Subhash Dagar
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#GodMorningSunday #Annapurna_Muhim_SantRampalJi Suprame God Every human being is a child of the one Supreme God; the one who sees division lacks spiritual wisdom. Supreme Sant Rampal Ji Maharaj Get Free Book: +917496801825 संत रामपाल जी महाराज #🌞 Good Morning🌞
🌞 Good Morning🌞 - 6"( Every human being is a child of the one Supreme God; the one who sees division lacks spiritual wisdom: | Supreme Sant Rampal Ji Maharaj Get Free Book : +91 7496801825 JagatGuruRampalJi.org @SaintRampalJiM 6"( Every human being is a child of the one Supreme God; the one who sees division lacks spiritual wisdom: | Supreme Sant Rampal Ji Maharaj Get Free Book : +91 7496801825 JagatGuruRampalJi.org @SaintRampalJiM - ShareChat
#GodMorningSunday #Annapurna_Muhim_SantRampalJi संतों की शिक्षा साध मिले साडे शादी हूंदी, बिछुड़दा दिल गीरी वे। अखदे नानक सुनो जिहाना, मुश्किल हाल फकीरी वे।। भावार्थ :- जब मेरे शिष्य सत्संग सुनने आते हैं तो साध संगत को देखकर मेरे को खुशी होती है कि सब भक्ति पर लगे हैं। कोई विचलित नहीं हुआ है। जब ये सत्संग के पश्चात् जाते हैं तो मायूसी छा जाती है कि कहीं कोई सिरफिरा इनको अमित करके परमात्मा से दूर न कर दे। बंदीछोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज संत रामपाल जी महाराज #🌞 Good Morning🌞
🌞 Good Morning🌞 - संतों क शिक्षा साध मिले साडे शादी हूंदी , बिछुड़दा दिल गीरी वे। मुश्किल हाल फकीरी वे।। जिहाना , अखदे नानक सुनो  आते हैं तो साध संगत को देखकर मेरे को खुशी होती है जब मेरे शिष्य सत्संग भावार्थ : सुनने कि सब भक्ति पर लगे हैं। कोई विचलित नहीं हुआ है। जब ये सत्संग के पश्चात् जाते हैं तो छा जाती है कि कहीं कोई सिरफिरा इनको अमित करके परमात्मा से दूर न कर दे। মাযুমী बंदीछोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL Ji @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGODORG SAINT RAMPAL Jl MAHARAJ संतों क शिक्षा साध मिले साडे शादी हूंदी , बिछुड़दा दिल गीरी वे। मुश्किल हाल फकीरी वे।। जिहाना , अखदे नानक सुनो  आते हैं तो साध संगत को देखकर मेरे को खुशी होती है जब मेरे शिष्य सत्संग भावार्थ : सुनने कि सब भक्ति पर लगे हैं। कोई विचलित नहीं हुआ है। जब ये सत्संग के पश्चात् जाते हैं तो छा जाती है कि कहीं कोई सिरफिरा इनको अमित करके परमात्मा से दूर न कर दे। মাযুমী बंदीछोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL Ji @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGODORG SAINT RAMPAL Jl MAHARAJ - ShareChat
#GodMorningSunday #Annapurna_Muhim_SantRampalJi चरित्रवान की कथा..... ऋषि शुकदेव जी राजा जनक के पास दीक्षा लेने गए। राजा जनक ने उनकी परीक्षा लेने के लिए एक सुंदर युवती को उनकी सेवा में भेजा। युवती उनके पलंग के पास बैठ गई, परन्तु शुकदेव जी ने उसे देखकर पैर समेट लिए और उसे बहन कहकर कमरे से बाहर जाने को कहा। इससे राजा जनक ने उनकी संयम और चरित्र की प्रशंसा की। कबीर परमेश्वर जी ने बताया है कि स्त्री तथा पुरुष आत्मा के ऊपर दो वस्त्र हैं। जैसे गीता अध्याय 2 श्लोक 22 में कहा कि अर्जुन ! जीव शरीर त्यागकर नया शरीर धारण कर लेता है, इसे मृत्यु कहते हैं। यह तो ऐसा है जैसे मनुष्य पुराने वस्त्र त्यागकर नए पहन लेता है। इसलिए आत्म तत्व को जान। 🙏🙏बंदीछोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज संत रामपाल जी महाराज #🌞 Good Morning🌞
