात्रिाय नम:🚩 🎭 ध्यान :-- करालवंदना धोरण मुक्तकेशी चतुर्भुजम्। कालरात्रिं करालिंका दिव्यां विद्युतमाला विभूषिताम् ाल दिव्यं फेरवज्र खड्ग वामोघोर्ध्व करम्बुजम्। अभय वरदान चैव दक्षिणोद्वघः पार्निकम् मम ां महामेघभ्याम श्यामं तक्ष चैव गर्दभारूकेँ। घोरदंश काराला यवन पीनोन्नत पयोधराम् ा सुख पन्नन वदना स्मरनन् सरोरूहाम्। & सचिनतयेत् कालरात्रिं सर्वपाद् गच्छधदिदम् ये। 🎎 स्तोत्र पाठ :- हीं कालरात्रि श्री कराली च क्लीं कल्यानि कलावती। कालमाता कलिदर्पध्नी कमदीश कुप्पविता दर् कामबीजजप्सदा कमबीजगतनी। कुमतिघनी कुलीनर्तिनाशिनी कुल कामिनी कुल क्लीं हीं श्रीं मन्त्र्व्लदेन कालकण्टकघातिनि। कृपामयी कृपाप्रद कृपापारा कृपागमा धारा। 💐 कवच :-- ऊँ क्लीं मे ह्रदय पातु पादौ श्रीकालरात्रि। ललाटे कंटिन्यू पातु तुतुग्रता निवारिणी पा रसनां पातु कौमारी, भैरवी चक्षुशोभम। कटौ पेजे महेशानी, कर्णोशंकरभामिनी ेश वर्जितानी तु स्थानाभि यानि च कवचेन हि। तनि सर्वानि मे देवततंपातु स्तम्भिनी देवी। #🙏🕉️जय माँ कालरात्रि🙏🕉️ माता दी🔔🐯🚩 👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣
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🙏🕉️जय माँ कालरात्रि🙏🕉️

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18 दिन पहले
🎎गोपी गीत इतना श्रेष्ठ क्यों है?🎎 🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳 🍇🍇🍇🍇🍇🍇🍇🍇🍇🍇🍇🍇🍇🍇🍇 🌷श्रीमद्भागवत में दशम स्कंध में गोपी गीत आता है। ये गोपी गीत भगवान कृष्ण को साक्षात् पाने का मन्त्र है। भगवान कृष्ण को पाने के जितने भी तरीके हैं या होंगे उनमे से एक गोपी गीत है। इस गोपी गीत(gopi geet) में उन्नीस श्लोक हैं। जब भगवान शरद पूर्णिमा की रात में रास लीला का प्रारम्भ करते है तो कुछ समय बाद गोपियों को मान हो जाता है कि इस जगत में हमारा भाग्य ही सबसे श्रेष्ठ है भगवान उनके मन की बात समझकर बीच रास से अंतर्ध्यान हो जाते है, 🌹व्यक्ति केवल दो ही जगह जा सकता है, एक है संसार और दूसरा है आध्यात्म या भगवान. जैसे ही भगवान से हटकर गोपियों का मन अपने ही भाग्य पर चला गया यहाँ भगवान बता रहे है कि जैसे ही भक्त मुझसे मन हटाता है वैसे ही मै चला जाता हूँ। 🎎भगवान सहसा अंतर्धान हो गये:-% 💐उन्हें न देखकर व्रजयुवतियो के हदय में विरह की ज्वाला जलने लगी – भगवान की मदोन्मत्त चाल, प्रेमभरी मुस्कान, विलासभरी चितवन, मनोरम प्रेमालाप, भिन्न-भिन्न प्रकार की लीलाओ और श्रृंगाररस की भाव-भंगियो ने उनके चित्त को चुरा लिया था. वे प्रेम की मतवाली गोपियाँ श्रीकृष्णमय हो गयी और फिर श्रीकृष्ण की विभिन्न चेष्टाओं और लीलाओ का अनुकरण करने लगी. अपने प्रियतम की चाल-ढाल, हास-विलास और चितवन- बोलन आदि मे श्रीकृष्ण की प्यारी गोपियाँ उनके समान ही बन गयी. 