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*वैशाख मास माहात्म्य: जानें वैशाख मास माहात्म्य अध्याय 13* वैशाख मास माहात्म्य अध्याय 13 (अन्तिम) इस अध्याय में:- वैशाख मास की अन्तिम तीन तिथियों की महत्ता तथा ग्रन्थ का उपसंहार #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स https://www.radheradheje.com/vaishakh-month-mahatmya-vaishakh-month-mahatmya-chapter-13/
*वैशाख मास माहात्म्य: जानें वैशाख मास माहात्म्य अध्याय 12* वैशाख मास माहात्म्य अध्याय – 12 इस अध्याय में:– वैशाख की अक्षय तृतीया और द्वादशी की महत्ता, द्वादशी के पुण्यदान से एक कुतिया का उद्धार #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स https://www.radheradheje.com/vaishakh-month-mahatmya-vaishakh-month-mahatmya-chapter-12/
*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 17 अप्रैल 2026* *⛅दिन - शुक्रवार* *⛅विक्रम संवत् - 2083* *⛅अयन - उत्तरायण* *⛅ऋतु - वसंत* *⛅मास - वैशाख* *⛅पक्ष - कृष्ण* *⛅तिथि - अमावस्या शाम 05:21 तक तत्पश्चात् प्रतिपदा* *⛅नक्षत्र - रेवती दोपहर 12:02 तक तत्पश्चात् अश्विनी* *⛅योग - वैधृति प्रातः 07:22 तक, तत्पश्चात् विष्कम्भ रात्रि 03:45 अप्रैल 18 तक, तत्पश्चात् प्रीति* *⛅राहुकाल - सुबह 10:51 से दोपहर 12:27 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 06:05* *⛅सूर्यास्त - 06:48 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - पश्चिम दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:35 से प्रातः 05:20 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:01 से दोपहर 12:52 (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:04 से मध्यरात्रि 12:49 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️व्रत पर्व विवरण - अमृतसिद्धि योग, सर्वार्थसिद्धि योग (अहो रात्रि), दर्श अमावस्या* *🌥️विशेष - अमावस्या और व्रत के दिन स्त्री सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* https://whatsapp.com/channel/0029VaARDIOAojYzV7E44245 *🧏‍♀️मुलतानी मिट्टी🧏‍♀️* #💮आज का पंचांग एवं मुहूर्त💫 *🔹मुलतानी मिट्टी से स्नान करने पर रोमकूप खुल जाते हैं । इससे रगड़कर स्नान करने पर जो लाभ होते हैं, साबुन से उसके एक प्रतिशत भी लाभ नहीं होते । स्फूर्ति और निरोगता चाहनेवालों को साबुन से बचकर मुलतानी मिट्टी से नहाना चाहिए ।* *🔹जिसको भी गर्मी हो, पित्त हो, आँखों में जलन होती हो वह मुलतानी मिट्टी का घोल बना के लगाये , थोड़ी देर बैठ जाय, फिर नहाये तो शरीर की गर्मी निकल जायेगी, फायदा होगा ।* *🔹मुलतानी मिट्टी और आलू का रस मिलाकर चेहरे को लगाओ, चेहरे पर सौंदर्य और निखार आयेगा ।* #friday #goddess #laxmiji #panchang #prosperity #healthylifestyle #keytosuccess #sadguru #blessings #mantra #jaishreeram #radheradheje #facebookviral #fbviral #trendingnow