🌞 Good Morning🌞 - चरिद्रवान की रथा ऋषि शुकदेव जी राजा जनक के पास दीक्षा लेने गए। राजा जनक ने लिए एक उनकी परीक्षा लेने के को उनकी सेवा में भेजा| सुंदर युवती उनके पलंग के पास बैठ गई, परन्तु जी ने उसे देखकर युवती शुकदेव पैर समेट लिए और उसे बहन कहकर कमरे से बाहर जाने को कहा। इससे राजा जनक ने उनकी संयम और चरित्र की प्रशंसा की। कबीर परमेश्वर जी ने बताया है कि स्त्री तथा पुरुष आत्मा के ऊपर दो वस्त्र हैं। जैसे गीता अध्याय 2 श्लोक २२ में कहा कि अर्जुन! जीव शरीर त्यागकर नया शरीर धारण कर लेता है, इसे मृत्यु कहते हैं। यह तो ऐसा है जैसे मनुष्य पुराने वस्त्र त्यागकर नए पहन लेता है। इसलिए आत्म तत्व को जान। बंदीछोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज f SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL Jl @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGODORG SAINT RAMPAL Jl MAHARAJ चरिद्रवान की रथा ऋषि शुकदेव जी राजा जनक के पास दीक्षा लेने गए। राजा जनक ने लिए एक उनकी परीक्षा लेने के को उनकी सेवा में भेजा| सुंदर युवती उनके पलंग के पास बैठ गई, परन्तु जी ने उसे देखकर युवती शुकदेव पैर समेट लिए और उसे बहन कहकर कमरे से बाहर जाने को कहा। इससे राजा जनक ने उनकी संयम और चरित्र की प्रशंसा की। कबीर परमेश्वर जी ने बताया है कि स्त्री तथा पुरुष आत्मा के ऊपर दो वस्त्र हैं। जैसे गीता अध्याय 2 श्लोक २२ में कहा कि अर्जुन! जीव शरीर त्यागकर नया शरीर धारण कर लेता है, इसे मृत्यु कहते हैं। यह तो ऐसा है जैसे मनुष्य पुराने वस्त्र त्यागकर नए पहन लेता है। इसलिए आत्म तत्व को जान। बंदीछोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज f SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL Jl @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGODORG SAINT RAMPAL Jl MAHARAJ - ShareChat
#GodMorningSunday #Annapurna_Muhim_SantRampalJi श्री गंगानगर बींझबायला के SD मंडा राजकीय स्कूल की छात्रा कल्पना (सुपुत्री प्रहलाद दास एवं माया देवी) ने 12वीं कक्षा में 95.80% अंक प्राप्त कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। शानदार सफलता का मुख्य श्रेय कल्पना ने अपने गुरु संत रामपाल जी महाराज के तत्वज्ञान और माता-पिता के सहयोग को दिया है। बिटिया की इस अद्वितीय उपलब्धि पर पूरे विद्यालय परिवार और क्षेत्र में खुशी की लहर है। संत रामपाल जी महाराज #🌞 Good Morning🌞