🌹सर्वथा भूलकर ‘श्रीकृष्ण स्वरुप’ हो गयी:- 🌋उनके शरीर में भी वही गति-मति वही भाव-भंगिमा उतर आयी, वे अपने को सर्वथा भूलकर ‘श्रीकृष्ण स्वरुप’ हो गयी. ‘मै श्रीकृष्ण ही हूँ’ इस प्रकार कहने लगी वे सब परस्पर मिलकर ऊँचे स्वर से उन्ही के गुणों का गान करने लगी. मतवाली होकर एक वन से दूसरे वन में एक झाड़ी से दूसरी झाड़ी में जा-जाकर श्रीकृष्ण को ढूँढने लगी. वे पेड-पौधों से उनका पता पूछने लगी – हे पीपल, बरगद! नंदनंदन श्यामसुन्दर अपनी प्रेमभरी मुस्कान और चितवन से हमारा मन चुराकर चले गये है क्या तुमने उन्हें देखा है ? 🎸एक ही स्वर में, ‘गोपी-गीत’ गाया :- 🎎जब भगवान उन्हें कही नहीं मिले तो श्रीकृष्ण के ध्यान में डूबी गोपियाँ यमुना जी के पावन पुलिन पर रमणरेती में लौट आयी और एक साथ मिलकर श्रीकृष्ण के गुणों का गान करने लगी.सबने एक साथ, एक ही स्वर में, ‘गोपी-गीत‘ गाया. जब सब गोपियों के मन की दशा एक जैसी ही थी, सबके भाव की एक ही दशा थी, तब उन करोड़ो गोपियों के मुँह से एक ही गीत, एक साथ निकला,इसमें आश्चर्य कैसा ? गोपी गीत में उन्नीस श्लोक है. गोपी गीत `कनक मंजरी’ छंद में है. ये गोपी गीत बड़ा ही विलक्षण ,आलौकिक है जो नित्य इस गोपी गीत पाठ करता है भगवान श्री कृष्ण जी में उसका प्रेम होता है और उसे उनकी अनुभूति होती है. 🎎भगवान के अन्तर्धान होने का एक कारण और था भगवान गोपियों के प्रेम को जगत को दिखाना चाहते थे कि गोपियाँ मुझसे कितना प्रेम करती है. नीचे पूरा गोपी गीत दिया गया है। आप उस गोपी गीत का एक एक श्लोक पढ़िए और उसका मर्म जानिए। यदि आप ह्रदय से , भगवान के प्रेम में डूबकर, सब कुछ भुलाकर गोपी गीत नहीं पढ़ेंगे तो आपको कुछ भी समझ नहीं आने वाला है। इसलिए मन को भगवान के चरणों में सौंपकर गोपी गीत का पाठ कीजिये। 🙏🌷जय जय श्री राधे🌷🙏 #🌸 जय श्री कृष्ण 🎐🎐🎐🎐🎐🎐🎐🎐🎐🎐🎐🎐🎐🎐🎐
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🌸 जय श्री कृष्ण

🌸 जय श्री कृष्ण - जय श्री राधे कृष्ण , शाप गात इतना महत्व क्या हा « խc - ShareChat
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1 महीने पहले
🙏'हिन्दी दिवस' पर कैसे लिखें निबंध:- 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 🎎हिन्दी के बढ़ते कदम- कल से आज तक🎎 🇨🇮🇨🇮🇨🇮🇨🇮🇨🇮🇨🇮🇨🇮🇨🇮🇨🇮🇨🇮🇨🇮🇨🇮🇨🇮🇨🇮🇨🇮 🎎 विश्व की दूसरी सबसे बड़ी भाषा है हिन्दी। चीनी भाषा के बाद यह विश्व में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। भारत और अन्य देशों में 60 करोड़ से अधिक लोग हिन्दी बोलते,पढ़ते और लिखते हैं। इतना ही नहीं फ़िजी,मॉरीशस,गुयाना,सूरीनाम जैसे दूसरे देशों की अधिकतर जनता हिन्दी बोलती है। भारत से सटे नेपाल की भी कुछ जनता हिन्दी बोलती है। आज हिन्दी राजभाषा,सम्पर्क भाषा,जनभाषा के सोपानों को पार कर विश्वभाषा बनने की ओर अग्रसर है। हिन्दी भाषा प्रेम,मिलन और सौहार्द की भाषा है। यह मुख्यरूप से आर्यों और पारसियों की देन है। हिन्दी के ज्यादातर शब्द संस्कृत,अरबी और फारसी भाषा से लिए गए हैं। हिन्दी अपने आप में एक समर्थ भाषा है। प्रकृति से उदार ग्रहणशील,सहिष्णु और भारत की राष्ट्रीय चेतना की संवाहिका है हिन्दी। यह विश्व की एक प्राचीन,समृद्ध तथा महान भाषा होने के साथ ही हमारी राज्यभाषा भी है। भारत की स्वतंत्रता के बाद 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने एक मत से यह निर्णय लिया कि हिन्दी की खड़ी बोली ही भारत की राजभाषा होगी। इस महत्वपूर्ण निर्णय के बाद ही हिन्दी को हर क्षेत्र में प्रचारित-प्रसारित करने के लिए राष्ट्रभाषा प्रचार समिति,वर्धा के अनुरोध पर सन् 1953 से संपूर्ण भारत में 14 सितंबर को प्रतिवर्ष हिन्दी-दिवस के रूप में मनाया जाता है। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर हिन्दी के प्रति जागरुकता पैदा करने और हिन्दी के प्रयोग को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से विश्व हिन्दी सम्मेलन जैसे समारोह की भी शुरुआत की गई है। 10 जनवरी 1975 को नागपुर से शुरू हुआ यह सफर आज भी जारी है। अब इस दिन को विश्व हिन्दी दिवस के रूप मे भी मनाया जाने लगा है। हिन्दी भारत की नहीं पूरे विश्व में एक विशाल क्षेत्र और जनसमूह की भाषा है। 1952 में उपयोग की जाने वाली भाषा के आधार पर यह विश्व में पांचवें स्थान पर थी। 1980 के आसपास वह चीनी और अंग्रेजी के बाद तीसरे स्थान पर आ गई। 1991 में यह पाया गया कि हिन्दी बोलने वालों की संख्या पूरे विश्व में अंग्रेजी भाषियों की संख्या से अधिक है,जो मध्यम वर्ग के एक विशाल क्षेत्र को अपने में समेटे हुए है। इस मध्यम वर्ग की क्रय-शक्ति पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ी है। आज अपने माल के प्रचार-प्रसार,पैकिंग,गुणवत्ता आदि के लिए हिन्दी को अपनाना बहुराष्ट्रीय कंपनियों की विवशता है और उनकी यही विवशता आज हिन्दी की शक्ति बन गई है। 1980 और 1990 के दशक में भारत में उदारीकरण,वैश्वीकरण तथा औद्योगीकरण की प्रक्रिया तीव्र हुई। इसके परिणामस्वरूप अनेक विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत में आईं तो हिन्दी के लिए एक खतरा दिखाई दिया था,क्योंकि वे अपने साथ अंग्रेजी लेकर आई थीं। मीडिया महारथी रुपर्ट मर्डोक स्टार चैनल लेकर आए। अंग्रेजी में यह चैनल बड़ी धूमधाम से शुरू हुआ था। इसी तर्ज पर सोनी और अन्य दूसरे चैनल भी अंग्रेजी में अपने कार्यक्रम लेकर भारत में आए। मगर इन सबको विवश होकर हिन्दी की ओर मुड़ना पडा,क्योंकि इन्हें अपनी दर्शक संख्या बढ़ानी थी। अपना व्यापार,अपना लाभ बढाना था जो हिन्दी से ही संभव था। आज टी वी चैनलों एवं मनोरंजन की दुनिया में हिन्दी सबसे अधिक मुनाफे की भाषा है। कुल विज्ञापनों का लगभग 75 प्रतिशत हिन्दी माध्यम में है। हिन्दी फिल्मों तथा फिल्मी गानों ने भी हिन्दी के प्रचार-प्रसार में अपना अहम योगदान दिया है। सन्‌ 1995 के बाद से टी.वी.के चैनलों से प्रसारित कार्यक्रमों की लोकप्रियता भी बढ़ी है। इसका अनुमान इससे लगाया जा सकता है कि जिन सेटेलाइट चैनलों ने भारत में अपने कार्यक्रमों का आरम्भ केवल अंग्रेजी भाषा से किया था उन्हें अपनी भाषा नीति में परिवर्तन करना पड़ा है। अब स्टार प्लस, जी.टी.वी,जी न्यूज,स्टार न्यूज,डिस्कवरी,नेशनल ज्यॉग्रॉफिक आदि टी.वी.