💮आज का पंचांग एवं मुहूर्त💫 - आज का पंचांग वैशाख, ٥ पक्ष  कृुष्ण wTadheradhejecom Rze वसंत शुक्रवार दिनांक- १७ 04 २०२६ तिथि- अमावस्या (१७:२१ से प्रतिपदा ) नक्षत्र  रैवती सूर्य नक्षत्र- अश्विनी चंद्रनक्षत्र॰  रेवती बोग॰ { ٩٩ वैधुति (O७:२१ सेविश्कुम्भ) करणा = चत्नुष्पद (O६:४९ से नाग ) चन्द्र राशि॰ मीन (१२:०१ से मेष ) सूर्य राशि॰ मेष मुहूर्त शुभ चोघडिया , दिन राहूकाल १०:५१ 12:27ঔথঙ यम घंटा १५:३७ - १७४१२ अशुभ चर0६:०६ - 0७:४१ शुभ घुली काल 0७:४१ 09816 0981689 @Iಚ07821 अभिजित १२:०१ अमृत 0९:१६ - १०:५१ शुभ १२:५२ शुभ ಷ್ಾತ೯ನ್ೆ 08.38 - / 0९:२९ अशुभ १२:२७ अशुभ काल १०8५१ दूर मुहूर्त १२:५२ १३४४३ अशुभ ೩೫ 12:27 १४:०२ शुभ रोग १४४०२ प्रदाष १८४४७ २1:०३ शुभ १५:३७ अशुभ र्घड मूल अहोरात्रअशुभ ತಕ[ 15837 १७४१२ अशुभ ರೆತಾ್ 06:06' ೩೫ १२:०२ अशुभ ೂ17812 = 18827 आपका दिन शुभष और मंगलमय हो RadbeRadhiefe आज का पंचांग वैशाख, ٥ पक्ष  कृुष्ण wTadheradhejecom Rze वसंत शुक्रवार दिनांक- १७ 04 २०२६ तिथि- अमावस्या (१७:२१ से प्रतिपदा ) नक्षत्र  रैवती सूर्य नक्षत्र- अश्विनी चंद्रनक्षत्र॰  रेवती बोग॰ { ٩٩ वैधुति (O७:२१ सेविश्कुम्भ) करणा = चत्नुष्पद (O६:४९ से नाग ) चन्द्र राशि॰ मीन (१२:०१ से मेष ) सूर्य राशि॰ मेष मुहूर्त शुभ चोघडिया , दिन राहूकाल १०:५१ 12:27ঔথঙ यम घंटा १५:३७ - १७४१२ अशुभ चर0६:०६ - 0७:४१ शुभ घुली काल 0७:४१ 09816 0981689 @Iಚ07821 अभिजित १२:०१ अमृत 0९:१६ - १०:५१ शुभ १२:५२ शुभ ಷ್ಾತ೯ನ್ೆ 08.38 - / 0९:२९ अशुभ १२:२७ अशुभ काल १०8५१ दूर मुहूर्त १२:५२ १३४४३ अशुभ ೩೫ 12:27 १४:०२ शुभ रोग १४४०२ प्रदाष १८४४७ २1:०३ शुभ १५:३७ अशुभ र्घड मूल अहोरात्रअशुभ ತಕ[ 15837 १७४१२ अशुभ ರೆತಾ್ 06:06' ೩೫ १२:०२ अशुभ ೂ17812 = 18827 आपका दिन शुभष और मंगलमय हो RadbeRadhiefe - ShareChat
आशीर्वाद में बहुत बड़ा बल है...... बहुत ही ज्ञानवर्धक कथा जरूर पढें! 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ सच्चे ह्रदय से निकला आशीर्वाद हमारे दुर्भाग्य को भी सौभाग्य में बदल सकता है ! एक महिला हुई है सावित्री ; राम नाम के रंग में रंगी परम अनुरक्ता ! घर के समीप ही एक आश्रम है जहा एक परम संत निवास किया करते है नित्य-प्रति वहा जा कर के तो झाडू पोंच्चा लगाया करती है ! संत महात्मा के चरण छू कर के उनका सम्मान किया करती है ! आज भाग्य का कुठाराघात हुआ है ;पति की मृत्यु हो गयी है !शव-यात्रा शमशान की ओर प्रस्थान कर रही है ;आगे-२ पुरुष अर्थी उठाये जा रहे है पीछे-२ विलाप करती महिलाये चल रही है ! अचानक ही सावित्री को वही संत-महात्मा सड़क की दूसरी ओर से आते हुए दिखाई दिये है ;महिलाओ की भीड़ से हट कर के तो आदत के अनुरूप सावित्री ने संत-महात्मा के श्री चरणों को छुआ है ! -सौभाग्यवती भव !यह आशीर्वाद संत-महात्मा ने सावित्री के सिर पर हाथ रख कर के तो दिया है ;यह सुनकर तो सावित्री की आँखों से आंसू बह निकले है ! -क्या हुआ है बेटी ? महाराज आप ने सौभाग्यवती होने का जो आशीर्वाद दिया है वह व्यर्थ ही है ;मेरे सौभाग्य को तो शमशान में जलाने के लिए ले जाया जा रहा है ! संत-महात्मा मुस्कराते हुए कहते है -बेटी जब से परमात्मा ने मुझे अपनाया है तब से इस मुख से कभी असत्य वचन नहीं निकला ! आज भी इस मुख से तुम्हारे लिये जो आशीर्वाद निकला है उसमे भी प्रभु ही की कोई लीला रही होगी साधकजनों सत्य मानियेगा ;सावित्री के पति को जब जलाने के लिए अर्थी पर लिटाया गया है तो वह जीवित उठ खड़ा हुआ है ! संत-महात्मा के आशीर्वाद का प्रताप कहियेगा इसे साधकजनों या सावित्री की विनम्रता का जो मरा हुआ व्यक्ति उठ खड़ा हुआ है !