Praveen Kumar Yadav
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Praveen Kumar Yadav
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नारी-मुक्ति आंदोलन की प्रणेता ,देश की प्रथम महिला शिक्षिका और समाज सेविका सावित्रीबाई फुले जी की 195 वी जयंती पर मैं आप को कोटिश: नमन तथा विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 ई को हुआ था। इनके पिता का नाम खन्दोजी नैवेसे और माता का नाम लक्ष्मीबाई था।सावित्रीबाई फुले जी का विवाह 1841 में महात्मा ज्योतिराव फुले से हुआ था। सावित्रीबाई फुले भारत के पहले बालिका विद्यालय की पहली प्रिंसिपल(भारत की प्रथम महिला शिक्षिका)और पहले किसान स्कूल की संस्थापक थीं। महात्मा ज्योतिराव को महाराष्ट्र और भारत में सामाजिक सुधार आंदोलन में एक सबसे महत्त्वपूर्ण व्यक्ति के रूप में माना जाता है।आप को महिलाओं और अनाथ,दीन-दुखी,गरीब लोगों को शिक्षित करने के प्रयासों के लिए जाना जाता है।ज्योतिराव, जो बाद में ज्योतिबा के नाम से जाने गए सावित्रीबाई के संरक्षक,गुरु और समर्थक थे। सावित्रीबाई ने अपने जीवन को एक मिशन की तरह से जीया जिसका उद्देश्य था विधवा विवाह करवाना,छुआछूत मिटाना,महिलाओं की मुक्ति और महिलाओ को शिक्षित बनाना। वे एक कवियत्री भी थीं उन्हें मराठी की आदिकवियत्री के रूप में भी जाना जाता था।आप स्कूल जाती थीं,तो उनका विरोध होता था।सावित्रीबाई पूरे देश की नायिका हैं।हर बिरादरी और धर्म के लिये उन्होंने काम किया।शिक्षा के क्षेत्र में सावित्रीबाई फुले ने बहुत बड़ा योगदान है।5 सितंबर 1848 में पुणे में अपने पति के साथ मिलकर विभिन्न जातियों की नौ छात्राओं के साथ उन्हों ने महिलाओं के लिए एक विद्यालय की स्थापना की।एक वर्ष में सावित्रीबाई और महात्मा फुले पाँच नये विद्यालय खोलने में सफल हुए।तत्कालीन सरकार ने इन्हे सम्मानित भी किया। एक महिला प्रिंसिपल के लिये सन् 1848 में बालिका विद्यालय चलाना कितना मुश्किल रहा होगा, इसकी कल्पना शायद आज भी नहीं की जा सकती। लड़कियों की शिक्षा पर उस समय सामाजिक पाबंदी थी। सावित्रीबाई फुले उस दौर में न सिर्फ खुद पढ़ीं,बल्कि दूसरी लड़कियों के पढ़ने का भी बंदोबस्त किया।10 मार्च 1897 को प्लेग के कारण सावित्रीबाई फुले का निधन हो गया।प्लेग महामारी में सावित्रीबाई प्लेग के मरीजों की सेवा करती थीं।एक प्लेग के छूत से प्रभावित बच्चे की सेवा करने के कारण इनको भी छूत लग गया,और इसी कारण से उनकी मृत्यु हुई।🙏🙏🙏 #🌞 Good Morning🌞 #🥰मोटिवेशन वीडियो #😎मोटिवेशनल गुरु🤘 #सावित्रीबाई #👍 डर के आगे जीत👌
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00:15
न्यायमूर्ति सूर्यकांत जी को भारत का 53वा मुख्य न्यायाधीश बनने पर मैं उन्हे हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाइयां देता हूं।10 फरवरी,1962 को हिसार (हरियाणा) में एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे। उन्होंने 1981 ई में सरकारी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, हिसार से स्नातक की उपाधि प्राप्त की।1984 ई में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से विधि में स्नातक की उपाधि प्राप्त की।1984 ई में हिसार जिला न्यायालय में वकालत शुरू की।