##दहेज_के_दानव_का_खात्मा सादगी की अनूठी मिसाल!
सतलोक आश्रम भिवानी (हरियाणा) में आठ जोड़ों ने बिना दहेज के शादी कर दहेज रूपी राक्षस का अंत किया। संत रामपाल जी के ज्ञान से समाज को मिली नई दिशा।
##दहेज_के_दानव_का_खात्मा धर्मक्षेत्र से कुरीतियों पर प्रहार!
सतलोक आश्रम कुरुक्षेत्र (हरियाणा) में दो जोड़ों ने तोड़ी दहेज की बेड़ियां। संत रामपाल जी के मार्गदर्शन में फिजूलखर्ची को त्यागकर अपनाया सादगी का मार्ग।
##दहेज_के_दानव_का_खात्मा राजधानी में बदला समाज!
दिल्ली के सतलोक आश्रम मुंडका में नौ जोड़ों का ऐतिहासिक विवाह। न बैंड-बाजा, न दिखावा, संत रामपाल जी की प्रेरणा से सिर्फ सादगी से किया विवाह।
##दहेज_के_दानव_का_खात्मा हरियाणा में दहेज मुक्त क्रांति!
सतलोक आश्रम धनाना धाम (हरियाणा) में 22 जोड़ों ने रचा इतिहास। संत रामपाल जी की प्रेरणा से बिना दान-दहेज, मात्र 17 मिनट में एक हुए दो परिवार।
300thBodhDiwasSantGaribdasJiहरि आये हरियाणे नू
हरियाणा की पवित्र भूमि जिला झज्जर, गांव छुड़ानी के पास खेतों में अपनी प्यारी आत्मा 10 वर्षीय बालक गरीबदास जी300thBodhDiwasSantGaribdasJi महाराज को गउएं चराते हुए, पूर्ण परमात्मा कबीर साहिब जी मिले, सतलोक #300thBodhDiwasSantGaribdasJi दिखाया और फिर वापिस छोड़ा। बस यहीं से गरीबदास जी महाराज का जीवन पलट गया और परमात्मा की महिमा गाते हुऐ गरीब दास जी चिता से उठ बैठे और बोले:–
अजब नगर में ले गया, हमकूं सतगुरु आन। झिलके बिम्ब अगाध गति, सूते चादर तान।
अनन्त कोटि ब्रह्मण्ड का एक रति नहीं भार। सतगुरु पुरुष कबीर हैं कुल के सृजनहार।।
#300thBodhDiwasSantGaribdasJi हरि आये हरियाणे नूं
ग्राम छुड़ानी, जिला झज्जर, हरियाणा में जन्मे संत गरीबदास जी को परमेश्वर कबीर साहिब जी जिंदा बाबा रूप में सतलोक से आकर विक्रमी संवत् 1784, सन् 1727 में फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष द्वादशी को मिले थे। इसीलिए संत गरीबदास जी ने कहा है:
सर्व कला सतगुरु साहेब की, हरि आए हरियाणे नूँ।
उन्हीं परमेश्वर के अवतार संत रामपाल जी का अवतरण हरियाणा प्रांत में हुआ है, जिनके विषय में आदरणीय संत गरीबदास जी ने अपनी अमरवाणी में कहा है:
पूर्व-पश्चिम-उत्तर-दक्षिण, क्यों फिरदा दाणें दाणें नू।
सर्ब कला सतगुरु साहेब की हरि आए हरियाणे नू।।
#300thBodhDiwasSantGaribdasJi हरि आये हरियाणे नूं*
आदरणीय संत गरीबदास जी महाराज का जन्म वैशाख के उत्तरार्ध की पूर्णिमा के दिन सन् 1717, विक्रमी संवत् 1774 में ग्राम छुड़ानी, जिला झज्जर, हरियाणा में हुआ था। जब आदरणीय गरीबदास जी 10 वर्ष की आयु हुए, तब कबलाना गाँव की सीमा से सटे नला खेत में जांडी के पेड़ के नीचे परमेश्वर कबीर साहिब जी सतलोक से आकर विक्रमी संवत् 1784, सन् 1727 में फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष द्वादशी को मिले। इसीलिए संत गरीबदास जी ने कहा है:
सर्व कला सतगुरु साहेब की, हरि आए हरियाणे नू।
#300thBodhDiwasSantGaribdasJiसर्व कला सतगुरु साहेब की, हरि आए हरियाणे नूँ
पूर्ण परमात्मा कविर्देव अर्थात कबीर परमेश्वर जिस क्षेत्र में आए उसका नाम हरयाणा अर्थात् परमात्मा के आने वाला पवित्र स्थल, जिसके कारण आस-पास के क्षेत्र को हरिआना (हरियाणा) कहने लगे। क्योंकि सन् 1727 में फाल्गुन मास की सुदी द्वादशी को परमेश्वर कबीर जी सतलोक से आकर गरीबदास जी को मिले थे।













