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#🌸 सत्य वचन #☝अनमोल ज्ञान #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #☝आज का ज्ञान
🌸 सत्य वचन - मॉ बाप के फैसले कभी-कभी క్ష गलत हा सकते हैं, [ लेकिन उनके फैसलों के पीछे की मंशा 8 हमेशा सिर्फ हमारी भलाई की होती है। Radieliadliee मॉ बाप के फैसले कभी-कभी క్ష गलत हा सकते हैं, [ लेकिन उनके फैसलों के पीछे की मंशा 8 हमेशा सिर्फ हमारी भलाई की होती है। Radieliadliee - ShareChat
*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 14 अप्रैल 2026* *⛅दिन - मंगलवार* *⛅विक्रम संवत् - 2083* *⛅अयन - उत्तरायण* *⛅ऋतु - वसंत* *⛅मास - वैशाख* *⛅पक्ष - कृष्ण* *⛅तिथि - द्वादशी मध्यरात्रि 12:12 तक तत्पश्चात् त्रयोदशी* *⛅नक्षत्र - शतभिषा शाम 04:06 तक तत्पश्चात् पूर्व भाद्रपद* *⛅योग - शुक्ल दोपहर 03:40 तक तत्पश्चात् ब्रह्म* *⛅राहुकाल - दोपहर 03:37 से शाम 05:11 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 06:07* *⛅सूर्यास्त - 06:47 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - उत्तर दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:37 से प्रातः 05:22 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:02 से दोपहर 12:53 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:04 से मध्यरात्रि 12:50 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️व्रत पर्व विवरण - मेष संक्रांति (पुण्यकाल : सूर्योदय से दोपहर 01:52 तक), त्रिपुष्कर योग (शाम 04:06 से मध्यरात्रि 12:12 तक), वैशाखी, डॉ आंबेडकर जयंती,* *🌥️विशेष - द्वादशी को पूतिका(पोई) खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* https://whatsapp.com/channel/0029VaARDIOAojYzV7E44245 *🔹स्वास्थ्य प्रदायक स्नान विधि 🔹* *🔸 स्नान सूर्योदय से पहले ही करना चाहिए ।* #🌟देखिए खास ज्योतिष उपाय #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 *🔸 मालिश के आधे घंटे बाद शरीर को रगड़-रगड़ कर स्नान करें ।* *🔸 स्नान करते समय स्तोत्रपाठ, कीर्तन या भगवन्नाम का जप करना चाहिए ।* *🔸 स्नान करते समय पहले सिर पर पानी डालें फिर पूरे शरीर पर, ताकि सिर आदि शरीर के ऊपरी भागों की गर्मी पैरों से निकल जाय ।* *🔸 'गले से नीचे के शारीरिक भाग पर गर्म (गुनगुने) पानी से स्नान करने से शक्ति बढ़ती है, किंतु सिर पर गर्म पानी डालकर स्नान करने से बालों तथा नेत्रशक्ति को हानि पहुँचती है ।' (बृहद वाग्भट, सूत्रस्थानः अ.3)* *🔸 स्नान करते समय मुँह में पानी भरकर आँखों को पानी से भरे पात्र में डुबायें एवं उसी में थोड़ी देर पलके झपकायें या पटपटायें अथवा आँखों पर पानी के छींटे मारें। इससे नेत्रज्योति बढ़ती है ।* *🔸 निर्वस्त्र होकर स्नान करना निर्लज्जता का द्योतक है तथा इससे जल देवता का निरादर भी होता है ।* *🔸 किसी नदी, सरोवर, सागर, कुएँ, बावड़ी आदि में स्नान करते समय जल में ही मल-मूत्र का विसर्जन नही करना चाहिए ।* *🔸 प्रतिदिन स्नान करने से पूर्व दोनों पैरों के अँगूठों में सरसों का शुद्ध तेल लगाने से वृद्धावस्था तक नेत्रों की ज्योति कमजोर नहीं होती ।* *🔹स्नान के प्रकार - मन:शुद्धि के लिए🔹* *🔸 ब्रह्म स्नान : ब्राह्ममुहूर्त में ब्रह्म-परमात्मा का चिंतन करते हुए ।* *🔸 देव स्नान : सूर्योदय के पूर्व देवनदियों में अथवा उनका स्मरण करते हुए ।* *🔹समयानुसार स्नान🔹* *🔸 ऋषि स्नान : आकाश में तारे दिखते हों तब ब्राह्ममुहूर्त में ।