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🙇‍♀️मां नर्मदा 🙏
प्राचीन काल की बात है, जब पृथ्वी पर 'ज्वरासुर' नामक एक भयंकर असुर का आतंक फैल गया था। वह असुर रोगों का साक्षात स्वरूप था। उसके स्पर्श मात्र से लोगों के शरीर तपने लगते, अंगों पर दाने निकल आते और पूरी मानवता महामारी की चपेट में आ गई थी। शक्ति का प्राकट्य🔱 जब हाहाकार मच गया, तब समस्त देवगण भगवान शिव की शरण में गए। महादेव के अंश से और आदिशक्ति की कृपा से एक देवी का प्राकट्य हुआ, जिनका स्वरूप अत्यंत शीतल और ममतामयी था। उन्हें 'शीतला' कहा गया। वे नीम की पत्तियों के गहने पहने, हाथ में कलश और झाड़ू लिए गधे पर सवार होकर पृथ्वी पर उतरीं। माँ शीतला ने जैसे ही अपनी झाड़ू से रोगों को बुहारना और कलश के जल से शांति फैलाना शुरू किया, ज्वरासुर और उसके सहायक प्रेत-पिशाच क्रोधित हो उठे। उन्होंने माता के कार्य में विघ्न डालना शुरू कर दिया ताकि महामारी बनी रहे। तब देवी की सहायता के लिए महादेव ने अपने रौद्र रूप 'भैरव' को प्रकट किया🔱 भगवान शिव ने भैरव से कहा: "हे भैरव! तुम देवी के अंगरक्षक और क्षेत्रपाल बनकर उनके साथ रहो। जो भी आसुरी शक्तियाँ या रोगरूपी दानव देवी के मार्ग में आएंगे, उनका संहार करना तुम्हारा उत्तरदायित्व है।" भैरव जी ने माता के आदेश को शिरोधार्य किया। तंत्र ग्रंथों के अनुसार, भैरव ने जहाँ एक ओर दुष्टों के लिए काल का रूप धरा, वहीं भक्तों के लिए वे 'बटुक भैरव' (बालक रूप) बनकर माता के साथ चलने लगे। उन्होंने ज्वरासुर का मान मर्दन किया और उसे माता के चरणों में झुकने पर विवश कर दिया। तब से यह परंपरा बन गई कि माँ शीतला जहाँ भी निवास करती हैं, वहाँ भैरव द्वारपाल या क्षेत्रपाल के रूप में पहरा देते हैं। बिना भैरव की अनुमति और उनके दर्शन के, शीतला माता की पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती। 🚩 इस कथा का आध्यात्मिक सार यह कहानी केवल दो शक्तियों के मिलन की नहीं है, बल्कि आयुर्वेद और सुरक्षा का संगम है: माँ शीतला: आरोग्य और स्वच्छता का प्रतीक हैं। भैरव: अनुशासन और सुरक्षा का प्रतीक हैं। निष्कर्ष: माँ शीतला की झाड़ू गंदगी (बीमारी की जड़) साफ करती है, कलश का जल घावों को भरता है और भैरव का दंड उन बाहरी नकारात्मक ऊर्जाओं को रोकता है जो दोबारा बीमारी ला सकती हैं। 🙏🔱🚩 #bhaktiwithashok #ViralBhakti #explorepage #jayshreeram #fblifestyle #💥🔥आज के चर्चित मुद्दे🔥💥 #लोकप्रिय । #🌅 सूर्योदय शुभकामनाएं #🌞 Good Morning🌞
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🌹तंत्र साधना की प्रथम शिष्या पार्वती और प्रथम गुरु शिव हैं🌹 तंत्र के मूल में शिव और शक्ति हैं। परमेश्वर के जितने अवतार हुए हैं, सभी के मूल में आद्याशक्ति की ही लीला रही है। जैसे--राधा-कृष्ण, सीता-राम आदि। लेकिन तंत्र में पहले शिव-शक्ति या शंकर-पार्वती आता है। महादेव का नाम पहले आता है। तंत्र का प्रादुर्भाव करने के लिए और जगत में प्रकाश करने के लिए सर्वप्रथम शिव ने पार्वती को तंत्र का गूढ़ रहस्य बताया था। पार्वती तंत्र की पहली पात्रा हुईं