RadheRadheje
ShareChat
click to see wallet page
@akshmasharma
akshmasharma
RadheRadheje
@akshmasharma
www.radheradheje.com
*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 18 जून 2026* *⛅दिन - गुरुवार* *⛅विक्रम संवत् - 2083* *⛅अयन - उत्तरायण* *⛅ऋतु - ग्रीष्म* *⛅मास - ज्येष्ठ* *⛅पक्ष - शुक्ल* *⛅तिथि - चतुर्थी शाम 06:58 तक तत्पश्चात् पंचमी* *⛅नक्षत्र - पुष्य सुबह 11:32 तक तत्पश्चात् अश्लेशा* *⛅योग - व्याघात शाम 05:35 तक तत्पश्चात् हर्षण* *⛅राहुकाल - दोपहर 02:09 से दोपहर 03:51 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 05:41* *⛅सूर्यास्त - 07:15 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - दक्षिण दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:18 से प्रातः 04:59 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:01 से दोपहर 12:55 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:07 से मध्यरात्रि 12:49 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️ व्रत पर्व विवरण - विनायक चतुर्थी, गुरु अर्जुनदेवजी शहीदी दिवस, गुरुपुष्यामृत योग (सूर्योदय से दोपहर 11:32 तक)* *🌥️ विशेष - चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* https://whatsapp.com/channel/0029VaARDIOAojYzV7E44245 #💮आज का पंचांग एवं मुहूर्त💫 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
💮आज का पंचांग एवं मुहूर्त💫 - आज का पंचांग பவச पक्ष  शुक्ल www radheradheje com ग्रीष्म दिनु { गुरुवार নিনক্ 18-06-2026 (१८:५८ से पंचमी ) तिथि- चत्ुर्थी प्रुष्य H8a सूर्य नक्षत्र - मृगशीर्षा 457815-| प्रुष्य मिथुन लोग॰ { व्ययत afuj7(08313 & fafe %3)| करण चन्द्र राशि- कर्क शुभ मुहूर्त मिथुन सूर्य राशि- चोघडिया , दिन राहूुकाल १४:०9९ १५:५१ अशुभ 474705:43 0७:२४ अशुभ शुभ 05:43 0७:२४ शुभ ঘুলী জঞোল 09805 008{7 रोग 0७:२५ - 0९:०५ अशुभ अभिजित १२:०१ १२:५५ शुभ उद्वेग 09:0३ १०:४७ अशुभ दूर मुहूर्त १०:१३ : ११:०७ अशुभ चर १०:४७ - १२२८ शुभ दूर मुहूर्त १५:३७ ' १६:३१ अशुभ १४:०9 शुभ cr 12:28 वर्ज्यम २३२९ २४:५९२ अशुभ अमृत १४:०९ १५:५१ शुभ प्रदोष १९:१५ = २१:१९ शुभ काल १५:५१ १७:३२ अशुभ गंडमूल अहोरात्र अशुभ 11832 शुभ १७:३२ 19814 ೩೫ आपका दिन शुभ और मंगलमय हो RadheRadliefe आज का पंचांग பவச पक्ष  शुक्ल www radheradheje com ग्रीष्म दिनु { गुरुवार নিনক্ 18-06-2026 (१८:५८ से पंचमी ) तिथि- चत्ुर्थी प्रुष्य H8a सूर्य नक्षत्र - मृगशीर्षा 457815-| प्रुष्य मिथुन लोग॰ { व्ययत afuj7(08313 & fafe %3)| करण चन्द्र राशि- कर्क शुभ मुहूर्त मिथुन सूर्य राशि- चोघडिया , दिन राहूुकाल १४:०9९ १५:५१ अशुभ 474705:43 0७:२४ अशुभ शुभ 05:43 0७:२४ शुभ ঘুলী জঞোল 09805 008{7 रोग 0७:२५ - 0९:०५ अशुभ अभिजित १२:०१ १२:५५ शुभ उद्वेग 09:0३ १०:४७ अशुभ दूर मुहूर्त १०:१३ : ११:०७ अशुभ चर १०:४७ - १२२८ शुभ दूर मुहूर्त १५:३७ ' १६:३१ अशुभ १४:०9 शुभ cr 12:28 वर्ज्यम २३२९ २४:५९२ अशुभ अमृत १४:०९ १५:५१ शुभ प्रदोष १९:१५ = २१:१९ शुभ काल १५:५१ १७:३२ अशुभ गंडमूल अहोरात्र अशुभ 11832 शुभ १७:३२ 19814 ೩೫ आपका दिन शुभ और मंगलमय हो RadheRadliefe - ShareChat