चैनल अपने कार्यक्रम हिन्दी में दे रहे हैं। आज सभी चैनल तथा फिल्म निर्माता अंग्रेजी क़ार्यक्रमों और फिल्मों को हिन्दी में डब करके प्रस्तुत करने लगे हैं। इसका जीता जागता उदाहरण है जुरासिक पार्क जैसी बेहद लोकप्रिय फिल्म को हिन्दी में डब किया जाना। इसके हिन्दी संस्करण ने सिर्फ भारत में इतने पैसे कमाए जितने अंग्रेजी संस्करण ने पूरे विश्व में नहीं कमाए थे। बीसवीं सदी के अंतिम दो दशकों में हिन्दी का अंतर्राष्ट्रीय विकास बहुत तेजी से हुआ है। वेब,विज्ञापन,संगीत,सिनेमा और बाजार के क्षेत्र में हिन्दी की मांग जिस तेजी से बढ़ी है वैसी किसी और भाषा में नहीं है। विश्व के लगभग 150 विश्वविद्यालयों तथा सैंकडों छोटे-बड़े केंद्रों में विश्वविद्यालय स्तर से लेकर शोध के स्तर तक हिन्दी के अध्ययन-अध्यापन की व्यवस्था हुई है। विदेशों से 25 से अधिक पत्र-पत्रिकाएं लगभग नियमित रूप से हिन्दी में प्रकाशित हो रही हैं। यूएई के 'हम एफ एम'सहित अनेक देश हिन्दी कार्यक्रम प्रसारित कर रहे हैं,जिनमें बीबीसी,जर्मनी के डॉयचे वेले,जापान के एनएचके वर्ल्ड और चीन के चाइना रेडियो इंटरनेशनल की हिन्दी सेवा प्रमुख है। हिन्दी भाषा और इसमें निहित भारत की सांस्कृतिक धरोहर इतनी सुदृढ और समृद्ध है कि इस ओर अधिक प्रयत्न न किए जाने पर भी इसके विकास की गति बहुत तेज है। ध्यान,योग,आसन और आयुर्वेद विषयों के साथ-साथ इनसे संबंधित हिन्दी शब्दों का भी विश्व की दूसरी भाषाओं में विलय हो रहा है। भारतीय संगीत,हस्तकला,भोजन और वस्त्रों की विदेशी मांग जैसी आज है पहले कभी नहीं थी। लगभग हर देश में योग,ध्यान और आयुर्वेद के केन्द्र खुल गए हैं जो दुनिया भर के लोगों को भारतीय संस्कृति की ओर आकर्षित करते हैं। ऐसी संस्कृति जिसे पाने के लिए हिन्दी के रास्ते से ही पहुंचा जा सकता है। भारतीयों ने अपनी कड़ी मेहनत,प्रतिभा और कुशाग्र बुद्धि से आज विश्व के तमाम देशों की उन्नति में जो सहायता की है उससे प्रभावित होकर सभी यह समझ गए हैं कि भारतीयों से अच्छे संबंध बनाने के लिए हिन्दी सीखना कितना जरूरी है। आज हिन्दी ने अंग्रेजी का वर्चस्व तोड़ डाला है। करोड़ों की हिन्दी भाषी आबादी कंप्यूटर का प्रयोग अपनी भाषा में कर रही हैं। प्रवासी भारतीयों में हजारों लोग हिन्दी के विकास में संलग्न हैं। हाल ही में अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने 114 मिलियन डॉलर की एक विशेष राशि अमरीका में हिन्दी,चीनी और अरबी भाषाएं सिखाने के लिए स्वीकृत की है। इससे स्पष्ट होता है कि हिन्दी के महत्व को विश्व में कितनी गंभीरता से अनुभव किया जा रहा है। 👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌 🇨🇮🎎जय हिंद🎎🇨🇮 🙏🇨🇮 जय भारत🇨🇮🙏 🎐🎐🎐🎐🎐🎐 #✍ हिंदी दिवस
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✍ हिंदी दिवस

✍ हिंदी दिवस - हिन्ति दिवस अ जय हिंद ! ! द जय भारत । । आप सभी को हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं हिन्दी हैं हम अभी विश्व के करीब 130 विश्वविद्यालयों में हिन्दी पढ़ाई जाती है और पूरी दुनिया में करोड़ों लोग हिन्दी बोलते हैं । चीनी भाषा के बाद यह दूसरी भाषा है जो इतनी बड़ी संख्या में बोली जाती है । - ShareChat
