Ravindra khairnar
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#✍🏽 माझ्या लेखणीतून
✍🏽 माझ्या लेखणीतून - हमसफ़र की तरह वो चला था मगर रास्ते भर रहा अजनबी अजनबी Ravi khairnar हमसफ़र की तरह वो चला था मगर रास्ते भर रहा अजनबी अजनबी Ravi khairnar - ShareChat
#✍🏽 माझ्या लेखणीतून
✍🏽 माझ्या लेखणीतून - भूले हुए Le लोगों को कियाा जाता है तो भूल जाओं कचो तुम्हे याद करेंगे! ! Ravi khairnar भूले हुए Le लोगों को कियाा जाता है तो भूल जाओं कचो तुम्हे याद करेंगे! ! Ravi khairnar - ShareChat
#✍🏽 माझ्या लेखणीतून
✍🏽 माझ्या लेखणीतून - कुछ ग़ैर होकर भी पराये नहीं लगते, और कुछ सगे होकर भी अपने नर्ही लगते.. !! Ravi khairnar कुछ ग़ैर होकर भी पराये नहीं लगते, और कुछ सगे होकर भी अपने नर्ही लगते.. !! Ravi khairnar - ShareChat
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✍🏽 माझ्या लेखणीतून - कर के बेचैन मुझे फिर मेरा हाल ना पूछा  उसने नजरे फेर ली मैंने भी सवाल ना पूछा !! Ravi khairnai कर के बेचैन मुझे फिर मेरा हाल ना पूछा  उसने नजरे फेर ली मैंने भी सवाल ना पूछा !! Ravi khairnai - ShareChat
#✍🏽 माझ्या लेखणीतून
✍🏽 माझ्या लेखणीतून - किसी ने सब्र र्मे सुकून ढूंढ़ लिया, ओर किसी ने आजमाने ्मे। किसी ने सब्र र्मे सुकून ढूंढ़ लिया, ओर किसी ने आजमाने ्मे। - ShareChat
#✍🏽 माझ्या लेखणीतून
✍🏽 माझ्या लेखणीतून - आदमी हमेशा : में ही कुछ सीखता है.. ! संकट में तों ভ্রুংখী वो पिछले सबक भी भूल जाता है..!! Ravi khairnat आदमी हमेशा : में ही कुछ सीखता है.. ! संकट में तों ভ্রুংখী वो पिछले सबक भी भूल जाता है..!! Ravi khairnat - ShareChat
#✍🏽 माझ्या लेखणीतून
✍🏽 माझ्या लेखणीतून - ज़िंदगी से बड़ी सज़ा ही नहीं और क्या जुर्म है पता ही नहीं.. Rav khatua? ज़िंदगी से बड़ी सज़ा ही नहीं और क्या जुर्म है पता ही नहीं.. Rav khatua? - ShareChat
#✍🏽 माझ्या लेखणीतून
✍🏽 माझ्या लेखणीतून - कुछ लोगों को शौक था.. मुझे इग्नोर करने का.:. मैंने भी उनका शौक  . उन्हें तोहफे में दे दिया.. हिंदी शायरी कुछ लोगों को शौक था.. मुझे इग्नोर करने का.:. मैंने भी उनका शौक  . उन्हें तोहफे में दे दिया.. हिंदी शायरी - ShareChat
#✍🏽 माझ्या लेखणीतून
✍🏽 माझ्या लेखणीतून - ज़िन्दगी कभी भीले सकती हे करवटः. तू गुमां न करः 6 बुलंदियाँ छू हजार मगर लिफ कोई गलाहन कसः उिसके Ravi khairnar ज़िन्दगी कभी भीले सकती हे करवटः. तू गुमां न करः 6 बुलंदियाँ छू हजार मगर लिफ कोई गलाहन कसः उिसके Ravi khairnar - ShareChat
#✍🏽 माझ्या लेखणीतून
✍🏽 माझ्या लेखणीतून - कहीं पर ग़म कहीं सरगम ये कुदरत के ही तो नज़ारे है , प्यासे तो वो भी रह जाते हैं घर जिनके दरिया किनारे होते हैं , Ravi khairnar कहीं पर ग़म कहीं सरगम ये कुदरत के ही तो नज़ारे है , प्यासे तो वो भी रह जाते हैं घर जिनके दरिया किनारे होते हैं , Ravi khairnar - ShareChat