25 साल की लड़ाई। एक ऐतिहासिक जीत। ✊✊
Greater Noida के माली और सफाई कामगार भाई-बहनों ने साबित कर दिया- जब मजदूर एक होते हैं, तो कोई ताकत उन्हें नहीं रोक सकती।
प्रशासन ने अनदेखा किया। विभाग टालता रहा। लेकिन हमने हार नहीं मानी।
सुप्रीम कोर्ट से मज़दूरों के हक़ में फैसले के एक साल से अधिक बीत जाने के बावजूद श्रम विभाग के मज़दूर विरोधी रवैए के चलते मज़दूरों को अपना हक़ नहीं मिल सका था। यूनियन के दृढ़ संकल्प के चलते ही आज ₹46,36,80,000 के रिकवरी का ऑर्डर हासिल हो सका है। यह सिर्फ आर्थिक जीत नहीं, यह हमारे इज्ज़त, अभिमान और पहचान की जीत है।
यह जीत किसी एक की नहीं- यह हर उस मजदूर की जीत है जो रोज उठता है, काम करता है, और अपने हक के लिए डटा रहता है।
सड़क से संघर्ष, संघर्ष से जीत- मज़दूर एकता जिंदाबाद!
✊✊✊
#CITU #MazdoorEkta #LaborRights #🌟 All About Spotlight
प्रेस विज्ञप्ति
दिनांक: 25.05.2026
ग्रेटर नोएडा माली एवं सफाई कामगार यूनियन का प्रस्तावित धरना स्थगित, श्रम विभाग ने जारी किए वेतन भुगतान के आदेश
ग्रेटर नोएडा माली एवं सफाई कामगार यूनियन, गौतम बुद्ध नगर, सम्बद्ध सीटू ने आज जारी विज्ञप्ति में बताया कि 25 मई 2026 से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन को स्थगित कर दिया गया है। यह निर्णय अपर श्रमायुक्त, गौतम बुद्ध नगर द्वारा श्रमिकों के बकाया वेतन भुगतान के आदेश जारी करने के बाद लिया गया।
पृष्ठभूमि:
1. न्यायालय का आदेश: औद्योगिक न्यायाधिकरण-5, मेरठ द्वारा दिनांक 29.05.2018 को ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के विरुद्ध पारित अवार्ड को इलाहाबाद उच्च न्यायालय व उच्चतम न्यायालय ने भी यथावत रखा। उच्चतम न्यायालय ने दिनांक 05.05.2025 को प्राधिकरण की एस.एल.पी. खारिज कर दी। 2. बकाया राशि: अवार्ड के तहत दिनांक 31.01.2000 से 20.12.2023 तक के वेतन व अन्य देयों की कुल धनराशि 46,36,80,000/- रुपये ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा 07.08.2025 व 01.09.2025 को श्रम-आयुक्त कार्यालय में जमा कर दी गई थी। 3. भुगतान में विलम्ब: श्रमिकों द्वारा 19.09.2025 को सभी दस्तावेज जमा करने के बावजूद 8 माह तक भुगतान नहीं किया गया। प्रशासन द्वारा बार-बार आश्वासन के बाद भी टालमटोल की जा रही थी।
आंदोलन की चेतावनी व समाधान:
भुगतान न होने से क्षुब्ध होकर यूनियन ने 25 मई 2026 से अपर श्रम-आयुक्त कार्यालय, सेक्टर-3 नोएडा पर परिवार सहित अनिश्चितकालीन धरने का नोटिस दिया था। यूनियन के नोटिस के बाद अपर श्रमायुक्त द्वारा कई दौर की वार्ताएं की गईं।
वार्ता के उपरान्त उप श्रमायुक्त, उ0प्र0, गौतमबुद्धनगर द्वारा भुगतान आदेश पारित कर दिए गए हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि वसूली प्रमाण पत्र संख्या 266-268/नोएडा/अवार्ड दिनांक 04.01.2024 से प्राप्त धनराशि 46,36,80,000/- रुपये सम्बन्धित श्रमिकों के बैंक खातों में तत्काल भुगतान की जाए।
यूनियन का बयान:
