स्वधर्मे निधनं श्रेय: https://globalhinduism.in/?p=3216 #📖जीवन का लक्ष्य🤔
*स्वधर्मे निधनं श्रेय:*
✍️ २७८२
*विनोदकुमार महाजन*
🌞🌞🌞🌞
भगवान *श्रीकृष्ण* कहते है
" *स्वधर्मे निधनं श्रेय:*
*परधर्मो भयावह: "*
मतलब ?
स्वधर्म अर्थात खुद का धर्म अर्थात ?
वैदिक सनातन हिंदू धर्म
में जन्मे हुए हर व्यक्ती को अपना धर्म जानसे भी प्यारा होता है !
वही सत्य धर्म और आदर्श जीवन पद्धती का वरदान होता है !
इसिलिए इसी धर्म में आनंद से जीवन जीना ही असली जीवन होता है !
*सनातन धर्म मतलब ?*
उच्च कोटी की आदर्श जीवन प्रणाली, जीसमें
" *वसुधैव कुटुंबकम् "*
की आदर्श जीवन पद्धती स्विकार की जाती है !
जो संपूर्ण मानवता , भूतदया सिखाती है !
और जो आदर्श संस्कृती द्वारा ईश्वराधिष्ठित जीवन यापन भी सिखाती है !
इसिलिए हिंदू धर्म ना कभी तलवार के धार पर बढाने की जरूरत है ना ही धन बाॅंटकर !
यह तो एक अटूट ईश्वरी सिद्धांत है !
इसिलिए इसी धर्म के लिये और उसकी रक्षा के लिये मर मिटना भी
यथोचित माना जाता है !
" *स्वधर्मे निधनं श्रेय "*
तो दूसरी ओर भगवान कहते है ?
*परधर्मो भयावह:*
यह मुद्दा भी महत्वपूर्ण जीवन प्रणाली का ही एक भाग बताया जाता है !
*मतलब ?*
किसी लालच में आकर ,
धन वैभव संपत्ती ऐश्वर्य प्राप्त करने के लिये , झूटे भोग विलास के लिये, खुद की आत्मा बेचकर , खुद के आत्मा की आवाज बेचकर,
परधर्म अर्थात आसुरी सिध्दांतों का स्विकार करना और हाहाकारी , पैशाचिक धर्म को अपनाना , उसे स्विकार करना !
यह मृत्यू समान है !
*मतलब ??*
कोई हिंदू सत्ता संपत्ती के लालच में आकर किसी हिंदू द्रोही शक्तियों से, अधर्मी विनाशकारी , हाहाकारी राक्षसी शक्तियों से हाथ मिलाता है अथवा उधर ही परीवर्तीत होता है तो यह महाभयंकर *धर्म संकट ही है !*
उदाहरण के तौर पर देखे तो ?
मैं अनेक लेख लिखता हूं , कुछ विडिओ बनाता हूं , तो केवल और केवल हिंदू धर्म के लिये , संस्कृती रक्षण के लिये , ईश्वरी सिध्दांतों के लिये ही लिखता हूं !
इसमें आर्थिक लाभ हानी यह महत्वपूर्ण मुद्दा नहीं होता है , गौण होता है , बल्की सिध्दांतों की अंतिम जीत के लिये आजीवन प्रयास करना महत्वपूर्ण होता है !
मुझे इसमें कितना आर्थिक लाभ मिलता है यह भी महत्वपूर्ण मुद्दा नहीं है !
धर्म के लिये और सत्य के लिये तथा सत्य सनातन हिंदू धर्म के लिये ही संपूर्ण समर्पित जीवन , यही जीवन सही जीवन है !
अनेक महापुरूषों ने लाभ हानी को ना देखते हुए केवल और केवल हिंदू धर्म तथा ईश्वरी सिध्दांतों के लिये ही अपना संपूर्ण जीवन समर्पित किया था !
याद करो , याद करो ...
ऐसे ही
हिंदू जैसे महान संस्कृती में जन्म लेने वाले अनेक महात्माओं को ...