1985 ई में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में वकालत करने के लिए चंडीगढ़ चले गए। संवैधानिक, सेवा और दीवानी मामलों में विशेषज्ञता हासिल की। उन्होंने कई विश्वविद्यालयों, बोर्डों, निगमों, बैंकों और स्वयं उच्च न्यायालय का प्रतिनिधित्व किया है।7 जुलाई,2000 को हरियाणा के सबसे युवा एडवोकेट जनरल नियुक्त होने का गौरव प्राप्त किया।मार्च, 2001 में वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित हुए।9 जनवरी, 2004 को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में स्थायी न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत होने तक हरियाणा के एडवोकेट जनरल के पद पर रहे। 23 फरवरी,2007 को राष्ट्रीय विधि सेवा प्राधिकरण के शासी निकाय के सदस्य के रूप में दो लगातार कार्यकालों के लिए 22 फरवरी, 2011 तक मनोनीत हुए। वर्तमान में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के तत्वावधान में मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय, इंडियन लॉ इंस्टीट्यूट की विभिन्न समितियों के सदस्य हैं।2011 में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय से विधि में प्रथम श्रेणी प्रथम प्राप्त करने का गौरव भी प्राप्त किया।विभिन्न प्रतिष्ठित राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों का आयोजन और उनमें भाग भी लिया है।5 अक्टूबर, 2018 से हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का पदभार ग्रहण किया। 24 मई, 2019 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत हुए।आप राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण [एनएएलएसए] के कार्यकारी अध्यक्ष और सर्वोच्च न्यायालय कानूनी सेवा समिति [एससीएलएससी] के अध्यक्ष थे। 24 नवंबर,2025 को आप ने भारत के 53 वे मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण लिया तथा 9 फरवरी,2027 को तक आप इस पद पर आसीन रहेंगे।केंद्र सरकार ने संसद में बताया है कि देशभर की अदालतों में 5.49 करोड़ से ज़्यादा केस लंबित हैं।मैं आप से उम्मीद करता हूं कि इन सभी न्यायालयों में लंबित केसों को एक नियम बनाकर तिथि वार 6 महीने के भीतर न्यायसंगत तरीके से निपटाने का आदेश देंगे ताकि लोगों का न्यायालय पर विश्वास और अटूट हो तथा अनगिनत लोगों को न्याय मिले।🫡🫡🫡🇮🇳🇮🇳🇮🇳🙏 #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान #🌞 Good Morning🌞 #🥰मोटिवेशन वीडियो #👍 डर के आगे जीत👌 #😎मोटिवेशनल गुरु🤘
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00:14
वर्ष नव, हर्ष नव, जीवन उत्कर्ष नव। नव उमंग, नव तरंग, जीवन का नव प्रसंग। नवल चाह, नवल राह, जीवन का नव प्रवाह। "न कोई रंज का लम्हा किसी के पास आए ख़ुदा करे कि नया साल सब को रास आए" Wishing you the Happiest New Year my sweet friends,relatives and students.May God bless to all of you and also your whole family members and all your wishes comes true this year.The future is your story to write this year the best one yet.I hope that this year will be full of hope,success,opportunity and happiness.Have a auspicious day and year my sweet friends,relatives and students.Theme of this year is Welcome 2026 with hope,opportunity, happiness, prosperity and success.Divide and rule is the English thought unite and win is the Indian culture.Let's unite this year to all of us🍫🍫🍫🍨🍨🍰🍰🍨🍨🇮🇳🇮🇳🇮🇳🙏 #👍 डर के आगे जीत👌 #🥰मोटिवेशन वीडियो #🌞 Good Morning🌞 #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान #💌🎉 Happy_New_Year🎆💐