🌞 Good Morning🌞 - श्री गंगानगर SA NEWS ٦٨٦ 6 बींझबायला के SD मंडा राजकीय स्कूल की छात्रा कल्पना प्रहलाद दास एवं माया देवी) ने १२वीं कक्षा में ९५.८०% (ggFt अंक प्राप्त कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। शानदार सफलता का मुख्य श्रेय कल्पना ने अपने गुरु संत रामपाल जी महाराज के तत्वज्ञान और माता-पिता के सहयोग को दिया है। SA News Channel Follow us on: SA News Rajasthan SANEWSi श्री गंगानगर SA NEWS ٦٨٦ 6 बींझबायला के SD मंडा राजकीय स्कूल की छात्रा कल्पना प्रहलाद दास एवं माया देवी) ने १२वीं कक्षा में ९५.८०% (ggFt अंक प्राप्त कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। शानदार सफलता का मुख्य श्रेय कल्पना ने अपने गुरु संत रामपाल जी महाराज के तत्वज्ञान और माता-पिता के सहयोग को दिया है। SA News Channel Follow us on: SA News Rajasthan SANEWSi - ShareChat
#GodMorningSunday #Annapurna_Muhim_SantRampalJi राजसमंद के चौहानों का गुड़ा गांव की माया मेघवाल ने 12वीं आर्ट्स में 98.40% अंक हासिल कर स्कूल और जिले में प्रथम स्थान पाया। वह रोज 3 किलोमीटर पैदल स्कूल जाती थी। सफलता का श्रेय संत रामपाल जी महाराज, शिक्षक और परिवार को दिया। माया का सपना IPS बनना है। संत रामपाल जी महाराज #🌞 Good Morning🌞
🌞 Good Morning🌞 - SA NEWS राजसमंद যজখান मेघवाल ने HI 3 अनुयायी  মন যাসপাল সী সহাহাস  और जिले में स्कूल में ९८.४०% अंक लाकर  पैदल आर्ट्स  किलोमीटर  12তরী' प्रतिदिन 3 {థuT' ٤١٨٩ स्थान সথম थी स्कूल সানী चलकर  SANews Channel News Follow us on: SANEWSin SA Rajasthan SA NEWS राजसमंद যজখান मेघवाल ने HI 3 अनुयायी  মন যাসপাল সী সহাহাস  और जिले में स्कूल में ९८.४०% अंक लाकर  पैदल आर्ट्स  किलोमीटर  12তরী' प्रतिदिन 3 {థuT' ٤١٨٩ स्थान সথম थी स्कूल সানী चलकर  SANews Channel News Follow us on: SANEWSin SA Rajasthan - ShareChat
#GodMorningSunday #Annapurna_Muhim_SantRampalJi पुलिस अधीक्षक महोदय जी पढ़ रहे हैं ज्ञान गंगा और आप..... 🙏🙏पूरी जानकारी के लिए पवित्र पुस्तक "ज्ञान गंगा" निःशुल्क (फ्री) पायें घर बैठे। अपना नाम, पूरा पता भेजें +91 7496801823 संत रामपाल जी महाराज #🌞 Good Morning🌞
🌞 Good Morning🌞 - पुलिस अधीक्षक नरेंद् सिंह मीना को भेंट की गई ज्ञान गंगा' पुस्तक संत रामपाल जी महाराज जी की मीना राजपूत, उजाला हितैषी  एक्सप्रेस , ब्यूरो राजस्थान। आध्यात्मिक मार्ग पर व्याप्त पाखंडवाद को समाप्त करने और समाज को कुरीतियों से के उद्देश्य से संत रामपाल जी সুক বনে  ने जिला पुलिस महाराज के अनुयायियों अधीक्षक नरेंदर सिंह मीना से मुलाकात की।  इस   दौरान जिला संयोजक पवन  दास स्वामी के नेतृत्व में उन्हें संत रामपाल जी महाराज द्वारा रचित पवित्र पुस्तक ' ज्ञान गंगा' भेंट की गई॰।मुलाकात के  दौरान को पुस्तक  पुलिस अधीक्षक  अनुयायियों ने  की विशेषताओं से अवगत करते हुए बताया कि यह ग्रंथ सभी धर्मों के पवित्र शास्त्रों का सार है। इसका मुख्य उद्देश्य  को पूर्ण परमात्मा सिद्ध किया है ।पवित्र होता है और इससे सकारात्मक वैचारिक समाज में व्याप्त दहेज प्रथा, मृत्युभोज भ्रूण  भ्रष्ाचार जैसी बुराइयों परिवर्तन आता   है।" इस पुस्तक स्वीकार करते हुए पुलिस अधीक्षक  अवसर पर छुआछूत और  हत्या प्रेम कुमार, " नरेंद्र सिंह मीना ने इस पहल की सराहना  बिंटूदास , हनुमान प्रसाद प्रवीण को जड़ से मिटाकर एक आदर्श समाज का दास, रविन्द्र दास बिश्नोई सुभाष सैनी, अनुयायियों ने कहा कि॰ की। उन्होंने कहा, " समाज में आध्यात्मिक निर्माण करना है। पवन सिडाना, विनोद