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300thBodhDiwasSantGaribdasJiहरि आये हरियाणे नू हरियाणा की पवित्र भूमि जिला झज्जर, गांव छुड़ानी के पास खेतों में अपनी प्यारी आत्मा 10 वर्षीय बालक गरीबदास जी300thBodhDiwasSantGaribdasJi महाराज को गउएं चराते हुए, पूर्ण परमात्मा कबीर साहिब जी मिले, सतलोक #300thBodhDiwasSantGaribdasJi दिखाया और फिर वापिस छोड़ा। बस यहीं से गरीबदास जी महाराज का जीवन पलट गया और परमात्मा की महिमा गाते हुऐ गरीब दास जी चिता से उठ बैठे और बोले:– अजब नगर में ले गया, हमकूं सतगुरु आन। झिलके बिम्ब अगाध गति, सूते चादर तान। अनन्त कोटि ब्रह्मण्ड का एक रति नहीं भार। सतगुरु पुरुष कबीर हैं कुल के सृजनहार।।
300thBodhDiwasSantGaribdasJi - Sஅ ಈಇಾರ লু संत गरीबदास जी ने कहा है सर्व कला सतगुरु साहेब की, हरि आए हरियाणे नूँ। মন 1727 ম মব হাকিমান परमेश्वर कबीर जी जिंदा रूप ्में सतलोक से महात्मा आकर संत गरीबदास जी को गांव छुड़ानी, जिला झज्जर हरियाणा में मिले थे। 0500 Sஅ ಈಇಾರ লু संत गरीबदास जी ने कहा है सर्व कला सतगुरु साहेब की, हरि आए हरियाणे नूँ। মন 1727 ম মব হাকিমান परमेश्वर कबीर जी जिंदा रूप ्में सतलोक से महात्मा आकर संत गरीबदास जी को गांव छुड़ानी, जिला झज्जर हरियाणा में मिले थे। 0500 - ShareChat
#300thBodhDiwasSantGaribdasJi हरि आये हरियाणे नूं ग्राम छुड़ानी, जिला झज्जर, हरियाणा में जन्मे संत गरीबदास जी को परमेश्वर कबीर साहिब जी जिंदा बाबा रूप में सतलोक से आकर विक्रमी संवत् 1784, सन् 1727 में फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष द्वादशी को मिले थे। इसीलिए संत गरीबदास जी ने कहा है: सर्व कला सतगुरु साहेब की, हरि आए हरियाणे नूँ। उन्हीं परमेश्वर के अवतार संत रामपाल जी का अवतरण हरियाणा प्रांत में हुआ है, जिनके विषय में आदरणीय संत गरीबदास जी ने अपनी अमरवाणी में कहा है: पूर्व-पश्चिम-उत्तर-दक्षिण, क्यों फिरदा दाणें दाणें नू। सर्ब कला सतगुरु साहेब की हरि आए हरियाणे नू।।
300thBodhDiwasSantGaribdasJi - DLLC हरियाणे नू BRSIRJR आदरणीय संत गरीबदास जी महाराज का जन्म धनखड़ जाट परिवार में वैशाख के उत्तरार्ध की पूर्णिमा के दिन सन् १७१७ ई॰ (विक्रमी संवत १७७४) में ग्राम जिला झज्जर , हरियाणा में हुआ था। जब आदरणीय गरीबदास जी १० छुड़ानी थे, तब कबलाना गाँव की सीमा से सटे नला खेत में जांडी के वर्ष की आयु के पेड़ के नीचे प्रातः १० बजे परमेश्वर कबीर साहिब जी सतलोक से आकर मिले। DLLC हरियाणे नू BRSIRJR आदरणीय संत गरीबदास जी महाराज का जन्म धनखड़ जाट परिवार में वैशाख के उत्तरार्ध की पूर्णिमा के दिन सन् १७१७ ई॰ (विक्रमी संवत १७७४) में ग्राम जिला झज्जर , हरियाणा में हुआ था। जब आदरणीय गरीबदास जी १० छुड़ानी थे, तब कबलाना गाँव की सीमा से सटे नला खेत में जांडी के वर्ष की आयु के पेड़ के नीचे प्रातः १० बजे परमेश्वर कबीर साहिब जी सतलोक से आकर मिले। - ShareChat