सावित्री की विनम्रता ने ही मानो संत-महात्मा को आशीर्वाद देने के लिए विवश किया है ! अतःअपने माता-पिता बड़े-बजुर्गो एवं गुरुजनों के आगे झुकना सीखियेगा !इन का ह्रदय से दिया हुआ आशीर्वाद हमारे जीवन की दशा और दिशा दोनों को बदल कर रख सकता है ! बच्चा निःस्वार्थी है तो प्यारा लगता है, संत निःस्वार्थी हैं तो प्यारे लगते हैं, भक्त निःस्वार्थी हैं तो प्यारे लगते हैं और स्वार्थी लोगों को तो देखकर जान छुड़ाने की रुचि होती है । अतः जीवन में निःस्वार्थ सेवा, निःस्वार्थ भगवान के नाम का जप ले आओ। 🌷नारायण नारायण 🌷 🙏🏻 लक्ष्मीनारायण भगवान की जय 🙏🏻 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ #☝आज का ज्ञान
☝आज का ज्ञान - आज का अमृत गाँठी होय सो हाथ कर, हाथ होय सो देह| आगे हाट न बानिया, लेना होय सो लेह। अर्थः जो गाँठ में बाँध रखा है॰ उसे हाथ में ला, और जो हाथ में हो उसे परोपकार में लगा| नर-शरीर के पश्चात् इतर खानियों में बाजार-व्यापारी कोई नहीं है, लेना हो सो यही ले-लो। आज का अमृत गाँठी होय सो हाथ कर, हाथ होय सो देह| आगे हाट न बानिया, लेना होय सो लेह। अर्थः जो गाँठ में बाँध रखा है॰ उसे हाथ में ला, और जो हाथ में हो उसे परोपकार में लगा| नर-शरीर के पश्चात् इतर खानियों में बाजार-व्यापारी कोई नहीं है, लेना हो सो यही ले-लो। - ShareChat
पुंडलिक और भगवान विठ्ठल की अमर पौराणिक कथा 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ प्राचीन भारत की पुण्यभूमि में, भीमा नदी के तट पर एक छोटा-सा ग्राम था, जहाँ भक्ति, सेवा और संस्कारों की सुगंध चारों ओर फैली रहती थी। उसी ग्राम में पुंडलिक नाम का एक युवक निवास करता था। बाल्यकाल में पुंडलिक अत्यन्त उग्र स्वभाव का था। उसे संसारिक सुखों का मोह अधिक था और माता-पिता की सेवा में उसका मन नहीं लगता था। वह व्यापार और भोग-विलास में लिप्त रहता था, और वृद्ध माता-पिता की पीड़ा को समझ नहीं पाता था। माता-पिता मौन रहकर उसके व्यवहार को सहते रहते, पर उनके हृदय में पीड़ा का सागर उमड़ता रहता। समय बीतता गया और पुंडलिक का जीवन मार्ग भटकता चला गया, परंतु भाग्य को कुछ और ही स्वीकार था। एक दिन पुंडलिक किसी तीर्थ यात्रा पर निकला। मार्ग में उसे एक साधु मिले जिनके मुख पर दिव्य तेज था। पुंडलिक ने देखा कि वे साधु अपने वृद्ध माता-पिता को अपने कंधों पर बैठाकर ले जा रहे थे। जब भी माता-पिता को प्यास लगती, साधु स्वयं दौड़कर जल लाते, जब थकान होती तो उन्हें सुलाकर अपने शरीर को कष्ट देते। यह दृश्य पुंडलिक के हृदय में तीर की भाँति लगा। उसने साधु से पूछा — “आप इतना कष्ट क्यों सहते हैं?” साधु मुस्कराए और बोले — “माता-पिता ही मेरे साक्षात भगवान हैं। उनकी सेवा में ही मोक्ष छिपा है।” यह वाक्य पुंडलिक के जीवन की दिशा बदलने वाला सिद्ध हुआ। पुंडलिक का अंतःकरण काँप उठा। उसे अपने पुराने व्यवहार पर लज्जा आई। उसकी आँखों से आँसू बहने लगे। उसने वहीं प्रण लिया कि अब जीवन भर माता-पिता की सेवा ही उसका धर्म होगा। वह तुरंत अपने ग्राम लौटा और माता- पिता के चरणों में गिर पड़ा। उसने उनसे क्षमा माँगी और बोला — “आज तक मैं अंधा था, अब मुझे सत्य दिखाई दे रहा है।” माता-पिता का हृदय भर आया। उन्होंने पुत्र को आशीर्वाद दिया। उसी दिन से पुंडलिक का जीवन बदल गया। वह स्वयं भोजन कराने लगा, स्नान कराता, सेवा करता और