गंगाजी में धोया पाप कहाँ – कहाँ तक जाता है...? 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ एक बार किसी गाँव में एक महात्मा सत्संग कर रहे थे, तभी कहीं से एक चोर आकर सत्संग में बैठ गया। महात्मा के सत्संग का इतना प्रभाव हुआ कि चोर को अपने पाप कर्मों से घृणा होने लगी। सत्संग समाप्त होने के बाद चोर महात्मा के पास गया और अपने पापों के प्रायश्चित का उपाय पूछने लगा। महात्माजी ने बोल दिया – “ गंगा स्नान कर आओ, तुम्हारे पाप धुल जायेंगे।” वह चोर तो गंगा स्नान के लिए चला गया लेकिन तभी वहाँ बैठे लोगों में से एक युवक खड़ा हुआ और बोला – “ महात्माजी ! आप कहते है कि गंगा स्नान से पाप धुल जाते है तो इसका मतलब ये हुआ कि पाप गंगाजी में समा गये, मतलब गंगाजी भी पापी हो गई।” युवक की बात का महात्माजी के पास कोई जवाब नहीं था । क्योंकि उन्होंने कभी इस बारे में सोचा ही नहीं कि गंगाजी से पाप कहाँ जाते है ? आखिरकार इस अनूठे प्रश्न का उत्तर जानने के लिए महात्माजी तपस्या करने लगे। कई दिनों की तपस्या के बाद महात्माजी पर देवता प्रसन्न होकर प्रकट हो गये और वरदान मांगने को कहा। महात्माजी ने कहा – “ भगवन ! मुझे अपने एक प्रश्न का उत्तर चाहिए कि गंगा में धोया गया पाप कहाँ जाता है ?” देवता अपने में मग्न, उन्हें भी पता नहीं कि गंगा में धोया पाप कहाँ जाता है ! अतः देवता बोले – “ चलो ! गंगाजी से ही पूछ लेते है और दोनों गंगाजी के पास पहुँचे। महात्माजी ने गंगाजी से प्रश्न किया – “ हे शीतल और परम पवित्र जल की अधिपति माँ गंगे ! कृपा करके हमें बताओं कि अनगिनत लोग आपमें जो पाप धोते है, उनसें क्या आप भी पापी होती हो ?” गंगाजी ने प्रसन्नता से कहा – “ भला मैं क्यों पापी हुई, मैं तो अपना सारा जल पापों सहित समुन्द्र को समर्पित कर देती हूँ । उसके बाद उन पापों का समुन्द्र देवता क्या करते है ? ये उन्हीं से पूछों । देवता महात्मा को लेकर समुन्द्र के पास गये और बोले – “ हे जलसिंधू ! माँ गंगे अपने सम्पूर्ण जल के साथ जो पाप आपको अर्पित देती है । उनसे क्या आप पापी होते है ?” सागर ने कहा – “ मैं तो अपना सम्पूर्ण जल सूर्य के ताप से भाप बनाकर बादलों में परिवर्तित कर देता हूँ । इसलिए भला मैं क्यों पापी हुआ ?” अब देवता महात्माजी को बादलों के पास ले गये और महात्माजी ने बादलों के सामने भी अपना प्रश्न दोहराया – “ हे मेघा ! समुन्द्र जो पापों सहित जल को भाप बनाकर बादलों में परिवर्तित कर देते है । तो क्या उन पापों से बादल पापी होते है ?” बादल बोले – “ भाई ! हम क्यों पापी हुए, हम तो सारा जल यथा ऋतू पृथ्वी पर भेज देते है । ये प्रश्न पृथ्वी से करो कि वह पापों का क्या करती है ?” अब देवता महात्माजी को पृथ्वी के पास ले गये और बोले – “ हे जगत को धारण करने वाली माँ धरती, बादल जल की बूंदों के साथ पापों की जो वर्षा करते है, वो पाप आपमें समा जाते है । तो क्या उनसे आप पापी होती है ?” पृथ्वी बोली – “ मैं क्यों पापी हुई ! मैं उन पापों को मिट्टी के माध्यम से अन्न में भेज देती हूँ । अब ये बात तो आप अन्न से पूछो कि वो उन पापों का क्या करता है ?” अब दोनों अन्न देवता के पास गये और बोले – “ हे अन्न देवता ! पृथ्वी सारे पाप आपको भेजती है, तो क्या आप पापी हुए ?” अन्न देवता बोले – “ मैं क्यों पापी हुआ ? जो मनुष्य मुझे जिस मनःस्थिति और वृति से उगाता है या प्राप्त करता है । जिस मनःस्थिति और वृति से बनाया और खिलाया जाता है । उसी मनःस्थिति और वृति के अनुरूप मैं पापों को उन मनुष्यों तक पहुँचा देता हूँ । जिसे खाकर उन मनुष्यों की बुद्धि भी वैसी ही पापी हो जाती है जो उनसे उनके कर्मों का फल देने वाले कार्य करवाती है ।” शायद इसीलिए कहा गया है – “ जैसा खाय अन्न, वैसा होय मन ” यह कहानी कितनी सच है ये महत्वपूर्ण नहीं, बल्कि इससे एक बड़े महत्वपूर्ण सत्य को उद्घाटित किया गया है । पाप कर्मों को गंगाजी में धोने का मतलब है मन को पाप कर्मों से मुक्त करना । यदि मन में पाप और अपवित्रता है तो गंगाजी में धोया पाप अन्न के माध्यम से फिर से हमें ही मिलने वाला है । क्योंकि अन्न को जिस वृति से कमाया और बनाया जाता है, उससे वैसे ही संस्कार बनते है । #☝आज का ज्ञान