#300thBodhDiwasSantGaribdasJi हरि आये हरियाणे नूं* आदरणीय संत गरीबदास जी महाराज का जन्म वैशाख के उत्तरार्ध की पूर्णिमा के दिन सन् 1717, विक्रमी संवत् 1774 में ग्राम छुड़ानी, जिला झज्जर, हरियाणा में हुआ था। जब आदरणीय गरीबदास जी 10 वर्ष की आयु हुए, तब कबलाना गाँव की सीमा से सटे नला खेत में जांडी के पेड़ के नीचे परमेश्वर कबीर साहिब जी सतलोक से आकर विक्रमी संवत् 1784, सन् 1727 में फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष द्वादशी को मिले। इसीलिए संत गरीबदास जी ने कहा है: सर्व कला सतगुरु साहेब की, हरि आए हरियाणे नू।
300thBodhDiwasSantGaribdasJi - C0764 মনিমাতা মু सुदी द्वादशी  सन् १७२७ फाल्गुन मास को संत गरीबदास जी महाराज को १० वर्ष की आयु में परमेश्वर कबीर साहेब हरियाणा में आकर जिंदा बाबा के रूप में मिले। अपने साथ কপং ক সমী লীকী কী নিস্রাকয सतलोक में अपने वास्तविक रूप के दर्शन भी कराए फिर ज्ञान उपदेश व नामदीक्षा देकर सत भक्ति करने के पर भेज दिया। लिए पुनः पृथ्वी C0764 মনিমাতা মু सुदी द्वादशी  सन् १७२७ फाल्गुन मास को संत गरीबदास जी महाराज को १० वर्ष की आयु में परमेश्वर कबीर साहेब हरियाणा में आकर जिंदा बाबा के रूप में मिले। अपने साथ কপং ক সমী লীকী কী নিস্রাকয सतलोक में अपने वास्तविक रूप के दर्शन भी कराए फिर ज्ञान उपदेश व नामदीक्षा देकर सत भक्ति करने के पर भेज दिया। लिए पुनः पृथ्वी - ShareChat
#300thBodhDiwasSantGaribdasJiसर्व कला सतगुरु साहेब की, हरि आए हरियाणे नूँ पूर्ण परमात्मा कविर्देव अर्थात कबीर परमेश्वर जिस क्षेत्र में आए उसका नाम हरयाणा अर्थात् परमात्मा के आने वाला पवित्र स्थल, जिसके कारण आस-पास के क्षेत्र को हरिआना (हरियाणा) कहने लगे। क्योंकि सन् 1727 में फाल्गुन मास की सुदी द्वादशी को परमेश्वर कबीर जी सतलोक से आकर गरीबदास जी को मिले थे।
300thBodhDiwasSantGaribdasJi - నే @  { 0 a 57 सटे नला खेत में जाडी के पेड़ के नीचे गरीबदास जी महाराज परमेश्वर कबीर साहिब जी सतलोक से आकर  নিক্ষমী  1784, মনু 1727 ম কালুন सवत को  मिले। সাম কী ঘুবল ৭ম द्वादशी वैशाख के उत्तरार्ध की इसीलिए संत गरीबदास जी ने कहा हैः काजन्म पूर्णिमा के दिन सन् १७१७, विक्रमी  सर्व कला सतगुरु साहेब की, संवत् १७७४ में ग्राम छुड़ानी, जिला  में हुआ  झज्नर हरियाणा  हरिओय e हखिपनू ( నే @  { 0 a 57 सटे नला खेत में जाडी के पेड़ के नीचे गरीबदास जी महाराज परमेश्वर कबीर साहिब जी सतलोक से आकर  নিক্ষমী  1784, মনু 1727 ম কালুন सवत को  मिले। সাম কী ঘুবল ৭ম द्वादशी वैशाख के उत्तरार्ध की इसीलिए संत गरीबदास जी ने कहा हैः काजन्म पूर्णिमा के दिन सन् १७१७, विक्रमी  सर्व कला सतगुरु साहेब की, संवत् १७७४ में ग्राम छुड़ानी, जिला  में हुआ  झज्नर हरियाणा  हरिओय e हखिपनू ( - ShareChat
