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अंत्येष्टि संस्कार क्यों? 〰️〰️🌼〰️🌼〰️〰️ मनुष्य के प्राण निकल जाने पर मृत शरीर को अग्नि में समर्पित कर अंत्येष्टि संस्कार करने का विधान हमारे ऋषियों ने इसलिए बनाया, ताकि सभी स्वजन, संबंधी, मित्र, परिचित अपनी अंतिम विदाई देने आएं और इससे उन्हें जीवन का उद्देश्य समझने का मौका मिले, साथ ही यह भी अनुभव हो कि भविष्य में उन्हें भी शरीर छोड़ना है। #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स चूड़ामण्युपनिषट् में कहा गया है कि ब्रह्म से स्वयं प्रकाशरूप आत्मा की उत्पत्ति हुई। आत्मा से आकाश, आकाश से वायु, वायु से अग्नि, अग्नि से जल, जल से पृथ्वी की उत्पत्ति हुई। इन पांच तत्त्वों से मिलकर ही मनुष्य शरीर की रचना हुई है। हिंदू अंत्येष्टि संस्कार में मृत शरीर को अग्नि में समर्पित करके आकाश, वायु, जल, अग्नि और भूमि इन्हीं पंच तत्त्वों में पुनः मिला दिया जाता है। मृतक देह को जलाने यानी शवदाह करने के संबंध में अथर्ववेद में लिखा है इमौ युनिज्मि ते वह्नी असुनीताय वोढवे ताभ्यां यमस्य सादनं समितीश्चाव गच्छतातू ॥ -अथर्ववेद 18/2/56 अर्थात् हे जीव! तेरे प्राणविहीन मृतदेह को सद्गति के लिए मैं इन दो अग्नियों को संयुक्त करता हूं अर्थात् तेरी मृतक देह में लगाता हूँ। इन दोनों अग्नियों के द्वारा तू सर्व नियंता यम परमात्मा के समीप परलोक को श्रेष्ठ गतियों के साथ प्राप्त हो। आ रभस्व जातवेदस्तेजस्वद्धरो अस्तु ते। शरीरमस्य सं दहाथैनं धेहि सुकृतामु लोके ॥ -अथर्ववेद 18/3/71 अर्थात् हे अग्नि! इस शव को तू प्राप्त हो। इसे अपनी शरण में ले। तेरा हरण सामर्थ्य तेजयुक्त होवे। इस शव को तू जला दे और हे अग्निरूप प्रभो, इस जीवात्मा को तू सुकृतलोक में धारण करा । वायुरनिलममृतमथेदं भस्मान्तं शरीरम् ओ३म् क्रतो स्मर। क्लिबे स्मर। कृतं स्मर ॥ -यजुर्वेद 4015 अर्थात् हे कर्मशील जीव, तू शरीर छूटते समय परमात्मा के श्रेष्ठ और मुख्य नाम ओम् का स्मरण कर। प्रभु को याद कर। किए हुए अपने कर्मों को याद कर। शरीर में आने जाने वाली वायु अमृत है, परंतु यह भौतिक शरीर भस्म पर्यन्त है। भस्मान्त होने वाला है। यह शव भस्म करने योग्य है। हिंदुओं में यह मान्यता भी है कि मृत्यु के बाद भी आत्मा शरीर के प्रति वासना बने रहने के कारण अपने स्थूल शरीर के आस-पास मंडराती रहती है, इसलिए उसे अग्नि को समर्पित कर दिया जाता है, ताकि उनके बीच कोई संबंध न रहे। अंत्येष्टि संस्कार में कपाल- क्रिया क्यों की जाती है, उसका उल्लेख गरुडपुराण में मिलता है। जब शवदाह के समय मृतक की खोपड़ी को घी की आहुति सात बार देकर डंडे से तीन बार प्रहार करके फोड़ा जाता है तो उस प्रक्रिया को कपाल-क्रिया के नाम से जाना जाता है। चूंकि खोपड़ी की हड्डी इतनी मजबूत होती है कि उसे आग से भस्म होने में भी समय लगता है। वह टूट कर मस्तिष्क में स्थित ब्रह्मरंत्र पंचतत्त्व में पूर्ण रूप से विलीन हो जाए, इसलिए उसे तोड़ना जरूरी होता है। इसके अलावा अलग-अलग मान्यताएं भी प्रचलित हैं। मसलन कपाल का भेदन होने पर प्राण पूरी तरह