☝आज का ज्ञान - आज का अमृत नहाये धोये क्या हुआ , जो मन मैल न जाए ] मीन सदा जल में रहे, धोये बास न जाए | आप कितना भी नहा धो लीजिए, लेकिन अगर मन साफ़ भावार्थ( नहीं हुआ तो उसे नहाने का क्या फायदा , जैसे मछली हमेशा पानी में रहती है लेकिन फिर भी वो सा़फ़ नहीं होती , मछली में तेज बदबू आती है। आज का अमृत नहाये धोये क्या हुआ , जो मन मैल न जाए ] मीन सदा जल में रहे, धोये बास न जाए | आप कितना भी नहा धो लीजिए, लेकिन अगर मन साफ़ भावार्थ( नहीं हुआ तो उसे नहाने का क्या फायदा , जैसे मछली हमेशा पानी में रहती है लेकिन फिर भी वो सा़फ़ नहीं होती , मछली में तेज बदबू आती है। - ShareChat
*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 17 जून 2026* *⛅दिन - बुधवार* *⛅विक्रम संवत् - 2083* *⛅अयन - उत्तरायण* *⛅ऋतु - ग्रीष्म* *⛅मास - ज्येष्ठ* *⛅पक्ष - शुक्ल* *⛅तिथि - तृतीया रात्रि 09:38 तक तत्पश्चात् चतुर्थी* *⛅नक्षत्र - पुनर्वसु दोपहर 01:37 तक तत्पश्चात् पुष्य* *⛅योग - ध्रुव रात्रि 08:51 तक तत्पश्चात् व्याघात* *⛅राहुकाल - दोपहर 12:28 से दोपहर 02:09 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 05:41* *⛅सूर्यास्त - 07:15 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - उत्तर दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:18 से प्रातः 04:59 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - कोई नहीं* *⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:07 से मध्यरात्रि 12:49 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️ व्रत पर्व विवरण - महाराणा प्रताप व छत्रसाल जयंती* *🌥️ विशेष - तृतीया को परवल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* https://whatsapp.com/channel/0029VaARDIOAojYzV7E44245 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #💮आज का पंचांग एवं मुहूर्त💫
🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स - आज का पंचांग मास॰ ज्येष्ठ, पक्ष शुक्ल wwwradheradhejecom ऋत्ु- ग्रीष्म दिन॰ ब्ुधवार 44-17-06-2026 तिथि॰ तृतीया (२१:३८ से चतुर्थी) प्रुनर्वसु 781515 सूर्य नक्षत्र - मृगशीर्षा चंद्रनक्षत्र॰ प्रुनर्वसु ؟ ল্লীন { ध्रुव तैतुल (11:114) करण ؟ (08:१२ से कर्क) चन्द्र राशि- ؟ सूर्य राशि- शुभ मुहूर्त चोघडिया , दिन १४:०9 अशुभ राहूकाल १२:२८ 0७:२४ शुभ @0583 यम घंटा 0७:२५ - 0९:०५ अशुभ ঔপুন024-09805থুঙ गुली काल १०:४७ 12:28 काल 0९:०५ १०४४७ अशुभ अभिजित १२:०१ १२:५५ अशुभ ೩೫ 10847 12:28 ೩೫ दूर मुहूर्त १२:०१  रोग १२:२८ १२ ५५ अशुभ १४:०9 अशुभ वर्ज्यम २०:५१ २२:१८ अशुभ उद्वेग १४:०9 १५:५१ अशुभ प्रदोष १९:१३ २१:१९ शुभ १७४३२ शुभ ಫ15851 १९:१३ शुभ সঙ1832 आपका दिन शुभ और मंगलमय हो RadheRadlefe आज का पंचांग मास॰ ज्येष्ठ, पक्ष शुक्ल wwwradheradhejecom ऋत्ु- ग्रीष्म दिन॰ ब्ुधवार 44-17-06-2026 तिथि॰ तृतीया (२१:३८ से चतुर्थी) प्रुनर्वसु 781515 सूर्य नक्षत्र - मृगशीर्षा चंद्रनक्षत्र॰ प्रुनर्वसु ؟ ল্লীন { ध्रुव तैतुल (11:114) करण ؟ (08:१२ से कर्क) चन्द्र राशि- ؟ सूर्य राशि- शुभ मुहूर्त चोघडिया , दिन १४:०9 अशुभ राहूकाल १२:२८ 0७:२४ शुभ @0583 यम घंटा 0७:२५ - 0९:०५ अशुभ ঔপুন024-09805থুঙ गुली काल १०:४७ 12:28 काल 0९:०५ १०४४७ अशुभ अभिजित १२:०१ १२:५५ अशुभ ೩೫ 10847 12:28 ೩೫ दूर मुहूर्त १२:०१  रोग १२:२८ १२ ५५ अशुभ १४:०9 अशुभ वर्ज्यम २०:५१ २२:१८ अशुभ उद्वेग १४:०9 १५:५१ अशुभ प्रदोष १९:१३ २१:१९ शुभ १७४३२ शुभ ಫ15851 १९:१३ शुभ সঙ1832 आपका दिन शुभ और मंगलमय हो RadheRadlefe - ShareChat
प्रेरणादायक कहानी 〰️🌸〰️〰️🌸〰️ सास-बहू की लड़ाई मिटाने वाला विलक्षण तावीज 〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️ एक महात्मा थे। वे पैदल घूम-घूमकर सत्संग का प्रचार किया करते थे। वे एक गाँवमें जाते, कुछ दिन ठहरकर सत्संग करते और फिर वहाँ से दूसरे गाँव चल देते । लोग भी उन पर बड़ी श्रद्धा रखते थे और उनकी बात मानते थे । घूमते-घूमते वे एक गाँव में पहुँचे। गाँव में सब जगह प्रचार हो गया कि महाराज जी पधारे हैं, आज अमुक जगह सत्संग होगा। सत्संग के समय बहुत-से भाई-बहन इकट्ठे हुए। जब सत्संग पूरा हुआ, तब एक माताजी महाराजजी के पास जाकर बोलीं-'महाराजजी ! आप अमुक गाँव में जाया करते हो!' महाराजजी- 'हाँ माई, जाया करता हूँ ।' माताजी-'वहाँ आपका अमुक सेवक है। आप उनके घर भी जाया करते हो!' महाराज जी-'हाँ, जाया करता हूँ।' माताजी-'यह मेरी बहू उसी की बेटी है। यह मेरे से लड़ती है! मेरा कहना नहीं मानती है! लोगों में महाराजजी का एक भय था। कोई गड़बड़ी करता तो कहते कि हम महाराज जी से कह देंगे। वह कहता कि भाई, महाराजजी को मत कहना, तुम जैसा कहोगे, वैसा हम करेंगे। महाराज जी कोई राजा की तरह दण्ड नहीं देते थे। वे बड़े प्रेम से कहते थे कि भाई, तुम ऐसा क्यों करते हो ? लोग उनकी बात का आदर करते थे। प्रेमका जो शासन होता है, वह बड़ा विलक्षण होता है। राजा का शासन तो राजसी-तामसी होता है, पर सन्तों का शासन सात्त्विक होता है। महाराजजी ने उस माताजी की बहू को बुलाया और उससे कहा कि 'बेटी! तू सास से क्यों लड़ती है?' महाराजजी ने ऐसा कहा तो उसकी आँखों से झर-झर आँसू बहने लग गये! वह जब छोटी बच्ची थी, तब वह महाराजजी के सामने खेला करती थी। अब बड़ी हो गयी, विवाह हो गया तो ससुराल में आ गयी । उसके मन में महाराजजी के प्रति बाप-दादे की तरह पूज्य भाव था । अब उसने महाराजजी के सामने अपनी शिकायत सुनी तो वह घबरा गयी और रोने लग गयी। महाराजजी ने आश्वासन दिया तो वह बोली-'महाराजजी! मैंने कोई कसूर तो किया नहीं। मैं सास को दुःख नहीं देती हूँ, फिर भी उनको मेरा काम पसन्द नहीं आता। मैं क्या करूँ ? सास बिना कारण मेरे से लड़ती है!" बहू तो कहती है कि सास लड़ती है और सास कहती है कि बहू लड़ती है! लड़ाई कम-से-कम दो आदमियों में होती है। अकेले में लड़ाई नहीं होती। सैकड़ों-हजारों आदमी मिलकर लड़ाई कर सकते हैं, पर अकेला आदमी लड़ाई नहीं कर सकता। दो आदमी लड़ते हैं तो एक कहता है कि वह लड़ाई करता है और दूसरा कहता है कि वह लड़ाई करता है। अपना अवगुण अपने को नहीं दीखता। महाराजजी ने कहा- ' बेटी ! तू घबरा मत। मैं एक ऐसा यन्त्र बनाकर देता हूँ, जिससे लड़ाई मिट जायगी।' वहाँ उसका देवर खड़ा था। उसको महाराजजी ने कागज, कलम, दवात और एक तावीज लाने के लिये कहा। वह जाकर चारों चीजें ले आया । महाराजजी ने कागज के एक टुकड़े पर कुछ लिख दिया और उसको समेटकर तावीज