* *🔸 मानव स्नान :सूर्योदय के पूर्व ।* *🔸 दानव स्नान : सूर्योदय के बाद चाय-नाश्ता लेकर 8-9 बजे ।* *🔸 करने योग्य स्नान : ब्रह्म स्नान एवं देव स्नान युक्त ऋषि स्नान ।* *🔸 रात्रि में या संध्या के समय स्नान न करें । ग्रहण के समय रात्रि में भी स्नान कर सकते हैं । स्नान के पश्चात तेल आदि की मालिश न करें । भीगे कपड़े न पहनें । (महाभारत, अनुशासन पर्व)* *🔸 दौड़कर आने पर, पसीना निकलने पर तथा भोजन के तुरंत पहले तथा बाद में स्नान नहीं करना चाहिए । भोजन के तीन घंटे बाद स्नान कर सकते हैं ।* *🔸 बुखार में एवं अतिसार (बार-बार दस्त लगने की बीमारी) में स्नान नहीं करना चाहिए ।* *🔸 दूसरे के वस्त्र, तौलिये, साबुन और कंघी का उपयोग नहीं करना चाहिए ।* *🔸 त्वचा की स्वच्छता के लिए साबुन की जगह उबटन का प्रयोग करें ।* *🔸 स्नान करते समय कान में पानी न घुसे इसका ध्यान रखना चाहिए ।* *🔸 स्नान के बाद मोटे तौलिये से पूरे शरीर को खूब रगड़-रगड़ कर पोंछना चाहिए तथा साफ, सूती, धुले हुए वस्त्र पहनने चाहिए । टेरीकॉट, पॉलिएस्टर आदि सिंथेटिक वस्त्र स्वास्थ्य के लिए अच्छे नहीं हैं ।* *🔸 जिस कपड़े को पहन कर शौच जायें या हजामत बनवायें, उसे अवश्य धो डालें और स्नान कर लें ।*
🌟देखिए खास ज्योतिष उपाय - आज का पंचांग a ٥ 08 ಹu radheradheje com W ऋतु- वसंत Bauakhu दिन- मंगलवार 4و5- 14-04-2026 तिथि- द्वादशी (२४४१२ से त्रयोदशी ) नक्षत्र॰ शतभिष नक्षत्र- रैवती चूर्रः शतभिष नक्षघ बोग॰ मीन शुक्ल कौलव (१२:४६ से   तैतुल) करण चन्द्र राशि- कुम्भ सूर्य राशि॰ मीन (O९१३१ से मेष ) शुभ मुहूर्त चोघडिया , दिन राहू काल १५:३७ u06:09 १७४११ अशुभ 0७:४३ अशुभ यम घंटा 0९:१८ - १०:५३ अशुभ 0&07:43=09:183g& பளி काल१२:२७ 1802 चर09:१8 १०:५३ शुभ अभिजित १२:०२ - १२१५३ शुभ १२:२७ शुभ @Iಚ10853 दूर मुहूर्त 0८:४०  0९:३१ अशुभ era 12:27 14802 ೩೫ दूरमुहूर्त २३११९  २४:१०० अशुभ १५:३७ अशुभ काल१५४०२ @య २३:५६ अशुभ ೩೫ 15237 १७४११ शुभ प्रदोष १८:४६ - २१:०३ शुभ रोग १७४११ १८:४६ अशुभ पंचकर अहोरात्र अशुभ बैसाखी की लख ्लख बधाईयाँ आज का पंचांग a ٥ 08 ಹu radheradheje com W ऋतु- वसंत Bauakhu दिन- मंगलवार 4و5- 14-04-2026 तिथि- द्वादशी (२४४१२ से त्रयोदशी ) नक्षत्र॰ शतभिष नक्षत्र- रैवती चूर्रः शतभिष नक्षघ बोग॰ मीन शुक्ल कौलव (१२:४६ से   तैतुल) करण चन्द्र राशि- कुम्भ सूर्य राशि॰ मीन (O९१३१ से मेष ) शुभ मुहूर्त चोघडिया , दिन राहू काल १५:३७ u06:09 १७४११ अशुभ 0७:४३ अशुभ यम घंटा 0९:१८ - १०:५३ अशुभ 0&07:43=09:183g& பளி काल१२:२७ 1802 चर09:१8 १०:५३ शुभ अभिजित १२:०२ - १२१५३ शुभ १२:२७ शुभ @Iಚ10853 दूर मुहूर्त 0८:४०  0९:३१ अशुभ era 12:27 14802 ೩೫ दूरमुहूर्त २३११९  २४:१०० अशुभ १५:३७ अशुभ काल१५४०२ @య २३:५६ अशुभ ೩೫ 15237 १७४११ शुभ प्रदोष १८:४६ - २१:०३ शुभ रोग १७४११ १८:४६ अशुभ पंचकर अहोरात्र अशुभ बैसाखी की लख ्लख बधाईयाँ - ShareChat
#📿एकादशी🪔🙏 #Varuthini Ekadashi2026 पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 13 अप्रैल को सुबह 1 बजकर 16 मिनट से आरंभ हो रही है, जो 14 अप्रैल को सुबह 1 बजकर 08 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में उदया तिथि के आधार पर वैशाख माह की पहली एकादशी यानी वरुथिनी एकादशी का व्रत 13 अप्रैल 2026, सोमवार को रखा जाएगा। वरुथिनी एकादशी व्रत का पारण 14 अप्रैल 2026 को किया जाएगा। इस दिन पारण का समय सुबह में 06 बजकर 54 मिनट से लेकर 08 बजकर 31 मिनट तक है। https://www.radheradheje.com/varuthini-ekadashi/
