"नफरत को छोड़िए,मोहब्बत को अपनाइए, उत्तर प्रदेश दिवस पर,एकता का दीप जलाइए"।
गंगा-जमुनी तहजीब की धरती उत्तर प्रदेश के 77 वे स्थापना दिवस की मैं आप सभी प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाइयां देता हूँ.उत्तर प्रदेश की स्थापना 24 जनवरी 1950 ई को हुई थी.उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री का नाम श्री योगी आदित्यनाथ जी है तथा वर्तमान राज्यपाल का नाम श्रीमती आनन्दीबेन पटेल जी है.उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले है जो 240928 वर्ग किलोमीटर तक फैले विशाल भूमि क्षेत्र के साथ इसे भारत का सबसे बड़ा राज्य बनाता है.उत्तर प्रदेश की कुल जनसंख्या करीब 25 करोड़ है.उत्तर प्रदेश का पुराना नाम युनाइटेड प्रोविंस था लेकिन आजादी के बाद 24 जनवरी 1950 ई को इसका नामकरण उत्तर प्रदेश कर दिया गया.उत्तर प्रदेश राज्य 18 डिवीजन में बटा है.उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ है.उत्तर प्रदेश में विभिन्न धर्मो को मानने वाले लोग साथ-साथ रहते हैं जो उत्तर प्रदेश की गंगा जमुनी तहजीब की निशानी है.उत्तर प्रदेश में 404 विधानसभा तथा 80 लोकसभा सीटें हैं.उत्तर प्रदेश की पहली भाषा हिन्दी तथा दूसरी उर्दू है.उत्तर प्रदेश में पर्यटन के कई स्थल एवं तीर्थस्थल है जैसे ताजमहल,मथुरा आदि.उत्तर प्रदेश में 77.73℅ लोग ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं.उत्तर प्रदेश की साक्षरता दर 70% है तो वही देश का सबसे साक्षर राज्य केरल है जिसकी साक्षरता 95% है.उत्तर प्रदेश का राजकीय पंक्षी सारस है.उत्तर प्रदेश बड़ा राज्य होने के बाद भी आज गरीबी,बेरोजगारी तथा महिला अपराध में जकड़ा है जिसको सुधारने के लिए वर्तमान सरकार को ध्यान देना होगा.आज प्रदेश में 25 करोड़ में 15 करोड़ लोग गरीब हैं।उत्तर प्रदेश संपन्न और समृद्ध बने इसी मंगलकामना के साथ मै एक बार पुनः आप सभी को उत्तर प्रदेश दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूँ.🇮🇳🇮🇳🇮🇳🛕🕍🕉☪🇬🇪🙏 #👍 डर के आगे जीत👌 #🌞 Good Morning🌞 #🥰मोटिवेशन वीडियो #उत्तर प्रदेश ##viral
"कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी
सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा" …
बसंत पंचमी एवं सरस्वती पूजा की मैं आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाइयां देता हूं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी की 129 वी जयंती पर मैं आप को कोटिश: नमन तथा विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं.नेताजी का जन्म 23 जनवरी 1897 ई को हुआ था.नेताजी सुभाषचन्द्र बोस जी का जन्म कटक (उडीसा) में हुआ था.नेताजी की माताजी का नाम स्व प्रभावती दत्त बोस तथा पिताजी का नाम स्व जानकीनाथ बोस था.नेताजी ने अपनी शिक्षा दीक्षा कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में सम्पन्न की.वर्ष 1919 ई में नेताजी का चयन I.C.S में भी हो गया था हालांकि आप ने सिविल सेवा से त्याग पत्र दे दिया क्योंकि उनका मानना था कि वह अग्रेजो के साथ काम नहीं कर सकते हैं.सुभाषचन्द्र बोस जी के आध्यात्मिक गुरु स्व स्वामी विवेकानन्द जी थे.1921 ई आप ने चितरंजन दास की स्वराज पार्टी द्वारा प्रकाशित समाचार पत्र फारवर्ड के संपादक भी रहे.आप ने "The Indian Struggle" नामक पुस्तक भी लिखी थी जिसमें वर्ष 1920 से 1934 के दौरान होने वाले देश के सभी स्वतंत्रता आंदोलनों को कवर किया गया था.1938 ई में हरिपुरा में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के आप अध्यक्ष भी रहे.1939 ई में आप ने इस पद से त्यागपत्र देकर आल इंडिया फारवर्ड ब्लॉक का गठन किया जिसका उद्देश्य राजनीतिक नाम को मजबूत करना था.