में बन्द कर दिया। महाराजजी- 'बेटी ! यह तावीज तू बाँध ले। तेरे घर की लड़ाई मिट जायगी। परन्तु इसके साथ तेरे को मेरी बात माननी पड़ेगी। बहू-' हाँ महाराज जी! आप जैसा कहोगे, वैसा ही करूँगी। " महाराजजी-'दो बातें हैं। एक तो सास कोई बात कहे तो सामने मत बोलना और दूसरा, सास जो काम कहे, चट उठकर कर देना। इन दो बातों का तू पालन कर लेगी तो यह यन्त्र सिद्ध हो जायगा। बहू-'महाराजजी! कितना दिन करना पड़ेगा ?' महाराज जी- 'कम-से-कम बारह महीने पालन कर लिया तो सब काम ठीक हो जायगा। पर बीच में कभी भूल हो गयी तो उसी दिन से फिर बारह महीने गिने जायँगे । उससे पहले जो दिन बीते, वे गिनती में नहीं आयेंगे।' बहू-'ठीक है, आप जैसा कहते हैं, वैसा ही करूँगी ।' बहूने तावीज लेकर बाँध लिया। महाराजजी ने चार-पाँच दिन और सत्संग किया, फिर दूसरे गाँव में चले गये उनका कोई नियम नहीं था कि इतने ही दिन यहाँ रुकेंगे हमारे यहाँ पहले ऐसे सन्तों की परम्परा चलती थी और लोगों पर उनका धार्मिक शासन चलता था। उनके शासन से लोग प्रभावित होते थे । लोग उन सन्तों को बड़े पूज्यभाव से देखते थे और उनकी आज्ञा का पालन करते थे। इससे गाँवों में बड़ी शान्ति रहती थी। बहू महाराजजी के बताये नियमों का पालन करने लगी। सास कोई काम कहती तो वह चट हाथ जोड़कर हाजिर हो जाती थी और सामने नहीं बोलती थी। सास ने मन में विचार किया कि महाराजजी का यन्त्र बड़ा विलक्षण है! देखो, एक दिन में ही बहू सुधर गयी! घर में बड़ी शान्ति हो गयी । घरवाले भी सब राजी हो गये। सास-बहू आपस में प्रेम से रहने लगीं। बहू आज्ञा माने तो वह सास को बेटी से भी अधिक प्यारी लगती है; क्योंकि बेटी तो थोड़े दिन घर पर रहती है, फिर अपने घर चली जाती है, पर बहू तो सदा ही पास में रहती है। खटपट तो तब होती है, जब वह सास के सामने बोल दे और उसका कहना नहीं करे। कुछ दिनों के बाद महाराजजी फिर आये तो उन्होंने पूछा- 'माताजी! ठीक है न ?' वह बोली - 'महाराज जी ! आपकी कृपा से बहुत ठीक है! बहू सुधर गयी है।' बहू से पूछा बोली-'महाराज जी! एक दिन मेरे से गलती हो गयी, मैं सास के सामने बोल गयी!' महाराजजी ने कहा- महीने गिने जायँगे, पहले वाले दिन गिनती में नहीं आयेंगे। एकादशी के दिन अन्न का एक दाना भी खा ले तो व्रत भंग हो जाता है!' बहू बोली-'ठीक है महाराज जी ! अब मैं ध्यान रखूँगी।' इस तरह डेढ़-दो वर्षों में उसके बारह महीने पूरे हो गये। सास-बहू में परस्पर बड़ा प्रेम हो गया। दो-ढाई वर्ष बीतने पर महाराज जी फिर उस गाँव में आये और उनसे बोले कि 'एक दिन हम तुम्हारे घर भिक्षा करेंगे। ' वे बहुत राजी हुए। महाराज जी बड़े त्यागी सन्त थे । वे दो-चार घरों से भिक्षा लेकर खाते थे। कपड़े फट जाते थे तो कोई ज्यादा आग्रह करता तो कपड़ा ले लेते थे। रुपयों-पैसों का कोई काम ही नहीं था। जब वे उनके घर भिक्षा के लिये गये तो बहुत-से लोग इकट्ठा हो गये कि महाराज जी आये हैं, सत्संग सुनायेंगे महाराजजी ने भिक्षा की और सत्संग सुनाया। फिर कहा कि 'दूसरे घरों के जो लोग आये हैं, उनको भेज दो । केवल आपके घरवाले ही रहें, आपसे एक बात कहनी है ।' घरवालों ने हाथ जोड़कर सबसे कह दिया कि 'भाई, अब सत्संग हो गया, अब आप सब लोग जाओ ।' सब लोग चले गये। घरवाले महाराजजी के पास आकर बैठ गये। महाराजजी बोले कि 'मैंने जो तावीज बनाकर दी थी, उसको लाओ। उन्होंने तावीज लाकर महाराजजी के सामने रख दी। महाराजजी ने कहा कि 'इसको खोलकर पढ़ो, इसमें क्या लिखा है?' उन्होंने तावीज के भीतर रखा