अर्थात् गुरु-शिष्य परम्परा में पार्वती पहली शिष्या बनी और शिव बने प्रथम गुरु। लेकिन विश्वब्रह्माण्ड के विस्तार के लिए शक्ति का ही आश्रय लिया गया। इसलिए शक्ति को पहले बोला जाने लगा। जैसे--लक्ष्मी-नारायण, उमा-महेश और उन्हें लक्ष्मीपति व उमापति कहा जाने लगा। किसी भी देवी-देवता के मंदिर में सात्विक पूजा-उपासना हो या हो तामसिक साधना, दीपक प्रज्ज्वलित करना आवश्यक है। एक प्रकार से साधना की पूर्णता का प्रतीक है दीपक। जब तक साधना में दीपक का प्रकाश नहीं होगा, पूजा-उपासना, आराधना-साधना का और मन्त्रों के उच्चारण का कोई फल नहीं मिलता है। दीपक की नीली ज्योति साक्षात् शिव है और उसके चारों ओर फैली हुए पीली ज्योति साक्षात् शक्ति है। वह शिव और शक्ति रूपी दीपक की लौ ही हमारी साधना-आराधना-अर्चना आदि की साक्षी है। सायंकाल शुद्ध घी का दीपक जिस घर में जलता है, उस घर में साक्षात् शिव और पार्वती का वास होता है। अगर हमें साधना में आगे बढ़ना है और करनी है प्रगति तो रात्रि-जागरण का अभ्यास करना पड़ेगा। दरअसल दिन गृहस्थों का और रात्रि साधकों की होती है। सच्चा साधक रात में जागता है क्योंकि रात्रि की निस्तब्धता जरुरी है साधक के लिए। साधना में जल का भी बड़ा महत्व है। जल चाहे प्रकृति के रूप में हो या साधना के क्षेत्र में हो, चाहे श्राप या आशीर्वाद देने में हो, जल का अपना विशेष महत्व है। सर्वप्रथम पृथ्वी पर जल की ही उत्पत्ति हुई। उसी के द्वारा जगत में जलशक्ति का स्वरुप सामने आया। इसीलिए भगवती दुर्गा को 'अम्बा' भी कहा जाता है। जल का पर्यायवाची है अम्बा। अर्थात् जल साक्षात् अम्बास्वरूप है, दुर्गास्वरूप है। जल में असीम प्राण-ऊर्जा है जो मन्त्र की शक्ति को हज़ार गुना बढ़ा देती है। तंत्र-साधक सर्वप्रथम जल-सिद्धि करता है उसके बाद ही अन्य सिद्धि। तंत्र -साधना का सम्बन्ध यक्षलोक से है। इसलिए महादेव ने जल की रक्षा का उत्तरदायित्व यक्षों को दिया है। वरुण जल के देवता अवश्य हैं पर जल की सुरक्षा का कार्य सदैव यक्ष करते हैं और कभी-कभी वे यह कार्य मनुष्य के माध्यम से करते हैं। इसी प्रकार नृत्य, वाद्य व गान की रक्षा गन्धर्व करते हैं। किन्नर प्रकृति में सन्तुलन बनाने के लिए हैं। साधना में होने वाली त्रुटि, मन्त्रों के उच्चारण के समय होने वाली त्रुटि में विद्याधर साधक की रक्षा करते हैं। इसलिए अपदेवता के रूप में ये पूज्य हैं। इनका निवास यक्ष-लोक है। #💥🔥आज के चर्चित मुद्दे🔥💥 #लोकप्रिय । #🌅 सूर्योदय शुभकामनाएं #🌞 Good Morning🌞
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नर्मदे हर जीवन भर जय श्री महाकाल बाबा जी 💐 #🌞 Good Morning🌞
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रिश्तों में राजनीति करना हम पसन्द नहीं करते,, हम जहां दिल लगाया करते है वहां कभी दिमाक का इस्तेमाल नहीं करते..!! वफ़ादारी एक "#ब्रांड " है... जो हर कोई "#ऑफॉर्ड "नहीं कर सकता..!! 💖🙂 हर हर महादेव नर्मदे हर जीवन भर 🔱 🙏 🚩 हरे कृष्णा जी राधे राधे जी।। #सनातनहमारीपहचान #highlightseveryone #💥🔥आज के चर्चित मुद्दे🔥💥 #लोकप्रिय । #🌅 सूर्योदय शुभकामनाएं #🌞 Good Morning🌞 #💝 शायराना इश्क़