साल 1943 ई में सुभाष चंद्र बोस जी ने सिंगापुर में आज़ाद हिंद फ़ौज का गठन किया था.आप ने पेशावर और अफगानिस्तान के रास्ते बर्लिन भागने का प्रबंध किया इसके बाद जापान से बर्मा पहुंचे और वहाँ भारतीय राष्ट्रीय सेना को संगठित किया ताकि जापान की मदद से भारत को आजाद कराया जा सके.आप ने "जय हिंद", "दिल्ली चलो" तथा "तुम मुझे खुन दो,मैं तुम्हें आजादी दूगां" जैसे प्रसिद्ध नारे भी दिये.जर्मन के तानाशाह एडोल्फ हिटलर ने आप को सबसे पहले नेताजी कहा था.आप को देश नायक की उपाधि रविन्द्र नाथ टैगोर जी ने दी थी.आप को आप की जयंती पर मैं एक बार पुनः कोटिशः नमन तथा विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ.🙏🇮🇳🇮🇳जय हिंद जय भारत🇮🇳
"तुम मुझे खून दो,
मैं तुम्हें आजादी दूंगा।"
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यकीन हो कि न हो बात तो यकीन की है,
हमारे जिस्म की मिट्टी इसी जमीन की है,
मेरे वतन के सभी लोग भाई-भाई हैं,
ये दूरियों की सियासत किसी कमीन की है।।
सभी का खून शामिल हैं यहां की मिट्टी में,हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई,हिन्दुस्तान किसी एक मजहब का देश थोड़ी है।
मैं मर जाऊं तो मेरी एक अलग पहचान लिख देना, लहू से मेरी पेशानी पे हिन्दुस्तान लिख देना।।
हम लोग शुरू से लेकर अंत तक केवल भारतीय है।।
वो मिट्टी के बेटे,जो वापस न लौटे!😭😭🫡🫡🫡🙏
🇮🇳भारत माता की जय🇮🇳
🇮🇳जय हिन्द जय भारत🇮🇳
Republic day Vibes 🫡🫡🫡🇮🇳🇮🇳🇮🇳🙏🙏🙏
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भारत की 'बैडमिंटन क्वीन' साइना नेहवाल ने आधिकारिक तौर पर पेशेवर बैडमिंटन से संन्यास की पुष्टि कर दी है। एक पॉडकास्ट में दिल खोलकर बात करते हुए पूर्व वर्ल्ड नंबर-1 खिलाड़ी ने बताया कि उनके घुटनों की स्थिति (अर्थराइटिस और कार्टिलेज डैमेज) अब हाई-इंटेंसिटी ट्रेनिंग और कड़े मुकाबलों को झेलने के काबिल नहीं रही। 2012 लंदन ओलंपिक में देश को पहला बैडमिंटन पदक (कांस्य) दिलाने वाली साइना ने अपने करियर में 24 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय खिताब जीते। साइना ने कहा, "मैंने अपनी शर्तों पर खेलना शुरू किया और अपनी शर्तों पर ही विदा ले रही हूँ।" उनके संन्यास के साथ ही भारतीय खेल जगत का एक ऐसा अध्याय समाप्त हो गया जिसने पीवी सिंधु जैसी कई प्रतिभाओं के लिए रास्ता खोला था। पूरा देश आज अपनी इस 'सुपरस्टार' को उनकी ऐतिहासिक उपलब्धियों के लिए सलाम कर रहा है।आप अनगिनत भारत की बेटियों की प्रेरणास्त्रोत है और हमेशा रहेगी।यह वास्तव में एक युग के अंत होने जैसा है। थैंक यू,साइना जी!😭🙌✨🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🙏🙏🙏
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रेल मंत्रालय ने रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की इंस्पेक्टर चंदना सिन्हा को उनके उत्कृष्ट सेवा कार्य के लिए भारतीय रेलवे के सर्वोच्च सम्मान ‘अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार’ से सम्मानित किया है।वर्ष 2024 के दौरान उन्होंने रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में संकट में फंसे और भटके हुए 152 से अधिक बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू किया।इसके साथ ही 41 बच्चों को बाल श्रम और मानव तस्करी से भी बचाया गया।