यूनियन के अध्यक्ष टीकम सिंह व महामंत्री रामकिशन ने बताया कि श्रम विभाग द्वारा भुगतान आदेश जारी होने के बाद 25.05.2026 से प्रस्तावित धरना व गांधीवादी अहिंसापूर्ण आन्दोलन को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भुगतान में अनावश्यक विलम्ब किया गया तो यूनियन पुनः आन्दोलन के लिए बाध्य होगी।
सीटू गौतम बुद्ध नगर के जिला सचिव कामरेड गंगेश्वर दत्त शर्मा ने कहा कि ग्रेटर नोएडा के माली व सफाई कर्मचारियों ने सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक 25 साल एकजुटता के साथ बहादुरीपूर्ण संघर्ष किया है। यह जीत मजदूर वर्ग की एकता की जीत है। सीटू की ओर से सभी संघर्षरत साथियों को क्रांतिकारी बधाई।
जारीकर्ता:
रामकिशन
महामंत्री
ग्रेटर नोएडा माली एवं सफाई कामगार यूनियन
गौतम बुद्ध नगर, सीटू
सम्पर्क कार्यालय: ए-2, सैक्टर-8, नोएडा #🌟 All About Spotlight
🚩 लाल झंडे को बदनाम करने वालों को जवाब 🚩
कुछ लोग आज कॉमरेडों और लाल झंडे पर उंगली उठा रहे हैं,
लेकिन शायद वो इतिहास और संघर्ष की सच्चाई नहीं जानते।
लाल झंडा किसी की “जेब गर्म” करने का माध्यम नहीं,
बल्कि गरीब, मजदूर, किसान और शोषित लोगों की आवाज़ है। ✊
जो लोग आज आंदोलन और धरनों का मज़ाक उड़ा रहे हैं,
उन्हें याद रखना चाहिए —
अगर मजदूरों को हक मिला, किसानों को आवाज़ मिली,
गरीब को न्याय मिला, तो उसमें सबसे बड़ा योगदान संघर्ष करने वाले कॉमरेडों का रहा है। 🚩
कॉमरेड वो लोग हैं जो
🔥 तपती धूप में धरना देते हैं,
🔥 गरीब के लिए प्रशासन से भिड़ते हैं,
🔥 मजदूर की मजदूरी और किसान की फसल के लिए लड़ते हैं।
और जो लोग सिर्फ सोशल मीडिया पर बैठकर झूठ फैलाते हैं,
उन्हें संघर्ष कभी समझ नहीं आएगा।
अगर लाल झंडे वाले “सौदेबाज” होते,
तो आज भी हजारों कॉमरेड बिना किसी लालच के जनता के बीच संघर्ष नहीं कर रहे होते।
सच्चाई यह है कि कुछ लोगों को जनता की जागरूकता और लाल झंडे की बढ़ती ताकत से डर लगने लगा है।
🚩
लाल झंडा बिकाऊ नहीं, संघर्ष का प्रतीक है।
कॉमरेड झुकते नहीं, लड़ते हैं।
जनता की लड़ाई जारी रहेगी। ✊
इंकलाब जिंदाबाद 🚩
मजदूर-किसान एकता जिंदाबाद 🚩 #🌟 All About Spotlight
https://youtube.com/watch?v=2KAUE4njsrw&si=dIvY-lpBnkdzIeUb #🌟 All About Spotlight
प्रेस विज्ञप्ति
दिनांक: 20 मई 2026
मुख्यमंत्री का बयान कॉर्पोरेट हितों को बचाने का प्रयास, उद्योग बंदी के असली कारणों से ध्यान भटका रहे हैं – सीटू गौतम बुध नगर
सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (सीटू) गौतम बुध नगर जिला कमेटी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा ट्रेड यूनियनों को उद्योगों के बंद होने के लिए जिम्मेदार ठहराने वाले बयान की कड़ी निंदा की है। सीटू ने इसे गैर-जिम्मेदाराना, असंवैधानिक और कॉर्पोरेट घरानों के हितों को साधने वाला बयान बताया है।
मुख्य बिंदु:
• मुख्यमंत्री का बयान गैर-जिम्मेदाराना: मुख्यमंत्री द्वारा एक समाचार पत्र के कार्यक्रम में ट्रेड यूनियनों को उद्योग बंदी और श्रमिकों की भुखमरी के लिए जिम्मेदार ठहराना संविधान की भावना के खिलाफ है। ट्रेड यूनियन बनाना अनुच्छेद 19 के तहत मौलिक अधिकार है। • नवउदारवादी नीतियां हैं बंदी की असली वजह: फैक्ट्रियां ट्रेड यूनियन की वजह से नहीं, बल्कि नवउदारवादी आर्थिक नीतियों, निजीकरण, नोटबंदी, गलत जीएसटी, निवेश की कमी और कुप्रबंधन के कारण बंद हुई हैं। कानपुर की एनटीसी और बीआईसी मिलों को रिलायंस जैसे बड़े घरानों को बाजार देने के लिए बंद किया गया। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने इन मिलों की जमीन रियल एस्टेट कारोबारियों को बेच दी। • ट्रेड यूनियन पर हमला लोकतंत्र के लिए खतरा: औद्योगिक शांति और बेहतर उत्पादन के लिए पूंजीवाद ने ही लंबे संघर्षों के बाद ट्रेड यूनियन का अधिकार दिया था। भारत में 1926 से यह कानूनन अधिकार है। यूनियनें मजदूरों के सम्मानजनक वेतन, रोजगार सुरक्षा और अधिकारों के लिए लड़ती हैं। कई बार यूनियनों ने ही बीमार उद्योगों को बचाया है, क्योंकि सुरक्षित और संतुष्ट श्रमिक ही उत्पादन बढ़ाता है।
सीटू गौतम बुध नगर के जिला सचिव गंगेश्वर दत्त शर्मा ने कहा:
"मुख्यमंत्री का बयान हकीकत से कोसों दूर है। उद्योग बंद होने के पीछे सरकार द्वारा उद्योगपतियों को दी जा रही बेहिसाब छूट सबसे बड़ा कारण है। सरकार उद्योग लगाने के लिए सस्ती दरों पर जमीन देती है, टैक्स में छूट देती है। 5-10 साल बाद जब जमीन की कीमत कई गुना बढ़ जाती है, तो उद्योगपति फैक्ट्री बंद कर जमीन बेचकर मोटा मुनाफा कमाते हैं। फिर नए औद्योगिक क्षेत्रों में फिर से सस्ती जमीन और छूट का लाभ उठाते हैं।
कई बार सरकार और उद्योगपतियों की सांठगांठ से जब कंपनी बंद होने के कगार पर पहुंचती है, तब मजदूर अपने कानूनी बकाया और हकों के लिए यूनियन बनाते हैं। लेकिन प्रचार यह किया जाता है कि 'यूनियन बनी इसलिए फैक्ट्री बंद हुई'। सच्चाई इसके उलट है – यूनियन इसलिए बनी क्योंकि फैक्ट्री बंद होने वाली थी।"
उत्तर प्रदेश में श्रमिकों की बदहाल स्थिति:
प्रदेश में मजदूर आधुनिक बंधुआ प्रथा में काम करने को मजबूर हैं। कारखाना अधिनियम में संशोधन कर काम के घंटे 12 कर दिए गए हैं। नए लेबर कोड से न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा और सामूहिक सौदेबाजी के अधिकार छीन लिए गए हैं। 12 साल से न्यूनतम मजदूरी का रिवीजन नहीं हुआ। मुख्यमंत्री ने नोएडा में मई माह में वेज बोर्ड गठन, आंगनबाड़ी-आशा का मानदेय और आउटसोर्सिंग कर्मियों का वेतन बढ़ाने की घोषणा की थी, जो आज तक पूरी नहीं हुई।
सीटू ने मांग की है कि मुख्यमंत्री अपने बयान पर पुनर्विचार करें और कॉर्पोरेट के प्रतिनिधि की तरह काम करने के बजाय प्रदेश के लाखों मजदूरों के हित में नीतियां बनाएं। ट्रेड यूनियनों को दोष देना असली आर्थिक और नीतिगत विफलताओं से ध्यान हटाने का प्रयास है।
जारीकर्ता:
मुकेश कुमार राघव
अध्यक्ष
राम स्वारथ
महासचिव
गंगेश्वर दत्त शर्मा
सचिव
सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस सीटू गौतम बुध नगर #🌟 All About Spotlight
प्रेस विज्ञप्ति
दिनांक: 19.05.2026
अवार्ड की राशि का भुगतान न होने पर ग्रेटर नोएडा माली एवं सफाई कामगार यूनियन का 26 मई से परिवार सहित नोएडा श्रम कार्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना
ग्रेटर नोएडा माली एवं सफाई कामगार यूनियन, गौतम बुद्ध नगर, सम्बद्ध सीटू ने आज प्रेस को जारी विज्ञप्ति में बताया कि श्रम विभाग द्वारा मजदूरों की अवार्ड राशि का भुगतान न करने के विरोध में यूनियन 26 मई 2026 से अपर श्रम-आयुक्त, नोएडा के कार्यालय के समक्ष परिवार सहित रात-दिन अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन करेगी।
मुख्य बिंदु:
1. न्यायालय के आदेश की अवहेलना: माननीय औद्योगिक न्यायाधिकरण-5, मेरठ द्वारा ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के खिलाफ दिनांक 29.05.2018 को पारित एवं उच्चतम न्यायालय तक पुष्ट अवार्ड के तहत 31.01.2000 से 20.12.2023 तक के वेतन व अन्य देयों की धनराशि 46,36,80,000/- रुपये ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा श्रम-आयुक्त कार्यालय में 07.08.2025 व 01.09.2025 को जमा कर दी गई है। 2. भुगतान में लगातार टालमटोल: अवार्ड से सम्बन्धित श्रमिकों ने 19.09.2025 को सभी दस्तावेज प्रस्तुत कर दिए, परन्तु 8 माह बाद भी भुगतान नहीं किया गया। अपर श्रम-आयुक्त द्वारा 25.03.2026 की वार्ता में आश्वासन दिया गया था, जिसका पालन नहीं हुआ। 3. प्रशासन का गैर-जिम्मेदार रवैया: 30.04.2026 तक भुगतान का आश्वासन दिया गया, फिर 04.05.2026 को मिलने पर भी भुगतान से इनकार कर दिया गया। श्रमिकों को स्टाम्प पेपर पर शपथ पत्र देने के लिए कहा जा रहा है, जबकि राशि पहले से विभाग में जमा है। 4. आंदोलन की चेतावनी: प्रशासन के इस रवैये से क्षुब्ध होकर यूनियन ने 26.05.2026 से अपर श्रम-आयुक्त कार्यालय, सेक्टर-3 नोएडा के समक्ष परिवार सहित रात-दिन धरना देने का निर्णय लिया है। धरने के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम, भोजन की व्यवस्था की जाएगी।
यूनियन की मांग:
1. 26 मई 2026 से पूर्व अवार्ड से सम्बन्धित सभी श्रमिकों को ब्याज सहित पूरी राशि का भुगतान किया जाए। 2. अवार्ड का पूर्णतः पालन करवाया जाए। 3. धरना स्थल पर स्वच्छ पानी, शौचालय, टेंट व माईक की व्यवस्था प्रशासन द्वारा कराई जाए।
यूनियन के महामंत्री रामकिशन ने कहा कि श्रमिक पिछले 25 वर्षों से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। न्यायालय से जीतने और राशि जमा होने के बाद भी भुगतान न होना श्रम विभाग की मजदूर विरोधी मानसिकता को दर्शाता है। यदि श्रमिकों को मजबूरी में परिवार सहित सड़क पर बैठना पड़ा तो उसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी श्रम विभाग व जिला प्रशासन की होगी।
जारीकर्ता:
रामकिशन
महामंत्री
ग्रेटर नोएडा माली एवं सफाई कामगार यूनियन
गौतम बुद्ध नगर, सीटू
सम्पर्क कार्यालय: ए-2, सैक्टर-8, नोएडा
पांच चुने हुए प्रतिनिधि: हेम सिंह, महेश कुमार, राम किशन, इन्द्रपाल, फिरेशम
प्रतिलिपि: माननीय रजिस्ट्रार, उच्च न्यायालय इलाहाबाद, माननीय मुख्यमंत्री उ0प्र0, प्रमुख सचिव श्रम, श्रम-आयुक्त कानपुर, जिलाधिकारी गौतमबुद्धनगर, पुलिस आयुक्त गौतमबुद्धनगर एवं अन्य। #🌟 All About Spotlight