स्वतंत्र होते हैं और नए जन्म की प्रक्रिया में आगे बढ़ते हैं। दूसरी मान्यता यह है कि खोपड़ी को फोड़कर मस्तिष्क को इसलिए जलाया जाता है ताकि वह भाग अधजला न रह जाए अन्यथा अगले जन्म में वह अविकसित रह जाता है। हमारे शरीर के प्रत्येक अंग में विभिन्न देवताओं का वास होने की मान्यता का विवरण श्राद्ध चंद्रिका में मिलता है। चूंकि सिर में ब्रह्मा का वास होना माना गया है इसलिए शरीर को पूर्ण रूप से मुक्ति प्रदान करने के लिए कपाल क्रिया द्वारा खोपड़ी को फोड़ा जाता है। पुत्र के द्वारा पिता को अग्नि देना व कपाल-क्रिया इसलिए करवाई जाती है ताकि उसे इस बात का एहसास हो जाए कि उसके पिता अब इस दुनिया में नहीं रहे और घर-परिवार का संपूर्ण भार उसे ही वहन करना है। 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️
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*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 03 फरवरी 2026* *⛅दिन - मंगलवार* *⛅विक्रम संवत् - 2082* *⛅अयन - उत्तरायण* *⛅ऋतु - शिशिर* *⛅मास - फाल्गुन* *⛅पक्ष - कृष्ण* *⛅तिथि - द्वितीया रात्रि 12:40 फरवरी 04 तक तत्पश्चात् तृतीया* *⛅नक्षत्र - मघा रात्रि 10:10 तक तत्पश्चात् पूर्वाफाल्गुनी* *⛅योग - शोभन रात्रि 02:39 फरवरी 04 तक तत्पश्चात् अतिगण्ड* *⛅राहुकाल - दोपहर 03:28 से शाम 04:51 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 07:06* *⛅सूर्यास्त - 06:16 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - उत्तर दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 05:23 से प्रातः 06:15 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:19 से दोपहर 01:03 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:15 फरवरी 04 से रात्रि 01:06 फरवरी 04 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️विशेष - द्वितीया को बृहती (छोटा बैंगन या कटेहरी) खाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* https://whatsapp.com/channel/0029VaARDIOAojYzV7E44245 *🔹शात्रों में वर्णित गौ-महिमा🔹* *🔸जो प्रतिदिन स्नान करके गौ का स्पर्श करता है, वह मनुष्य सब प्रकार के स्थूल पापों से भी मुक्त हो जाता है । जो गौओं के खुर से उडी हुई धूल को सिर पर धारण करता है, वह मानो तीर्थ के जल में स्नान कर लेता है और सभी पापों से छुटकारा पा जाता है । (पद्म पुराण, सृष्टि खंड, अध्याय:५७)* *🔸गौ का स्पर्श करने, सात्त्विक-सदाचारी ब्राह्मण को नमस्कार करने और सद्गुरु, देवता का भलीभाँति पूजन करने से गृहस्थ सारे पापों से छुट जाते हैं । (स्कंद पुराण, प्रभास खंड)* *🔸गंडस्पर्श कर लेने मात्र से ही गौएँ मनुष्य के समस्त पापों को नष्ट कर देती हैं और आदरपूर्वक सेवन किये जाने पर अपार सम्पत्ति प्रदान करती हैं । वे ही गायें दान दिये जाने पर सीधे स्वर्ग ले जाती हैं । ऐसी गौओं के समान और कोई भी धन नहीं हैं । (बृहत्पराशर स्मृति)* #💮आज का पंचांग एवं मुहूर्त💫 *🔸जो प्यास से व्याकुल हुई गौओं को पानी पीने से विघ्न डालता है, उसे ब्रह्मघाती समझना चाहिए । (महाभारत, अनुशासन पर्व : २४.