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Jay bhim namo buddhay
#📓 हिंदी साहित्य #📚एजुकेशनल ज्ञान📝 #👨‍🎓करियर टिप्स👩‍💻
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#📓 हिंदी साहित्य #❤️जीवन की सीख #☝अनमोल ज्ञान #👉 लोगों के लिए सीख👈
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00:18
#✍🏻भारतीय संविधान📕 #📓 हिंदी साहित्य Jay bhim namo Buddhay 🙏🙏🙏🙏
✍🏻भारतीय संविधान📕 - डॉ. आम्बेडकर द्वारा मनुस्मृति दहन की घटना का समाचार सारे देश मे जंगल की आग की मनुवादी तरह फैल गया था सारे दौड़े दौड़े गाँधीजी के पास गए और कहने लगे कि बापूजी देखो आम्बेडकर क्या अनर्थ कर रहे हैं धार्मिक पवित्र हमारी को आग के हवाले पुस्तको  करके हमारी भावनाओ को भड़का रहे हैं | किसी ने कहा उनपर तुरंत मुकदमा किया जाए। इस बात मौजूद सरदार पटेल पर वहाँ कुछ भी करने से पहले बोले इतना जरूर सोच लेना कि डॉ. आम्बेडकर एक महान वकील भी हैं, अगर आप उनसे मुकदमा हार गए तो कहीं महाभारत और रामायण तुम्हारी के साथ सभी ग्रंथो को भी ना फ्ूँक दें" Fotos | डॉ. आम्बेडकर द्वारा मनुस्मृति दहन की घटना का समाचार सारे देश मे जंगल की आग की मनुवादी तरह फैल गया था सारे दौड़े दौड़े गाँधीजी के पास गए और कहने लगे कि बापूजी देखो आम्बेडकर क्या अनर्थ कर रहे हैं धार्मिक पवित्र हमारी को आग के हवाले पुस्तको  करके हमारी भावनाओ को भड़का रहे हैं | किसी ने कहा उनपर तुरंत मुकदमा किया जाए। इस बात मौजूद सरदार पटेल पर वहाँ कुछ भी करने से पहले बोले इतना जरूर सोच लेना कि डॉ. आम्बेडकर एक महान वकील भी हैं, अगर आप उनसे मुकदमा हार गए तो कहीं महाभारत और रामायण तुम्हारी के साथ सभी ग्रंथो को भी ना फ्ूँक दें" Fotos | - ShareChat
#✍🏻भारतीय संविधान📕
✍🏻भारतीय संविधान📕 - पत्थर कि मूर्ति घर ले जाकर उसक गूलाम 47444 किसी महापुरुष कि किताब ले जाकर নিম্লান ಈ नही बनते है? पत्थर कि मूर्ति घर ले जाकर उसक गूलाम 47444 किसी महापुरुष कि किताब ले जाकर নিম্লান ಈ नही बनते है? - ShareChat
#✍🏻भारतीय संविधान📕 #📓 हिंदी साहित्य Jay bhim namo Buddhay
✍🏻भारतीय संविधान📕 - शिमराच अंबेडकर सकल्प शःभीखनहीं मांगेगे  मेहनत हमेशा मे करेंगे _- எக்I त- वक्त का सदुपयोग करंगे | अः अंधविश्व्ासो से मुक्त रहेंगे | चे बेगारी नहीं करेंगे ८ः डर कर नही रहेंगे | मे निपुण रहेंगे . क॰॰कल। रहन सहन परध्यान देगे और आपस मे आाईचारा बनाये रखेंगे | जय भीम शिमराच अंबेडकर सकल्प शःभीखनहीं मांगेगे  मेहनत हमेशा मे करेंगे _- எக்I त- वक्त का सदुपयोग करंगे | अः अंधविश्व्ासो से मुक्त रहेंगे | चे बेगारी नहीं करेंगे ८ः डर कर नही रहेंगे | मे निपुण रहेंगे . क॰॰कल। रहन सहन परध्यान देगे और आपस मे आाईचारा बनाये रखेंगे | जय भीम - ShareChat
#📓 हिंदी साहित्य #✍🏻भारतीय संविधान📕