ये सभी रेस्क्यू RPF के ‘नन्हे फरिश्ते मिशन’ के तहत किए गए, जिसकी शुरुआत 2018 में की गई थी।इस अभियान का उद्देश्य घर से भागे, खोए हुए, अनाथ या शोषण के शिकार बच्चों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित करना और अपराध, बाल श्रम व तस्करी से बचाना है।इंस्पेक्टर चंदना सिन्हा जी के अनुसार,बच्चों की पहचान करना आसान नहीं होता, कई बार RPF की टीम सादे कपड़ों में यात्रियों के बीच रहकर संदिग्ध गतिविधियों पर नज़र रखती है।रेस्क्यू के बाद बच्चों की काउंसलिंग भी की जाती है, ताकि वे दोबारा ऐसी स्थिति में न फँसें।उन्होंने यह भी बताया कि आज के समय में ऑनलाइन गेम्स और इंटरनेट के ज़रिये बहकावे में आकर घर से भागने वाले बच्चों की संख्या बढ़ रही है।इंस्पेक्टर चंदना सिन्हा जी का यह कार्य रेलवे परिसर को बच्चों के लिए अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और यह दिखाता है कि सजग पुलिसिंग कैसे सैकड़ों मासूम ज़िंदगियों को नई राह दे सकती है।यह महिला सशक्तिकरण की जीत है।आप को इस उपलब्धि के लिए मैं दिल से बधाईयां देता हूं।🫡🫡🫡👍👍👍🇮🇳🙏 #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान #🌞 Good Morning🌞 #👩🌾खान सर मोटिवेशन💡 #👍 डर के आगे जीत👌 #🥰मोटिवेशन वीडियो
तेलंगाना सरकार ने तय किया है कि अगर कोई सरकारी कर्मचारी अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल नहीं करता, तो उसकी सैलरी से 10% राशि काटी जाएगी। यह पैसा सीधे माता-पिता के बैंक खाते में ट्रांसफर किया जाएगा, ताकि वे सम्मान के साथ अपना जीवन जी सकें। इसके लिए सरकार एक अलग शिकायत तंत्र और जल्द ही एक कानून (Act) भी लाने जा रही है।
सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल के लिए ‘प्रणाम’ डे-केयर सेंटर खोले जाएंगे, जहाँ उनके स्वास्थ्य, मनोरंजन और सामाजिक मेलजोल का ध्यान रखा जाएगा।
सरकार का सन्देश है कि माता-पिता की सेवा सिर्फ़ नैतिक कर्तव्य नहीं, अब जवाबदेही भी है।
तेलंगाना से उठी यह पहल पूरे देश के लिए नज़ीर बन सकती है।
यह बेहद ही शानदार और प्रेरणादायक फैसला है जिससे राज्य में वृद्धा आश्रम में बड़े पैमाने पर कमी आयेगी और बुजुर्ग माता-पिता का बच्चे सम्मान करना सीखेंगे जो आज परम्परा खत्म होती जा रही है।
तेलंगाना सरकार के इस फैसले पर आपकी राय क्या है?
Respect your parents and elders my sweet students and friends. 🫡🫡🫡👍👍👍❤️🙏
कमेंट में ज़रूर बताइए
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दिल्ली की हवा में घुलते जहर का असर अब आंकड़ों में साफ-साफ नजर आने लगा है. दिल्ली सरकार के आधिकारिक दस्तावेज से निकला कड़वा सच बताता है कि 2024 में सांस की बीमारियों जैसे अस्थमा, ब्रॉन्काइटिस, निमोनिया या फेफड़ों से जुड़ी अन्य समस्याएं से 9,211 मौतें दर्ज हुईं. ये 2023 के 8,801 से करीब 4.7% ज्यादा है, और 2022 के 7,432 से तो 24% ऊपर है. वहीं, सबसे चौंकाने वाला फिगर 2021 का है, उस साल कोविड-19 की दूसरी लहर ने देश में कोहराम मचा दिया था और रेस्पिरेटरी डेथ्स 14,442 तक पहुंच गई थीं.CAQM ने NCR के नागरिकों से अपील की है कि वे GRAP के Citizen Charter का पालन करें, जैसे अनावश्यक वाहन उपयोग कम करना, सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल बढ़ाना और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों से बचना। विशेषज्ञों का मानना है कि मौसमी परिस्थितियां अभी 2-3 दिनों तक प्रतिकूल रह सकती हैं, इसलिए GRAP Stage-III का सख्ती से पालन जरूरी है। यदि AQI और बिगड़ता है तो Stage-IV ('Severe Plus') के उपाय भी विचाराधीन हो सकते हैं।विशेषज्ञों ने दिल्लीवासियों को सलाह दी है कि मास्क पहनें,घर से बाहर निकलने से बचें और बच्चों-बुजुर्गों का विशेष ख्याल रखें।ग्रेप स्टेज III के तहत सरकारी,नगर निगम और निजी कार्यालयों में कामकाज सीमित कर दिया गया है।