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Varuthini Ekadashi : कब है वरुथिनी एकादशी ? जानें तिथि, महत्व, कथा और शुभ मुहूर्त
वैशाख मास में दो एकादशी तिथियाँ आती हैं, जिसमें कृष्ण पक्ष की एकादशी को वरुथिनी एकादशी कहते हैं। मान्यता है कि वरुथिनी एकादशी पर व्रत रखने से इस लोक के साथ परलोक में भी पुण्य मिलता है, पद्म पुराण में वैशाख मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी के विषय में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि यमराज और यमलोक के भय से परेशान लोगों को वरूथिनी एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए। वरूथिनी एकादशी पर भगवान मधुसूदन की पूजा की जाती है, इस दिन भगवान नारायण के वराह अवतार की पूजा भी किए जाने का विधान है। शास्त्रों में वरूथिनी एकादशी के व्रत को अन्नदान तथा कन्यादान दोनों के समान फलों की प्राप्ति होने वाला कहा गया है।
अक्षय तृतीया 2026: शुभ मुहूर्त, पौराणिक महत्व, विवाह और धन प्राप्ति के उपाय अक्षय तृतीया पर करें ये 5 काम, जीवन बदल जाएगा #akshayatritiya2026 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🌟देखिए खास ज्योतिष उपाय https://www.radheradheje.com/akshaya-tritiya-2026-upay-muhurat-mahatva/
*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 13 अप्रैल 2026* *⛅दिन - सोमवार* *⛅विक्रम संवत् - 2083* *⛅अयन - उत्तरायण* *⛅ऋतु - वसंत* *⛅मास - वैशाख* *⛅पक्ष - कृष्ण* *⛅तिथि - एकादशी मध्यरात्रि 01:08 तक तत्पश्चात् द्वादशी* *⛅नक्षत्र - धनिष्ठा शाम 04:03 तक तत्पश्चात् शतभिषा* *⛅योग - शुभ शाम 05:17 तक तत्पश्चात् शुक्ल* *⛅राहुकाल - सुबह 07:44 से सुबह 09:19 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 06:08* *⛅सूर्यास्त - 06:47 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - पूर्व दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:37 से प्रातः 05:23 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:02 से दोपहर 12:53 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:04 से मध्यरात्रि 12:50 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️व्रत पर्व विवरण - वरुथिनी एकादशी, श्री वल्लभाचार्य जयंती* *🌥️विशेष - एकादशी को शिम्बी (सेम) न खाएं अन्यथा पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* https://whatsapp.com/channel/0029VaARDIOAojYzV7E44245 *🥭गर्मियों में बलप्रद व स्वास्थ्यवर्धक आम🥭* #💮आज का पंचांग एवं मुहूर्त💫 *🔸पका आम बहुत ही पौष्टिक होता है । इसमें प्रोटीन,विटामिन व खनिज पदार्थ, कार्बोहाइड्रेट तथा शर्करा विपुल मात्रा में होते हैं ।* *🔸आम मीठा, चिकना, शौच साफ़ लानेवाला, तृप्तिदायक, ह्रदय को बलप्रद, वीर्य की शुद्धि तथा वृद्धि करनेवाला है । यह वायु व पित्त नाशक परंतु कफकारक है तथा कांतिवर्धक, रक्त की शुद्धि करनेवाला एवं भूख बढ़ानेवाला है । इसके नियमित सेवन से रोगप्रतिकारक शक्ति बढती है ।* *🔸शुक्रप्रमेह आदि विकारों के कारण जिनको संतानोत्पत्ति न होती हो, उनके लिए पका आम लाभकारक है । कलमी आम की अपेक्षा देशी आम जल्दी पचनेवाला, त्रिदोषशामक व विशेष गुणयुक्त है । रेशासहित, मीठा, पतली या छोटी गुठलीवाला आम उत्तम माना जाता है । यह आमाशय, यकृत, फेफड़ों के रोग तथा अल्सर, रक्ताल्पता आदि में लाभ पहुँचाता है । इसके सेवन से रक्त,मांस आदि सप्तधातुओं तथा वासा की वृद्धि और हड्डियों का पोषण होता है । यूनानी डॉक्टरों के मतानुसार पका आम आलस्य दूर करता है, मूत्र साफ़ लाता है, क्षयरोग (टी.