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जीतने का असली मज़ा तब सब आपके हारने का इंतजार करे
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-तूं सैं देशी रूंखडो , म्हे परदेशी लोग -चूरु का विलुप्त होगया फोग और फोगले का रायता । --------दशरथ उपाध्याय -खेती के तरीकों में बदलाव से मरूस्थल की पहचान फोगला विलुप्त प्रायः होगया है । -बीकानेर रियासत की पहचान ही फोगले के कारण थी । बिकानेर रियासत की सीमा कहां तक है ? इसका निर्धारण यह माना गया कि जहॉ तक फोग के पैधे है वहां तक बीकानेर की सीमा को मान्यता मिली थी ,यानी जहां तक फोगला था वहां तक का भूभाग बीकानेर का माना गया । -चूरू में फोग बहुतायात से उगता था।मुझे याद है मैं गणगौर पूजन के लिये फोगले की पत्तियॉ लाता था उस समय शीतला मन्दिर के अगल बगल में व पीछे की ओर धने फोग के झाड थे । -शीतला मन्दिर के आगे जाने पर धना "जंगल "था जिसमें फोगला और बेर की झाडियों की बहुतायत थी उन स्थानों पर अब फोग नजर ही नहीं आत है।पूरा बीड ही लुप्त होगया । -मरूप्रदेश वासियों के लिए संजीवनी के रूप में काम आने वाले फोग का हर जगह महत्व था । -लेकिन खेती में मशीनों के अन्धाधुन्ध उपयोग ने फोग को विलुप्ति के कगार पर पहुंचा दिया है। -पहले गांव में थोडी दूरी पर ही फोग की झाडियों की हरियाली नजर आ जाती थी।चैत्र में इन पर नई पत्तियां और फूल आने से मनोरम दृश्य होता था। -लोग इसे खाद्यान्न के रूप में काम लेते हैं । इसकी पत्तियां पशुओं के चारे एवं तना जलाऊ लकडी के रूप में भी काम में लेतेथे । -लेकिन अब यह सब बीते जमाने की बात हो गया है। अधिकांश इलाकों में फोग की विदाई हो चुकी है। इस के विलुप्त होने को देखते हुए इस को बचाने के लिए (इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर एंड नेचुरल रिसोर्सेज )(आईयूसीएन) की रेड डाटा बुक में सम्मिलित किया गया है. फोग और फोगले का उपयोग ------------------------ -फोगले का का रायता: -फोग के फूल को फोगला कहा जाता है जिसका उपयोग रायता बनाने में किया जाता है।इसके फूल को सुखाकर फोगला बनाया जाता है जिसका रायता बनता है। यह रायता गर्मी में बहुत ही ठंडा और स्वादिष्ट होता है। -रायता बनाने की विधि भी आसान है।फोगले के साथ फोग की पत्तियाँ जो पतली ओर बारीक होने के करण मिल जाती हैं । -इसलिए उनको अलग करने के लिए पानी में डाल देते हैं। फोगले के फूल पानी पर तैरते हैं और पत्तियॉ निचे बैठ जाती हैं। -ऊपर से फोगले को लेकर थोड़ा पानी डालकर कूकर में दो सीटी मार लेते हैं।कूकर से निकाल कर थोड़ा दबाकर अतिरिक्त पानी निकाल देते हैं और फोगले को दही और छाछ मिलाकर उसमें छोंक लेते हैं। -फोग की जड़ों का उपयोग लुहारों द्वारा हथियार बनाने के लिए कोयला निर्माण हेतु किया जाता है।फोग की लकड़ी का उपयोग कोयला बनाने में किया जाने के कारण इसके पौधे समाप्ति की ओर हैं। -फोग की पत्तियों को ऊंट बहुत पसंद करते हैं।फोग की पत्तियों को सुखाकर बनाये गए चारे को ल्हासू कहते हैं जो बहुत पौष्टिक चारा माना जाता है। -फोग झाड़ी के पत्तियों से निकाला गया रस आकलेटेक्स के विष के प्रतिरोधी के रूप में माना जाता है। -फोग रेगिस्तान में टीलों के स्थिरीकरण और रेगिस्थान के फैलाव को रोकने में भी सहायक है। -फोग के फूलों का उपयोग आग से जलने पर दवा के रूप में किया जाता है। -फोग की जड़ों का सत्व कत्थे के साथ मिलाकर लेने से गले की खराश दूर होती है। -फोग का जलीय पेस्ट अफीम के नशे को दूर करने तथा बिच्छू का जहर उतारने के लिए एक एंटी डॉट के रूप में काम आता है। -फोग का सत्व टाइफाइड के निवारण में काम आता है। -फोग के काढे को जानवरों के मूत्र की समस्याओं के निवारण में प्रयोग किया जाता है। -फोग की कलियां दही के साथ लेने से लू के आघात से बचा जा सकता है। -फोग के काढ़े से कुल्ले करने से मसूड़ों की सूजन कम हो जाती है। -फोग की ताजा पत्तियों से गणगौर पूजन के समय शिव-पारवती की