दफ्तरों में सिर्फ 50 प्रतिशत स्टाफ को ही फिजिकली आने की अनुमति होगी
बाकी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम करने की सलाह दी गई है
इसका उद्देश्य रोजाना की आवाजाही कम कर प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करना है।
दिल्ली से स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,300 फीसदी अधिक है।
पिछले हफ्ते लैंसेट की रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया जिससे पता चला कि वायु प्रदूषण के कारण भारत में 17 लाख लोगों की मौत हुई है।
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उन्हें लोग आज “Golden Girl" कहते हैं,लेकिन इस सुनहरे सफ़र की शुरुआत बिल्कुल आसान नहीं थी।
लेफ्टिनेंट कर्नल अंजना भदौरिया, भारतीय सेना में गोल्ड मेडल पाने वाली पहली महिला अफ़सरों में से एक, 1992 के पहले महिला बैच का हिस्सा थीं,पर सेना की ट्रेनिंग के लिए चंडीगढ़ से चेन्नई जाने की इजाज़त तक उन्हें आसानी से नहीं मिली।उनके भाई को डर था कि एक लड़की अकेले इतनी दूर कैसे जाएगी? और उन्होंने अंजना को जाने से साफ़ मना कर दिया।
अंजना जी आज भी हँसते हुए याद करती हैं, “मैंने अपनी माँ को अलग ले जाकर कहा था— "भैया को मना लो, वरना मैं घर से भाग जाऊँगी!”
देश की सेवा करने और वर्दी पहनने का अंजना का सपना बहुत पुराना था। उन्होंने अपने पिता को वायुसेना में सेवा करते देखा था,वहीं से ये सपना उनके दिल में बस गया।MSc माइक्रोबायोलॉजी करने के बाद वह एक फ़ार्मा कंपनी में काम कर रही थीं, तभी एक अख़बार में उनकी नज़र पड़ी— 'Indian Army की Women Special Entry Scheme में महिलाओं की भर्ती'
अंजना जी ने बिना देर किए आवेदन कर दिया।1992 में वह पहले महिला कैडेट बैच में चुनी गईं। उनका सर्विस नंबर था— 00001
यानी इतिहास की पहली पंक्ति।
चेन्नई की Officers’ Training Academy में उन्होंने न सिर्फ़ ट्रेनिंग पूरी की, बल्कि पूरे बैच में पहला स्थान हासिल कर गोल्ड मेडल जीत लिया,और इसी के साथ वह भारतीय सेना की अग्रणी महिला अफ़सरों में शामिल हो गईं।
जिस पिता को यह कामयाबी सबसे ज़्यादा खुशी देती, वह तब तक इस दुनिया में नहीं थे,लेकिन उनकी माँ चट्टान की तरह उनके साथ खड़ी रहीं।
अंजना जी ने गोल्ड मेडल जीतकर अपने पिता का सपना और अपने परिवार का सिर गर्व से ऊँचा कर दिया।पहला बैच होने की वजह से सब कुछ एक तरह का experiment था। ट्रेनर्स भी नहीं जानते थे कि 25 महिला कैडेट कितनी सहनशक्ति रखती हैं।अंजना जी बताती हैं—“राइफ़ल ड्रिल में 7.62mm की भारी राइफ़ल उठानी होती है।शुरुआत में हमें राइफ़ल की जगह छड़ी दे दी गई,क्योंकि उन्हें लगा हम राइफ़ल नहीं संभाल पाएँगी।” लेकिन महिला कैडेट्स ने साफ़ मना कर दिया।
आप ने हर टेस्ट, हर चुनौती पूरे आत्मविश्वास के साथ पूरी की। ट्रेनिंग के बाद इसी बैच ने आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत अहम फ़ीडबैक भी दिया।
शुरुआत में जवानों को महिला अफ़सर देखने की आदत नहीं थी।महिला कैडेट्स को बार-बार खुद को साबित करना पड़ता था,लेकिन समय के साथ सोच बदली,सम्मान बढ़ा,और आज महिला अफ़सर सेना की रीढ़ हैं।
लेफ्टिनेंट कर्नल अंजना भदौरिया सिर्फ़ गोल्ड मेडलिस्ट नहीं हैं,वह उस पीढ़ी की पहचान हैं जिसने इतिहास की पहली लकीर खींची ताकि आगे की राह आसान हो सके।यह कहानी सिर्फ़ एक महिला की नहीं, यह कहानी हिम्मत, भरोसे और देश के लिए जज़्बे की है।
