आज राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस है।
भारत की आत्मा गांवों में बसती है।
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प्रक्रिया पर ध्यान दीजिए,
परिणाम अपने आप आ जायेगा.
कोई था जो विकेटों के पीछे से मैच पलट देता था।
Such a cute bond between MSD Sir and Deepak Chahar...
What a memorable picture.
Love,Respect,Dedication ❤️❤️Love u Mahi Sir❤️❤️🇮🇳🙏
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विश्व पृथ्वी दिवस की मैं आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। पृथ्वी को "नीला ग्रह" कहा जाता है क्योंकि इसकी सतह का लगभग 70% हिस्सा पानी से ढका हुआ है।पहला पृथ्वी दिवस 22 अप्रैल, 1970 ई को मनाया गया और इसे आधुनिक पर्यावरण आंदोलन की शुरुआत का श्रेय दिया जाता है।पृथ्वी दिवस अब 190 से अधिक देशों में मनाया जाता है,जिससे यह विश्व के सबसे बड़े धर्मनिरपेक्ष उत्सवों में से एक बन गया है।पृथ्वी दिवस पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्थन प्रदर्शित करने के लिए दुनिया भर में मनाया जाने वाला एक वार्षिक कार्यक्रम है।यह हमें भविष्य की पीढ़ियों के लिए अपने ग्रह की सुरक्षा करने की हमारी ज़िम्मेदारी की याद दिलाता है।पृथ्वी दिवस पर्यावरण संबंधी मुद्दों जैसे प्रदूषण,वनों की कटाई, जलवायु परिवर्तन और लुप्तप्राय प्रजातियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। यह व्यक्तियों,समुदायों और सरकारों को पृथ्वी के प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित और सुरक्षित रखने के लिए कार्रवाई करने के लिए प्रोत्साहित करता है।आज देश में पेड़ो को काटा जा रहा है ताकि फैक्ट्रियों और इमारतें बनाई जा सके लेकिन इसके बदले हम पृथ्वी की उर्वरता क्षमता और पेड़ों को काट कर मृदा अपरदन को बढ़ावा दे रहे हैं जो बिल्कुल भी ठीक नहीं है।अभी कुछ साल पहले ही हैदराबाद में विकास के नाम पर 400 एकड़ में फैले जंगल को काटा जा रहा था ताकि विकास हो सके लेकिन इस विकास के लिए न जाने कितने जानवरो और पेड़ो की बलि चढ़ा दी गई जो किसी भी तरह से ठीक नहीं है।अगर किसी का विनाश कर के विकास होगा तो यह बिल्कुल भी अच्छी बात नहीं है तथा यह निंदनीय भी है। तेलंगाना सरकार इसे तुरंत रोके ताकि जानवरो के आश्रय गृह को बचाया जा सके तथा मृदा अपरदन को भी रोका जा सके।यही कारण है कि भारत पर्यावरण प्रदूषण सूचकांक में बुरी तरह से 180 देशों की सूची में 176 वे स्थान पर है। पृथ्वी तभी बचेगी जब पेड़ पौधे बचेंगे और पेड़ पौधे बचेंगे तभी आक्सीजन मिलेगा और आक्सीजन मिलेगा तभी मनुष्य भी बचेगा अन्यथा सब कुछ नष्ट हो जाएगा।आइए हम सभी संकल्प ले कि इस कुकृत्य के खिलाफ आवाज उठाएंगे तथा सुन्दर लाल बहुगुणा जी जैसे एक बार फिर पेड़ो से चिपकर चिपको आंदोलन शुरू करेंगे तब जाकर पृथ्वी बचेगी और पर्यावरण शुद्ध होगा अन्यथा सब कुछ बर्बाद हो जाएगा।विश्व पृथ्वी दिवस 2026 की थीम "हमारी शक्ति, हमारा ग्रह" (Our Power, Our Planet) है।😭दुखद😭🌍🌍🌍🪐🪐🪐🌳🌳🌳🌴🌴🌴🙏World Earth Day🙏
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वैशाली रमेशबाबू ने फिर रचा इतिहास!