७ )* *🔸जो एक वर्ष तक प्रतिदिन स्वयं भोजन के पहले दुसरे की गाय को एक मुट्ठी घास खिलाता है, उसका वह व्रत समस्त कामनाओं को पूर्ण करनेवाला होता है । (महाभारत, अनुशासन पर्व : ६९.१२)* *🔸प्रतिपदा का चन्द्र-दर्शन केवल गाय ही कर पाती है । यमदूतों व प्रेतत्माओं को देख लेने में गाय सक्षम है । उनके दिखने पर वह विशिष्ट प्रकार की आवाज निकालने लगती है । गाय रँभाने की तरंगे जहाँ तक पहुँचती हैं वहाँ तक आसुरी शक्तियों का प्रभाव नष्ट हो जाता है ।*
💮आज का पंचांग एवं मुहूर्त💫 - आज का पंचांग मास॰ फाल्गुन॰ पक्ष  कृष्ण www.radheradheje.com R शिशिर दिन॰ र्ंगलवार নিনক্ 03-02-2026 तिथि- द्वितीया (२४४४० से नृतीया ) नक्षक भघा ఇాాః नक्षत्र  श्रवण దివిడ ٥ ল্লীকু भकर शोभन (13.11ಣu) तैतुल करण- चन्द्र राशि- सिंह सूर्य राशि- मकर चौघडिया, दिन मुहूर्त शुभ 007:07 रहुकाल १५:२८ १६४५१ अशुभ 08:३१ अशुभ यमर्घंटा 09:५ उद्वेग 08:३० ११८१७ अशुभ 09:5! அg& gch' ಈರ12831 14804| er 09354 ११४१७ शुभ अभिजित १२४१९ 13:038& शुभ CIಖ11617 , 12321 दूर मुहूर्त 0९:२१ 10:05அg& 071240 १४४०५ शुभ दवूरमुहूर्त २३१२४ - २४:०८० अशुभ Cటd802 15828 997 वर्ज्यम१०२४ 01857&থঙ शुभ15:28 १६:५१ शुभ प्रदाष १८४१५ - २०५० शुभ १८४१५ अशुभ 006850 ्ंडमूल २२४१० अशुभ 07807 आपका दिन शुथ और ्गलमय हो Badlieliadliee आज का पंचांग मास॰ फाल्गुन॰ पक्ष  कृष्ण www.radheradheje.com R शिशिर दिन॰ र्ंगलवार নিনক্ 03-02-2026 तिथि- द्वितीया (२४४४० से नृतीया ) नक्षक भघा ఇాాః नक्षत्र  श्रवण దివిడ ٥ ল্লীকু भकर शोभन (13.11ಣu) तैतुल करण- चन्द्र राशि- सिंह सूर्य राशि- मकर चौघडिया, दिन मुहूर्त शुभ 007:07 रहुकाल १५:२८ १६४५१ अशुभ 08:३१ अशुभ यमर्घंटा 09:५ उद्वेग 08:३० ११८१७ अशुभ 09:5! அg& gch' ಈರ12831 14804| er 09354 ११४१७ शुभ अभिजित १२४१९ 13:038& शुभ CIಖ11617 , 12321 दूर मुहूर्त 0९:२१ 10:05அg& 071240 १४४०५ शुभ दवूरमुहूर्त २३१२४ - २४:०८० अशुभ Cటd802 15828 997 वर्ज्यम१०२४ 01857&থঙ शुभ15:28 १६:५१ शुभ प्रदाष १८४१५ - २०५० शुभ १८४१५ अशुभ 006850 ्ंडमूल २२४१० अशुभ 07807 आपका दिन शुथ और ्गलमय हो Badlieliadliee - ShareChat
*ललिता जयंती 2026 विशेष | कथा, मंत्र, साधना, श्रीविद्या रहस्य* मां ललिता प्राकट्योत्सव का पर्व माघ मास के शुक्ल पक्ष को मनाया जाता है, इस दिन मां ललिता की पूजा की जाती है। इस दिन मां ललिता के साथ ही स्कंदमाता और भगवान शंकर की पूजा भी की जाती है। माता ललिता को राजेश्वरी, षोडशी, त्रिपुरा सुंदरी आदि नामों से भी जाना जाता है। इस दिन माँ के मन्त्र ॐ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीयै नमः का जाप करना चाहिये। #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स https://www.radheradheje.com/lalita-jayanti-2026/