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1 महीने पहले
🎎🌿🌹पितृ श्राद्ध पक्ष 🌹🌿🎎 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 💐इस साल पितृ पक्ष पखवाड़ा 14 सितंबर 2019दिन शनिवार से शुरू हो रहा है जो 28 सितंबर तक चलेगा💐 🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋 🏵इन दिनों वर्तमान संतानें अपने दिवंगत पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने, उनको याद करते हुए पिड़दान, तर्पण, श्राद्ध कर्म, दान आदि कर्म करते हैं। पहला श्राद्ध 14 सितंबर को पूर्णिमा का श्राद्ध होगा, जिसमें इन पितरों के निमित्त तर्पण आदि कर्म किए जाएंगे। जानें पितृ पक्ष के पहले दिन एवं सभी 16 दिनों में किन दिवंगत आत्माओं का तर्पण उनकी तिथि के अनुसार करना चाहिए। 👤सबसे पहले इनका श्राद्ध कर्म करने से पित्रों की अतृप्त आत्माओं की मिल जाती है मुक्ति 👽अपने पितरों कि मृत्यु तिथि के अनुसार इन तिथियों करें अपने दिवंगत पितरों का श्राद्ध कर्म। 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 1- पहला श्राद्ध - दिनांक 14 सितंबर 2019 दिन शनिवार को, श्राद्धपक्ष तिथि - पूर्णिमा के दिन- पहले इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु पूर्णिमा तिथि को हुई हो। 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 2- दूसरा श्राद्ध - दिनांक 15 सितंबर 2019, दिन रविवार को - कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तिथि- इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु प्रतिपदा तिथि को हुई हो। - ( इस तिथि को नानी-नाना का श्राद्ध भी किया जा सकता है।) 🍇🍇🍇🍇🍇🍇🍇🍇🍇🍇🍇🍇🍇🍇🍇 3- तीसरा श्राद्ध - दिनांक 16 सितंबर 2019, दिन सोमवार को - कृष्ण पक्ष द्वितीया तिथि- इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु द्वितीय तिथि को हुई हो। 🎐🎐🎐🎐🎐🎐🎐🎐🎐🎐🎐🎐🎐🎐🎐 4- चौथा श्राद्ध - दिनांक 17 सितंबर 2019, दिन मंगलवार को - कृष्ण पक्ष तृतीय तिथि- इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु तृतीया तिथि को हुई हो। 💦💦💦💦💦💦💦💦💦💦💦💦💦💦💦 5- पांचवा श्राद्ध - दिनांक 18 सितंबर 2019, दिन बुधवार को - कृष्ण पक्ष चतुर्थी तिथि - इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु चतुर्थी तिथि को हुई हो। 👤👤👤👤👤👤👤👤👤👤👤👤👤👤👤 6- छठा श्राद्ध - दिनांक 19 सितंबर 2019, दिन गुरुवार को - कृष्ण पक्ष पंचमी तिथि- इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें जिनकी मृत्यु पंचमी तिथि को हुई हो। - ( इसी तिथि को अविवाहित मृतक पित्रों के निमित्त श्राद्ध किया जाता है।) 🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋 7- सातवां श्राद्ध - दिनांक 20 सितंबर 2019, दिन शुक्रवार को - कृष्ण पक्ष षष्ठी तिथि- इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु षष्ठी तिथि को