राजे संभाजी महाराज ने , गुरू गोविंद सिंग जी ने और ऐसे अनेक महात्माओं ने ,सिध्दांतों के लिये , धर्म के लिये हॅंसते हॅंसते मृत्यू को गले लगाया मगर सिध्दांतों से समझौता नहीं किया !
छोटे छोटे लालच में आकर अथवा डर के मारे धर्म परिवर्तन *करनेवाले साथीयों...*
याद करो वही वीर महापुरूषों को जीन्होने धर्म के लिये और सत्य के लिये , सब कुछ नौछावर कर दिया था !
याद करो उन आदर्शों को जीसकी आज भी हम पूजा करते है !
स्वाभिमानी बनो ,
छोटी छोटी बातों के लिये लाचारी मत स्विकारो...
धर्म से बढकर कुछ भी नहीं होता है !
धर्म के लिये सारा जीवन समर्पित करना ही असली जीवन है !
जरा सोचो साथीयों ,
जो हमारे देवीदेवताओं को , महापुरूषों को , आदर्श ईश्वरी सिध्दांतों को आजीवन बरबाद करने का सपना देखते है , ऐसा ही लगातार प्रयास करते आ रहे है , ऐसे विघटनकारी हितशत्रुओं से दूर रहो !
ऐसी शक्तियों को सदा के लिये सत्ता और संपत्ती से दूर रखो !
एकसंध और अटूट समाज बहुत कुछ कर दिखाने के लिये सक्षम होता है !
*जागो मेरे प्यारे हिंदू* *साथीयों !*
*यही असली जीवन होता* *है !*
*यदी मैं रातोरात* *मालामाल* ( और भी अनेक मेरे जैसे योध्दा हमारे धर्म में पैदा हुए है , जो बिना लाभ हानी के , धर्म के लिये दिनरात लड रहे है ) होने के लिये अपने सिध्दांत और अपनी आत्मा बेचूंगा और हाहाकारी, राक्षसी शक्तियों को जाकर मिलुंगा , उनके लिए ही लिखुंगा , विडिओ बनाऊंगा, फिल्म निर्माण के लिये फायनान्स लूंगा, हिंदुद्रोही शक्तियों को मिलकर, हिंदुद्रोह करूंगा तो निश्चित ही यह निंदनीय तो है ही
मगर...यह तो ...
*स्वधर्मे निधनं श्रेय:*
*परधर्मो भयावह:*
इसी श्रेणी में ही आता है !
मुझे मेरे धर्म में , अगर मेरे विचारों को कोई स्विकारे या नहीं , अथवा मेरे ही धर्म में , मेरे ही लोगों द्वारा प्रताडना भी मिले , अपमान , अवहेलना भी मिले तो भी चलेगा,
*मगर ?*
कार्य तो खुद के आदर्श ईश्वरी धर्म का ही करना चाहिए !
बिना आर्थिक लाभ हानी देखे !
आप सभी से भी यही अपेक्षा है !
यही असली धर्म है और यही *धर्म की शिक्षा भी* है !
और इसी आदर्श रास्तों पर चलना हर एक हिंदू का दाईत्व भी है !
हमारे कार्यों में यश मिले न मिले , कोई सहयोग करे न करें , चाहे गरीबी में , एक झोपडी में भी रहना पडे , दाल रोटी भी खाना पडे तो भी चलेगा , मगर सिध्दांतों से सम़झौता नहीं होना चाहिए !
" *वहाॅं* ? " सोने का राजमहल भी मिले तो भी नरक समान है और
" *हमारे यहाँ ? "*
टूटी फूटी झोपडी भी मिले तो भी स्वर्ग समान है ?
यही फर्क है दोनों में ?
यही
*स्वधर्मे निधनं श्रेय:*
*परधर्मो भयावह:* का वास्तव अर्थ है ?
साथीयों धर्म के लिये सब कुछ नौछावर करना ही असली जीवन है, मगर धन दौलत के लालच में परीवर्तीत होकर , खुद की आत्मा बेचना मृत्यू समान ही है !
*यही असली सत्यमेव* *जयते है !*
अगर हमारा कोई भाई , गलत रास्तों से चलकर, हाहाकार फैला रहा है , सभी का जीना मुश्किल कर रहा है , आक्रमणकारीयों को जाकर मिल रहा है, आक्रमणकारीयों की शक्ती बढा रहा है तो ?