बी.)मिटाता है तथा गुर्दें व मूत्राशय के लिए शक्तिदायक है ।* *🔸औषधि-प्रयोग🔸* *🔸भूखवृद्धि : आम के रस में घी और सौंठ डालकर सेवन करने से जठराग्नि प्रदीप्त होता है । वायु रोग या पाचनतंत्र की दुर्बलता : आम के रस में अदरक मिलाकर लेना हितकारी है ।* *🔸शहद के साथ पके आम के सेवन से प्लीहा, वायु और कफ के दोष तथा क्षयरोग दूर होता है ।* *🔸 आम का पना : केरी (कच्चा आम ) को पानी में उबालें अथवा गोबर के कंडे की आग में दबा दें । भुन जाने पर छिलका उतार दें और गूदा मथकर उसमें गुड, जीरा, धनिया, काली मिर्च तथा नमक मिलाकर दोबारा मथें । आवश्यकता अनुसार पानी मिलायें और पियें ।* *🔸लू लगने पर : उपरोक्त आम का पना एक-एक कप दिन में २ - ३ बार पियें ।* *🔸भुने हुए कच्चे आम के गूदेको पैरों के तलवों पर लगाने से भी लू से राहत मिलती है ।* *🔸वजन बढ़ाने के लिए : पके और मीठे आम नियमित रूप से खाने से दुबले - पतले व्यक्ति का वजन बढ़ सकता है ।* *🔸दस्त में रक्त आने पर : छाछ में आम की गुठली का २ से ३ ग्राम चूर्ण मिलाकर पीने से लाभ होता है ।* *🔸पेट के कीड़े : सुबह चौथाई चम्मच आम की गुठलियों का चूर्ण गर्म पानी के साथ लेने से पेट के कीड़े मर जाते है ।* *🔸प्रदर रोग : आम की गुठली का २ से ३ ग्राम चूर्ण शहद के साथ चाटने से रक्त-प्रदर में लाभ होता है ।* *🔸दाँतों के रोग : आम के पत्तों को खूब चबा-चबाकर थूकते रहने से कुछ ही दोनों में दाँतों का हिलना और मसूड़ों से खून आना बंद हो जाता है । आम की गुठली की गिरी के महीन चूर्ण का मंजन करने से पायरिया ठीक होता है ।* *🔸घमौरियाँ : आम की गुठली के चूर्ण से स्नान करने से घमौरियाँ दूर होती है ।* *🔸पुष्ट और सुडौल शरीर : यदि एक वक्त के आहार में सुबह या शाम केवल आम चूसकर जरा-सा अदरक लें तथा डेढ -दो घंटे के बाद दूध पियें तो ४० दिन में शरीर पुष्ट व सुडौल हो जाता । आम और दूध एक साथ खाना आयुर्वेद की दृष्टि से विरुद्ध आहार है । इससे आगे चलकर चमड़ी के रोग होते हैं ।* *🔸सावधानी : खाने के पहले आम को पानी में रखना चाहिए । इससे उसकी गर्मी निकल जाती है । भूखे पेट आम नहीं खाना चाहिए । अधिक आम खाने से गैस बनती है और पेट के विकार पैदा होते हैं । कच्चा, खट्टा तथा अति पका हुआ आम खाने से लाभ के बजाय हानि हो सकती है । कच्चे आम के सीधे सेवन से कब्ज व मंदाग्नि हो सकती है ।* *🔸बाजार में बिकनेवाला डिब्बाबंद आम का रस स्वास्थ्य के लिए हितकारी नहीं होता है । लम्बे समय तक रखा हुआ बासी रस वायुकारक, पचने में भारी एवं ह्रदय के लिए अहितकर है ।* #monday #god #lordshiva #harharmahadev #omnamahshivaya #panchang #prosperity #healthylifestyle #keytosuccess #sadguru #blessings #mantra #jaishreeram #radheradheje #facebookviral #fbviral #trendingnow
💮आज का पंचांग एवं मुहूर्त💫 - आज का पंचांग वैशाख, ٥ 08T- ಹ!u] radheradhejecom W ऋत्ु- वसंत दिन- सोमवार [ಪ- 13-04-2026 तिथि- एकादशी (२५:०८ से द्वादशी ) नक्षत्र धनिष्ठाा सूर्य नक्षत्र- रेवती चंद्र नक्षत्र॰ धनिष्ठा मीन چ शुभ बव (१३:१८ से बालव ) करण चन्द्र राशि- क्ुम्भ सूर्य राशि॰ मीन चोघडिया , दिन ೩೩ मुहूर्त राहूुकाल 0७:४५ - 0९:१९ अशुभ 3{706:10 0७:४५ शुभ यम घंटा १०:५३ - १२:२८ अशुभ काल 0७:४५ - 0९:१९ अशुभ घुली काल १४४०२ থরুঞ্ড 09819  १०:५३ शुभ 15837 रोग १०:५३ - १२:२८ अशुभ अभिजित १२:०२ - १२:५३ शुभ 87386f12:53 ತ[ 12:28 - 14:02 