दिन-रात माता-पिता के चरणों में ही अपनी भक्ति खोजने लगा। एक प्रातःकाल का समय था। भीमा नदी शांत बह रही थी। सूर्य की किरणें मंदिरों की दीवारों से टकराकर स्वर्णिम आभा फैला रही थीं। उसी समय पुंडलिक अपने माता-पिता को शय्या पर लिटाकर उनके चरण दबा रहा था। माता-पिता वृद्ध थे, शरीर दुर्बल था और नींद में भी उनके मुख पर संतोष की झलक थी। पुंडलिक की आँखों में करुणा थी और हाथों में सेवा का ताप। तभी उस पावन घाट पर स्वयं भगवान विठ्ठल प्रकट हुए। उनके शरीर से दिव्य प्रकाश निकल रहा था, मुकुट दमक रहा था, कंठ में पुष्पमाला और पीताम्बर लहरा रहा था। पूरा वातावरण जैसे साक्षात वैकुण्ठ बन गया। भगवान विठ्ठल पुंडलिक के सामने खड़े हुए। उन्होंने कोमल स्वर में कहा — “पुंडलिक, मैं तुम्हारी भक्ति से प्रसन्न होकर स्वयं आया हूँ। उठो, मेरा दर्शन करो।” परंतु पुंडलिक उस समय माता-पिता के चरण दबा रहा था। उसने सिर उठाकर देखा, पर हाथ नहीं हटाए। विनम्र स्वर में बोला — “हे प्रभु, आप आए यह मेरा सौभाग्य है, पर अभी मेरे माता-पिता विश्राम कर रहे हैं। उनकी सेवा अधूरी छोड़कर मैं उठ नहीं सकता।” कहते हुए पुंडलिक ने पास पड़ी हुई एक ईंट भगवान की ओर सरका दी और बोला — “प्रभु, कृपया इस पर खड़े होकर प्रतीक्षा करें।” यह दृश्य देखकर स्वयं भगवान विठ्ठल मुस्कुरा उठे। संसार में जहाँ लोग भगवान को बुलाने के लिए तप करते हैं, वहाँ पुंडलिक ने भगवान को प्रतीक्षा करवा दी, वह भी अहंकार से नहीं बल्कि सेवा-भाव से। भगवान ने उस ईंट को स्वीकार किया और उस पर खड़े हो गए। उनके हाथ कटि पर टिके और मुख पर वात्सल्य का प्रकाश फैल गया। चारों ओर देवताओं ने पुष्पवर्षा की। आकाश से स्वर गूंज उठा — “धन्य है पुंडलिक की भक्ति।” भगवान ने कहा — “पुंडलिक, आज तुमने सिद्ध कर दिया कि माता-पिता की सेवा ही सच्ची पूजा है। जो माता-पिता को प्रसन्न करता है, वही मुझे प्रसन्न करता है।” कुछ समय बाद जब माता-पिता जागे, पुंडलिक उनके चरणों में बैठा था और सामने स्वयं भगवान विठ्ठल खड़े थे। माता-पिता चकित रह गए। उन्होंने काँपते स्वर में भगवान को प्रणाम किया। भगवान विठ्ठल ने उन्हें आशीर्वाद दिया और बोले — “तुम्हारा पुत्र संसार के लिए आदर्श बनेगा।” भगवान ने पुंडलिक से वर माँगने को कहा। पुंडलिक ने हाथ जोड़कर कहा — “हे प्रभु, आप यहीं इस भीमा तट पर निवास करें ताकि हर भक्त को यह शिक्षा मिले कि भक्ति पहले कर्तव्य है।” भगवान विठ्ठल ने उसकी प्रार्थना स्वीकार की और उसी स्थान पर पांडुरंग विठोबा के रूप में स्थिर हो गए। तभी से पंढरपुर धाम की महिमा फैली। लाखों भक्त वहाँ जाते हैं और कहते हैं — “पुंडलिक वरदा हरि विठ्ठल।” भगवान आज भी ईंट पर खड़े हैं, यह संकेत देते हुए कि वे अपने भक्तों की सेवा-भावना के आगे स्वयं झुक जाते हैं। पुंडलिक की कथा केवल एक कहानी नहीं, बल्कि जीवन का सत्य है कि भगवान मंदिरों में नहीं, बल्कि माता-पिता की सेवा में बसते हैं। जिसने माता-पिता को सुख दिया, उसने संसार के समस्त तीर्थों का फल पा लिया। पुंडलिक के जीवन से यह संदेश मिलता है कि भक्ति केवल मंत्रों से नहीं होती, बल्कि त्याग, करुणा और कर्तव्य से होती है। भगवान विठ्ठल आज भी अपने भक्तों को यही सिखाते हैं कि पहले मानव धर्म निभाओ, फिर देवत्व अपने आप प्राप्त होगा। भीमा नदी आज भी उस दिन की साक्षी है, मंदिरों की दीवारें आज भी पुंडलिक की कथा सुनाती हैं और विठोबा आज भी अपने भक्तों के लिए ईंट पर खड़े प्रतीक्षा करते हैं। 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #😊कृष्ण कथाएं #🙏 राधा रानी
🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स - विठ्ठल पुंडलिक और भगवान की अमर पौराणिक कथा विठ्ठल पुंडलिक और भगवान की अमर पौराणिक कथा - ShareChat
भगवान कृष्ण की 8 पत्नियों और 80 पुत्रों के बारे में रोचक जानकारी 🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸 भगवान श्री कृष्ण की 8 पत्नियां थी। प्रत्येक पत्नी से उन्हें 10 पुत्रों की प्राप्ति हुई थी इस तरह से उनके 80 पुत्र थे। आज हम आपको श्री कृष्ण की 8 रानियों और 80 पुत्रों के बारे में बताएँगे। यह भी पढ़े- कैसे खत्म हुआ श्रीकृष्ण सहित पूरा यदुवंश? 1. रुक्मणी 🔸🔹🔹🔸 महाभारत अनुसार कृष्ण ने रुक्मणि का हरण कर उनसे विवाह किया था। विदर्भ के राजा भीष्मक की पुत्री रुक्मणि भगवान कृष्ण से प्रेम करती थी और उनसे विवाह करना चाहती थी। रुक्मणि के पांच भाई थे- रुक्म, रुक्मरथ, रुक्मबाहु, रुक्मकेस तथा रुक्ममाली। रुक्मणि सर्वगुण संपन्न तथा अति सुन्दरी थी। उसके माता-पिता उसका विवाह कृष्ण के साथ करना चाहते थे किंतु रुक्म चाहता था कि उसकी बहन का विवाह चेदिराज शिशुपाल के साथ हो। यह कारण था कि कृष्ण को रुक्मणि का हरण कर उनसे विवाह करना पड़ा। रूक्मिणी के पुत्रों के ये नाम थे- प्रद्युम्न, चारूदेष्ण, सुदेष्ण, चारूदेह, सुचारू, विचारू, चारू, चरूगुप्त, भद्रचारू, चारूचंद्र। 2. सत्यभामा 🔸🔹🔹🔸 सत्यभामा, सत्राजीत की पुत्री थी, सत्राजीत को शक्तिसेन के नाम से भी जानते है। सत्यभामा के पुत्रों के नाम थे- भानु, सुभानु, स्वरभानु, प्रभानु, भानुमान, चंद्रभानु, वृहद्भानु, अतिभानु, श्रीभानु और प्रतिभानु। श्यामा श्याम तत्वज्ञान परिवार हमारा उदेश्य प्रभु तत्वज्ञान को जन जन तक पहुँचाना l 3. सत्या 🔸🔹🔸 सत्या राजा कौशल की पुत्री थी। सत्या के बेटों के नाम ये थे- वीर, अश्वसेन, चंद्र, चित्रगु, वेगवान, वृष, आम, शंकु, वसु और कुंत। 4. जाम्बवंती 🔸🔹🔹🔸 जाम्बवंती, निषाद राज जाम्बवन की पुत्री थी। जाम्बवान उन गिने चुने पौराणिक पात्रों में से एक है जो रामायण और महाभारत दोनों समय उपस्तिथ थे। जाम्बवंती के पुत्र ये थे- साम्ब, सुमित्र, पुरूजित, शतजित, सहस्रजित, विजय, चित्रकेतु, वसुमान, द्रविड़ व क्रतु। 5. कालिंदी 🔸🔹🔹🔸 कृष्ण की पत्नी कालिंदी, खांडव वन की रहने वाली थी। यही पर पांडवो का इंद्रप्रस्थ बना था। कालिंदी के पुत्रों के नाम ये थे- श्रुत, कवि, वृष, वीर, सुबाहु, भद्र, शांति, दर्श, पूर्णमास एवं सोमक। 6. लक्ष्मणा 🔸🔹🔹🔸 मद्र कन्या लक्ष्मणा, वृहत्सेना की पुत्री थी। लक्ष्मणा के पुत्रों के नाम थे- प्रघोष, गात्रवान, सिंह, बल, प्रबल, ऊध्र्वग, महाशक्ति, सह, ओज एवं अपराजित। 7. मित्रविंदा 🔸🔹🔹🔸 मित्रविंदा, अवन्तिका की राजकुमारी थी। मित्रविंदा के पुत्रों के नाम – वृक, हर्ष, अनिल, गृध, वर्धन, अन्नाद, महांश, पावन, वहिन तथा क्षुधि। 8. भद्रा 🔸🔹🔸 कृष्ण की अंतिम पत्नी, भद्रा केकय कन्या थी। ये थे भद्रा के पुत्र – संग्रामजित, वृहत्सेन, शूर, प्रहरण, अरिजित, जय, सुभद्र, वाम, आयु और सत्यक। विशेष👉 इनके अलावा श्री कृष्ण की 16100 और पत्नियां बताई जाती है। इन 16100 कन्याओं को श्री कृष्ण ने नरकासुर राक्षस का वध कर मुक्त कराया था और अपने यहाँ आश्रय दिया था। इन सभी कन्याओं ने श्री कृष्ण को पति स्वरुप मान लिया था। 🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #😊कृष्ण कथाएं #🙏 राधा रानी