कागज खोलकर पढ़ा। उसमें लिखा था- 'सास-बहू राजी तो साधु को क्या और सास-बहू नाराज तो साधु को क्या!' महाराजजी बोले-'सास-बहू शान्ति से रहें तो हमें क्या मतलब और रोजाना आपसमें लड़ें तो हमें क्या मतलब ? हमारा मतलब तो यह है कि तुम्हारे घर में शान्ति, आनन्द रहे। यह शक्ति यन्त्र में नहीं है। यह शक्ति इस बातमें है कि सामने न बोले और जैसा कहे, वैसा कर दे। देखो, दूसरा कोई जन्तर-मन्तर की बात कहे कि हमें देवता सिद्ध है, हम तुम्हारे को ऐसा कर देंगे, वैसा कर देंगे तो डरना नहीं! इसीलिये तुमको यन्त्र खोलकर दिखाया है। जन्तर-मन्तर को मैं नहीं मानता । परन्तु तुम्हारे को मेरी बात पर विश्वास हो जाय, इसलिये यन्त्र बनाकर दिया है। बड़ों के सामने बोलना नहीं और उनकी आज्ञा का पालन करना-इन दो बातों का घर के सभी लोग पालन करें तो आपके लोक और परलोक दोनों सुधर जायँगे। कभी सास कोई ऐसा काम करने को कह दे, जिससे आगे नुकसान दीखता हो तो हाथ जोड़कर खड़ी हो जाय । वह पूछे कि खड़ी क्यों है, तो कहे कि आपका काम तो मैं कर दूँगी, पर इससे बिगाड़ हो जायगा। वह कहे कि 'नहीं-नहीं, यह काम करना है' तो वैसा कर दे। अगर काम बिगड़ जाय तो शेखी न बघारे कि देखो, मैंने तो पहले ही कह दिया था, पर आपने माना नहीं! प्रत्युत बड़ी नम्रता, सरलता, निरभिमानता रखे।' महाराजजीकी इन बातों का सब पर बड़ा असर पड़ा। सब भाई-बहनों से प्रार्थना है कि आपलोग भी आज इस विलक्षण यन्त्र को धारण कर लें कि बड़ों के सामने नहीं बोलेंगे, उनका तिरस्कार, अपमान, अवहेलना नहीं करेंगे और वे जैसा कहेंगे, वैसा कर देंगे । फिर आपके घरों में भी शान्ति, आनन्द हो जायगा। 〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️ #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #☝आज का ज्ञान
🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स - आज का अमृत दमनखमनअरदीनतb ಟತಪಟತಟತ] कहेकबीरवहीबडुफछ जिकाबड्ास्वभाव०० संत कबीरदास ही कहते है की विनम्रता , क्षमाशीलता , दयालुता aTaTల का गुण ये सभी बड़े स्वभाव वालो के आभूषण और सभी का आदर करने होते है और ऐसे बड़े स्वभाव वाले व्यक्ति ही वास्तव में बड़े होते है। आज का अमृत दमनखमनअरदीनतb ಟತಪಟತಟತ] कहेकबीरवहीबडुफछ जिकाबड्ास्वभाव०० संत कबीरदास ही कहते है की विनम्रता , क्षमाशीलता , दयालुता aTaTల का गुण ये सभी बड़े स्वभाव वालो के आभूषण और सभी का आदर करने होते है और ऐसे बड़े स्वभाव वाले व्यक्ति ही वास्तव में बड़े होते है। - ShareChat
#🪔सोमवती अमावस्या🙏📿 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय 🙏 🗓️ सोमवती अमावस्या: 15 जून 2026, सोमवार 🗓️ अमावस्या तिथि: 14 जून दोपहर 12:19 बजे से 15 जून सुबह 08:23 बजे तक सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है। यह दिन स्नान, दान, जप, पितृ स्मरण और भगवान विष्णु की आराधना के लिए विशेष पवित्र माना जाता है। इस दिन प्रातः स्नान के बाद शांत मन से भगवान विष्णु का स्मरण करें। पीपल वृक्ष की पूजा करें, जल अर्पित करें और श्रद्धा अनुसार पीपल की परिक्रमा परिक्रमा करें। इस दिन पितरों की शांति के लिए तर्पण, काले तिल, जौ, अन्न, जल या वस्त्र का दान शुभ माना गया है। सोमवती अमावस्या हमें अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता, सेवा और संयम का संदेश देती है।
🪔सोमवती अमावस्या🙏📿 - सोमवती अमावस्या कीआपसबको हार्दिकशुभकामनाएं। सोमवती अमावस्या कीआपसबको हार्दिकशुभकामनाएं। - ShareChat