वैशाली ने दबाव, उम्मीदों और दुनिया के सबसे मजबूत खिलाड़ियों के बीच से रास्ता निकालते हुए FIDE Women’s Candidates Tournament 2026 का ख़िताब हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला बन गयी हैं।
ये जीत सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं है, ये उस सफर की कहानी है जो छोटे शहर के चेसबोर्ड से शुरू होकर दुनिया के सबसे बड़े मंच तक पहुँचा।
वैशाली का बचपन शतरंज के बीच ही बीता—घर में इस खेल को सिर्फ खेल नहीं, बल्कि अनुशासन और सोचने की ताकत माना गया। उनके पिता ने उन्हें और उनके भाई प्रज्ञानानंद को इस खेल से जोड़ा, और माँ ने हर मुश्किल मोड़ पर साथ खड़े रहकर उन्हें संभाला, प्रेरित किया और मजबूत बनाया।
हर टूर्नामेंट, हर हार, हर जीत—इन सबने मिलकर उस खिलाड़ी को गढ़ा जिसने आज दुनिया को दिखा दिया कि भारत सिर्फ हिस्सा नहीं लेता इतिहास लिखता है और जब मंच पर “जन गण मन” गूंजा तो वो सिर्फ एक जीत का जश्न नहीं था,
वो एक पूरे देश की मेहनत, सपनों और विश्वास की आवाज़ थी।
यह पल भारतीय शतरंज के लिए एक नया अध्याय है… जहाँ भारत अब सिर्फ उभर नहीं रहा, बल्कि शिखर पर खड़ा है 🇮🇳🙏🙏🙏
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लोकप्रिय समाजवादी जननेता एवं भारत के पूर्व प्रधानमंत्री रहे स्व चन्द्रशेखर जी की जयंती पर मैं आप को कोटिशः नमन तथा विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।श्री चन्द्रशेखर जी का जन्म 17 अप्रैल 1927 ई को उत्तर प्रदेश के बागी बलिया जिले में स्थित इब्राहिमपट्टी गांव में एक किसान परिवार में हुआ था।आप ने कहा था कि, " नफरत की राजनीति से केवल सरकार बनाई जा सकती है देश नहीं।आप न तो केंद्र में मंत्री बने न ही राज्य मंत्री।आप बिना इन पदों को ग्रहण किए बिना सीधे देश के प्रधानमंत्री बने।आप ने राष्ट्रीय मसलों और जनता के सवालों पर सत्ता धारी सरकारों का विरोध किया और आवश्यक सहयोग भी।आप 1951 में सोशलिस्ट पार्टी के कार्यकता बन गये।आप ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की डीग्री प्राप्त की।आप 10 नवंबर 1990 से 21 जून 1991 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे।आप एक ऐसे ‘युवा तुर्क’ नेता के रूप में सामने आए जिसने दृढ़ता,साहस एवं ईमानदारी के साथ निहित स्वार्थ के खिलाफ लड़ाई लड़ी।आप 1969 में दिल्ली से प्रकाशित साप्ताहिक पत्रिका ‘यंग इंडियन’ के संस्थापक एवं संपादक थे।इसका सम्पादकीय अपने समय के विशिष्ट एवं बेहतरीन संपादनों में से एक हुआ करता था।आपातकाल (मार्च 1977 से जून 1975) के दौरान ‘यंग इंडियन’ को बंद कर दिया गया था।फरवरी 1989 से इसका पुनः नियमित रूप से प्रकाशन शुरू हुआ।आप इसके संपादकीय सलाहकार बोर्ड के अध्यक्ष थे।श्री चन्द्र शेखर अपने छात्र जीवन से ही राजनीति की ओर आकर्षित थे और क्रांतिकारी जोश एवं गर्म स्वभाव वाले वाले आदर्शवादी के रूप में जाने जाते थे। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (1950-51) से राजनीति विज्ञान में अपनी मास्टर डिग्री करने के बाद वे समाजवादी आंदोलन में शामिल हो गए। उन्हें आचार्य नरेंद्र देव के साथ बहुत निकट से जुड़े होने का सौभाग्य प्राप्त था। वे बलिया में जिला प्रजा समाजवादी पार्टी के सचिव चुने गए एक साल के भीतर वे उत्तर प्रदेश में राज्य प्रजा समाजवादी पार्टी के संयुक्त सचिव बने। 