आप के जज्बे और आत्मविश्वास पर देशवासियों को गर्व है।आप अनगिनत बेटियों की प्रेरणास्त्रोत हैं।आप पर देशवासियों को गर्व है मेरे भारत की बेटी।🫡🫡🫡👍👍👍🇮🇳🇮🇳🇮🇳❤️🙏
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78वे भारतीय सेना दिवस की मैं आप सभी बहादुर सेना के जवानों को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाइयां देता हूं।भारतीय सेना दिवस हर साल 15 जनवरी को मनाया जाता है.वर्तमान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी जी है जबकि भारत के तीनों सेनाओं के प्रमुख राष्ट्रपति होते हैं। इस उत्सव की शुरुआत 1949 में हुई थी,जब 15 जनवरी को भारतीय सेना की कमान ब्रिटिश सेना के अधिकारी जनरल सर फ्रांसिस बुचर से भारतीय सेना के अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल के.एम करिअप्पा जी को सौंपी गई थी,जिससे भारत में सेना का पहला भारतीय नेतृत्व स्थापित हुआ।इस दिन न केवल भारतीय सैनिकों की वीरता और बलिदान का जश्न मनाया जाता है,बल्कि औपनिवेशिक शासकों से भारतीयों को सत्ता हस्तांतरण का भी प्रतीक है.लेफ्टिनेंट जनरल के.एम करिअप्पा जी,भारतीय सेना के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ,कर्नाटक से थे.वह सैम मानेकशॉ के बाद भारत के फील्ड मार्शल की उपाधि पाने वाले केवल दो लोगों में से एक थे.भारत में पहली बार 78वा सेना दिवस परेड 15 जनवरी को जयपुर (पिंक सिटी) में छावनी क्षेत्र के बाहर एक सार्वजनिक स्थान पर आयोजित किया जा रहा है।भारत 13,25,000 सैनिक जवानों के साथ दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी सेना है Iयदि इसमें रिजर्व और पैरामिलिट्री फोर्सेज को जोड़ दिया जाए,तो यह संख्या 47,68,407 होगी। देश की सेना में 30 रेजिमेंट और 63 सशस्त्र रेजिमेंट्स हैं जो 7 ऑपरेशनल कमांड्स और तीन प्रकार की सेनाओं में 37 डिवीजंस में फैली है।एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल्स में भारत के पास 443 नाग,30000 मिलन,4100 मिलन 2टी और 15000 9एम113 कोंक्रूज मिसाइल्स हैं,इतना ही नहीं कोरेंट,फगोट,शत्रुम,अताका-वी, मल्युक्त और फालंका जैसी हजारों एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल्स हैं।पृथ्वी,सूर्या,अग्नि ब्रह्मोस बैलेस्टिक मिसाइल्स की पूरी रेंज है।आजादी के बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तान के खिलाफ तीन युद्ध 1948, 1965,तथा 1971 में लड़े हैं जबकि एक बार चीन से 1962 में भी युद्ध हुआ है।इसके अलावा 1999 में एक युद्ध कारगिल युद्ध पाकिस्तान के साथ दुबारा लड़ा गया।
"मैं मर जाऊं तो मेरी एक अलग पहचान लिख देना,लहू से मेरी पेशानी पे हिंदुस्तान लिख देना।"
🫡🇮🇳Indian Army Day🇮🇳🫡 🙏🇮🇳जय हिन्द जय भारत🇮🇳🙏
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आज इंसानियत फिर हार गई… 💔
पंजाब के लुधियाना में एक परिवार शादी से लौट रहा था…
रास्ते में ट्रक से टक्कर में पति-पत्नी की मौत हो गई,और जो लोग मदद करने वाले होने चाहिए थे,
उन्हीं ने उल्टा अंगूठी, गले का हार, शादी के लिफ़ाफ़े, सोना, Apple के फ़ोन… सब लूट लिए।
सोचिए…
दुःख में बिखरे परिवार से भी अगर इंसानियत गायब हो जाए,
तो फिर हम किस समाज में जी रहे हैं? 😔
आज सड़कों पर हादसा नहीं हुआ…
आज इंसानियत का अंतिम संस्कार हुआ है।
हमारा समाज कहा जा रहा है? यह एक सोचनीय
प्रश्न है। हमारे देश के लोगों से इंसानियत,मानवता और मदद करने की भावना विलुप्त होती जा रही है जो किसी भी सभ्य समाज के लिए अच्छी चीज नहीं है।यह घटना देश में फैली नफरत और हिंसा का परिणाम है।😭😭दुखद😭😭
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