📓 हिंदी साहित्य - मकोड़े पर किसी भी कीडे यदि किसी ने पांव रखातो चह कीडा भी अपने को रौंद रहे पांच को काटे बगैर नहीं रहता। तो फिर तुम तो सुख दुख समझने चाले मानव प्राणी हो॰ तुम लोग अपने ऊपर हो रहे दुर्भावनापूर्ण अत्याचार को कब तक सहते रहोगे? भूमिका Aid यदि तुमने आकामक नहीं निभायी तो तुम्हारा टिकना संभव नहीं होगा। तुम रौंदे जा ೧೮( Lk रहे हा इसका कारण यही है कि तुम्हें तुम्हारे अपमत पर गु़स्सा नहीं आता। जुल्म करने वाले से जुल्म सहने aHl ज्यादाा गुलहगार होता है। मकोड़े पर किसी भी कीडे यदि किसी ने पांव रखातो चह कीडा भी अपने को रौंद रहे पांच को काटे बगैर नहीं रहता। तो फिर तुम तो सुख दुख समझने चाले मानव प्राणी हो॰ तुम लोग अपने ऊपर हो रहे दुर्भावनापूर्ण अत्याचार को कब तक सहते रहोगे? भूमिका Aid यदि तुमने आकामक नहीं निभायी तो तुम्हारा टिकना संभव नहीं होगा। तुम रौंदे जा ೧೮( Lk रहे हा इसका कारण यही है कि तुम्हें तुम्हारे अपमत पर गु़स्सा नहीं आता। जुल्म करने वाले से जुल्म सहने aHl ज्यादाा गुलहगार होता है। - ShareChat
#✍🏻भारतीय संविधान📕 Jay bhim namo Buddhay 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
✍🏻भारतीय संविधान📕 - योग्यता से जीयो अपने स्वाभिमान को खोकर जीवित रहना अपमानजनक है। जीवन में स्वाभिमान अतिआवश्यक है। बगैर मनुष्य शून्य है। इसके जीवित सम्मान के साथ  योग्यता रहने के लिए मनुष्य को 6 तकलीफों से गुजरना पडता है। कठोर और निरंतर संघर्ष से ही मनुष्य को शक्ति   विश्वास और मान्यता उपलब्ध हो सकती है। मनुष्य नश्वर है॰ हर एक ना एक दिन मरना है। लेकिन मनुष्य को आत्म - सम्मान की उत्तम आदर्श को प्रफुल्लित सुशोभित करने हेतु समर्पित करने और मानवीय जीवन को करने का संकल्प करना होगा। हम दास ( गुलाम ) नहीं है। हम सैनिकवंश से हैं। किसी वीर पुरुष के लिए स्वाभिमान के बिना जीवन जीने से अधिक शर्मनाक बात न्हीं हो सकती | डा बाबास््हब अम्बेडकर Ramrao Lonarel योग्यता से जीयो अपने स्वाभिमान को खोकर जीवित रहना अपमानजनक है। जीवन में स्वाभिमान अतिआवश्यक है। बगैर मनुष्य शून्य है। इसके जीवित सम्मान के साथ  योग्यता रहने के लिए मनुष्य को 6 तकलीफों से गुजरना पडता है। कठोर और निरंतर संघर्ष से ही मनुष्य को शक्ति   विश्वास और मान्यता उपलब्ध हो सकती है। मनुष्य नश्वर है॰ हर एक ना एक दिन मरना है। लेकिन मनुष्य को आत्म - सम्मान की उत्तम आदर्श को प्रफुल्लित सुशोभित करने हेतु समर्पित करने और मानवीय जीवन को करने का संकल्प करना होगा। हम दास ( गुलाम ) नहीं है। हम सैनिकवंश से हैं। किसी वीर पुरुष के लिए स्वाभिमान के बिना जीवन जीने से अधिक शर्मनाक बात न्हीं हो सकती | डा बाबास््हब अम्बेडकर Ramrao Lonarel - ShareChat
#✍🏻भारतीय संविधान📕 #📓 हिंदी साहित्य