उसे कानून के दायरे में रहकर दंडित करना भी यथोचित तो है ही , सामाजिक हाहाकार और उद्रेक कम करने का एक पुण्यकर्म भी है !
जो ईश्वर संम्मंत भी है !
आज हमारे कुछ हिंदू भाई , आक्रमणकारीयों को गले लगाकर , गलत रास्तों से चलकर, निजी स्वार्थ के लिये, हाहाकार और उन्माद फैलाने में मदद कर रहे है, और ऐसे ही उन्मादी संगठनों का सहयोग कर रहे है तो ?
ऐसा भयंकर अराजक देखकर बडा दुःख तो होगा ही !
उन्हे भी तुरंत और सख्त कानूनी दंड देना अनिर्वार्य है , ता की
धर्म रक्षा और धर्मकार्य में कोई बाधा ना बना सके !
मेरे *सद्गुरू आण्णा* भी यही भगवान श्रीकृष्ण की निती मुझे हमेशा सिखाते थे !
धर्मयुद्ध तो भगवान श्रीकृष्ण ने इसी सत्य सनातन धर्म की अंतिम जीत के लिये ही किया था !
और ईश्वरी सिध्दांतों की रक्षा के लिये भगवान श्रीकृष्ण भी भगवत् गीता में निरंतर , आज भी यही सिखाते है !
भगवत् गीता का पठन करना ठीक है मगर उसका आचरण करना भी भयंकर कठीण जरूर है , मगर अत्यावश्यक भी है !
तलवार की धार पर चलने जैसा !
फिर भी यह रास्ता अपनाना ही पडेगा !
इसी में ही जीत तो पक्की है ही !
बाकी आप सभी मेरे भाई सूजान और सूज्ञ तो है ही !
क्या करना है , क्या उचीत है , यह सबकुछ आप स्वयं जानते भी है !
*धर्म रक्षा के लिये* *तेजस्वी बनो*
*उन्मादी नहीं*
*जय श्रीकृष्ण*
*जय हरी विठ्ठल*
🌞🌞🕉️🚩🙏
उपद्रवी व रक्त पिपासू ढेकणं , झुरळं , डास लगेच एकाचे हजारो होतात.त्याला लगेच फवारा मारावा लागतो.समजलं का कांही ???
विनोदकुमार महाजन #❤️जीवन की सीख
सावधान https://globalhinduism.in/?p=3210 #❤️जीवन की सीख
*खतरे की घंटी बज चुकी* *है...*
✍️ २७८१
🫣🫣🫣🫣🫣
जी हाँ साथीयों
साजीश गहरी है
चाल भयंकर है
*सावधान हो जाईये !*
खतरे की घंटी बज चुकी है !
टुलकीट गैंग देश में भयंकर अराजक फैलाने के लिये सक्रीय हो गई है !
*संकट गहरा है !*
संपूर्ण तबाही का नया प्लाॅन तैय्यार होकर ,
*मार्केट में खुले आम*
घूम रहा है !
विषय है
*सवर्ण विरूद्ध गैरसवर्ण*
मोदिजी योगीजी ने संकट की गहराई पूर्ण रूप से भाॅंप ली है !
इसिलिए वो मौन हो गये है ?
दोनों में से एक पक्ष लेंगे तो ? भयंकर बदनामी और अगले विधानसभा और लोकसभा के सभी चुनावों पर गहरा असर ???
२४ में क्या हुवा था ?
*संविधान खतरे में का*
झूटा प्रपोगंडा फैलावर , समाज मन को संपूर्ण रूप से संभ्रमित और प्रभावित करके , मतदान प्रक्रिया पर , गहरा असर पडा था !
परिणाम क्या हुवा था ?
चारसो पार तो दूर ?
स्पष्ट बहुमत तक जाने में भी अनेक बाधाएं उत्पन्न हो गई !
अब मुद्दा सवर्ण और गैर सवर्ण का बनाया जा रहा है !