300thBodhDiwasSantGaribdasJi #300thBodhDiwasSantGaribdasJi
300thBodhDiwasSantGaribdasJi - ei हर & ٤؟ पास खेतों मे अपनी प्यारी  हरियाणा की पवित्र भूमि जिला झज्जर , गांव छुड़ानी के आत्मा १० वर्षीय बालक गरीबदास जी महाराज को गठएँ चराते हुए, पूर्ण परमात्मा  कबीर साहिबजी मिले, सतलोक दिखाया और फिर वापिस छोडा। बस यहीं से की महिमा गाते हुऐ  गरीबदास जी महाराज का जीवन पलट गया और परमात्मा  गरीब दासजी चिता सेउठ बैठे और बोले  नगर में ले गया, हमकूं सतगुरु आन। झिलके बिम्ब अगाध गति , सृते चादर तान।  अजव कबीर हे कुल के सृजनहार।।  अनन्त कोटि ब्रहमण्ड का एक रति नही भार। सतगुरु पुरुष  ei हर & ٤؟ पास खेतों मे अपनी प्यारी  हरियाणा की पवित्र भूमि जिला झज्जर , गांव छुड़ानी के आत्मा १० वर्षीय बालक गरीबदास जी महाराज को गठएँ चराते हुए, पूर्ण परमात्मा  कबीर साहिबजी मिले, सतलोक दिखाया और फिर वापिस छोडा। बस यहीं से की महिमा गाते हुऐ  गरीबदास जी महाराज का जीवन पलट गया और परमात्मा  गरीब दासजी चिता सेउठ बैठे और बोले  नगर में ले गया, हमकूं सतगुरु आन। झिलके बिम्ब अगाध गति , सृते चादर तान।  अजव कबीर हे कुल के सृजनहार।।  अनन्त कोटि ब्रहमण्ड का एक रति नही भार। सतगुरु पुरुष - ShareChat
##हरि_आये_हरियाणे_नूं हरि आये हरियाणे नू हरियाणा की पवित्र भूमि जिला झज्जर, गांव छुड़ानी के पास खेतों में अपनी प्यारी आत्मा 10 वर्षीय बालक गरीबदास जी महाराज को गउएं चराते हुए, पूर्ण परमात्मा कबीर साहिब जी मिले, सतलोक दिखाया और फिर वापिस छोड़ा। बस यहीं से गरीबदास जी महाराज का जीवन पलट गया और परमात्मा की महिमा गाते हुऐ गरीब दास जी चिता से उठ बैठे और बोले:– अजब नगर में ले गया, हमकूं सतगुरु आन। झिलके बिम्ब अगाध गति, सूते चादर तान। अनन्त कोटि ब्रह्मण्ड का एक रति नहीं भार। सतगुरु पुरुष कबीर हैं कुल के सृजनहार।।
#हरि_आये_हरियाणे_नूं - 0 हरियाणा प्रांत के गांव छुड़ानी, जिला झज्जर #41 १७१७ में जन्मे संत गरीबदास जी को परमेश्वर कबीर साहिब जी जिंदा बाबा के रूप में सतलोक से आकर विक्रमी মণন 1784, মন 1727 স की सुदी फाल्गुन मास द्वादशी को मिले थे। इसीलिए संत गरीबदास जी ন ক6া 68 सर्व कला सतगुरु साहेब की, हरि आए हरियाणे नू। 0 हरियाणा प्रांत के गांव छुड़ानी, जिला झज्जर #41 १७१७ में जन्मे संत गरीबदास जी को परमेश्वर कबीर साहिब जी जिंदा बाबा के रूप में सतलोक से आकर विक्रमी মণন 1784, মন 1727 স की सुदी फाल्गुन मास द्वादशी को मिले थे। इसीलिए संत गरीबदास जी ন ক6া 68 सर्व कला सतगुरु साहेब की, हरि आए हरियाणे नू। - ShareChat