कुमार और मंगत संत रामपाल जी महाराज कबीर पंथ के ज्ञान का प्रसार करना एक सराहनीय कदम एकमात्र ऐसे संत हैं जिन्होंने कबीर साहेब है। पुस्तकों का अध्ययन हमेशा ज्ञानवर्धक दास सहित अनेक सेवादार उपस्थित रहे। पुलिस अधीक्षक नरेंद् सिंह मीना को भेंट की गई ज्ञान गंगा' पुस्तक संत रामपाल जी महाराज जी की मीना राजपूत, उजाला हितैषी  एक्सप्रेस , ब्यूरो राजस्थान। आध्यात्मिक मार्ग पर व्याप्त पाखंडवाद को समाप्त करने और समाज को कुरीतियों से के उद्देश्य से संत रामपाल जी সুক বনে  ने जिला पुलिस महाराज के अनुयायियों अधीक्षक नरेंदर सिंह मीना से मुलाकात की।  इस   दौरान जिला संयोजक पवन  दास स्वामी के नेतृत्व में उन्हें संत रामपाल जी महाराज द्वारा रचित पवित्र पुस्तक ' ज्ञान गंगा' भेंट की गई॰।मुलाकात के  दौरान को पुस्तक  पुलिस अधीक्षक  अनुयायियों ने  की विशेषताओं से अवगत करते हुए बताया कि यह ग्रंथ सभी धर्मों के पवित्र शास्त्रों का सार है। इसका मुख्य उद्देश्य  को पूर्ण परमात्मा सिद्ध किया है ।पवित्र होता है और इससे सकारात्मक वैचारिक समाज में व्याप्त दहेज प्रथा, मृत्युभोज भ्रूण  भ्रष्ाचार जैसी बुराइयों परिवर्तन आता   है।" इस पुस्तक स्वीकार करते हुए पुलिस अधीक्षक  अवसर पर छुआछूत और  हत्या प्रेम कुमार, " नरेंद्र सिंह मीना ने इस पहल की सराहना  बिंटूदास , हनुमान प्रसाद प्रवीण को जड़ से मिटाकर एक आदर्श समाज का दास, रविन्द्र दास बिश्नोई सुभाष सैनी, अनुयायियों ने कहा कि॰ की। उन्होंने कहा, " समाज में आध्यात्मिक निर्माण करना है। पवन सिडाना, विनोद कुमार और मंगत संत रामपाल जी महाराज कबीर पंथ के ज्ञान का प्रसार करना एक सराहनीय कदम एकमात्र ऐसे संत हैं जिन्होंने कबीर साहेब है। पुस्तकों का अध्ययन हमेशा ज्ञानवर्धक दास सहित अनेक सेवादार उपस्थित रहे। - ShareChat
#GodNightSaturday #RealKnowledgeOf_Bible . परमात्मा का ध्यान अलल पक्षी की तरह रखो अलल का ध्यान धरौ रे, चीन्हौं पुरुष बिदेही।। उलटि पवन रेचक करि राखौ, काया कुंभ भरौ रे। अडिग अमांन अडोल अबोलं, टार्यौ नांहि टरौ रे।। बिन सतगुरु पद दर्शत नाहीं, भावै तिहूंलोक फिरौ रे। गुन इन्द्री का ज्ञान परेरो, जीवत क्यौं न मरौ रे।।2।। पलकौं दा भौंरा पुरुष बिनांनी, खोटा करत खरौ रे। कामधेनु दूझे कलवारनि, नीझर अजर जरौ रे।।3।। कलविष कुसमल बंधन टूटैं, सब दुःख ब्याधि हरौ रे। गरीबदास निरभै पद पाया, जम सें नांहि डरौ रे।।4।।8।। संत गरीबदास जी ने अपनी अमृतवाणी रूपी वन में प्रत्येक प्रकार के पेड़-पौधे, जड़ी-बूटियां, फूल, फलदार वृक्ष, मेवा की लता आदि-आदि उगाए हैं। इसका मुख्य कारण यह रहा है कि जो मूल ज्ञान है, उसको गुप्त रखना था। यह परमात्मा कबीर जी का आदेश था। इसी कारण से संत गरीबदास जी ने अनेकों वाणियाँ कही हैं। मन की आदत है कि यदि कम वाणी हैं तो उनको कण्ठस्थ करके अरूचि करता है। ये ढे़र सारी अमृतवाणी लिखवाकर संत गरीबदास जी ने मन को व्यस्त तथा रूचि बनाए रखने का मंत्र बताया है। मन पढ़ता रहता है या सुनता रहता है, आत्मा आनन्द का अनुभव करती है। गरीब, राम कहा तो क्या हुआ, उर में नहीं यकीन। चोर मुसें घर लूटहि, पाँच पचीसों तीन।। यदि साधक को परमात्मा पर विश्वास ही नहीं है तो नाम-सुमरण का कोई लाभ नहीं। उसके मानव