*ललिता जयंती 2026 विशेष | कथा, मंत्र, साधना, श्रीविद्या रहस्य* मां ललिता प्राकट्योत्सव का पर्व माघ मास के शुक्ल पक्ष को मनाया जाता है, इस दिन मां ललिता की पूजा की जाती है। इस दिन मां ललिता के साथ ही स्कंदमाता और भगवान शंकर की पूजा भी की जाती है। माता ललिता को राजेश्वरी, षोडशी, त्रिपुरा सुंदरी आदि नामों से भी जाना जाता है। इस दिन माँ के मन्त्र ॐ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीयै नमः का जाप करना चाहिये। https://www.radheradheje.com/lalita-jayanti-2026/ #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
*ललिता जयंती 2026 विशेष | कथा, मंत्र, साधना, श्रीविद्या रहस्य* मां ललिता प्राकट्योत्सव का पर्व माघ मास के शुक्ल पक्ष को मनाया जाता है, इस दिन मां ललिता की पूजा की जाती है। इस दिन मां ललिता के साथ ही स्कंदमाता और भगवान शंकर की पूजा भी की जाती है। माता ललिता को राजेश्वरी, षोडशी, त्रिपुरा सुंदरी आदि नामों से भी जाना जाता है। इस दिन माँ के मन्त्र ॐ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीयै नमः का जाप करना चाहिये। https://www.radheradheje.com/lalita-jayanti-2026/ #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स - RadheRadheje मां ललिता प्राकट्योत्सव मां ललिता प्राकट्योत्सव का पर्व माघ मास के शुक्ल पक्ष को मनाया जाता है, इस दिन मां ललिता की पूजा की जाती है। इन्हें महात्रिपुरसुन्दरी, षोडशी, ललिता , लीलावती , लीलामती , ललिताम्बिका , लीलेशी, लीलेश्वरी , तथा राजराजेश्वरी भी कहते हैं। इन्हें दस महाविद्याओं की तीसरी महाविद्या माना जाता है। ललिता प्राकट्योत्सव प्रत्येक वर्ष माघ मास की तिथि के दिन मनाई जाती है। इस दिन मां ललिता की gfofH आराधना करने से व्यक्ति को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन मां ललिता के साथ ही स्कंदमाता और भगवान शंकर की पूजा भी की जाती है। माता ललिता को राजेश्वरी, Fg ' सुंदरी आदि नामों से भी जाना जाता है। इस दिन माँ के षोडशी, मन्त्र ऊँ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीयै नमः का जाप करना चाहिये। radheradheje com WWW RadheRadheje मां ललिता प्राकट्योत्सव मां ललिता प्राकट्योत्सव का पर्व माघ मास के शुक्ल पक्ष को मनाया जाता है, इस दिन मां ललिता की पूजा की जाती है। इन्हें महात्रिपुरसुन्दरी, षोडशी, ललिता , लीलावती , लीलामती , ललिताम्बिका , लीलेशी, लीलेश्वरी , तथा राजराजेश्वरी भी कहते हैं। इन्हें दस महाविद्याओं की तीसरी महाविद्या माना जाता है। ललिता प्राकट्योत्सव प्रत्येक वर्ष माघ मास की तिथि के दिन मनाई जाती है। इस दिन मां ललिता की gfofH आराधना करने से व्यक्ति को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन मां ललिता के साथ ही स्कंदमाता और भगवान शंकर की पूजा भी की जाती है। माता ललिता को राजेश्वरी, Fg ' सुंदरी आदि नामों से भी जाना जाता है। इस दिन माँ के षोडशी, मन्त्र ऊँ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीयै नमः का जाप करना चाहिये। radheradheje com WWW - ShareChat
#🌺राधा कृष्ण💞 #🙏 राधा रानी #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #💕 राधे-कृष्ण कोट्स 🙏 #📒 मेरी डायरी