1955-56 में वे उत्तर प्रदेश में राज्य प्रजा समाजवादी पार्टी के महासचिव बने।1962 में वे उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए चुने गए। वे जनवरी 1965 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हो गए। 1967 में उन्हें कांग्रेस संसदीय दल का महासचिव चुना गया। संसद के सदस्य के रूप में उन्होंने दलितों के हित के लिए कार्य करना शुरू किया एवं समाज में तेजी से बदलाव लाने के लिए नीतियाँ निर्धारित करने पर जोर दिया। इस संदर्भ में जब उन्होंने समाज में उच्च वर्गों के गलत तरीके से बढ़ रहे एकाधिकार के खिलाफ अपनी आवाज उठाई तो सत्ता पर आसीन लोगों के साथ उनके मतभेद हुए।
वे एक ऐसे ‘युवा तुर्क’ नेता के रूप में सामने आए जिसने दृढ़ता, साहस एवं ईमानदारी के साथ निहित स्वार्थ के खिलाफ लड़ाई लड़ी। वे 1969 में दिल्ली से प्रकाशित साप्ताहिक पत्रिका ‘यंग इंडियन’ के संस्थापक एवं संपादक थे। इसका सम्पादकीय अपने समय के विशिष्ट एवं बेहतरीन संपादनों में से एक हुआ करता था। आपातकाल (मार्च 1977 से जून 1975) के दौरान ‘यंग इंडियन’ को बंद कर दिया गया था। फरवरी 1989 से इसका पुनः नियमित रूप से प्रकाशन शुरू हुआ। वे इसके संपादकीय सलाहकार बोर्ड के अध्यक्ष थे।
श्री चन्द्र शेखर हमेशा व्यक्तिगत राजनीति के खिलाफ रहे एवं वैचारिक तथा सामाजिक परिवर्तन की राजनीति का समर्थन किया। यही सोच उन्हें 1973-75 के अशांत एवं अव्यवस्थित दिनों के दौरान श्री जयप्रकाश नारायण एवं उनके आदर्शवादी जीवन के और अधिक करीब ले गई। इस वजह से वे जल्द ही कांग्रेस पार्टी के भीतर असंतोष का कारण बन गए।आपातकाल (1975-1977) के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी को आंतरिक सुरक्षा अधिनियम (MISI) के तहत गिरफ्तार करके जेल में रखा गया था।आप तत्कालीन सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी का हिस्सा होने के बावजूद अपनी मुखरता के कारण गिरफ्तार किए गए और अधिकांश समय कारावास में रहे।
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सुप्रसिद्ध एवं दिग्गज गायिका आशा भोसले जी का 92 साल की उम्र में निधन होना अत्यंत दुःखद है।2008 में पद्म विभूषण अवार्ड,2000 में दादा साहेब फाल्के अवार्ड,7 फिल्मफेयर अवार्ड,2 नेशनल अवार्ड सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित आशा जी ने लंबे समय तक भारतीय कला जगत को समृद्ध बनाने में अनुपम भूमिका निभाई।
हिंदी,मराठी के साथ ही कई भाषाओं में गायन कर उन्होंने भारतीय गीत-संगीत और सिनेमा को विश्व मंच पर प्रतिष्ठित किया।आशा जी का देहावसान भारतीय कला-संगीत जगत के लिए गहरी क्षति है।मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे तथा शोकाकुल परिजनों और प्रशंसकों को अथाह दुःख की इस घड़ी में संबल प्रदान करें।😭😭😭🙏