जीवन को काम, क्रोध, मोह, लोभ, अहंकार रूपी पाँच चोर मुस (चुरा) रहे हैं। इन पाँचों की पाँच-पाँच प्रकृति यानि 25 ये तथा रजगुण के आधीन होकर कोठी बंगले बनाने में, कभी कार-गाड़ी खरीदने में जीवन नष्ट कर देता है। सतगुण के प्रभाव से पहले तो किसी पर दया करके बिना सोचे-समझे लाखों रूपये खर्च कर देता है। फिर उसमें त्रुटी देखकर तमोगुण के प्रभाव से झगड़ा कर लेता है। इस प्रकार तीन गुणों के प्रभाव से मानव जीवन नष्ट हो जाता है। यदि तत्वदर्शी संत से ज्ञान सुनकर विश्वास के साथ नाम का जाप करे तो जीवन सफल हो जाता है। जिन-जिन भक्तों ने मर्यादा में रहकर जिस स्तर की भक्ति, दान आदि-आदि किया है, उनको लाभ अवश्य मिला है। उदाहरण बताया है कि गोरखनाथ, दत्तात्रे, शुकदेव, पीपा, नामदेव, धन्ना भक्त, रैहदास (रविदास), फरीद, नानक, दादू, हरिदास, गोपीचंद, भरथरी, जंगनाथ (झंगरनाथ),चरपटनाथ, अब्राहिम अधम सुल्तान, नारद ऋषि, प्रहलाद भक्त, धु्रव, विभीक्षण, जयदेव, कपिल मुनि, स्वामी रामानंद, श्री कृष्ण, ऋषि दुर्वासा, शंभु यानि शिव, विष्णु, ब्रह्मा आदि सबकी प्रसिद्धि पूर्व जन्म तथा वर्तमान में की गई नाम-सुमरण (स्मरण) की शक्ति से हुई है, अन्यथा ये कहाँ थे यानि इनको कौन जानता था? इसी प्रकार आप भी तन-मन-धन समर्पित करके गुरू धारण करके आजीवन भक्ति मर्यादा में रहकर करोगे तो आप भी भक्ति शक्ति प्राप्त करके अमर हो जाओगे। जिन-जिन साधकों ने जिस-जिस देव की साधना की, उनको उतनी महिमा मिली है। कबीर जी ने कहा है कि जो जाकि शरणा बसै, ताको ताकी लाज। जल सौंही मछली चढ़ै, बह जाते गजराज।। जो साधक जिस राम (देव-प्रभु) की भक्ति पूरी श्रद्धा से करता है तो वह राम उस साधक की इज्जत रखता है यानि उसको अपने सामर्थ्य अनुसार अपने क्षेत्र में पूर्ण लाभ देता है। उदाहरण दिया है कि जैसे मछली का जल से अटूट नाता है। वह कुछ समय ही जल से दूर होने पर तड़फ-तड़फकर प्राण त्याग देती है। ऐसी श्रद्धा देखकर जल ने उसको अपने क्षेत्र में पूर्ण स्वतंत्रता दे रखी है। उसको कोई रोक-टोक नहीं है। जैसे ऊँचे स्थान (Fall) से 50 फुट से दरिया का जल गिर रहा होता है। वह जल की धारा बड़े से बड़े हाथी यानि गजराज को भी बहा ले जाती है जो हाथियों का राजा होता है। परंतु अपनी पुजारिन मछली को पूरी स्वतंत्रता दे रखी है। वह उस गिरते पानी में नीचे से ऊपर (50 फुट तक) चढ़ जाती है। इसी प्रकार जो साधक जिस प्रभु की पूरी श्रद्धा से भक्ति करता है तो वह प्रभु अपने भक्त को अपने स्तर का लाभ अपनी क्षमता के अनुसार पूरा देता है। समझने के लिए सामान्य उदाहरण अपने देश में अभी तक अंग्रेजों वाली परंपरा का प्रभाव भी है। जैसे किसी सामान्य व्यक्ति को पुलिस थाने से बुलावा आता है तो उसके लिए बड़ी आपत्ति होती है। थाने के आस-पास से भी सामान्य व्यक्ति डरकर जाता है। बुलावा आने पर तो उसके साथ क्या बीतेगी? स्पष्ट है। जाते ही लगभग प्रत्येक पुलिसकर्मी तथा थानेदार का दुर्व्यवहार झेलना पड़ता है। मारपीट तो पहला प्रसाद है। गाली देना पुलिस वालों का मूल मंत्र है। उसी थाने में किसी का मित्र थानेदार लगा है। वह व्यक्ति वहाँ जाता है तो थानेदार उसे कुर्सी पर बैठाता है, चाय-पानी पिलाता है। इस प्रकार जो व्यक्ति जिस अधिकारी का मित्र है, वह अपने स्तर की राहत अवश्य देता है। वह राहत उस सामान्य व्यक्ति के लिए असहज होती है यानि सामान्य नहीं होती, परंतु वह पर्याप्त भी नहीं है। यदि पुलिस अधीक्षक से मित्रता हो जाए तो थानेदार भी नतमस्तक हो जाता है। यदि मंत्री जी से मित्रता हो जाए तो एस.