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00:13
गोरखपुर: बीआरडी मेडिकल कालेज की इमरजेंसी सेवाओं की बदहाली एक बार फिर सामने आई है।जंगल धूसड़ के टोला रेतवहिया निवासी लल्लन के 10 वर्षीय पुत्र राज का साइकिल चलाते समय बायां हाथ टूट गया। स्वजन उसे लेकर उपचार के लिए बीआरडी मेडिकल कालेज की इमरजेंसी में पहुंचे, लेकिन वहां बच्चे को समय पर जरूरी सुविधाएं नहीं मिल सकीं।इमरजेंसी आर्थो ओटी के सामने फर्श पर बैठाकर खूंटी में बोतल टांगकर उसे ड्रिप चढ़ाई गई।उसे आर्थो विभाग के इमरजेंसी ओटी तक ले जाने के लिए न तो स्ट्रेचर उपलब्ध कराया गया और न ही ह्वील चेयर दी गई। स्वजन गोद में उठाकर किसी तरह उसे लेकर आर्थो ओटी पहुंचे तो बच्चे को इमरजेंसी आर्थो ओटी के बाहर फर्श पर बैठा दिया गया। ड्रीप चढ़ाने के लिए स्टैंड तक नहीं मिला और इमरजेंसी के बाहर एक खूंटी में बोतल टांगकर ड्रीप चढ़ाई गई। बच्चा दर्द से कराहता रहा, लेकिन स्टाफ से बार-बार गुहार लगाने के बावजूद किसी ने सुना नहीं। इमरजेंसी जैसे संवेदनशील विभाग में जरूरी संसाधनों की कमी ने व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। बच्चे के हाथ में गंभीर फ्रैक्चर है और उसे तत्काल सर्जरी की जरूरत बताई गई, इसके बावजूद आपरेशन की प्रक्रिया में देरी होती रही।प्राचार्य डा. रामकुमार जायसवाल ने बताया कि मामला संज्ञान में नहीं है। पर्याप्त संख्या में इमरजेंसी में ड्रिप स्टैंड, स्ट्रेचर व ह्वील चेयर हैं। मांगने पर कर्मचारी दे देते हैं। यदि इसमें किसी कर्मचारी का दोष मिला तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने उत्तर प्रदेश में चरमरा चुकी स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है।जब प्रदेश के मुखिया के गृह जनपद का यह हाल है तो प्रदेश के अन्य जगह स्वास्थ्य व्यवस्था कितनी बीमार हालत में होगी इसका अनुमान आप सभी लगा सकते हैं।😭😭दुखद😭😭 #🌞 Good Morning🌞 #🥰मोटिवेशन वीडियो #👍 डर के आगे जीत👌 #🙌 Never Give Up #sad
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00:14
C.I.S.F ने ये वीडियो शेयर किया है जो इंसानियत की एक खूबसूरत मिसाल बन गया.विदेश से लौटे पिता को देखते ही नन्ही बच्ची भावनाओं में बहकर उनकी ओर दौड़ पड़ी.सुरक्षा नियमों के चलते CISF जवान के सामने कठिन स्थिति थी लेकिन CISF के जवान ने न तो सख्ती दिखाई और न ही मासूम बच्ची का दिल दुखाया जिसकी हर ओर प्रशंसा हो रही है।यह viral विडियो देखकर देश का हर एक C.I.S.F का जवान आज प्रफुल्लित और गर्वान्वित महसूस कर रहा है।🥰🥰🥰❤️❤️❤️👍👍🇮🇳🇮🇳🇮🇳🙏 #🥰मोटिवेशन वीडियो #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान #👍 डर के आगे जीत👌 #🌞 Good Morning🌞 #🚗🧗🏻भारत भ्रमण व सफर प्रेमी🚂⛰
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00:21