3987 13:43 3[? ಕ್ಟಿ೯rೆ 15.24 - 16.14 31997 4714802 १५:३७ शुभ ಈ 23820 १७४११ शुभ लाभ 1५:३7 २४:५७* अशुभ प्रदोष १८:४६ = २१:०२ शुभ अमृत १७:११ १८:४६ शुभ वरुथिनी एकादशी की शुभकामनाएं RadheRadhefe आज का पंचांग वैशाख, ٥ 08T- ಹ!u] radheradhejecom W ऋत्ु- वसंत दिन- सोमवार [ಪ- 13-04-2026 तिथि- एकादशी (२५:०८ से द्वादशी ) नक्षत्र धनिष्ठाा सूर्य नक्षत्र- रेवती चंद्र नक्षत्र॰ धनिष्ठा मीन چ शुभ बव (१३:१८ से बालव ) करण चन्द्र राशि- क्ुम्भ सूर्य राशि॰ मीन चोघडिया , दिन ೩೩ मुहूर्त राहूुकाल 0७:४५ - 0९:१९ अशुभ 3{706:10 0७:४५ शुभ यम घंटा १०:५३ - १२:२८ अशुभ काल 0७:४५ - 0९:१९ अशुभ घुली काल १४४०२ থরুঞ্ড 09819  १०:५३ शुभ 15837 रोग १०:५३ - १२:२८ अशुभ अभिजित १२:०२ - १२:५३ शुभ 87386f12:53 ತ[ 12:28 - 14:02 3987 13:43 3[? ಕ್ಟಿ೯rೆ 15.24 - 16.14 31997 4714802 १५:३७ शुभ ಈ 23820 १७४११ शुभ लाभ 1५:३7 २४:५७* अशुभ प्रदोष १८:४६ = २१:०२ शुभ अमृत १७:११ १८:४६ शुभ वरुथिनी एकादशी की शुभकामनाएं RadheRadhefe - ShareChat
यह भी कट जाएगा 〰️〰️🌼🌼〰️〰️ एक बार एक राजा की सेवा से प्रसन्न होकर एक साधू नें उसे एक ताबीज दिया और कहा की राजन इसे अपने गले मे डाल लो और जिंदगी में कभी ऐसी परिस्थिति आये की जब तुम्हे लगे की बस अब तो सब ख़तम होने वाला है, परेशानी के भंवर मे अपने को फंसा पाओ, कोई प्रकाश की किरण नजर ना आ रही हो, हर तरफ निराशा और हताशा हो तब तुम इस ताबीज को खोल कर इसमें रखे कागज़ को पढ़ना, उससे पहले नहीं राजा ने वह ताबीज अपने गले मे पहन लिया ! एक बार राजा अपने सैनिकों के साथ शिकार करने घने जंगल मे गया! एक शेर का पीछा करते करते राजा अपने सैनिकों से अलग हो गया और दुश्मन राजा की सीमा मे प्रवेश कर गया, घना जंगल और सांझ का समय, तभी कुछ दुश्मन सैनिकों के घोड़ों की टापों की आवाज राजा को आई और उसने भी अपने घोड़े को एड लगाई, राजा आगे आगे दुश्मन सैनिक पीछे पीछे! बहुत दूर तक भागने पर भी राजा उन सैनिकों से पीछा नहीं छुडा पाया ! भूख प्यास से बेहाल राजा को तभी घने पेड़ों के बीच मे एक गुफा सी दिखी, उसने तुरंत स्वयं और घोड़े को उस गुफा की आड़ मे छुपा लिया! और सांस रोक कर बैठ गया, दुश्मन के घोड़ों के पैरों की आवाज धीरे धीरे पास आने लगी ! दुश्मनों से घिरे हुए अकेले राजा को अपना अंत नजर आने लगा, उसे लगा की बस कुछ ही क्षणों में दुश्मन उसे पकड़ कर मौत के घाट उतार देंगे! वो जिंदगी से निराश हो ही गया था, की उसका हाथ अपने ताबीज पर गया और उसे साधू की बात याद आ गई! उसने तुरंत ताबीज को खोल कर कागज को बाहर निकाला और पढ़ा! उस पर्ची पर लिखा था —“यह भी कट जाएगा” राजा को अचानक ही जैसे घोर अन्धकार मे एक ज्योति की किरण दिखी, डूबते को जैसे कोई सहारा मिला ! उसे अचानक अपनी आत्मा मे एक अकथनीय शान्ति का अनुभव हुआ ! उसे लगा की सचमुच यह भयावह समय भी कट ही जाएगा, फिर मे क्यों चिंतित होऊं ! अपने प्रभु और अपने पर विश्वासरख उसने स्वयं से कहा की हाँ, यह भी कट जाएगा और हुआ भी यही, दुश्मन के घोड़ों के पैरों की आवाज पास आते आते दूर जाने लगी, कुछ समय बाद वहां शांति छा गई! राजा रात मे गुफा से निकला और किसी तरह अपने राज्य मे वापस आ गया यह सिर्फ किसी राजा की कहानी नहीं है यह हम सब की कहानी है ! हम सभी परिस्थिति, काम, तनाव के दवाव में इतने जकड जाते हैं की हमे कुछ सूझता नहीं है,हमारा डर हम पर हावी होने लगता है, कोई रास्ता, समाधान दूर दूर तक नजर नहीं आता, लगने लगता है की बस, अब सब ख़तम, है ना ? जब ऐसा हो तो २ मिनट शांति से बेठिये, थोड़ी गहरी गहरी साँसे लीजिये ! अपने आराध्य को याद कीजिये और स्वयं से जोर से कहिये –यह भी कट जाएगा ! आप देखिएगा एकदम से जादू सा महसूस होगा, और आप उस परिस्थिति से उबरने की शक्ति अपने अन्दर महसूस करेंगे ! आजमाया हुआ है! बहुत कारगर है आशा है जैसे यह सूत्र मेरे जीवन मे मुझे प्रेरणा देता है, आपके जीवन मे भी प्रेरणादायक सिद्ध होगा। 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #☝आज का ज्ञान
🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स - आज का अमृत बहुत गई थोड़ी रही, व्याकुल मन मत होय। धीरज सबको मित्र है, करी कमाई ना खोय।। काफी समय गुजर गया अब थोड़ा ही रह गया है। अर्थ( परेशान होकर धैर्य मत खोवो। धैर्य ही सबका सच्चा मित्र है। जो इतने दिनों से कमाया है उसे खत्म ना करो। आज का अमृत बहुत गई थोड़ी रही, व्याकुल मन मत होय। धीरज सबको मित्र है, करी कमाई ना खोय।। काफी समय गुजर गया अब थोड़ा ही रह गया है। अर्थ( परेशान होकर धैर्य मत खोवो। धैर्य ही सबका सच्चा मित्र है। जो इतने दिनों से कमाया है उसे खत्म ना करो। - ShareChat
अयोध्या के महल में चोरी करता पकड़ा गया था मेघनाद? 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️ संतजन अपनी कथाओं में एक प्रसंग सुनाते हैं मेघनाथ के अयोध्या आने की और श्रीलक्ष्मणजी द्वारा उसे बंदी बना लेने की। तुलसीबाबा एक चौपाई लिखते हैं उसके आधार पर ही संभवतः यह प्रसंग बनता है. आज आपके सामने वही प्रसंग रखने का प्रयास करते हैं। जब लंका युद्ध में मेघनाद ने लक्ष्मणजी को शक्ति मार दी और लक्ष्मणजी अचेत पड़ गए तो भगवान श्रीराम भाई का कष्ट देखकर विलाप करने लगे. विलाप करते हुए वह अपने बचपन की एक घटना स्मरण करते हैं जब लक्ष्मणजी ने मेघनाथ को बंदी बना लिया था। भगवान श्रीराम भावुक होकर विलाप करते हुए कहते हैं कि अगर उस दिन पिता के वचन न माना होता तो आज यह दशा न आती. प्रभु की वेदना का वर्णन करते हुए तुलसीदासजी ने एक चौपाई लिखी है- जो जनतेउ वन बंधु बिछोहू। पिता बचन मनतेउ नहिं ओहू॥ पिता के वचन की लाज रखने के लिए वनवास में चले आए भगवान श्रीराम पिताजी के किस वचन के मानने पर दुख प्रकट कर रहे हैं. इसकी एक कथा है, उसका आप आनंद लीजिए। एक बार रावण को समुद्र किनारे शिव-आराधना के समय एक कमलपुष्प की पंखुडी कहीं से बहकर आती दिखाई दी. पंखुडी अद्वितीय सुन्दर थी. रावण ने ऐसा सुंदर कमलदल नहीं देखा था। उसे देखकर विचार करने लगा कि पंखुडी जिस कमल पुष्प का हिस्सा है वह पुष्प कितना सुन्दर होगा? काश पूरा कमलपुष्प पा जाऊँ तो अपने आराध्य भगवान भोलनाथ को अर्पित करके उन्हें प्रसन्न करता। रावण बस यही विचार करते हुए वहीं बैठा रहा. रावण पूजा के बाद समय से वापस नहीं आया तो मंदोदरी को चिंता हुई. पुत्र मेघनाद को पिता की खोज-खबर हेतु भेजा। मेघनाद ने देखा कि पिताजी एकटक जल में लहराती एक पंखुडी निहार रहे हैं. उनका मन अविचल स्थिति में शांत तो है किंतु कुछ चिंतित भी है. उसने पिता से इस स्थिति का कारण पूछा तो सारी स्थिति व रावण की अभिलाषा का पता चला। मेघनाद ने पिता को प्रसन्न करने के लिए कहा- पिताजी आप चिंता न करें. तीनों लोकों में जहां भी इस पंखुडी के पुष्प लगे होंगे, मैं वहां से अभी इसे खोजकर लिए आता हूं. आप भोलेनाथ को इसे अवश्य अर्पित करेंगे। रावण को प्रणाम कर मेघनाद मायावी छद्मभेष धारण कर तुरंत ही आकाश,पाताल समेत सभी लोकों का चक्कर लगाकर पृथ्वी पर पुष्प तलाशने लगा. तभी उसे सरयू की धारा में उसी