##हरि_आये_हरियाणे_नूं हरि आये हरियाणे नूं ग्राम छुड़ानी, जिला झज्जर, हरियाणा में जन्मे संत गरीबदास जी को परमेश्वर कबीर साहिब जी जिंदा बाबा रूप में सतलोक से आकर विक्रमी संवत् 1784, सन् 1727 में फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष द्वादशी को मिले थे। इसीलिए संत गरीबदास जी ने कहा है: सर्व कला सतगुरु साहेब की, हरि आए हरियाणे नूँ। उन्हीं परमेश्वर के अवतार संत रामपाल जी का अवतरण हरियाणा प्रांत में हुआ है, जिनके विषय में आदरणीय संत गरीबदास जी ने अपनी अमरवाणी में कहा है: पूर्व-पश्चिम-उत्तर-दक्षिण, क्यों फिरदा दाणें दाणें नू। सर्ब कला सतगुरु साहेब की हरि आए हरियाणे नू।।
#हरि_आये_हरियाणे_नूं - சனஎ் हरियाणा प्रांत के गांव  छुड़ानी ঠিলা ভাতাঠ মন 1717 ম जन्मे संत गरीबदास जी को परमेश्वर कबीर साहिब जी जिंदा बाबा के रूप में सतलोकसे संवत् आकरविक्रमी १७८४ सन  सुदी १७२७ में फाल्गन मास की को मिले थे। द्वादशी इसीलिए संत गरीबदास जी ने कहा हैः सर्व कला सतगरु हर साहिब की अये हरियाणे नूं சனஎ் हरियाणा प्रांत के गांव  छुड़ानी ঠিলা ভাতাঠ মন 1717 ম जन्मे संत गरीबदास जी को परमेश्वर कबीर साहिब जी जिंदा बाबा के रूप में सतलोकसे संवत् आकरविक्रमी १७८४ सन  सुदी १७२७ में फाल्गन मास की को मिले थे। द्वादशी इसीलिए संत गरीबदास जी ने कहा हैः सर्व कला सतगरु हर साहिब की अये हरियाणे नूं - ShareChat
##हरि_आये_हरियाणे_नूं हरि आये हरियाणे नूं* आदरणीय संत गरीबदास जी महाराज का जन्म वैशाख के उत्तरार्ध की पूर्णिमा के दिन सन् 1717, विक्रमी संवत् 1774 में ग्राम छुड़ानी, जिला झज्जर, हरियाणा में हुआ था। जब आदरणीय गरीबदास जी 10 वर्ष की आयु हुए, तब कबलाना गाँव की सीमा से सटे नला खेत में जांडी के पेड़ के नीचे परमेश्वर कबीर साहिब जी सतलोक से आकर विक्रमी संवत् 1784, सन् 1727 में फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष द्वादशी को मिले। इसीलिए संत गरीबदास जी ने कहा है: सर्व कला सतगुरु साहेब की, हरि आए हरियाणे नू।
#हरि_आये_हरियाणे_नूं - (२५X _ ( 00 जिला झच्चर में सन् १७१७ में जन्मे संत हरियाणा प्रांत के गांव छुड़ानी गरीबदास जी को परमेश्वर कबीर साहिब जी जिंदा बाबा के रूप में सतलोक से आकर विक्रमी संवत् १७८४, सन् १७२७ में फाल्गुन मास की सुदी द्वादशी को मिले थे। इसीलिए संत गरीबदास जी ने कहा हैः कला सतगरू सहेव को हॅरि ऑये हरियाणे (२५X _ ( 00 जिला झच्चर में सन् १७१७ में जन्मे संत हरियाणा प्रांत के गांव छुड़ानी गरीबदास जी को परमेश्वर कबीर साहिब जी जिंदा बाबा के रूप में सतलोक से आकर विक्रमी संवत् १७८४, सन् १७२७ में फाल्गुन मास की सुदी द्वादशी को मिले थे। इसीलिए संत गरीबदास जी ने कहा हैः कला सतगरू सहेव को हॅरि ऑये हरियाणे - ShareChat