*सोमवती अमावस्या 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत कथा और उपाय* सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और पितरों की पूजा करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। मान्यता है कि सोमवती अमावस्या के दिन स्नान, दान, जप, तप और पीपल पूजन करने से जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स https://www.radheradheje.com/somvati-amavasya-2026-date-shubh-muhurat-puja-vidhi-vrat-katha/
*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 15 जून 2026* *⛅दिन - सोमवार* *⛅विक्रम संवत् - 2083* *⛅अयन - उत्तरायण* *⛅ऋतु - ग्रीष्म* *⛅मास - अधिक ज्येष्ठ* *⛅पक्ष - कृष्ण* *⛅तिथि - अमावस्या सुबह 08:23 तक, तत्पश्चात् प्रतिपदा 16 जून प्रातः 4: 30 तक तत्पश्चात् द्वितीया* *⛅नक्षत्र - मृगशिरा शाम 07:08 तक तत्पश्चात् आर्द्रा* *⛅योग - शूल सुबह 08:56 तक, तत्पश्चात् गण्ड 16 जून प्रातः 04:39 तक तत्पश्चात् वृद्धि* *⛅राहुकाल - प्रातः 07:24 से सुबह 09:05 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 05:41* *⛅सूर्यास्त - 07:14 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - पूर्व दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:17 से प्रातः 04:59 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:00 से दोपहर 12:55 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:07 से मध्यरात्रि 12:48 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️ व्रत पर्व विवरण - सर्वार्थसिद्धि योग, अमृतसिद्धि योग, सोमवती अमावस्या (सूर्योदय से सुबह 08:23 तक), षडशीति‌ संक्रांति (पुण्यकाल: दोपहर 12:59 से सूर्यास्त तक)* *🌥️ विशेष - अमावस्या के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। प्रतिपदा को कूष्माण्ड (कुम्हड़ा, पेठा) न खाये, क्योंकि यह धन का नाश करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* Follow the RadheRadheje® channel on WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029VaARDIOAojYzV7E44245 #💮आज का पंचांग एवं मुहूर्त💫 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
💮आज का पंचांग एवं मुहूर्त💫 - ख्येष्ठ आज का पंचांग भास॰ अधिक पक्ष कृष्ण யயயradheradhejecom घ्रीष्म दविनु॰ सोष्मवार নিনক 15-06-2026 तिथि- अमावस्या (०८४२३ से प्रतिपद ) मुगशीर्षा नक्षत्र ؟ मृगशीर्षा नक्षत्र मुँगशीर्षा नक्षत्र बोग & वृषभ शूल (८४५५ सै गण्ड) E(08.23 ಈಸತಳ) करण राशि॰ वृुषभ (0८४४० से मिथ्नुन) ಇ್ಷ್ ٥؟ राशि- वुषभ(१२:५२ से शुभ मुहुर्त चौघडिया , दिन अमृत 0५४४२  ०७२४ शुभ राहकाल 0७२४ . 09:05 3& यमर्घटा १०:४६ ಹIG 07824 - 09.0532 १२२७ अशुभ घुली काल १४४०९ 8109:05 १०:४६ शुभ 15:50 যীণ্ 0:46 ಖR5 12:00  12:273[[ १२:५४ शुभ उद्वेग१२२७ 896d12:54=13:493ன1 14.09 32 چ738015:37 चर१४:०9 15:50থুম १६:३१ अशुभ लाभ15:50 17:313[[ 05{26:285` २७१५२२ अशुभ प्रदोष १९:१३ १९:१३ शुभ अमृत १७:३१ 21818 2 आपका दिन शुभष और ्ंगलमय हो Radlbekadliee ख्येष्ठ आज का पंचांग भास॰ अधिक पक्ष कृष्ण யயயradheradhejecom घ्रीष्म दविनु॰ सोष्मवार নিনক 15-06-2026 तिथि- अमावस्या (०८४२३ से प्रतिपद ) मुगशीर्षा नक्षत्र ؟ मृगशीर्षा नक्षत्र मुँगशीर्षा नक्षत्र बोग & वृषभ शूल (८४५५ सै गण्ड) E(08.23 ಈಸತಳ) करण राशि॰ वृुषभ (0८४४० से मिथ्नुन) ಇ್ಷ್ ٥؟ राशि- वुषभ(१२:५२ से शुभ मुहुर्त चौघडिया , दिन अमृत 0५४४२  ०७२४ शुभ राहकाल 0७२४ . 09:05 3& यमर्घटा १०:४६ ಹIG 07824 - 09.0532 १२२७ अशुभ घुली काल १४४०९ 8109:05 १०:४६ शुभ 15:50 যীণ্ 0:46 ಖR5 12:00  12:273[[ १२:५४ शुभ उद्वेग१२२७ 896d12:54=13:493ன1 14.09 32 چ738015:37 चर१४:०9 15:50থুম १६:३१ अशुभ लाभ15:50 17:313[[ 05{26:285` २७१५२२ अशुभ प्रदोष १९:१३ १९:१३ शुभ अमृत १७:३१ 21818 2 आपका दिन शुभष और ्ंगलमय हो Radlbekadliee - ShareChat
