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काशी करौंत काहे लेही, बिना भजन नहीं ढंग रे। कोटी ग्रंथ का योही अर्थ है, करो साध सत्संग रे।। मोक्ष प्राप्ति के लिए पूर्ण और सच्चे संत की शरण में जाना अनिवार्य है। इसी का समर्थन श्रीमद्भगवद्गीता भी करती है: तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया। उस परम ज्ञान को जानने के लिए तत्वदर्शी संत के पास जाओ, उन्हें दंडवत प्रणाम करो और निष्कपट भाव से सेवा करो। ♦️गरीब, बिना भगति क्या होत है, भावैं कासी करौंत लेह। मिटे नहीं मन बासना, बहुबिधि भर्म संदेह।। पहले काशी में गंगा किनारे करौंत लगा रखा था। (करौंत: यह लकड़ी चीरने वाला एक बड़ा आरा होता है, जिसे दोनों तरफ लगे हैंडल से पकड़कर दो व्यक्तियों द्वारा चलाया जाता है।) और भ्रम फैला रखा था, कि जो काशी में करौंत से गर्दन कटवा लेगा। वह स्वर्ग जाएगा। वृद्ध आदमी सोच लेता है कि मरना तो है ही। कल को बीमार होकर दुर्गति से मरूंगा। तो पैसे देकर, उन्होंने जान भी दी। लेकिन मोक्ष तो भक्ति से होगा इन बकवादों से थोड़े ही होता है। #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
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🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - Barhma,vishnu,shiv bhi jnm mirityu me hai] Barhma,vishnu,shiv bhi jnm mirityu me hai] - ShareChat
#meditation #yoga #jaishreeram #hanumanchalisa #sanatandharma SantRampalJiMaharaj हिन्दू धर्म के धर्मगुरू जो साधना साधक समाज को बताते हैं, वह शास्त्र प्रमाणित नहीं है। जिस कारण से साधकों को परमात्मा की ओर से कोई लाभ नहीं मिला जो भक्ति से अपेक्षित किया। फिर धर्मगुरूओं ने एक योजना बनाई कि भगवान शिव का आदेश हुआ है कि जो काशी नगर में प्राण त्यागेगा, उसके लिए स्वर्ग का द्वार खुल जाएगा। वह बिना रोक-टोक के स्वर्ग चला जाएगा। जो मगहर नगर (गोरखपुर के पास उत्तरप्रदेश में) वर्तमान में जिला-संत कबीर नगर (उत्तर प्रदेश) में है, उसमें मरेगा, वह नरक जाएगा या गधे का शरीर प्राप्त करेगा। गुरूजनों की प्रत्येक आज्ञा का पालन करना अनुयाईयों का परम धर्म माना गया है। इसलिए हिन्दू लोग अपने-अपने माता-पिता को आयु के अंतिम समय में काशी (बनारस) शहर में किराए पर मकान लेकर छोड़ने लगे।  अंधविश्वास और पाखंड के कारण लोग करौंत जैसी विधियों में फंसे रहे। यह केवल अज्ञानता और शास्त्रज्ञान की कमी का परिणाम है। ♦️ गला भी कटाया, मोक्ष नहीं पाया। कबीर, तिलभर मछली खायके, कोटि गऊ दै दान। काशी करौत ले मरै, तौ भी नरक निदान।। जो व्यक्ति गाय दान करते हैं यानि धर्म करते हैं। वे यदि तिलभर माँस मछली या अन्य किसी जीव का खाएगा तो उसका वह गऊ दान का धर्म समाप्त हो जाएगा। चाहे वह काशी में करौंत से गला भी कटा ले तो भी वह नरक में गिरेगा। https://www.instagram.com/p/DTx58AbD5tX/?igsh=MXB1OHo4Y2JyYnM2Mw== #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
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Gyan Singh Rathore on Instagram: "#meditation #yoga #jaishreeram #hanumanchalisa #sanatandharma SantRampalJiMaharaj हिन्दू धर्म के धर्मगुरू जो साधना साधक समाज को बताते हैं, वह शास्त्र प्रमाणित नहीं है। जिस कारण से साधकों को परमात्मा की ओर से कोई लाभ नहीं मिला जो भक्ति से अपेक्षित किया। फिर धर्मगुरूओं ने एक योजना बनाई कि भगवान शिव का आदेश हुआ है कि जो काशी नगर में प्राण त्यागेगा, उसके लिए स्वर्ग का द्वार खुल जाएगा। वह बिना रोक-टोक के स्वर्ग चला जाएगा। जो मगहर नगर (गोरखपुर के पास उत्तरप्रदेश में) वर्तमान में जिला-संत कबीर नगर (उत्तर प्रदेश) में है, उसमें मरेगा, वह नरक जाएगा या गधे का शरीर प्राप्त करेगा। गुरूजनों की प्रत्येक आज्ञा का पालन करना अनुयाईयों का परम धर्म माना गया है। इसलिए हिन्दू लोग अपने-अपने माता-पिता को आयु के अंतिम समय में काशी (बनारस) शहर में किराए पर मकान लेकर छोड़ने लगे।  अंधविश्वास और पाखंड के कारण लोग करौंत जैसी विधियों में फंसे रहे। यह केवल अज्ञानता और शास्त्रज्ञान की कमी का परिणाम है। ♦️ गला भी कटाया, मोक्ष नहीं पाया। कबीर, तिलभर मछली खायके, कोटि गऊ दै दान। काशी करौत ले मरै, तौ भी नरक निदान।। जो व्यक्ति गाय दान करते हैं यानि धर्म करते हैं। वे यदि तिलभर माँस मछली या अन्य किसी जीव का खाएगा तो उसका वह गऊ दान का धर्म समाप्त हो जाएगा। चाहे वह काशी में करौंत से गला भी कटा ले तो भी वह नरक में गिरेगा।"
1 likes, 0 comments - gyan.singh3742 on January 21, 2026: "#meditation #yoga #jaishreeram #hanumanchalisa #sanatandharma SantRampalJiMaharaj हिन्दू धर्म के धर्मगुरू जो साधना साधक समाज को बताते हैं, वह शास्त्र प्रमाणित नहीं है। जिस कारण से साधकों को परमात्मा की ओर से कोई लाभ नहीं मिला जो भक्ति से अपेक्षित किया। फिर धर्मगुरूओं ने एक योजना बनाई कि भगवान शिव का आदेश हुआ है कि जो काशी नगर में प्राण त्यागेगा, उसके लिए स्वर्ग का द्वार खुल जाएगा। वह बिना रोक-टोक के स्वर्ग चला जाएगा। जो मगहर नगर (गोरखपुर के पास उत्तरप्रदेश में) वर्तमान में जिला-संत कबीर नगर (उत्तर प्रदेश) में है, उसमें मरेगा, वह नरक जाएगा या गधे का शरीर प्राप्त करेगा। गुरूजनों की प्रत्येक आज्ञा का पालन करना अनुयाईयों का परम धर्म माना गया है। इसलिए हिन्दू लोग अपने-अपने माता-पिता को
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