उषा कुमारी
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#✍मेरे पसंदीदा लेखक #❤️जीवन की सीख #📚कविता-कहानी संग्रह
✍मेरे पसंदीदा लेखक - अब तो पथ यही है / दुष्यंत कुमार जिंदगी ने कर लिया स्वीकार, अब तो पथ यही है। अब उभरते ज्वार का आवेग मद्धिम हो चला है, एक हलका सा धुंधलका था कहीं , कम हो चला है, यह शिला पिघले न पिघले, रास्ता नम होे चला है, क्यों करूँ आकाश की मनुहार , अब तो पथ यही है | क्या भरोसा , कांच का घट है, किसी दिन फूट जाए, मामूली कहानी है, अधूरी छूट जाए॰ एक समझौता एक हुआ था रौशनी से, टूट जाए, आज हर नक्षत्र है अनुदार, अब तो पथ यही है। यह लडाई, जो की अपने आप से मैंने लड़ी है, यह घुटन, यह यातना , केवल किताबों में पढ़ी है, यह पहाड़ी इरादों ने चढ़ी है, कल दरीचे ही बनेंगे पाव क्या चढ़ते, द्वार, अब तो पथ यही है | अब तो पथ यही है / दुष्यंत कुमार जिंदगी ने कर लिया स्वीकार, अब तो पथ यही है। अब उभरते ज्वार का आवेग मद्धिम हो चला है, एक हलका सा धुंधलका था कहीं , कम हो चला है, यह शिला पिघले न पिघले, रास्ता नम होे चला है, क्यों करूँ आकाश की मनुहार , अब तो पथ यही है | क्या भरोसा , कांच का घट है, किसी दिन फूट जाए, मामूली कहानी है, अधूरी छूट जाए॰ एक समझौता एक हुआ था रौशनी से, टूट जाए, आज हर नक्षत्र है अनुदार, अब तो पथ यही है। यह लडाई, जो की अपने आप से मैंने लड़ी है, यह घुटन, यह यातना , केवल किताबों में पढ़ी है, यह पहाड़ी इरादों ने चढ़ी है, कल दरीचे ही बनेंगे पाव क्या चढ़ते, द्वार, अब तो पथ यही है | - ShareChat