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भारतीय संविधान के निर्माता एवं संविधान के प्रारुप समिति के अध्यक्ष एवं मानवाधिकार आदोलन के प्रकांड विद्वान भारत रत्न स्व बाबा साहेब डा० भीमराव अम्बेडकर जी की 135 वी जयंती पर मैं आप को कोटिशः नमन तथा विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ.बाबा साहेब डा भीम राव अम्बेडकर जी अछूत माने जाने वाली महार जाति के थे.आप का जन्म मध्यप्रदेश के महू नामक स्थान में हुआ था.आप की माताजी का नाम श्रीमती भीमाबाई तथा पिताजी का नाम रामजी मालोजी सकपाल जी था.बचपन से ही आप को भेदभाव और सामाजिक दुराव से गुजरना पड़ा.बचपन से ही आप मेधावी छात्र थे.मेधावी छात्र होने के बाद भी आप के साथ स्कूल में भेदभाव का व्यवहार किया जाता था.इस समय छूछाछूत की समस्या भी समाज में वृहद स्तर पर थी जिससे पढ़ाई लिखाई में आप को बहुत समस्या आई लेकिन इन सब की परवाह किये बगैर आप ने अपनी स्कूली शिक्षा पुरी की.1913 ई में आप ने अमेरिका के कोलंबिया यूनिवर्सिटी से ला इकोनोमिक्स और पोलिटिकल साइंस की डिग्री प्राप्त की.आप के पास कुल 32 डीग़्रीया तथा 9 भाषाओं का ज्ञान था.देश की आज़ादी के बाद आप देश के पहले कानून मंत्री बने.सन् 1990 ई में आप को देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न दिया गया.आप ने समाज के कमजोर तथा दबे कुचले लोगों को समान अधिकार दिलाने तथा अपना पुरा जीवन सामाजिक बुराईयों से लड़ने तथा समाज को एकजुट करने में लगा दिया.आप की समाधि स्थल का नाम चैत्य भूमि है।आप ने संविधान में हम भारतीयों को 6 अधिकार दिये ताकि कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति से भेदभाव न कर सके जो इस प्रकार है.(1)समानता का अधिकार (2)स्वतंत्रता का अधिकार (3)शोषण के विरुद्ध अधिकार (4)धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (5)सास्कृतिक और शैक्षिक अधिकार (6)संवैधानिक उपचारों का अधिकार.आइए हम सभी भारतीय आज संकल्प लें कि हम लोग समाज में किसी से भेदभाव नही करेंगे तथा हमेशा एक भारतीय नागरिक बन के समाज को एकजुट रखेगे क्योंकि अंबेडकर जी ने कहा था कि "हम लोग शुरू से लेकर अंत तक केवल भारतीय हैं ".आज के दिन यही काम कर के हम बाबा साहेब डा भीम राव अम्बेडकर जी को सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते हैं.शत् शत् नमन🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇬🇬☪🕉🇬🇪😭🙏
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आज जलियांवाला बाग हत्याकांड का 107 वा स्मृति दिवस है.यह घटना आज की ही तारीख़ को पंजाब के अमृतसर नामक स्थान में हुई थी.यह घटना तब घटी जब दो राष्ट्रवादी नेता सत्यपाल जी तथा सैफुद्दीन किचलू की गिरफ्तारी के विरोध में 13 अप्रैल 1919 ई को बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए थे.आज के दिन अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के पास जलियांवाला बाग में खून की होली खेली गई थी।🙏🙏🙏
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सत्यशोधक समाज के संस्थापक,नारी शिक्षा के अग्रदूत एवं समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले जी की जयंती पर मैं आप को कोटिशः नमन तथा विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।आप की माता जी का नाम चिमणाबाई तथा पिता जी का नाम गोविंदराव था। उनका परिवार कई पीढ़ी पहले माली का काम करता था।वे सातारा से पुणे फूल लाकर फूलों के गजरे आदि बनाने का काम करते थे इसलिए उनकी पीढ़ी 'फुले' के नाम से जानी जाती थी।