✍🏻भारतीय संविधान📕 - ४सभी दलितों,शूद्रों से अधिक पढ़े-लिखे डॉ॰ आंबेडकर हिन्दू नहीं बने रहना 41 चाहते हास्यास्पद है कि वहीं ये लोग हिन्दू बने घूम रहे हैं।" आज का इतिहास ने बौद्ध धर्म अपनाया बाबा साहब १४ अक्टूबर १९५६ को ३ ६५ लाख लोगों के साथ अंबेडकर ने बौद्ध धर्म स्वीकार किया था। उन्होंने बौद्ध धर्म में लौटने के लिए अपने अनुयायियों के लिए २२ प्रतिज्ञाएं निर्धारित की थीं। इन प्रतिज्ञाओं में उन्होंने हिंदू धर्म और उसकी पूजा पद्धति को पूरी तरह त्याग l ४सभी दलितों,शूद्रों से अधिक पढ़े-लिखे डॉ॰ आंबेडकर हिन्दू नहीं बने रहना 41 चाहते हास्यास्पद है कि वहीं ये लोग हिन्दू बने घूम रहे हैं।" आज का इतिहास ने बौद्ध धर्म अपनाया बाबा साहब १४ अक्टूबर १९५६ को ३ ६५ लाख लोगों के साथ अंबेडकर ने बौद्ध धर्म स्वीकार किया था। उन्होंने बौद्ध धर्म में लौटने के लिए अपने अनुयायियों के लिए २२ प्रतिज्ञाएं निर्धारित की थीं। इन प्रतिज्ञाओं में उन्होंने हिंदू धर्म और उसकी पूजा पद्धति को पूरी तरह त्याग l - ShareChat
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✍🏻भारतीय संविधान📕 - मुझे जनसभाओं में जाकर इस या उस विषय भाषण  देने की आदत   नहीं है। दिल्ली पर बाद   से   मैंने   बहुत সান چ सभाओं कम ক্ি 4 लिया   है।   मेरा 8 मानना भाग लोगों का समय रूप से नहीं अनावश्यक लेना चाहिए, और अगर हम उनका समय लेते भी हैं कुछ ऐसा   कहने तो को   होना हमारे पास चाहिए जिससे मनोबल @ఢ उनका और उन्हें मदद मिले। (संदर्भः- भगवान बुद्ध की २४९४वीं जयंती के अवसर पर डॉ॰ बाबासाहेब अम्बेडकर का अध्यक्षीय भाषण, दिल्ली॰ 2 मई १९५०) मुझे जनसभाओं में जाकर इस या उस विषय भाषण  देने की आदत   नहीं है। दिल्ली पर बाद   से   मैंने   बहुत সান چ सभाओं कम ক্ি 4 लिया   है।   मेरा 8 मानना भाग लोगों का समय रूप से नहीं अनावश्यक लेना चाहिए, और अगर हम उनका समय लेते भी हैं कुछ ऐसा   कहने तो को   होना हमारे पास चाहिए जिससे मनोबल @ఢ उनका और उन्हें मदद मिले। (संदर्भः- भगवान बुद्ध की २४९४वीं जयंती के अवसर पर डॉ॰ बाबासाहेब अम्बेडकर का अध्यक्षीय भाषण, दिल्ली॰ 2 मई १९५०) - ShareChat
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✍🏻भारतीय संविधान📕 - CHINTHA "The history of India is nothing but a history of a mortal conflict between- Buddhism and Brahmanism It is important that everyone who was able to understand the history of India must nothing but the history know that it is of the struggle for supremacy between Brahmanism and Buddhism, Dr. Babasaheb Ambedkar CHINTHA "The history of India is nothing but a history of a mortal conflict between- Buddhism and Brahmanism It is important that everyone who was able to understand the history of India must nothing but the history know that it is of the struggle for supremacy between Brahmanism and Buddhism, Dr. Babasaheb Ambedkar - ShareChat