कबीर, बार-बार निज श्रवणतें, सुने जो धर्म पुराण।
कोमल चित उदार नित, हिंसा रहित बखान ।।
भक्त को चाहिए कि वह बार-बार धर्म-कर्म के विषय में सत्संग ज्ञान सुने और अपना चित कोमल रखे। अहिंसा परम धर्म है। ऐसे अहिंसा संबंधी प्रवचन सुनने चाहिऐ।
– जगतगुरु तत्वदर्शी #SantRampalJiMaharaj
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