हुई हो। 🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳 8- आठवां श्राद्ध - दिनांक 21 सितंबर 2019, दिन शनिवार को - कृष्ण पक्ष सप्तमी तिथि - इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु सप्तमी तिथि को हुई हो। 🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚 9- नौवां श्राद्ध - दिनांक 22 सितंबर 2019, दिन रविवार को - कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि - इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु अष्टमी तिथि को हुई हो। 💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧 10- दसवां श्राद्ध - दिनांक 23 सितंबर 2019, दिन सोमवार को - कृष्ण पक्ष नवमी तिथि - इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु नवमी तिथि को हुई हो। - ( इस तिथि को विशेष रूप से माताओं एवं परिवार की सभी स्त्रियों का श्राद्ध किया जा सकता है। इसलिए इसे मातृनवमी भी कहते हैं।) 👽👽👽👽👽👽👽👽👽👽👽👽👽👽👽 11- ग्यारहवां श्राद्ध - दिनांक 24 सितंबर 2019, दिन मंगलवार को - कृष्ण पक्ष दशमी तिथि- इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु दशमी तिथि को हुई हो। 🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿 12- बारहवां श्राद्ध - दिनांक 25 सितंबर 2019, दिन बुधवार को - कृष्ण पक्ष एकादशी तिथि - इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु एकादशी तिथि को हुई हो। पितर पक्ष में पंचबली भोग लगाना न भूले, नहीं तो भूखी ही वापस चली जाएंगी पित्रों का आत्मा 🏵🏵🏵🏵🏵🏵🏵🏵🏵🏵🏵🏵🏵🏵🏵 13- तेरहवां श्राद्ध - दिनांक 26 सितंबर 2019, दिन गुरुवार को - कृष्ण पक्ष द्वादशी तिथि - इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु द्वादशी तिथि को हुई हो। - ( इस तिथि को उन लोगों का श्राद्ध भी किया जाता है जिन्होंने मृत्यु से पूर्व सन्यास ले लिया हो।) 👤👤👤👤👤👤👤👤👤👤👤👤👤👤👤 14- चौदहवां श्राद्ध- दिनांक 27 सितंबर 2019, दिन शुक्रवार को - कृष्ण पक्ष त्रयोदशी एवं चतुर्दशी तिथि एक साथ है - इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु त्रयोदशी तिथि को हुई हो। ( घर के मृत बच्चों का श्राद्ध भी इसी दिन किया जाता है।) 🎎🎎🎎🎎🎎🎎🎎🎎🎎🎎🎎🎎🎎🎎🎎 15- पद्रहवां श्राद्ध - दिनांक 27 सितंबर 2019, दिन शुक्रवार को - कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि - चतुर्दशी तिथि का श्राद्ध केवल उन मृतजनों के लिए करना चाहिए जिनकी मृत्यु किसी हथियार से हुई हो, उनका क़त्ल हुआ हो, जिन्होंने आत्महत्या की हो या जिनकी मृत्यु किसी हादसे में हुई हो। - (इसके अलावा अगर किसी की मृत्यु चतुर्दशी तिथि को हुई है तो उनका श्राद्ध अमावस्या श्राद्ध तिथि को ही किया जाता है।) 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 16- सोलहवां श्राद्ध - दिनांक 28 सितंबर 2019, दिन शनिवार को (सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या ) - भादो अमावस्या तिथि- इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु अमावस्या तिथि, पूर्णिमा तिथि और चतुर्दशी तिथि को हुई हो। - (इसके अलावा इस तिथि को वह लोग भी श्राद्ध करें, जिन्हें अपने मृत पित्रों की तिथि याद नहीं हो। (क्योंकि इस अमावस्या तिथि को सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या भी कहते हैं।) ******************************************** 🙏🌹हरि ॐ🌹🙏 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 #🙏 धर्म-कर्म