जो अगले उत्तर प्रदेश विधानसभा और पश्चिम बंगाल विधानसभा पर और भविष्यकालीन लोकसभा चुनावों पर गहरा असर करेगा !
*इसिलिए...??*
सावधान हो जाईये , सचेत हो जाईये , सतर्क हो जाईये !
एक एक कदम फूंक फूंक कर चलिए !
यह विनाशकारी चक्रव्यूह भेदन की यशस्वी रणनीती और यशस्वी काट बनाईये ! ( इसके लिए मुझे मुमकीन हुवा तो संपर्क किजिए )
फर्जी प्रपोगंडा फैलाने वाले फेक विडिओ , लेख , व्यक्ती पर तुरंत और कठोर, सख्त कानूनी कारवाई किजिए !
*यह तुरंत और* *अत्यावश्यक है !*
मार्केट में बहुत से फर्जी फेक लेख , विडिओ चलेंगे जो समाजमन को काफी प्रभावित भी करेंगे और एक हो रहे समाज मन में फूट डालने की भी पूरी कोशिश करेंगे !
इसी विषय पर आधारित एक फिल्म बन रही है...( नाम नहीं दे रहा हूं )
फिल्म का नाम भी समाज में फूट डालने का ही है ! ऐसे फिल्म निर्माण के लिये भी फंडिंग कहाॅं से हो रही होगी ? यह भी आप सब जानते ही है !
शायद योगी सरकार ने इसके विरूद्ध एफ.आय.आर.दर्ज की है ऐसी जानकारी प्राप्त हुई है !
और एक भाजपा मुख्यमंत्री का समाज में फूट डालने का एक विडिओ भी जोरशोर से सोशल मिडिया पर वायरल किया जा रहा है !
शायद यह विडिओ भी फर्जी हो सकता है !
२४ में मोहन भागवत जी और अमीत शहा जी पर ऐसे ही संभ्रम निर्माण करनेवाले फेक विडिओ व्हायरल किए गये थे , यह आपको पता होगा !
एकसंध होता जा रहा हिंदू समाज को तोडने की और राज करने की विनाशकारी साजिश भयावह है !
हिंदू साथीयों
उज्वल भविष्य के लिये एक रहिए ! सचेत रहिए !
सावधान साथीयों
अनेक हिंदुद्रोही और हिंदुद्वेषी गुप्त रूप से , गुप्त एजेंडा चलाने के लिये , पर्दे के पिछे से शायद सक्रिय हो गये है !
*अतएव सावधान !*
*त्रिवार सावधान !*
*वंदे मातरम्*
*जय श्रीराम*
*विनोदकुमार महाजन*
( अंतरराष्ट्रीय पत्रकार )
*एक विशेष टीप : -* अनेक माध्यमों द्वारा मेरे लेख करोडो लोग पढते है ! मुझे ऐसे भी मेसेज आते है की ,
तुम्हारे लेख पर आधारित कोई लोग अनेक विडिओ बनाते है अथवा उनके नाम से मेरे लेख प्रकाशित भी करते है ! इसी निमीत्त तो मेरे *तेजस्वी विचार तेजी* से समाज में फैल रहे है ! शायद नाम मेरा न सही , विचार तो मेरे ही है ना !? इसिलिए मैं काॅपी राईट भी नहीं रखता हूं !
पैसा कमाना ही है तो एक रात में ( आत्मा बेचकर ? ) पांच हजार करोड रुपये भी कमा सकते है ! ऐसे अनेक आफर भी मिले थे... मगर वह पैसा किस काम का ? जिसमें सत्य की और ईश्वरी सिध्दांतों की सुगंध ना हो ?? देना ही है तो ? ईश्वर एक ही रात में, वह भी सही रास्ते से , *ईश्वरी कार्य के* लिये , अरबो खरबो भी देगा !)
भगवे को संपूर्ण समर्पित , निस्वार्थ जीवन ही असली जीवन होता है !!
मेरी दो अंतरराष्ट्रीय वेबसाइट चलाने वाले मेरे प्रिय मित्र , राम आसबे जी , मेरी वेबसाईट को विज्ञापन लगाने से भी मना करते रहते है ता की , पाठकों की असुविधा ना हो !