🌺राधा कृष्ण💞 - रूह का रिश्ता है आपसे, मन भरने का सवाल ही पैदा नहीं होता, रूह का रिश्ता है आपसे, मन भरने का सवाल ही पैदा नहीं होता, - ShareChat
*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 31 जनवरी 2026* *⛅दिन - शनिवार* *⛅विक्रम संवत् - 2082* *⛅अयन - उत्तरायण* *⛅ऋतु - शिशिर* *⛅मास - माघ* *⛅पक्ष - शुक्ल* *⛅तिथि - त्रयोदशी सुबह 08:25 तक, तत्पश्चात् चतुर्दशी प्रातः 05:52 फरवरी 01 तक, तत्पश्चात् पूर्णिमा* *⛅नक्षत्र - पुनर्वसु रात्रि 01:34 फरवरी 01 तक तत्पश्चात् पुष्य* *⛅योग - विष्कम्भ दोपहर 01:33 तक तत्पश्चात् प्रीति* *⛅राहुकाल - सुबह 09:55 से सुबह 11:18 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 07:07* *⛅सूर्यास्त - 06:14 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - पूर्व दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 05:24 से प्रातः 06:16 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:18 से दोपहर 01:03 तक(उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:14 फरवरी 01 से रात्रि 01:06 फरवरी 01 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️व्रत पर्व विवरण - सर्वार्थसिद्धि योग (प्रातः 03:27 से प्रातः 07:07 तक)* *🌥️विशेष - चतुर्दशी को स्त्री - सहवास तथा तिल का तेल खाना व लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* https://whatsapp.com/channel/0029VaARDIOAojYzV7E44245 *🔹स्वप्न में देशी गौवंश व गौ-उत्पादों के दर्शन से शुभ फल🔹* *🔸स्वप्न में गौओं, उनसे प्राप्त दूध, दही आदि गव्यों तथा प्रसंगों, क्रियाओं के दर्शन से नीचे दिये अनुसार विभिन्न फल प्राप्त होते हैं ।* *🔸१] साँड अथवा गौ-दर्शन से कल्याण-लाभ, व्याधि-नाश, कुटुम्ब-वृद्धि होती है । सभी काली वस्तुओं का दर्शन निंद्ध माना जाता है जबकि काली गाय का दर्शन शुभ होता है । गौ के थन को चूसना भी श्रेष्ठ माना गया है ।* *🔸२] गौ का घर में ब्याना, बैल या साँड की सवारी करना, तालाब के बीच में घी-मिश्रित खीर का भोजन उत्तम माना गया है । घी सहित खर का भोजन तो राज्यप्राप्ति का सूचक माना गया है ।* *🔸३] स्वप्न में ताजे दुहे हुए फेनसहित दुग्ध का पान करनेवाले को अनेक भोगों की तथा दही के दर्शन से प्रसन्नता की प्राप्ति होती है ।* *🔸४] जो बैल अथवा साँड से युक्त रथ पर अकेला सवार होता है और उसी अवस्था में जाग जाता है उसे शीघ्र धन मिलता है ।* #💮आज का पंचांग एवं मुहूर्त💫 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स *🔸५] घी मिलने या दही खाने से यश की तथा दही मिलने से धन की प्राप्ति निश्चित है | इसी प्रकार यात्रा आरम्भ करते समय दही और दूध का दिखना शुभ शकुन माना गया है ।* *🔸६] दही-भात खाने से कार्यसिद्धि होती है तथा बैल पर चढ़ने से धन-लाभ होता है एवं व्याधि से छुटकारा मिलता है ।* *🔸स्वप्न में उपरोक्त अनुसार देशी गोवंश व गाय के दूध-दही आदि के दर्शनमात्र से यदि इतना फल मिल सकता है तो प्रत्यक्ष देशी गाय के दर्शन व सेवा से कितना महान फल मिलता होगा, आप सोच सकते हैं लेकिन जो भी सोचेंगे फल उससे कई-कई गुना अधिक ही होगा ।*