Please and subscribe my YouTube channel my sweet students and friends.Have a nice day to all of you.🙏🙏🙏 #🌞 Good Morning🌞 #👍 डर के आगे जीत👌 #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान #🥰मोटिवेशन वीडियो #students
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00:13
भारतीय राष्ट्रगान आज की ही तारीख को 27 दिसम्बर 1911 ई को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गाया गया था."जन गण मन,अधिनायक जय हे"...भारत का राष्ट्रगान है.इसके रचयिता नोबेल पुरस्कार विजेता गुरुदेव स्व श्री रवींद्रनाथ टैगोर जी है.भारत के राष्ट्रगान की पक्तिया स्व श्री रवींद्रनाथ टैगोर जी के गीत "भारत भाग्यो विधाता" से ली गई है.यह सबसे पहले बंगाली भाषा में गाया गया था.यह पहली बार 1905 ई में तत्वबोधिनी पत्रिका के एक अंक में प्रकाशित हुआ था.इस राष्ट्रगान को गुरुदेव स्व श्री रवीन्द्रनाथ टैगोर जी ने सबसे पहले गाया था.भारत के संविधान ने 24 जनवरी 1950 ई को भारत भाग्य विधाता के पहले श्लोक को आधिकारिक रूप से राष्ट्रगान घोषित किया था. इस ऐतिहासिक क्षण ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को एक नई ऊर्जा दी और देशवासियों को एकजुटता का संदेश दिया।‘जन-गण-मन’ सिर्फ एक गीत नहीं है,ये हमारी पहचान भी है।जब हम इसे गाते हैं या सुनते हैं,तो गर्व और एकता की भावना जागती है।ये गीत हमें याद दिलाता है कि हम अलग-अलग भाषा,धर्म और संस्कृति के होते हुए भी एक साथ हैं।आपने देखा होगा कि जब भी कभी राष्ट्रगान सुनाई देता है या हम खुद गाते हैं तो हमेशा खड़े हो जाते हैं।🇮🇳🇮🇳तन मन धन से पहले जन मन गण🇮🇳🇮🇳🙏भारत माता की जय #🇮🇳 देशभक्ति #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान #🌞 Good Morning🌞 #👍 डर के आगे जीत👌 #कवि रविन्द्र नाथ टैगोर
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00:12
जनरल ओ डायर को लंदन में गोली मार कर जलियांवाला बाग नरसंहार के बदला लेने वाले अमर शहीद सरदार उधम सिंह जी की 126 वी जयंती पर मैं आप को कोटिश: नमन तथा विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।आप का नाम भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाता है।आप छोटी ही उम्र में अनाथ हो गए और अमृतसर के सेंट्रल खालसा अनाथालय में पले-बढ़े।13 अप्रैल 1919ई को हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड ने आप को गहराई से प्रभावित किया।इस नरसंहार में जनरल डायर और ब्रिटिश अधिकारियों की भूमिका थी।उधम सिंह जी ने इस घटना के बाद जनरल डायर को मारने की प्रतिज्ञा ली।13 मार्च 1940 ई को लंदन के कैक्सटन हाल में जनरल ओ डायर को गोली मार कर ऊधम सिंह जी ने जलियांवाला बाग नरसंहार का बदला लिया।आप गदर पार्टी एवं हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) से प्रभावित थे तथा साम्राज्यवाद व औपनिवेशिक शासन का विरोध किया।आप ने राम मोहम्मद सिंह आजाद’ नाम अपनाकर हिंदू, मुस्लिम,सिख एकता पर जोर दिया।सिख भगत सिंह जी से जेल में आप की मुलाकात हुई तथा उनकी विचारधारा से आप प्रेरित हुए।