Naresh Ahuja
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@859131814
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Naresh Ahuja
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#🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - वोज़माना और था कि जब पडोस के घर पीहर बेटी आती थी ता सारे मौहल्ले में रौनक होती थी। वोज़माना और था कि जब पडोस के घर पीहर बेटी आती थी ता सारे मौहल्ले में रौनक होती थी। - ShareChat
#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - ر जब स्वेटर कौ यर्महिट बाज़ार से नहीं खरीदी जाती थी। 34232 ر जब स्वेटर कौ यर्महिट बाज़ार से नहीं खरीदी जाती थी। 34232 - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - जबा हम डॉक्टर कगै दिखाने कम जाते थैे डॉक्टर हमारे घर आते थै॰ जबा हम डॉक्टर कगै दिखाने कम जाते थैे डॉक्टर हमारे घर आते थै॰ - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - 48dod मानसरोवर मे चुनी कथाओं का लघ संकलन जब TV नहों प्रेमचंद के घरजमाई हमेंदारोगाजी  उपन्यास कफन कहानियाँ सुनातेदयकाकी 48dod मानसरोवर मे चुनी कथाओं का लघ संकलन जब TV नहों प्रेमचंद के घरजमाई हमेंदारोगाजी  उपन्यास कफन कहानियाँ सुनातेदयकाकी - ShareChat
#🙏कर्म क्या है❓
🙏कर्म क्या है❓ - कपड़ों के पुराने जब बदले चमकते बर्तन लिए जाते थे। कपड़ों के पुराने जब बदले चमकते बर्तन लिए जाते थे। - ShareChat
#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - जब दस पैसे की चूरन कौ गोलियां ज़िदगी मे नयाा जायका घोला करती थी जब दस पैसे की चूरन कौ गोलियां ज़िदगी मे नयाा जायका घोला करती थी - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - चौपड़ पत्थर के जब फर्श पे उकेरी जाती थी। चौपड़ पत्थर के जब फर्श पे उकेरी जाती थी। - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - जब पेड़ों की शाखें हमारा बोझ उठाने को बैचेन sa हुआ करती थी। जब पेड़ों की शाखें हमारा बोझ उठाने को बैचेन sa हुआ करती थी। - ShareChat
#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - जब कजिन नहों सभी भाई बहन हुआ करते थे। जब कजिन नहों सभी भाई बहन हुआ करते थे। - ShareChat
#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - ಕಞಹತೆ ؟؟٩ १० पैसे का बर्फकाा पाानी॰ गिलास के गिलास पी जाते थे मगर यला खराब नहों होताा था। ಕಞಹತೆ ؟؟٩ १० पैसे का बर्फकाा पाानी॰ गिलास के गिलास पी जाते थे मगर यला खराब नहों होताा था। - ShareChat