🌸 जय श्री कृष्ण😇 - भगवान कृष्ण की 8 पत्नियों 31ా 80 पुत्रों के 4 रोचक जानकारी भगवान कृष्ण की 8 पत्नियों 31ా 80 पुत्रों के 4 रोचक जानकारी - ShareChat
*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 16 अप्रैल 2026* *⛅दिन - गुरुवार* *⛅विक्रम संवत् - 2083* *⛅अयन - उत्तरायण* *⛅ऋतु - वसंत* *⛅मास - वैशाख* *⛅पक्ष - कृष्ण* *⛅तिथि - चतुर्दशी रात्रि 08:11 तक तत्पश्चात् अमावस्या* *⛅नक्षत्र - उत्तर भाद्रपद दोपहर 01:59 तक तत्पश्चात् रेवती* *⛅योग - इन्द्र सुबह 10:38 तक तत्पश्चात् वैधृति* *⛅राहुकाल - दोपहर 02:02 से दोपहर 03:37 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 06:06* *⛅सूर्यास्त - 06:48 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - दक्षिण दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:35 से प्रातः 05:20 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:01 से दोपहर 12:52 (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:04 से मध्यरात्रि 12:49 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️व्रत पर्व विवरण - सर्वार्थसिद्धि योग (दोपहर 01:59 से प्रातः 06:05 अप्रैल 17 तक)* *🌥️विशेष - चतुर्दशी, अमावस्या और व्रत के दिन स्त्री सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* https://whatsapp.com/channel/0029VaARDIOAojYzV7E44245 *🔹घर में सुख-शांति के लिए🔹* #🌟देखिए खास ज्योतिष उपाय #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #💮आज का पंचांग एवं मुहूर्त💫 *🔸वास्तुशास्त्र के नियमों के उचित पालन से शरीर की जैव-रासायनिक क्रिया को संतुलित रखने में सहायता मिलती है ।* *🏡 एक घर में होना चाहिए एक मंदिर। एक घर में अलग-अलग पूजाघर बनवाने की बजाए मिल-जुलकर एक मंदिर बनवाए। एक घर में कई मंदिर होने पर वहां के सदस्यों को मानसिक, शारीरिक और आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।* *🔸घर या वास्तु के मुख्य दरवाजे में देहरी (दहलीज) लगाने से अनेक अनिष्टकारी शक्तियाँ प्रवेश नहीं कर पातीं व दूर रहती हैं । प्रतिदिन सुबह मुख्य द्वार के सामने हल्दी, कुमकुम व गोमूत्र मिश्रित गोबर से स्वस्तिक, कलश आदि आकारों में रंगोली बनाकर देहरी (दहलीज) एवं रंगोली की पूजा कर परमेश्वर से प्रार्थना करनी चाहिए कि 'हे ईश्वर ! आप मेरे घर व स्वास्थ्य की अनिष्ट शक्तियों से रक्षा करें ।'* *🔸प्रवेश-द्वार के ऊपर नीम, आम, अशोक आदि के पत्ते का तोरण (बंदनवार) बाँधना मंगलकारी है ।* *🔸 मुख्य द्वार के सामने भोजन-कक्ष, रसोईघर या खाने की मेज नहीं होनी चाहिए ।* *🔸मुख्य द्वार के अलावा पूजाघर, भोजन-कक्ष एवं तिजोरी के कमरे के दरवाजे पर भी देहरी (दहलीज) अवश्य लगवानी चाहिए ।* *🔸भूमि-पूजन, वास्तु-शांति, गृह-प्रवेश आदि सामान्यतः शनिवार एवं मंगलवार को नहीं करने चाहिए ।* *🔸गृहस्थियों को शयन-कक्ष में सफेद संगमरमर नहीं लगावाना चाहिए । इसे मन्दिर मे लगाना उचित है क्योंकि यह पवित्रता का द्योतक है ।