सनातनीयों को यशस्वी होने का सही रास्ता मिले !
*जय हरी विठ्ठल*
✍️🚩🚩🚩🚩
हम तुमसे प्रेम करते रहे https://globalhinduism.in/?p=3207 #❤️जीवन की सीख
*हम? तुमसे प्रेम करते* *रहे..? तुम ?* *नफरत का बीज बोते* *रहे...* 👆❓
✍️ २७८०
*विनोदकुमार महाजन*
⁉️❓⁉️❓
जी हाँ साथीयों
हम *उनपर* हमेशा
सच्चा प्रेम करते रहे और वो ? *हमपर हमेशा* नफरत का बीज बोते रहे ?
*सदीयों से !*
सदीयों से हम असली भाईचारा निभाते रहे !
और वो ?
सदीयों से भाईचारे की आड में हमारा घात करते रहे !
*कौन ?*
*सोचो समझो जानो* *जागो असलियत* *पहचानो !*
भाईचारे में हम हमारा ही अस्तित्व खोते रहे !
सदीयों से वो हमें भाईचारे के आड में भगाते रहे !
*अभी भी नहीं समझे ?*
*अभी भी अनाडी ही* *हो ?*
हर जगहों से हमारे मठ मंदिर गिराए गए ! ?
हमारे आदर्श संस्कृती के नामोनिशाण मिटाते गए ! ?
जगह जगह पर हमारे आदर्शों को जमीनदोस्त करते गए ???
*और फिर भी हम* *भाईचारा निभाते रहे !*🤫
*आज तक अभी तक*
यही सिलसिला लगातार चलता आ रहा है !
*फिर भी हम आज भी ?*
भाई समझकर प्रेम करते रहे !
तुम्हारे आदर्शों की लगातार पूजा करते रहे !
और तुम ? हमारे आदर्श श्रद्वास्थानों पर *मौका* *मिलते ही* हमले करते रहे ! ?
तुम *कावेबाज ,* *धोकेबाज , षड्यंत्रकारी* होकर भी हम आज तक तुम्हारी असलीयत समझ न सके !
*तुम लुटाते रहे*
*हम लुटते रहे !*
तुम बरबाद करते रहे
हम हर जगहों पर बरबाद होते रहे !
हमारी ईश्वरी वृत्ती हम कभी भी छोड न सके !
तुम तुम्हारी हैवानियत भरी गहरी चाल कभी भी छोड न सके !
तुम भगाने में माहीर हो,
हम भगौडे होकर भी , कभी भी जाग ना सके !
झूटे भाईचारे की आड में
हम तुमपर विश्वास करके बारबार बरबाद होते रहे !
आक्रमणकारी , चोर , लुटारू होकर भी हम तुम्हे बारबार अपनाने की झूटी कोशिश करते रहे !
*मगर याद रखना*
अत्याचार का अंत भी बहुत ही बूरा होता है !
जब ईश्वर की लाठी चलती है *तब ?*
उसके लाठी की आवाज तक सुनाई नहीं देती है !
*जरासंध के सौ अपराध* *भरने तक*
स्वयं भगवान भी शांत और मौन रहे !
जरासंध के आतंकवादी पाप मौन होकर देखते रहे !
और सौ अपराध पूरे होते ही ❓
*आगे क्या हुवा था यह* *तो तुम ही बताओ* *ना ?*
रावण दुर्योधन कंस हिरण्यकश्यपू जैसे *महापापीयों का अंत भी* ?
ईश्वर के दरबार में कैसा हुवा था यह भी आप सभी को पता है ना ! ?
*हम भोलेभाले जरूर है* *दिलवाले भी है*
*मगर*
*ईश्वराधिष्ठित विश्व*
यह महान सिध्दांत मानने वाले भी है !
*इसिलिए...?*
*जब ईश्वर की लाठी* *बोलेगी तब ?*
तुम्हारा सर्वनाश तय है
*पक्का तय है !*
*और यह समय भी* *नजदिक ही है !*
*आगे देखिए होता है* *क्या ?*
*जय हरी विठ्ठल*
✅✅✅✅✅
गौमाता की जो रक्षा करेगा , वही देश पर
राज करेगा... गौमाता का हत्यारा ?, गौ श्राप से ही , समाप्त होगा !!