प्रकार की पंखुडियां बहती दिखीं। उनको खोजता मेघनाद अयोध्या के उपवन के उस तालाब में पहुंच गया जो उन अद्भुत, अद्वितीय कमल-पुष्पों का पूरा श्रोत था. तालाब को उन कमल पुष्पों से भरा देखकर मेघनाद की प्रसन्नता की सीमा न रही। बिना विलंब किए उसने पुष्प तोडना शुरू किया. अचानक किसी अजनबी को महाराज दशरथ के बगीचे में पुष्प तोड़ते देखकर रखवालों ने पास ही खेल रहे श्रीराम-लखन आदि को खबर कर दी. वे तुरंत आए और मेघनाद को पकड लिया। लक्ष्मणजी तो तो वाटिका में घुसकर चोरी कर रहे मेघनाद को वहीं मार देना चाहते थे पर श्रीरामजी ने कहा- दंड निर्धारण का अधिकार राजा का होता है. इसे पिताजी महाराज के पास लिए चलते हैं. वह जो दंड निर्धारित करेंगे वह दंड दिया जाएगा। मेघनाद को बांधकर वे महाराज दशरथ के पास ले गए. दशरथजी ने उसका परिचय आदि के बाद पूरा वृतांत व पुष्प चोरी करने का कारण जाना। फिर वह बोले- निःसंदेह इसने बिना अनुमति वाटिका में प्रवेशकर अपराध किया है परंतु यह पितृ-भक्ति के भाव में था इसलिए इससे यह घृष्टता हो गई. अपने पिता की सेवा में निकले इसके प्राण मत लो. इसे पुष्प देकर छोड दो। जब मेघनाद ने लंकायुद्ध में लक्ष्मणजी पर शक्ति का प्रहारकर विकट स्थिति पैदा कर दी, तब रामजी भाई के शोक में विलाप करते हुए स्मरण करने लगे। दुखी हृदय से पिताजी की आज्ञा का स्मरण करते हुए श्रीराम ने कहा कि यदि मैं जानता कि यह मेघनाद मेरे भाई लखन के प्राणों के संकट का कारण बनेगा तो मैं उस समय पिताजी के बचन न मानता और लक्ष्मण को इसके प्राण लेने देता। 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️ #😊कृष्ण कथाएं #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
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सुदामा के भाग्य में ‘श्रीक्षय’ लिखा हुआ था, श्रीकृष्ण ने वहां उन अक्षरों को उलटकर ‘यक्षश्री’ श्रीकृष्ण और सुदामा की मैत्री वास्तव में अतुलनीय है। श्रीकृष्ण सुदामा के ही तुल्य होते, तो कुछ महत्त्व नहीं था; पर वे तो राजराजेश्वर द्वारिकानाथ थे। उन्होंने निर्धन, दीन सुदामा के चरण धोए, उसका चरणामृत लिया, उसे महलों में छिड़का, दीन को गले से लगाया। यह है महत्ता उनके प्रेम और स्नेह की। ऐसी प्रीति दीनबंधु! दीनन सौं माने को? ऐसे बेहाल बिवाइन सों पग, कंटक-जाल लगे पुनि जोये। हाय! महादुख पायो सखा तुम, आये इतै न किते दिन खोये। देखि सुदामा की दीन दसा, करुना करिके करुनानिधि रोये। पानी परात को हाथ छुयो नहिं, नैनन के जल सौं पग धोये।। भगवान ने सुदामा के द्वारा लाए हुए चिउड़ों का बड़ी रुचि के साथ भोग लगाया और सुदामा से कहा–’आपके द्वारा लाया हुआ चिउड़ों का यह उपहार मुझको अत्यन्त प्रसन्नता देने वाला है। ये चिउड़े मुझको और मेरे साथ ही समस्त विश्व को तृप्त कर देंगे।’ सुदामा ने श्रीकृष्ण से प्रेम किया तो श्रीकृष्ण ने उन्हें द्वारिकानाथ बना दिया। उन्हें अपने सिंहासन पर बिठाया और स्वयं नीचे ही नहीं वरन् सुदामा के चरणों में बैठे। श्रीकृष्ण ने एक मुट्ठी चावल खाकर सुदामा को द्वारिका के तुल्य सम्पत्ति प्रदान की। सुदामाजी द्वारिका से लौटकर अपने गांव आए तो देखा कि यहां तो किसी राजा ने सुन्दर नगर बसा दिया है, जिसकी रचना और उसका ऐश्वर्य द्वारिका के समान है। लेकिन इतने अपार वैभव को प्राप्त कर भी सुदामाजी उसके मोह और भोगों में आसक्त नहीं हुए। सुदामा की इतनी सम्पत्ति देखकर यमराजजी से रहा न गया। वे परमात्मा को कायदे-कानून बताने के लिए सब बही-चौपड़े लेकर द्वारिका पहुंचे और भगवान के चरणों में वंदन करके बोले–’महाराज! अब शायद मेरी जरुरत नहीं है। प्रत्येक को उसके कर्मानुसार फल प्रदान करने का नियम तो आपने ही तोड़ दिया है। अब कायदा-कानून कुछ रहा नहीं।’ भगवान ने पूछा–’क्यों, क्या हुआ यमराजजी!’ यमराजजी ने कहा–’भगवन्! आप ही जब नियम भंग करते हैं तो फिर जगत का क्या होगा? आपको कौन रोक सकता है? आप परमेश्वर हैं, किन्तु किसी साधारण जीव को यदि इतनी सम्पत्ति प्रदान करेंगे तो कर्म की मर्यादा छिन्न-भिन्न हो जाएगी।’ श्रीकृष्ण ने पूछा–’ क्या आप सुदामा की बात कर रहे हैं?’ यमराज ने कहा–’हां महाराज! इस सुदामा ने ऐसा कोई बड़ा पुण्य नहीं किया है। इस ब्राह्मण के भाग्य में तो दरिद्रता का ही योग लिखा हुआ है और आपने इसको इतना अधिक दे दिया! इतनी सम्पत्ति तो इन्द्र के दरबार में भी नहीं है। आप उदार हैं, किन्तु इससे कर्म की मर्यादा लुप्त होती है।’ सुदामा के ऐश्वर्य को देखकर यमराज को भी ईर्ष्या हुई, इसलिए भगवान को कर्म की मर्यादा समझाने लगे। श्रीकृष्ण ने कहा–’यमराजजी! आप अपना हिसाब-किताब ठीक नहीं रखते। सुदामा के पुण्य का क्या बखान करुं! सुदामा ने मुझे एक मुट्ठी चावल खिलाए। जो मुझे खिलाता है उसे सम्पूर्ण विश्व को भोजन कराने का फल मिलता है।’ भगवान ने यमराज के बही-चौपड़े खोलकर देखे और जहां सुदामा के भाग्ययोग में ‘श्रीक्षय’ (सम्पत्ति का नाश) लिखा हुआ था, श्रीकृष्ण ने वहां उन अक्षरों को उलटकर ‘यक्षश्री’ (कुबेर की सम्पत्ति) लिख दिया। इससे स्पष्ट है कि भगवान के दरबार में ‘सबसे ऊंची प्रेम सगाई’ है। जो भगवान श्रीकृष्ण को खुश करते हैं, उनसे सारा संसार खुश रहता है। ।। जय श्री कृष्णा।। #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🙏 राधा रानी #😊कृष्ण कथाएं
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#varuthiniekadashi2026 कब है वरुथिनी एकादशी ? जानें तिथि, महत्व, कथा और शुभ मुहूर्त पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 13 अप्रैल को सुबह 1 बजकर 16 मिनट से आरंभ हो रही है, जो 14 अप्रैल को सुबह 1 बजकर 08 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में उदया तिथि के आधार पर वैशाख माह की पहली एकादशी यानी वरुथिनी एकादशी का व्रत 13 अप्रैल 2026, सोमवार को रखा जाएगा। वरुथिनी एकादशी व्रत का पारण 14 अप्रैल 2026 को किया जाएगा। इस दिन पारण का समय सुबह में 06 बजकर 54 मिनट से लेकर 08 बजकर 31 मिनट तक है #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स https://www.radheradheje.com/varuthini-ekadashi/
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Varuthini Ekadashi : कब है वरुथिनी एकादशी ? जानें तिथि, महत्व, कथा और शुभ मुहूर्त
वैशाख मास में दो एकादशी तिथियाँ आती हैं, जिसमें कृष्ण पक्ष की एकादशी को वरुथिनी एकादशी कहते हैं। मान्यता है कि वरुथिनी एकादशी पर व्रत रखने से इस लोक के साथ परलोक में भी पुण्य मिलता है, पद्म पुराण में वैशाख मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी के विषय में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि यमराज और यमलोक के भय से परेशान लोगों को वरूथिनी एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए। वरूथिनी एकादशी पर भगवान मधुसूदन की पूजा की जाती है, इस दिन भगवान नारायण के वराह अवतार की पूजा भी किए जाने का विधान है। शास्त्रों में वरूथिनी एकादशी के व्रत को अन्नदान तथा कन्यादान दोनों के समान फलों की प्राप्ति होने वाला कहा गया है।