##हरि_आये_हरियाणे_नूं सर्व कला सतगुरु साहेब की, हरि आए हरियाणे नूँ पूर्ण परमात्मा कविर्देव अर्थात कबीर परमेश्वर जिस क्षेत्र में आए उसका नाम हरयाणा अर्थात् परमात्मा के आने वाला पवित्र स्थल, जिसके कारण आस-पास के क्षेत्र को हरिआना (हरियाणा) कहने लगे। क्योंकि सन् 1727 में फाल्गुन मास की सुदी द्वादशी को परमेश्वर कबीर जी सतलोक से आकर गरीबदास जी को मिले थे।
#हरि_आये_हरियाणे_नूं - (1U10) तपणतं छुड़ानी, जिला झज्जर, हरियाणा में जन्मे संत गरीबदास जी को परमेश्वर  ग्राम कबीर साहिब जी जिंदा बाबा रूप में सतलोक से आकर विक्रमी संवत् १७८४ , सन् को मिले थे। इसीलिए संत १७२७ में फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष द्वादशी गरीबदास जी ने कहा हैः सर्व कला सतगुरु साहेब की॰ हरि आए हरियाणे नूँ।  में हुआ " 8, उन्हीं परमेश्वर के अवतार संत रामपाल जी का अवतरण हरियाणा प्रात जिनके विषय में आदरणीय संत गरीबदास जी ने अपनी अमरवाणी में कहा हैः दाणें नू। पूर्व पश्चिम उत्तर दक्षिण, क्यों फिरदा दाणें  सर्ब कला सतगुरु साहेब की हरि आए हरियाणे नू।। (1U10) तपणतं छुड़ानी, जिला झज्जर, हरियाणा में जन्मे संत गरीबदास जी को परमेश्वर  ग्राम कबीर साहिब जी जिंदा बाबा रूप में सतलोक से आकर विक्रमी संवत् १७८४ , सन् को मिले थे। इसीलिए संत १७२७ में फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष द्वादशी गरीबदास जी ने कहा हैः सर्व कला सतगुरु साहेब की॰ हरि आए हरियाणे नूँ।  में हुआ " 8, उन्हीं परमेश्वर के अवतार संत रामपाल जी का अवतरण हरियाणा प्रात जिनके विषय में आदरणीय संत गरीबदास जी ने अपनी अमरवाणी में कहा हैः दाणें नू। पूर्व पश्चिम उत्तर दक्षिण, क्यों फिरदा दाणें  सर्ब कला सतगुरु साहेब की हरि आए हरियाणे नू।। - ShareChat
##हरि_आये_हरियाणे_नूं आये हरियाणे नू सन 1727 फाल्गुन मास सुदी द्वादशी को संत गरीबदास जी महाराज को 10 वर्ष की आयु में परमेश्वर कबीर साहेब हरियाणा में आकर जिंदा बाबा के रूप में मिले। अपने साथ ऊपर के सभी लोकों को दिखाकर सतलोक में अपने वास्तविक रूप के दर्शन भी कराए। फिर ज्ञान उपदेश व नामदीक्षा देकर सत भक्ति करने के लिए पुनः पृथ्वी पर भेज दिया।
#हरि_आये_हरियाणे_नूं - Sஅ ಈಇಾರ লু संत गरीबदास जी ने कहा है सर्व कला सतगुरु साहेब की, हरि आए हरियाणे नूँ। মন 1727 ম মব হাকিমান परमेश्वर कबीर जी जिंदा रूप ्में सतलोक से महात्मा आकर संत गरीबदास जी को गांव छुड़ानी, जिला झज्जर हरियाणा में मिले थे। 0500 Sஅ ಈಇಾರ লু संत गरीबदास जी ने कहा है सर्व कला सतगुरु साहेब की, हरि आए हरियाणे नूँ। মন 1727 ম মব হাকিমান परमेश्वर कबीर जी जिंदा रूप ्में सतलोक से महात्मा आकर संत गरीबदास जी को गांव छुड़ानी, जिला झज्जर हरियाणा में मिले थे। 0500 - ShareChat