पी. भी नतमस्तक हो जाता है। यदि मुख्यमंतत्री-प्रधानमंत्री के साथ मेल हो जाए तो नीचे के सर्व अधिकारी-कर्मचारी आपके साथ हो जाएंगे। इसी प्रकार यदि कोई किसी देवी-देव, माता-मसानी, सेढ़-शीतला, भैरो-भूत तथा हनुमान जी की भक्ति करता है तो उसको उनका लाभ अवश्य होगा, परंतु गीता अध्याय 16 श्लोक 23,24 में तथा अध्याय 7 श्लोक 12,15 तथा 20 से 23 तक में बताए अनुसार व्यर्थ साधना होने से मोक्ष से वंचित रह जाते हैं। कर्म का फल भी अच्छा-बुरा भोगना पड़ता है। इसलिए यह साधना करके भी हानि होती है। इसलिए संत गरीबदास जी ने वाणी नं. 38 में कहा है कि गरीब, ऐसा निर्मल नाम है, निर्मल करे शरीर। और ज्ञान मण्डलीक हैं, चकवै ज्ञान कबीर।। वेदों, गीता, पुराणों, कुरान, बाईबल आदि का ज्ञान तो मण्डलीक यानि अपनी- अपनी सीमा का है। परंतु परमेश्वर कबीर जी द्वारा बताया आध्यात्म सत्य ज्ञान यानि तत्वज्ञान (सुक्ष्मवेद) चक्रवर्ती ज्ञान है जिसमें सब ज्ञान का समावेश है। वह कबीर वाणी है। गरीब, गगन मण्डल में रहत है, अविनाशी आप अलेख। जुगन-जुगन सत्संग है, धर-धर खेलै भेख।। गरीब, काया माया खण्ड है, खण्ड राज और पाट। अमर नाम निज बंदगी, सतगुरू सें भई साँट।। पूर्ण परमात्मा कबीर जी गगन मण्डल यानि आकाश में रहता है जो अविनाशी अलेख है।{अलेख का अर्थ है जो पृथ्वी से देखा नहीं जा सकता। जिसे अविनाशी अव्यक्त गीता अध्याय 8 श्लोक 20 से 23 में कहा है। जैसे कुछ ऋषिजन दिव्य दृष्टि के द्वारा पृथ्वी से स्वर्ग लोक, श्री विष्णु लोक, श्री ब्रह्मा लोक तथा श्री शिव जी के लोक को तथा वहाँ के देवताओं को तथा ब्रह्मा- विष्णु-महेश को देख लेते थे। परंतु ब्रह्म काल को तथा इससे ऊपर अक्षर पुरूष तथा परम अक्षर पुरूष (अविनाशी अलेख) को कोई नहीं देख सकता। जिस कारण से उस परमात्मा का यथार्थ उल्लेख ग्रन्थों में नहीं है। यथार्थ वर्णन सुक्ष्मवेद में है जो स्वयं परमात्मा द्वारा बताया अध्यात्म ज्ञान है। इसलिए उस पूर्ण परमात्मा को अलख तथा अलेख कहकर उपमा की है। उस परमेश्वर को देखने के लिए पूर्ण सतगुरू जी से दीक्षा लेकर तब सतलोक जाकर ही देखा जा सकता है।} वह परमात्मा स्वयं अन्य भेख (वेश) धारण करके पृथ्वी पर प्रत्येक युग में प्रकट होता है। अपना तत्वज्ञान (चक्रवर्ती ज्ञान) स्वयं ही बताता है कि यह सब राज-पाट तथा शरीर खण्ड (नाशवान) है। केवल सतगुरू से मिलन तथा उनके द्वारा दिया निज नाम (सत्य भक्ति मंत्र) ही अमर है। यदि सच्चे भक्ति मंत्र प्राप्त नहीं हुए तो अन्य नामों का जाप (सुमरण) तथा यज्ञ करना सब व्यर्थ है। Sant RampalJi YtChannel #🌞 Good Morning🌞