विनोदकुमार महाजन #❤️जीवन की सीख
*जीवन में परिस्थितियाँ कैसी*
*भी हों,*
*उत्साह और आत्मविश्वास को*
*कभी कम नहीं होने दें,!,,,*
🩷 *विनोदकुमार महाजन 🌹* #❤️जीवन की सीख
सुखी मनुष्य https://globalhinduism.in/?p=3204 #📖जीवन का लक्ष्य🤔
*मी सुखी होत आहे...*
✍️ २७७९
*विनोदकुमार महाजन*
🌹🌹🌹🌹🌹
होय मित्रांनो ,
आपण दररोज आपल्या मनाला हे नक्की सांगायचं.
*मी सुखी होत आहे.*
एवढं वाक्य जरी तुम्ही म्हणत असाल तर नक्कीच तुम्ही वरचेवर सुखी व्हालच व्हाल.
*प्रयत्न करून तर बघा.*
याला कांहीं पैसा वगैरे नाही हो लागत.
" माझ्यावर दररोज सद्गुरूची , ईश्वराची कृपा होत आहे.
*माझे दुःख हळूहळू* *संपत आहे.*
माझ्या आसपासची , माझ्यावर खरं प्रेम करणारी सगळी माणसं सुखी होत आहेत "
असही म्हणा.
स्वतः पेक्षा इतरांच्या सुखासाठी प्रार्थना करणारी निस्वार्थी माणसं देवाला खूपच प्रिय असतात.
म्हणूनच तो त्यांचं लवकर ऐकतो.
" मला वरचेवर सुख , समाधान , शांती , आनंद मिळतो आहे.
मला लवकरच मला हवे असणारे धनही मिळणार आहे "
*अशीही प्रार्थना करा.*
*प्रार्थनेत खूप मोठी शक्ती* *असते.*
" मी तर सुखी होणारच पण माझ्या बरोबर येणाऱ्या प्रत्येकाला मी सुखी आनंदी करणार "
ही मनाची धारणा ठेवा.
एवढंच नाही तर,
मनात असंही म्हणा की,
" मला दुःख, त्रास,कष्ट देणा-यांनाही सुखी कर भगवंता.
त्यांच्या चुका माफ करून त्यांना सन्मार्ग दाखव . माझा अकारण द्वेष मत्सर करणारांनाही सुखी
कर देवा ".
भलेही तुमच्या त्यांच्या आयुष्यात कधीही गाठीभेटी होऊ अथवा न होऊ,पण त्यांच्या साठी प्रार्थना तरी करा.
पटत नसेल तर एकमेकाचं आयुष्यभर तोंडही बघू नका,पण मनात कटुता ही ठेऊ नका.
वाटल्यास त्यांच्या आयुष्यातून कायमचं दूर निघून जा.
पण ह्रदयात मात्र प्रेम ठेवा.
बघा तुमचं आयुष्य कसं जादू झाल्यासारखं बदलतं आहे ते.
प्रत्यक्ष भगवंतच तुमच्या जवळ राहून तुम्हाला आनंदी जीवन देत आहे , असेही तुम्हाला जाणवेल.
जमलं तर तुळशीची माळ गळ्यात घाला.जमेल तसं एखाद्या मंदिरात जाऊन दर्शन , भजन , पूजन करा . कपाळावर हिंदू धर्माचा अभिमान वाटतो म्हणून भगवे गंध लावा.घरावर , दुकानात भगवंताचे प्रतीक म्हणून भगवा ध्वज लावा.
जागोजागी धर्म जागरण करा.
आसुरी व्यक्तिपासून समाजाला सावध करा.
एवढं तरी नक्कीच जमेल.
जमलं तर बघा प्रयत्न करून.नाहितर द्या सोडून.
*सर्व मित्रांना समर्पित.*
*हरी ॐ*
🌞🌞🌞🌞🌞
जहाँ तुम्हारी सच्चाई,अच्छाई का मोल नहीं , जहाँ तुम्हारे प्रेम और अश्रुओं की कीमत नहीं उस जगह पर मत रहिए , उस जगह पर मत जाईये !