* *🔸कार्यालय के कामकाज, अध्ययन आदि के लिए बैठने का स्थान छत की बीम के नीचे नहीं होना चाहिए क्योंकि इससे मानसिक दबाव रहता है ।* *🔸बीम के नीचे वाले स्थान में भोजन बनाना व करना नहीं चाहिए । इससे आर्थिक हानि हो सकती है । बीम के नीचे सोने से स्वास्थ्य में गड़बड़ होती है तथा नींद ठीक से नहीं आती ।* *🔸घर की रसोई हमेशा अग्नि कोण में हो, गैस चूल्हा भी अग्नि कोण (साऊथ ईस्ट) में, खाना पूर्व की ओर मुंह करके बनाएं, शैंक (बर्तन धोने वाला) हमेशा नार्थ ईस्ट (ईशान कोण) में रखें । शयन कक्ष या रसोई में रात को झूठे बर्तन मत छोड़ें । हमेशा धो-मांज कर रखें ।* *🔹घर में बरकत नहीं हो तो🔹* *💵 घर में बरकत नहीं होती तो खडी हल्दी की सात गाँठे और खड़ा नमक कपडे में बांध लें और कटोरी में रख दें घर के किसी भी कोने में, बरकत होगी |* *🔹कार्यों में सफलता-प्राप्ति हेतु🔹* *🔸जो व्यक्ति बार-बार प्रयत्नों के बावजूद सफलता प्राप्त न कर पा रहा हो अथवा सफलता-प्राप्ति के प्रति पूर्णतया निराश हो चुका हो, उसे प्रत्येक सोमवार को पीपल वृक्ष के नीचे सायंकाल के समय एक दीपक जला के उस वृक्ष की ५ परिक्रमा करनी चाहिए । इस प्रयोग को कुछ ही दिनों तक सम्पन्न करनेवाले को उसके कार्यों में धीरे-धीरे सफलता प्राप्त होने लगती है ।* #thursday #god #vishnubhagwan #panchang #prosperity #healthylifestyle #keytosuccess #sadguru #blessings #mantra #jaishreeram #radheradheje #facebookviral #fbviral #trendingnow
🌟देखिए खास ज्योतिष उपाय - आज का पंचांग वैशाख, ٥ पक्ष  कृुष्ण wwwradheradhejecom ऋतु- वसंत  gR दिनांक- १६=04 २०२६ तिथि- चतुर्दशी (२०:११ से अमावस्या ) नक्षत्र उत्तरभाद्रपदा सूर्य नक्षत्र- अश्विनी चंद्रनक्षत्र॰ उत्तरभाद्रपदा ল্লীন-মীন্ব্  विष्टि भद्र (०९१२५से शक्रुनी ) करण चन्द्र राशि- मीन शुभ मुहूर्त सूर्य राशि॰ मेष चोघडिया , दिन राहूकाल १४४०२ 15:37 31997 यम घंटा 0६:०७ 0७:४२ अशुभ गुली काल 09:१७  ೩೫ 06:07 07842 ೩೫ 00:52 ঘীণ্য 0842 अभिजित १२:०२ 09:१७ अशुभ १२:५२ शुभ 3&09817 दूर मुहूर्त १०:२० १०:५२ अशुभ ११:११ अशुभ चर 1०:५२ - १२:२७ शुभ दूर मुहूर्त १५:२५ - १६:१५ अशुभ १४:०२ शुभ @ाभ1227 ೯೫25:033 २६:३२* अशुभ अमृत १४:०२ १५:३७ शुभ प्रदोष १8४४७ २१:०३ शुभ ঘীভমুল 13858 १७४१२ अशुभ c1583 अहोरात्र अशुभ पंचक॰ अहोरात्र अशुभ ೩೫ 17812  १८:४७ शुभ आपका दिन शुभष और मंगलमय हो RadbeRadhiefe आज का पंचांग वैशाख, ٥ पक्ष  कृुष्ण wwwradheradhejecom ऋतु- वसंत  gR दिनांक- १६=04 २०२६ तिथि- चतुर्दशी (२०:११ से अमावस्या ) नक्षत्र उत्तरभाद्रपदा सूर्य नक्षत्र- अश्विनी चंद्रनक्षत्र॰ उत्तरभाद्रपदा ল্লীন-মীন্ব্  विष्टि भद्र (०९१२५से शक्रुनी ) करण चन्द्र राशि- मीन शुभ मुहूर्त सूर्य राशि॰ मेष चोघडिया , दिन राहूकाल १४४०२ 15:37 31997 यम घंटा 0६:०७ 0७:४२ अशुभ गुली काल 09:१७  ೩೫ 06:07 07842 ೩೫ 00:52 ঘীণ্য 0842 अभिजित १२:०२ 09:१७ अशुभ १२:५२ शुभ 3&09817 दूर मुहूर्त १०:२० १०:५२ अशुभ ११:११ अशुभ चर 1०:५२ - १२:२७ शुभ दूर मुहूर्त १५:२५ - १६:१५ अशुभ १४:०२ शुभ @ाभ1227 ೯೫25:033 २६:३२* अशुभ अमृत १४:०२ १५:३७ शुभ प्रदोष १8४४७ २१:०३ शुभ ঘীভমুল 13858 १७४१२ अशुभ c1583 अहोरात्र अशुभ पंचक॰ अहोरात्र अशुभ ೩೫ 17812  १८:४७ शुभ आपका दिन शुभष और मंगलमय हो RadbeRadhiefe - ShareChat