🌞 Good Morning🌞 - मुक्तिबोध पेज- ११, १२ सुमिर्न के अंग 75] सोरश[ पीपा , शुकदेव, नामदेव, ( रविदास ), फरीद, नानक, अब्राहिम अधम सुल्तान , नारद ऋषि , प्रहलाद भक्त ध्रुव, विभीक्षण , ऋषि दुर्वासा , शंभु f यानि शिव, লম্মা আানি सबकी प्रसिद्धि पूर्व जन्म तथा वर्तमान में की गई नाम- सुमरण शक्ति से हुरई है, स्मरण ) की अन्यथा ये कहाँ थे यानि इनको कौन जानता था ? प्रकार आप भी तन- मन-्धन समर्पित करके गुरू धारण হরমী ] करके आजीवन भक्ति मर्यादा में रहकर करोगे तो आप भी भक्ति शक्ति प्राप्त करके अमर हो जाओगे ( SANT RAMPAL Ji SPIRITUAL LEADER @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGOD ORG in MAHARAJ SAINT RAMPAL JI मुक्तिबोध पेज- ११, १२ सुमिर्न के अंग 75] सोरश[ पीपा , शुकदेव, नामदेव, ( रविदास ), फरीद, नानक, अब्राहिम अधम सुल्तान , नारद ऋषि , प्रहलाद भक्त ध्रुव, विभीक्षण , ऋषि दुर्वासा , शंभु f यानि शिव, লম্মা আানি सबकी प्रसिद्धि पूर्व जन्म तथा वर्तमान में की गई नाम- सुमरण शक्ति से हुरई है, स्मरण ) की अन्यथा ये कहाँ थे यानि इनको कौन जानता था ? प्रकार आप भी तन- मन-्धन समर्पित करके गुरू धारण হরমী ] करके आजीवन भक्ति मर्यादा में रहकर करोगे तो आप भी भक्ति शक्ति प्राप्त करके अमर हो जाओगे ( SANT RAMPAL Ji SPIRITUAL LEADER @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGOD ORG in MAHARAJ SAINT RAMPAL JI - ShareChat
#GodNightSaturday #RealKnowledgeOf_Bible . कर्म काण्ड के विषय में सत्य कथा’ मेरे सतगुरु संत रामपाल जी महाराज ने बताया कि उनके गुरु पूज्य गुरूदेव स्वामी राम देवानन्द जी महाराज को सोलह वर्ष की आयु में किसी महात्मा के सत्संग सुनने से वैराग हो गया था। एक दिन वे खेतों में गये हुए थे। पास में ही वन था। वे वन में जाकर किसी मृत जानवर की हड्डियों के पास अपने कपड़े फाड़कर फैंक जाते हैं और स्वयं महात्मा जी के साथ चले जाते हैं। जब उनकी खोज हुई तो उनके घर वालों ने देखा कि वन में हड्डियों के पास फटे हुए कपड़े पड़े हैं तो उन्होंने सोचा कि किसी जंगली जानवर ने उन्हें खा लिया है। उन कपड़ों तथा हड्डियों को उठा कर घर पर ले आते हैं और अंतिम संस्कार कर देते हैं। उसके बाद तेरहवीं तथा छःमाही करते हैं और फिर श्राद्ध शुरू हो जाते हैं। जब मेरे पूज्य गुरूदेव बहुत वृद्ध हो चुके थे तो वे एक बार घर पर गये। तब उन घर वालों को यह पता चला कि ये जीवित हैं और घर छोड़कर चले गये थे। उन्होंने बताया कि जब ये घर छोड़कर चले गये थे तो इनकी खोज हुई। वन में इनके कपड़े मिले। उनके पास कुछ हड्डियाँ पड़ी थी।‌ तो हमने सोचा कि किसी जंगली जानवर ने इनको खा लिया है और उन कपड़ों तथा हड्डियों को घर पर लाकर अंतिम संस्कार कर दिया। फिर जब मेरे सतगुरु संत रामपाल दास ने उनके पूज्य गुरूदेव के छोटे भाई की पत्नी से पूछा कि जब हमारे पूज्य गुरूदेव घर छोड़कर चले गये थे तो तुमने पीछे से क्या किया? उसने बताया कि जब मैं ब्याही आई थी तो उस समय मुझे इनके श्राद्ध निकलते मिले थे। मैं अपने हाथों से इनके लगभग 70 श्राद्ध निकाल चुकी हूँ। उसने बताया कि जब घर में कोई नुकसान हो जाता था जैसे कि भैंस का दूध न देना, थन में खराबी आ जाना, कोई और नुकसान हो जाना आदि तो हम स्यानों के पास बूझा पड़वाने के लिए जाते थे तो वे कहते थे कि तुम्हारें घर में कोई निःसन्तान मरा हुआ है। तुम्हारे को वह दुःखी कर रहा है। फिर हम उसके कपड़े आदि देते हैं। तब मैंने कहा कि ये तो दुनिया का उद्धार कर रहे हैं। ये किसको दुःख दे रहे थे। ये तो अब सुख दाता हैं। फिर मैंने (सन्त रामपाल जी महाराज ने) उस वृद्धा से कहा कि अब तो ये आपके