💥🔥आज के चर्चित मुद्दे🔥💥 - रिश्तों में राजनीति करना हम पसन्द नहीं करते, , हम जहां दिल लगाया करते है वहां कभी दिमाक का इस्तेमाल नहीं करते..!! वफ़ादारी एक " #ब्रांड " है... जो हर कोई "# ऑफॉर्ड " नहीं कर सकता..!! हर हर महादेव नर्मदे हर जीवन ஈ@P எ தாளி राधे राधे जी।। रिश्तों में राजनीति करना हम पसन्द नहीं करते, , हम जहां दिल लगाया करते है वहां कभी दिमाक का इस्तेमाल नहीं करते..!! वफ़ादारी एक " #ब्रांड " है... जो हर कोई "# ऑफॉर्ड " नहीं कर सकता..!! हर हर महादेव नर्मदे हर जीवन ஈ@P எ தாளி राधे राधे जी।। - ShareChat
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🌅 सूर्योदय शुभकामनाएं - శీ ( ೬ ( ৫ 110 40 [ # క్డీ = ೯ - = = క్లే & క్డీ ೯ ؟ & శీ ( ೬ ( ৫ 110 40 [ # క్డీ = ೯ - = = క్లే & క్డీ ೯ ؟ & - ShareChat
तंत्र और योग के गहन विज्ञान में , और जैसे ग्रंथों में आज्ञा चक्र की अधिष्ठात्री देवी — माँ हाकिनी — का अत्यंत रहस्यमय वर्णन मिलता है। माँ हाकिनी ज्ञान, ध्यान, अंतर्दृष्टि और आत्म-शक्ति की देवी हैं। उनका स्थान है — आज्ञा चक्र (भ्रूमध्य), जहाँ से साधक की चेतना दिव्य स्तर पर प्रवेश करती है। हाकिनी साधना का प्रथम नियम: जो साधक माँ हाकिनी को सिद्ध करना चाहता है, उसे इंद्रिय संयम का पालन करना अनिवार्य है। वह साधक किसी भी प्रकार के काम-भोग, आकर्षण या स्त्री-संग से दूर रहेगा, तभी उसकी ऊर्जा (ओजस) ऊपर उठकर आज्ञा चक्र में स्थिर होगी। बिना ब्रह्मचर्य और मानसिक शुद्धता के हाकिनी साधना केवल कल्पना बनकर रह जाती है। सच्चा साधक वही है — जो अपने मन, इंद्रियों और इच्छाओं पर विजय पा ले। तभी माँ हाकिनी की कृपा से उसे दिव्य दृष्टि, गहन ज्ञान और अंतर-जागृति प्राप्त होती है। यह साधना अत्यंत गूढ़ और शक्तिशाली है, इसे केवल योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही करना चाहिए। #लोकप्रिय । #💥🔥आज के चर्चित मुद्दे🔥💥 #🌞 Good Morning🌞 #🌅 सूर्योदय शुभकामनाएं
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#❤️प्यार वाले स्टेटस ❤️ #🎶हैप्पी रोमांटिक स्टेटस #💝 शायराना इश्क़ #💥🔥आज के चर्चित मुद्दे🔥💥 #लोकप्रिय ।
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❝❤ कुछ तो नशा होगा , तेरे इश्क में ऐ दिलबर.. 💚 💜 सारी आदतें अपनी छोड़ के , तलब तेरी जो लगा बैठे हैं हम ...🖤❜❜ *━─── ⊹⊱❤️🌸⊰⊹ ───━* #लोकप्रिय । #💥🔥आज के चर्चित मुद्दे🔥💥 #💝 शायराना इश्क़ #🎶हैप्पी रोमांटिक स्टेटस #❤️प्यार वाले स्टेटस ❤️
लोकप्रिय । - कुछ तोनशा होगा तेरे इ्करमें ऐ दिलबर . सारी आदर्ते अपनी छोड़के तलब तेरी णो लगा बैठे हैहम 3' कुछ तोनशा होगा तेरे इ्करमें ऐ दिलबर . सारी आदर्ते अपनी छोड़के तलब तेरी णो लगा बैठे हैहम 3' - ShareChat
💞#आँख खुलते ही #तुझे💞 💞#देखने की #तमन्ना होती है,💞 💞ये #कैसी #कशिश है..💞 💞जो मुझे #तुझसे #बांधती है!!💞 मेरी मां नर्मदा मैय्या जी #लोकप्रिय । #💥🔥आज के चर्चित मुद्दे🔥💥 #🪔देवउठनी एकादशी📿
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