पूजा की जाती है। इतिहास में फोग -प्राचीन नागवंशी लोग पेड़ पौधों अथवा जानवरों को अपना विशिष्ठ प्रतीक चिन्ह मानते थे। वर्तमान नें अधिकांश नागवंशी क्षत्रिय जातियां जाटों में शामिल हो गई हैं। -जाटों की एक प्रमुख गोत्र का नाम फोगाट है जो संभवतः नागवंशियों की संतान हैं जो फोग को अपना प्रतीक चिन्ह मानते थे। -लोक धारणा प्रचलित है कि फोगाट गोत्र का आदि पुरुष फोग की आड़ में पैदा हुआ था,फोगाट जाट हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में पाए जाते हैं। -एकबार की बात है, बीकानेर के राजा रायसिंहजी के भाई पीथळ नांव के ख्यातनांव कवि को दिल्ली बादशाह अकबर ने मध्य प्रदेश में बुरहानपुर भेजा और वहां के सूबेदार बनाए गए। -देस से ज्यादा दिन बाहर रहने के कारण उनको देश की बहुदा याद आती रहती बादशाह इनको घर जाने का अवकाश नहीं देते थे । -बादशाह को अक्सर यह भय रहता कि ये लोग अपने राज्य में जाकर कहीं संगठित हो मेरे विरूद्ध खडे न हो जाये इस सोच के चलते वह इनको अवकाश नहीं देताथा । -यह बात महाराष्ट्र के प्रशिद्ध इतिहास कार सेतुबन्द माधव पगडी भी मानते थे। -प्रमाण के तोर पर एक घटना का उल्लेख करते हुये बताया कि एक बार कीबात है , बीरानेर के राजा रायसिंहजी के भाई पीथल नाम के ख्याति नाम कवि को दिल्ली बादशाह अकबर ने मध्य प्रदेश में बुरहान पुर भेजा ओर वहां के सूबेदार बनाये गये । ।वे नदी किनारे तफरी कर रहे थे. अचानाक उनको फोग दिख गया (जो वर्षात के पानी में बहता हुआ आगया )तो वे बोले- तूं सैं देसी रूंखड़ो, म्हे परदेसी लोग। म्हानै अकबर तेड़िया, तूं यूं आयो फोग।। अर्थात फोग तुं हमारे देश का पौधा है और हम यहाँ परदेशी हैं. मुझे तो अकबर ने भेज दिया परन्तु तुम यहाँ क्यों आ गया ? एसा कहते हुये वे इतने भावुक होगये कि उस फोग के झाड को बाहों में एसे लगा लिया मानों वे अपने बहुत दिने बिछुडे मित्र से मिल रहें है। जनमानस में फोग : --------------- -राजस्थान के जनमानस में फोग और फोगले के बारे में अनेक लोक कहावतें प्रचलित हैं. -फोग आलो ई बळै, सासू सूदी ई लड़ै। -अर्थात _जिस प्रकार फोग की लकड़ी गीली होने पर भी आग पकड़ लेती है, उसी प्रकार सास सीधी हो तब भी अधिकार पूर्वक बहू को फटकार लगा ही देती है,मौका मिलने पर असली स्वभाव उजागर हो ही जाता है. बैसाख महीने में गाय-भैंस का दूध सूख जाता है परन्तु बकरियां दूध देती हैं क्योंकि उनको फ़ोग का चारा मिलता रहता है. इस बारे में लोक कहावत है: 'फोगलो फूट्यो, मिणमिणी ब्याई। भैंस री धिरियाणी, छाछ नै आई।' अर्थात जब फोग में नई पत्तियाँ आती हैं तब बकरियां दूध देती हैं परन्तु भैंस दूध देना बंद कर देती है जिसके कारण भैंस की मालकिन को छाछ मांग कर लानी पड़ती है. छाळी और मिणमिणी यहाँ बकरी के पर्याय है. फोगला के रायता के बारे में लोक कहावत है: 'फोगलै रो रायतो, काचरी रो साग। बाजरी री रोटड़ी, जाग्या म्हारा भाग।' अर्थात जिसको फोगले का रायता , काचरी का साग और बाजरे की रोटी खाने मिलती हैं उसका तो भाग्य ही जाग जाता है। कोयला high calorific value वाला होता है,1980 सें 1990 के बीच बीकानेर शहर में 500 सें ऊपर फोग के कोयले बनने की भट्टीयाँ थी। कोयला दूसरे राज्यों में भी जाता था, खेती के लिए जंगल सफाई के नाम पर large scale विदोहन हुआ, mechanised खेती भी दुश्मन बनगयी फोग की झाड़ियों की, फारेस्ट deptt में बाहर के अफसर होने सें फोगले के महत्व को नहीं समझा , इसके प्रती खूब उदासीनता रही, है बड़े काम की झाड़ी फोगले को नष्ट व विलुप्त कर दिया गया । #🌷शुभ रविवार #👨 मेरा गांव #🏡मेरी जीवन शैली #😍 मेरा प्यारा गांव #🌞 Good Morning🌞
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#सच्चा प्रेम नहीं सादगी #सादगी प्रकृति की #सादगी से जीवन जिएं #लोग दिवाने है बनावट के हम सादगी लेकर जाए कहां #सांवले रंग की सादगी अपने आप में जहर हैं.!
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