💮आज का पंचांग एवं मुहूर्त💫 - आज का पंचांग भास॰ माथ पक्ष शुक्च www.radheradheje.com R- fifk दिन॰ शनिवार 4٦-31-01-2026 निथि॰ घ्रयोदशी (८३२३ से चतुर्दशी २९३३२(क्षय) प्रुनर्वस्नु 7811 چ नक्षव  श््रवण 85   9ಾಸ ಪ ಇರಖ ৎi নন্তল(08:25 ম্ীঘ্) करप ؟ (20:00344 चन्द्ररशि- सूर्य राशि॰ मकर चोघडिया, दिन मुहूर्त शुभ 08:323?7 &[41<709:55 ११४१८ अशुभ 476707:09 ಟಟೊ14803 १५:२६ अशुभ शुभ08:32 09855 ೩೫ ঘীণ্ 09:55 घुली @ರ0809 08832 11818 ಊೌ೫ अभिजित १२:१८ उद्वेग ११४१८ १३४०३ शुभ १२:४० अशुभ ಷ್ಟಟ೯೯f 08.37 ' 09:२१ अशुभ 4712:40 1803 9೫ वर्ज्यम १४४२8 १५४५७ अशुभ 6u727 14803| १५:२६ शुभ प्रदोष १८४१२ २०:४८ शुभ अमृत १५:२६ 16849 ೩೫ काल १६४४९ १८४१२ अशुभ आपका दिन शुथ और र्गलमय हो RadheRadliefe आज का पंचांग भास॰ माथ पक्ष शुक्च www.radheradheje.com R- fifk दिन॰ शनिवार 4٦-31-01-2026 निथि॰ घ्रयोदशी (८३२३ से चतुर्दशी २९३३२(क्षय) प्रुनर्वस्नु 7811 چ नक्षव  श््रवण 85   9ಾಸ ಪ ಇರಖ ৎi নন্তল(08:25 ম্ীঘ্) करप ؟ (20:00344 चन्द्ररशि- सूर्य राशि॰ मकर चोघडिया, दिन मुहूर्त शुभ 08:323?7 &[41<709:55 ११४१८ अशुभ 476707:09 ಟಟೊ14803 १५:२६ अशुभ शुभ08:32 09855 ೩೫ ঘীণ্ 09:55 घुली @ರ0809 08832 11818 ಊೌ೫ अभिजित १२:१८ उद्वेग ११४१८ १३४०३ शुभ १२:४० अशुभ ಷ್ಟಟ೯೯f 08.37 ' 09:२१ अशुभ 4712:40 1803 9೫ वर्ज्यम १४४२8 १५४५७ अशुभ 6u727 14803| १५:२६ शुभ प्रदोष १८४१२ २०:४८ शुभ अमृत १५:२६ 16849 ೩೫ काल १६४४९ १८४१२ अशुभ आपका दिन शुथ और र्गलमय हो RadheRadliefe - ShareChat
*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 30 जनवरी 2026* *⛅दिन - शुक्रवार* *⛅विक्रम संवत् - 2082* *⛅अयन - उत्तरायण* *⛅ऋतु - शिशिर* *⛅मास - माघ* *⛅पक्ष - शुक्ल* *⛅तिथि - द्वादशी सुबह 11:09 तक तत्पश्चात् त्रयोदशी* *⛅नक्षत्र - आद्रा रात्रि 03:27 जनवरी 31 तक तत्पश्चात् पुनर्वसु* *⛅योग - वैधृति शाम 04:58 तक तत्पश्चात् विष्कम्भ* *⛅राहुकाल - सुबह 11:17 से दोपहर 12:40 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 07:08* *⛅सूर्यास्त - 06:13 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - पश्चिम दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 05:24 से प्रातः 06:16 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:18 से दोपहर 01:02 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:14 जनवरी 31 से रात्रि 01:06 जनवरी 31 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️व्रत पर्व विवरण - प्रदोष व्रत, गांधीजी पुण्यतिथि* *🌥️विशेष - द्वादशी को पूतिका (पोई) व त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* https://whatsapp.com/channel/0029VaARDIOAojYzV7E44245 *🔹तिल के औषधीय प्रयोग🔹* *🔸काले तिल चबाकर खाने व शीतल जल पीने से शरीर की पर्याप्त पुष्टि हो जाती है। दाँत मृत्युपर्यन्त दृढ़ बने रहते हैं।* *🔸एक भाग सोंठ चूर्ण में दस भाग तिल का चूर्ण मिलाकर 5 से 10 ग्राम मिश्रण सुबह शाम लेने से जोड़ों के दर्द में राहत मिलती है।