सामने हैं, अब तो ये व्यर्थ की साधना जैसे श्राद्ध निकालने बंद कर दो। तब उसने कहा कि यह तो पुरानी रिवाज है, यह कैसे छोड़ दूं? अर्थात् हम अपनी पुरानी रिवाजों में इतने लीन हो चुके हैं कि प्रत्यक्ष प्रमाण होने पर कि वह गलत कर रहे हैं छोड़ नहीं सकते। इससे प्रमाणित होता है कि श्राद्ध निकालना, पितर पूजा करना आदि सब व्यर्थ हैं। बच्चे के जन्म पर शास्त्र विरूद्ध पूजा निषेध। बच्चे के जन्म पर कोई छटी आदि नहीं मनानी है। सुतक के कारण प्रतिदिन की तरह करने वाली पूजा, भक्ति, आरती, ज्योति जगाना आदि बंद नहीं करनी है। इसी संदर्भ में एक संक्षिप्त कथा बताता हूँ कि एक व्यक्ति की शादी के दस वर्ष पश्चात् पुत्र हुआ था। पुत्र की खुशी में उसने बहुत ही खुशी मनाई। बीस-पच्चीस गाँवों को भोजन के लिए आमन्त्रित किया और बहुत ही गाना-बजाना हुआ अर्थात् काफी पैसा खर्च किया। फिर एक वर्ष के बाद उस पुत्रा का देहान्त हो जाता है। फिर वही परिवार टक्कर मार कर रोता है और अपने दुर्भाग्य को कोसता है। इसलिए कबीर साहेब हमें बताते हैं कि कबीर, बेटा जाया खुशी हुई, बहुत बजाये थाल। आना जाना लग रहा, ज्यों कीड़ी का नाल।। कबीर, पतझड़ आवत देख कर, बन रोवै मन माहिं। ऊंची डाली पात थे, अब पीले हो हो जाहिं।। कबीर, पात झडंता यूं कहै, सुन भई तरूवर राय। अब के बिछुड़े नहीं मिला, न जाने कहां गिरेंगे जाय। कबीर, तरूवर कहता पात से, सुनों पात एक बात। यहाँ की याहे रीति है, एक आवत एक जात।। देई धाम पर बाल उतरवाने जाना निषेध हैं। बच्चे के किसी देई धाम पर बाल उतरवाने नहीं जाना है। जब देखो बाल बड़े हो गए, कटवा कर फैंक दो। एक मन्दिर में देखा कि श्रद्धालु भक्त अपने लड़के या लड़कियों के बाल उतरवाने आए। वहाँ पर उपस्थित नाई ने बाहर के रेट से तीन गुना पैसे लीये और एक कैंची भर बाल काट कर मात-पिता को दे दिए। उन्होंने श्रद्धा से मन्दिर में चढ़ाए। पुजारी ने एक थैले में डाल लिए। रात्राी को उठा कर दूर एकांत स्थान पर फैंक दिए। यह केवल नाटक बाजी है। क्यों न पहले की तरह स्वाभाविक तरीके से बाल उतरवाते रहें तथा बाहर डाल दें। परमात्मा नाम से प्रसन्न होता है पाखण्ड से नहीं। नाम जाप से सुख:-- नाम (उपदेश) को केवल दुःख निवारण की दृष्टि कोण से नहीं लेना चाहिए बल्कि आत्म कल्याण के लिए लेना चाहिए। फिर सुमिरण से सर्व सुख अपने आप आ जाते हैं। कबीर,सुमिरण से सुख होत है सुमिरण से दुःख जाए। कहैं कबीर सुमिरण किए, सांई माहिं समाय।। Sant RampalJi YtChannel #🌞 Good Morning🌞
🌞 Good Morning🌞 - Sant Rampal Ji Maharaj Ji कबीर, सुमिरण से सुख होत है, सुमिरण से दुःख जाए। कहैं कबीर सुमिरण কিৎ सांई माहिं समाय |।" नाम (उपदेश) को केवल दुःख निवारण की दृष्टि कोण से नहीं लेना चाहिए बल्कि आत्म कल्याण चाहिए। लिए ক 0TT से सर्व सुख अपने आप आ जाते हैं। सुमिरण satlokashram org @Satlokashramoo1 @Satlokashram Sant Rampal Ji Maharaj Ji कबीर, सुमिरण से सुख होत है, सुमिरण से दुःख जाए। कहैं कबीर सुमिरण কিৎ सांई माहिं समाय |।" नाम (उपदेश) को केवल दुःख निवारण की दृष्टि कोण से नहीं लेना चाहिए बल्कि आत्म कल्याण चाहिए। लिए ক 0TT से सर्व सुख अपने आप आ जाते हैं। सुमिरण satlokashram org @Satlokashramoo1 @Satlokashram - ShareChat