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🙏 धर्म-कर्म

🙏 धर्म-कर्म - Dr . Ratan Singh mymandir पर मेरी धार्मिक पोस्ट पाएँ । पितृ श्राद्ध पक्ष 800 शनिवार 14 - 9 - 2019 से शुरू होने वाले | पितृ श्राद्ध पक्ष । की आपको व आपके पूरे परिवार को हार्दिक शुभकामनायें सातों लोकों में स्थित समस्त पूर्वजों को प्रणाम mymandir App धार्मिक फ़ोटो , वीडियो पाने का एकमात्र ऐप्प - ShareChat
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1 महीने पहले
🎎🌲🏵शुभ सावन माह🌲🏵🎎 🚩🐚🌹ॐ विष्णुदेवाय नमः🌹🐚🚩 🌹⛺🌞ॐ भाष्कराय नमः🌞⛺🌹 🚩🌿🌹ॐ नमः शिवाय🌹🌿🚩 🎆🙏🌸शुभ रविवार🌸🙏🎆 🍑🐚🌞शुभ दोपहर🌞🐚🍑 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 👏आपको सपरिवार सावन के कामदा एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएं🙏 🎎आप सभी पर श्री हरि विष्णु जी भगवान सुर्यदेव और भोलेनाथ जी की कृपादृष्टि सदा बनी रहे और सभी मनोकामना पूर्ण हो🙏 🎡🎡🎡🎡🎡🎡🎡🎡🎡🎡🎡🎡🎡🎡🎡 🎭 आपका रविवार का दिन अतिसुन्दर 🌺 🙏शुभ शांतिमय और मंगलमय व्यतीत हो🙏 🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲 🎎सावन में शिव के साथ भगवान विष्णु को करना प्रसन्न है तो करें यह व्रत🎎 🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱 🌹सावन का महीना वैसे तो भगवान शिव को समर्पित होता है, लेकिन इस महीने में कुछ खाय तिथियों पर भगवान विष्णु की पूजा करने का भी पौराणिक अर्थ है। सावन में भगवान विष्णु की पूजा के लिए कामिका एकादशी पर व्रत रखते हुए की मान्‍यता है। सावन मास के कृष्णण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को कामिका एकादशी कहते हैं और इस दिन भगवान विष्णु के वायरस की पूजा की जाती है। इस वर्ष यह एकादशी 28 जुलाई, दिन रविवार को है। आइए जानते हैं इस व्रत से जुड़ी मान्यताओं और पूजा विधि ... 1 🔱शिव के साथ विष्णु भी होते हैं प्रसन्न :-- 🌿सावन के महीने में एकादशी का आना अपने आप में विशेष संयोग है। मान्‍यता है कि सभी एकादशियों में व्रत करने वाले मनु और अजय को किसी अन्य पूजा या अनु देवी की पूजा करने से नहीं होती। कामिका एकादशी में भगवान श्रीहरि के शमरण मात्र से ही वाजपेय यज्ञ का फल प्राप्त होता है। पुराणों में बताया गया है कि भगवान विष्णु के अग्रदूत भगवान शिव हैं और भगवान शिव के आराध्या भगवान विष्णु हैं। ऐसे में सावन मास में पड़ने वाली एकादशी का सकारात्मकव और भी बढ़ जाता है। 