यही आनंदी जीवन का रहस्य है !
विनोदकुमार महाजन #❤️जीवन की सीख
अमीरी गरीबी https://globalhinduism.in/?p=3199
*भुलभुलैय्या अमीरी* *गरीबी का...*
✍️ २७७७
*विनोदकुमार महाजन*
💰🌈💎💎💎
भुलभुलैय्या से चलती है दुनियादारी !
कोई अमीर है तो कोई गरीब !
हर एक का सपना होता है अमीर बनने का !
गरीब को भी लगता है , हम जरूर अमीर बनेंगे !
क्योंकी गरीबी है एक शाप !
अमीरी में होती है
शान ए शौकत , एक विलासी जीवन !
मगर फिर भी अमीरी में होता है दिखावा , भपका , अवडंबर , सबसे मैं बडा की अहंकारी वृत्ती !
भुलभुलैय्या का जीवन सारा !
हाय फाय जीवन जीने की चाहत !
करोडों का बंगला , गाडी , नौकर , चाकर आंखों को चकाचौंध कर देती है !
फिर भी संत कबीर कहते है और अनुप जलोटा बहुत ही बढीया ढंग से गाते है...
" *जो सुख नाही अमीरी* *में , मन मेरा* *लागा फकिरी में* "
धन चाहिए , धन वैभव की खनखनाहट चाहिए !
मगर आखिर धन के लिये भी होता है ,
" *नशीब अपना अपना "*
धन वैभव तो केवल मनुष्यों को ही लगता है !
बाकी पशुपक्षी तो धन वैभव ना होकर भी मस्त होकर आनंदी जीवन जीते है !
रास्ते पर खाना , रास्ते पर ही सोना !
राजमहल तो इंन्सानों को लगता है !
हाँ धन तो चाहिए ही चाहिए !
मगर दो नंबर वाला नहीं बल्की माता महालक्ष्मी की कृपा वाला धन चाहिए !
मगर होता क्या है ,
काला हो या गोरा , कौनसे भी कमाई का हो , आखिर पूजा जाता है तो, धनवान ही !
गरीब को कौन पूछता है यहाँ ?
सत्य , प्रेम , इमानदारी , सत्वगुण की कीमत आखिर , धन वैभव के सामने होती ही नहीं है !
" *विद्वान सर्वत्र पूज्यते* *नहीं चलता है ,* *वास्तव में धनवान* *सर्वत्र पूज्यते* " यही दुनियादारी का वास्तव है और इसी पर केवल दुनियादारी चलती भी है !
धनवान फिर चाहे हो अवगुणी या फिर हो पाप की कमाई वाला , कीमत उसीकी ही होती है !
गरीब बेचारा *मारे मारे*
फिरता रहता है !
*मॅन पाॅवर और मसल* *पॉवर*
*केवल और केवल*
*मनी पाॅवर से ही चलती* *है !*
*अमीरों को रामराम*
*गरीब तेरा क्या काम ?*
यही दुनिया का दस्तुर है !
अमीरों को लगता है और पैसा चाहिए , मध्यमवर्गीय को लगता है , मालामाल होना चाहिए , गरीब को लगता है , धन की वर्षा होनी चाहिए !
*है ना साथीयों ?*
मगर आप चाहे अमीर हो , मध्यमवर्गीय हो अथवा गरीब हो ,
ईश्वर के लिये सब एक समान ही होते है !
ईश्वर के दरबार में भेदभाव है ही नहीं !
*इसिलिए तो...*
अमीर हो या गरीब हो , सब ईश्वर की पूजा मनोभाव से करते ही है !
*मेरा पांडूरंग*
गरीबों का भी है , अमीरों का भी है ! पशुपक्षीयों का भी है !
*सबका हरी मेरा श्रीहरी*
पांडूरंगाची भगवी पताका घेऊ खांद्यावरी
*पांडूरंग पांडूरंग*
*पांडूरंग हरी वासुदेव हरी*
🙏🙏🙏🙏🚩 #❤️जीवन की सीख