ज्योतिबा बहुत बुद्धिमान थे। उन्होंने मराठी में अध्ययन किया। वे महान क्रांतिकारी, भारतीय विचारक, समाजसेवी, लेखक एवं दार्शनिक थे। 1840 में ज्योतिबा का विवाह सावित्रीबाई से हुआ था। महाराष्ट्र में धार्मिक सुधार आंदोलन जोरों पर था। जाति-प्रथा का विरोध करने और एकेश्वरवाद को अमल में लाने के लिए ‘प्रार्थना समाज’ की स्थापना की गई थी जिसके प्रमुख गोविंद रानाडे और आरजी भंडारकर थे। उस समय महाराष्ट्र में जाति-प्रथा बड़े ही वीभत्स रूप में फैली हुई थी। स्त्रियों की शिक्षा को लेकर लोग उदासीन थे, ऐसे में ज्योतिबा फुले ने समाज को इन कुरीतियों से मुक्त करने के लिए बड़े पैमाने पर आंदोलन चलाए। उन्होंने महाराष्ट्र में सर्वप्रथम महिला शिक्षा तथा अछूतोद्धार का काम आरंभ किया था। उन्होंने पुणे में लड़कियों के लिए भारत की पहला विद्यालय खोला। लड़कियों और दलितों के लिए पहली पाठशाला खोलने का श्रेय ज्योतिबा को दिया जाता है।ज्योतिराव गोविंदराव फुले की मृत्यु 28 नवंबर 1890 को पुणे में हुई। इस महान समाजसेवी ने अछूतोद्धार के लिए सत्यशोधक समाज स्थापित किया था। उनका यह भाव देखकर 1888 में उन्हें 'महात्मा' की उपाधि दी गई थी।
🙏🙏✊शत् शत् नमन ✊🙏🙏
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होमियोपैथी विधा के जनक रहे जर्मन चिकित्सक एवं छद्म-वैज्ञानिक होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति के जन्मदाता डॉ. फ्रेडरिक सैमुअल हैनीमैन जी की 271 वी जन्मजयंती पर मै उन्हे कोटिश: नमन तथा विनम्र श्रद्धांजली अर्पित करता हूं।यह दिवस विश्व होम्योपैथिक दिवस के रूप में भी विश्व स्तर पर मनाया जा रहा है।हैनीमैन स्वयं एक एलोपैथिक चिकित्सक भी थे,जिन्होंने यह महसूस किया कि अंग्रेजी दवाएं मनुष्य की जीवनी शक्ति को नष्ट कर देती हैं।मूल रोग नष्ट होने की बजाय दब जाता है।इससे प्रेरित होकर डॉ. हैनीमैन जी ने विषस्य विषमौषधम् के आधार पर होमियोपैथिक औषधियों का निर्माण किया,जिनका प्रयोग स्वस्थ मनुष्य के शरीर पर किया गया जबकि आज भी एलोपैथिक दवाओं का प्रयोग पहले जन्तुओं पर किया जाता है,यही वजह है कि होमियोपैथिक दवाएं सर्वथा निरापद होती हैं।हैनीमैन ने कई सालों के शोध के बाद 'सिमिलिया सिमिलीबस क्यूरेंटुर' या 'जैसा इलाज वैसा ही' नामक सिद्धांत की नींव रखी और इस तरह होम्योपैथी का जन्म हुआ।होम्योपैथी ने समय-समय पर कई लोगों को लाभ पहुंचाया है और मनुष्यों में कुछ गहरी जड़ें जमा चुकी बीमारियों का इलाज किया है,और यह दिन उन उदाहरणों पर प्रकाश डालने के लिए मनाया जाता है,इसके अलावा,विश्व होम्योपैथी दिवस विज्ञान की इस शाखा के सदस्यों और विश्वासियों के लिए आगे के मार्ग और इसे प्रशस्त करने के लिए आवश्यक रणनीतियों पर चर्चा करने के लिए एक मंच भी प्रदान करता है।2 जुलाई 1843 को सुबह 5 बजे डॉ. हैनीमैन ने पेरिस में अंतिम सांस ली।उनके अंतिम शब्द थे: मैंने व्यर्थ नहीं जिया।शत् शत् नमन🙏🙏🙏
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