गिरफ्तारी के बाद आप ने 42 दिन की भूख हड़ताल की तथा ब्रिटिश शासन के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। सरदार उधम सिंह जी की मृत्यु फांसी के द्वारा हुई थी,जब ब्रिटिश सरकार ने आप को 31 जुलाई 1940 ई को लंदन की पेंटन विलेज जेल में जलियांवाला बाग नरसंहार का बदला लेने के लिए माइकल ओ'डायर की हत्या के आरोप में फाँसी दे दी थी,जिसके बाद आप को 'शहीद उधम सिंह' के नाम से जाना जाने लगा। शत् शत् नमन भारत माता की जय, इंकलाब जिंदाबाद, हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई एकता जिंदाबाद🫡🫡🫡🇮🇳🇮🇳🇮🇳🙏 #👍 डर के आगे जीत👌 #🌞 Good Morning🌞 #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान #🇮🇳 देशभक्ति #👳‍♀️सरदार उधम सिंह(26/12/1899- 31/7/1940) जयंती🌅 🌱हार्दिक शुभकामनाएं🌺 💖शत शत नमन🙏🏻
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00:14
अरावली को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है.सरकार ने कहा है कि हम पूरे अरावली को बचाएंगे.अब कोई माइनिंग लीज नहीं दी जाएगी यानी अब इसमें कोई खनन नहीं होगा.संरक्षित क्षेत्र का विस्तार किया जाएगा.🌳🌴अरावली को बचाना मतलब खुद को बचाना है।यह हम अरावली पर्वतमाला को बचाने वालों की जीत है।यह हम देशवासियों के विश्वास की जीत है।यह पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने वालो की जीत है इसलिए तो मैंने कहा था कि बचीं जो अरावली तो धरती रहे हरी-भरी।सच में अरावली को बचाना जैसे खुद को बचाना है।यह हम भारतीयों की एकजुटता और भरपूर समर्थन के वजह से ही सम्भव हो पाया है।🦚🌴🫡✊👍🙏 #🌐 राष्ट्रीय अपडेट #Aravalli #🌞 Good Morning🌞 #🏞 पर्यटन फोटोग्राफी #👍 डर के आगे जीत👌
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00:14
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सौ मीटर से कम की पहाड़ी को अरावली की परिभाषा से बाहर रखा जा सकता है।इस फैसले के बाद कहा जाने लगा है कि तब तो अरावली रेंज का बड़ा हिस्सा खनन से लेकर रियल इस्टेट तक के लिए खुल जाएगा। ये पहाड़ियाँ चंद वर्षों में मिट जाएंगी।अरावली भारत की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला है जो लगभग 2 अरब साल पुरानी है जो पहले से ही खनन का शिकार रही है ।अरावली को बचाने के लिए जनता सड़कों पर उतर रही है। अरावली पर प्रहार बंद करिए, बच्चों के भविष्य पर वार मत करिए! अरावली पर्वत देश के मानचित्र पर केवल एक लकीर नहीं बल्कि हमारी 'जीवनरेखा' है। गुजरात - राजस्थान - हरियाणा - दिल्ली तक फैली यह सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखला को विकास की आड़ में खत्म करने की साजिश हो रही है। 100 मीटर से ऊंचे पहाड़ों को ही अरावली मानने के नये नियम 100 मीटर से कम ऊंचाई वाले वन क्षेत्रों को खनन माफियाओं के हवाले करने का हथकंडा है।यह विकास नहीं, विनाश को सीधा न्योता है।अरावली हमारा प्राकृतिक सुरक्षा कवच है, इसे बर्बाद नहीं होने देंगे! यह भारत की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखला है। अरावली को बचाना मतलब खुद को बचाना है। आइए अरावली पर्वतमाला को बचाना के लिए हम सभी एकजुट हो अन्यथा पर्यावरण प्रदूषण और अवैध खनन से सबकुछ बर्बाद हो जाएगा। बची रहे जो "अरावली" तो दिल्ली रहे हरी-भरी"। # Let's unite for Save the Aravalli Hills🌴🌴🌳🌳🌳🦚🦚🦚😭😭😭🙏 #🥰मोटिवेशन वीडियो #Aravalli #🌞 Good Morning🌞 #🌐 राष्ट्रीय अपडेट #🏞 पर्यटन फोटोग्राफी
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