*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 14 जून 2026* *⛅दिन - रविवार* *⛅विक्रम संवत् - 2083* *⛅अयन - उत्तरायण* *⛅ऋतु - ग्रीष्म* *⛅मास - अधिक ज्येष्ठ* *⛅पक्ष - कृष्ण* *⛅तिथि - चतुर्दशी दोपहर 12:19 तक तत्पश्चात् अमावस्या* *⛅नक्षत्र - रोहिणी रात्रि 10:14 तक तत्पश्चात् मृगशिरा* *⛅योग - धृति दोपहर 01:15 तक तत्पश्चात् शूल* *⛅राहुकाल - शाम 05:31 से शाम 07:12 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 05:41* *⛅सूर्यास्त - 07:14 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - पश्चिम दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:17 से प्रातः 04:59 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:00 से दोपहर 12:54 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:06 से मध्यरात्रि 12:48 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️व्रत पर्व विवरण - दर्श अमावस्या* *🌥️विशेष -‌ चतुर्दशी व अमावस्या के दिन स्त्री - सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* Follow the RadheRadheje® channel on WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029VaARDIOAojYzV7E44245 #sunday #god #lordsurya #panchang #prosperity #healthylifestyle #keytosuccess #sadguru #blessings #mantra #jaishreeram #radheradheje #facebookviral #fbviral #trendingnow #💮आज का पंचांग एवं मुहूर्त💫 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
💮आज का पंचांग एवं मुहूर्त💫 - आज का पंचांग 58 मास॰ अधिक पक्ष- कृष्ण uuu.rqdherqdheje com 5g ரிச दिन॰ रविवार दिनाक॰ १४ ०६ २०२६ तिथि॰ चतुर्दशी ( २:१९ से अमावस्या नक्षत्र  रोहिणी घूर्द मृगशीर्षा মঃE नक्षत्र॰ रोहिणी ল্রীয়-ঘ্ূবি  करण (२:१९से चितुष्पद) থক্ুনী चन्द्र राशि॰ वृषभ gீ g शुभ मुहुर्त चौघडिया, दिन 3&105:42< 07:2333[[ राहकाल १७१३१ 19:12 3[ 43412:27 307:23=09:05&{ १४:०9 अशुभ घुली काल १५:५०  108462 ৫Iঙ09:05 1831 अभिजित १२:०० १२२७ शुभ अमृत १०:४६ १२५४ शुभ दूर मुहूर्त १७२४ - १८४१८ अशुभ 04809 গথুন eld 12.27 814:09 १५:५० शुभ 5{15:15 16:393& रोग १५:५० 96919:12 17:313_ 21.18 21 3چ117:31 19:123& आपका दिन शृभष और संगलमय हो Badidif@ आज का पंचांग 58 मास॰ अधिक पक्ष- कृष्ण uuu.rqdherqdheje com 5g ரிச दिन॰ रविवार दिनाक॰ १४ ०६ २०२६ तिथि॰ चतुर्दशी ( २:१९ से अमावस्या नक्षत्र  रोहिणी घूर्द मृगशीर्षा মঃE नक्षत्र॰ रोहिणी ল্রীয়-ঘ্ূবি  करण (२:१९से चितुष्पद) থক্ুনী चन्द्र राशि॰ वृषभ gீ g शुभ मुहुर्त चौघडिया, दिन 3&105:42< 07:2333[[ राहकाल १७१३१ 19:12 3[ 43412:27 307:23=09:05&{ १४:०9 अशुभ घुली काल १५:५०  108462 ৫Iঙ09:05 1831 अभिजित १२:०० १२२७ शुभ अमृत १०:४६ १२५४ शुभ दूर मुहूर्त १७२४ - १८४१८ अशुभ 04809 গথুন eld 12.27 814:09 १५:५० शुभ 5{15:15 16:393& रोग १५:५० 96919:12 17:313_ 21.18 21 3چ117:31 19:123& आपका दिन शृभष और संगलमय हो Badidif@ - ShareChat