*वैशाख मास माहात्म्य: जानें वैशाख मास माहात्म्य अध्याय 11* वैशाखमास-माहात्म्य अध्याय 11 इस अध्याय में:- धर्मवर्ण की कथा, कलि की अवस्था का वर्णन, धर्मवर्ण और पितरों का संवाद एवं वैशाख की अमावास्या की श्रेष्ठता #🌟देखिए खास ज्योतिष उपाय #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स https://www.radheradheje.com/vaishakh-month-mahatmya-vaishakh-month-mahatmya-chapter-11/
*वैशाख मास माहात्म्य: जानें वैशाख मास माहात्म्य अध्याय 10 वैशाखमास-माहात्म्य अध्याय 10 इस अध्याय में:- वैशाख मास के माहात्म्य-श्रवण से सर्प के उद्धार और एक वैशाख धर्म के पालन तथा रामनाम-जप से व्याध का वाल्मीकि होना #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🌟देखिए खास ज्योतिष उपाय https://www.radheradheje.com/vaishakh-month-mahatmya-vaishakh-month-mahatmya-chapter-10/
एक आदमी ने बहुत ही सुंदर लड़की से ब्याह किया। वो उसे बहुत प्यार करता था। अचानक उस लड़की को चर्मरोग हो गया कारण वश उसकी सुंदरता कुरूपता में परिवर्तित होने लगी। अचानक एक दिन सफर में दुर्घटना से उस व्यक्ति के आँखों की रौशनी चली गई। दोनों पति-पत्नी की जिंदगी तकलीफों के बावजूद भी एक दूसरे के साथ प्रेम पूर्वक चल रही थी। दिन ब दिन पत्नी अपनी सुंदरता खो रही थी पर पति के देख न पाने के कारण उनके प्यार में कोई कमी नही आ रही थी । दोनों का दाम्पत्य जीवन बड़े प्यार से चल रहा था। रोग के बढ़ते रहने के कारण पत्नी की मृत्यु हो गई। पति को बहुत दुःख हुआ और उसने उसकी यादों के साथ जुड़ा होने के कारण उस शहर को छोड़ देने का विचार किया। उसके एक मित्र ने कहा अब तुम पत्नी के बिना सहारे अंजान जगह अकेले कैसे चल फिर पाओगे ? उसने कहा मैं अँधा होने का नाटक कर रहा था,क्यों की अगर मेरी पत्नी को ये पता चल जाता की मैं देख सकता हूँ तो उसे अपने रोग से ज्यादा कुरूपता पर दुःख होता और में उसे इतना प्यार करता था,की किसी भी हालत में उसे दुखी नही देख सकता था। वो एक बहुत ही अच्छी पत्नी थी और मैं उसे हमेशा खुश देखना चाहता था। सीख :: कभी कभी हमारे लिए भी अच्छा है कि हम कुछ मामलों में अंधे बने रहें, वही हमारी ख़ुशी का सबसे बड़ा कारण होगा। बहुत बार दांत जीभ को काट लेते हैं फिर भी मुंह में एक साथ रहते हैं, यही माफ़ कर देने का सबसे बड़ा उदाहरण है। मानवीय रिश्ते बिना एक दूसरे के हमेशा अधूरे हैं ,इसलिए हमेशा जुड़े रहें। हमारे जीवन में सब की अपनी अपनी अलग प्रधानता है, जैसे हम एक तेज धार दार ब्लेड से पेड़ नही काट सकते और एक मजबूत कुल्हाड़ी से बाल नही काट सकते। जो जैसा है कमोबेश सदा जुड़े रहें। यही जीवन की सफलता का राज है। 🌹🙏 #☝आज का ज्ञान
☝आज का ज्ञान - आज का अमृत प्रेम पियाला सो पिये शीश दक्षिना देय। लोभी शीश ना दे सवे नाम प्रेम का लेय। प्रेम का प्याला केवल वही पी सकता है जो ಚ पने सिर का वलिदान करने को तत्पर हो। फ लोभी लालची अपने सिर का वलिदान कभी नहीं कता भले वह कितना भी प्रेम-प्रेम चिल्लाता हो। आज का अमृत प्रेम पियाला सो पिये शीश दक्षिना देय। लोभी शीश ना दे सवे नाम प्रेम का लेय। प्रेम का प्याला केवल वही पी सकता है जो ಚ पने सिर का वलिदान करने को तत्पर हो। फ लोभी लालची अपने सिर का वलिदान कभी नहीं कता भले वह कितना भी प्रेम-प्रेम चिल्लाता हो। - ShareChat