2 🎎भगवान कृष्ण ने बताया था महत्व :-- 🌋पद्म पुराण में वर्णन आता है कि एक बार इस एकादशी के महत्व के बारे में स्वयं भगवान कृष्ण ने पांडुपुत्र धर्मराज युधिष्ठिर को बताया था। भगवान कृष्ण ने कहा था कि इस एकादशी का व्रत रखने वाले को अश्वमेध यज्ञ करने के बराबर फल की प्राप्ति होती है। इस दिन शंख, चक्र और गड्डधारी भगवान विष्णु का पूजन और अर्चना की जाती है। 3 🎎कामिका एकादशी की पूजाविधि :-- 🌲एकादशी तिथि पर सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर भगवान विष्णु का ध्यान करें फिर व्रत का संकल्प लेकर पूजन-क्रिया के साथ प्रारंभ करें। प्रभु को फल-फूल, तिल, दूध, पंचामृत आदि निवेदित करें, रोली-अक्षत से तिलक कर फूल चढ़ाएं। एकादशी के दिन आठों पहर निर्बल रहकर विष्णुजी के नाम का स्मरण करें और भजन-कीर्तन करें। विष्णु सहस्त्रनाम का जप अवश्य करें। इस दिन गरीबों और ब्राह्मण भोज द्वारा दान-दक्षिणा का विशेष महत्व होता है। अगर संभव हो सके तो इस दिन सिर में तेल ना लगाएं और बिस्तर पर नहीं जमीन पर सोएं और ईश्वर का ध्यान करें। इस प्रकार विधिनुसार जो भी कामिका एकादशी का व्रत रखता है उसकी कामनाएँ पूर्ण होती हैं। मौन रहकर आप भोलेनाथ के साथ नागदेवता की पूजा, यह वरदान प्राप्त करेंगे 4🐚 इन बातों का रखें ख्याल :- एकादशी का व्रत रखनेवालों को सदाचार का पालन करना चाहिए। जो यह व्रत नहीं भी करता है उन्हें भी इस दिन लहसुन, प्याज, बैंगन, मांस-मदिरा, पान-सुपारी और तंबाकू आदि से परहेज करना चाहिए। व्रत रखने वाले को दशमी तिथि के दिन से ही भगवान विष्णु का ध्यान शुरू कर देना चाहिए। साथ ही काम भाव, भोग विलास से खुद को दूर कर लेना चाहिए। ध्यान रहे व्रत के दौरान कांसे के बर्तन में भोजन और नमक का प्रयोग भी नहीं करना चाहिए। 5 🌿तुलसी का विशेष महत्व :- एकादशी की पूजा में भगवान विष्णु के वायरस को तुलसी अर्पित करने का विशेष पूजाव होता है। प्रभु श्रीहरि को तुलसी विशेष रूप से प्रिय है। शास्त्रों में बताया गया है कि तुलसी के दर्शन करने भर से ही सभी पाप न कीट हो जाते हैं। शपर्श होने पर यह हमारे शायर को शुद्ध और पवित्र कर देता है। जल देने पर यमराज को भी डराती हैं और ईश्वर के चरणों में अर्पित करने पर मोक्ष रूपी फल फल करते हैं। 🚩🌹ॐ विष्णुदेवाय नमः🌹🚩 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱 #🕛 शुभ दोपहर
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🕛 शुभ दोपहर

🕛 शुभ दोपहर - * . शुभ श्रावण मास शुभरविवार शिव परिवार , गौरी शंकर शुभमलालदायी वात drs वर शुभकामएकादशी ( 28 जुलाई 2019 शुभ एवं पवित्र श्रावण मास के दूसरे रविवार कीआप सब को हार्दिक शुभकामनाएँ प्रभु श्री गौरी शंकर जी एवं भगॅवान सूर्य नारायण सब पर अपनी कृपा दृष्टि सदैव बनाये रखे । ॐ श्रीसूर्यदेवाय नमः | | आपकारविवार का दिन शुभ और मंगलमय हो । - ShareChat
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2 महीने पहले
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मैं इस पोस्ट का विरोध करता हूँ, क्योंकि ये पोस्ट...
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