* *🔸तिल का तेल पीने से अति स्थूल (मोटे) व्यक्तियों का वजन घटने लगता है व कृश (पतले) व्यक्तियों का वजन बढ़ने लगता है। यह कार्य तेल के द्वारा सप्तधातुओं के प्राकृत निर्माण से होता है।* #💮आज का पंचांग एवं मुहूर्त💫 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स *🔹तैलपान विधिः सुबह 20 से 50 मि.ली. गुनगुना तेल पीकर,गुनगुना पानी पियें। बाद में जब तक खुलकर भूख न लगे तब तक कुछ न खायें।* *🔸अत्यन्त प्यास लगती हो तो तिल की खली को सिरके में पीसकर समग्र शरीर पर लेप करें।* *🔸वार्धक्यजन्य हड्डियों की कमजोरी उससे होने वाले दर्द में दर्दवाले स्थान पर 15 मिनट तक तिल के तेल की धारा करें।* *🔸पैर में फटने या सूई चुभने जैसी पीड़ा हो तो तिल के तेल से मालिश कर रात को गर्म पानी से सेंक करें।* *🔸पेट मे वायु के कारण दर्द हो रहा हो तो तिल को पीसकर, गोला बनाकर पेट पर घुमायें।* *🔹वातजनित रोगों में तिल में पुराना गुड़ मिलाकर खायें।** *🔸एक भाग गोखरू चूर्ण में दस भाग तिल का चूर्ण मिलाके 5 से 10 ग्राम मिश्रण बकरी के दूध में उबाल कर, मिश्री मिला के पीने से षढंता∕नपुंसकता (Impotency) नष्ट होती है।* *🔸काले तिल के चूर्ण में मक्खन मिलाकर खाने से रक्तार्श (खूनी बवासीर) नष्ट हो जाती है।* *🔹तिल की मात्राः 10 से 25 ग्राम ।* *🔹विशेषः देश, काल, ऋतु, प्रकृति, आयु आदि के अनुसार मात्रा बदलती है। उष्ण प्रकृति के व्यक्ति, गर्भिणी स्त्रियाँ तिल का सेवन अल्प मात्रा में करें। अधिक मासिक-स्राव में तिल न खायें।*
💮आज का पंचांग एवं मुहूर्त💫 - आज का पंचांग भास माथ এ&থু www.radheradheje.com रितनु- शिशिर दिन॰ शुक्रवार சiீச 30 01 2026 तिथि- द्वादशी (०१४०९से त्रयोदशी) नक्षत्र आद्रा सूर्य नक्षत्र॰ श्रवण चंद्रनक्षत्र॰ & ল্লীল సిబా वैधृति करणा- बालव(११:०९से कौलव) मिथुन चन्द्ररशि॰ सूर्य राशि- मकर चोघडिया, दिन '೯೯' शुभ १२:४० अशुभ रहुकाल ११४१७ ಟ307:09 08832 9೫ ಊಟೊ15826' १६४४९ अशुभ 09255 ೩೫ ঝঙ্08832 பூளி @ರ08832 09855 3{09:55 11817 ೩೫ fவf1:18 1E8028 काल ११४१७ १२:४० अशुभ दूरमुहूर्त 0९:२१ १०:०६ अशुभ शुभ १२:४0 १४४०३ शुभ दूरमुहूर्त १३१०२ रोग १४४०३ १३८५७ अशुभ १५१२६ अशुभ 40413809 148373[& उद्वेग १५:२६  06849 && प्रदोष १८४१२ २०:४8 शुभ चर १६४५९ 18812 ೩೫ शुक्र प्रदोष व्रत की शुभकामनाएं RadheRadlefe आज का पंचांग भास माथ এ&থু www.radheradheje.com रितनु- शिशिर दिन॰ शुक्रवार சiீச 30 01 2026 तिथि- द्वादशी (०१४०९से त्रयोदशी) नक्षत्र आद्रा सूर्य नक्षत्र॰ श्रवण चंद्रनक्षत्र॰ & ল্লীল సిబా वैधृति करणा- बालव(११:०९से कौलव) मिथुन चन्द्ररशि॰ सूर्य राशि- मकर चोघडिया, दिन '೯೯' शुभ १२:४० अशुभ रहुकाल ११४१७ ಟ307:09 08832 9೫ ಊಟೊ15826' १६४४९ अशुभ 09255 ೩೫ ঝঙ্08832 பூளி @ರ08832 09855 3{09:55 11817 ೩೫ fவf1:18 1E8028 काल ११४१७ १२:४० अशुभ दूरमुहूर्त 0९:२१ १०:०६ अशुभ शुभ १२:४0 १४४०३ शुभ दूरमुहूर्त १३१०२ रोग १४४०३ १३८५७ अशुभ १५१२६ अशुभ 40413809 148373[& उद्वेग १५:२६  06849 && प्रदोष १८४१२ २०:४8 शुभ चर १६४५९ 18812 ೩೫ शुक्र प्रदोष व्रत की शुभकामनाएं RadheRadlefe - ShareChat