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*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 22 अप्रैल 2026* *⛅दिन - बुधवार* *⛅विक्रम संवत् - 2083* *⛅अयन - उत्तरायण* *⛅ऋतु - ग्रीष्म* *⛅मास - वैशाख* *⛅पक्ष - शुक्ल* *⛅तिथि - षष्ठी रात्रि 10:49 तक तत्पश्चात् सप्तमी* *⛅नक्षत्र - आर्द्रा रात्रि 10:13 तक तत्पश्चात् पुनर्वसु* *⛅योग - अतिगण्ड सुबह 09:08 तक तत्पश्चात् सुकर्मा* *⛅राहुकाल - दोपहर 12:26 से दोपहर 02:02 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 06:01* *⛅सूर्यास्त - 06:51 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - उत्तर दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:31 से प्रातः 05:16 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - कोई नहीं* *⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:03 से मध्यरात्रि 12:47 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️व्रत पर्व विवरण - श्री रामानुजाचार्य जयंती, पृथ्वी दिवस, स्कन्द षष्ठी* *🌥️विशेष - षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातून मुँह में डालने नीच योनियों की प्राप्ति होती है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* https://whatsapp.com/channel/0029VaARDIOAojYzV7E44245 ━━━━━━━━━━━ 🎥 ━━━━━━━━━━━ https://youtube.com/shorts/cZyb39DYbgE?si=6Xb1cUOypwDN9_0l #wednesday #god #lordganesha #💮आज का पंचांग एवं मुहूर्त💫 #ganpatibappamorya #panchang #prosperity #healthylifestyle #keytosuccess #sadguru #blessings #mantra #jaishreeram #radheradheje #facebookviral #fbviral #trendingnow
💮आज का पंचांग एवं मुहूर्त💫 - आज का पंचांग मास- वैशाख, पक्ष- शुक्ल wwwradheradhejecom ऋतु- ग्रीष्म दिन- बुधवार வiசு 22-04-2026 तिथि- षष्ठी (२२:४८ से सप्तमी ) नक्षत्र  आद्रा सूर्य नक्षत्र- अश्विनी चंद्रनक्षत्र- आद्रा बोग॰ : मेष अतिर्गंड कौलव (१२:०१ से तैतनुल) करण मिथुन चन्द्रराशि- सूर्य राशि॰ मेष शुभ मुहूर्त चोघडिया , दिन १४:०२ अशुभ राहूकाल १२:२६ 7/3706:02 07838 ೩೫ यम ्घंटा 0७:३8 09:14 3%& अमृत 0७:३8 09814 ೩೫ गुली काल १०:५०  128266 काल 0९:१५ - १०:५० अशुभ अभिजित १२:०० १२:५१ अशुभ ೩೫7 10:50 १२:२६ शुभ रोग १२१२६ = १५:०२ अशुभ दूर मुहूर्त १२:००  १२:५१ अशुभ उद्वेग १४:०२ 09:10 3&& 40407842 १५:३७ अशुभ प्रदोष १८:४९ 21804 ೩೫ 17813 ೩೫ 15837 18849 ೩೫ সUঙ1813 आपका दिन शुभ और मंगलमय हो Radlheliadliee आज का पंचांग मास- वैशाख, पक्ष- शुक्ल wwwradheradhejecom ऋतु- ग्रीष्म दिन- बुधवार வiசு 22-04-2026 तिथि- षष्ठी (२२:४८ से सप्तमी ) नक्षत्र  आद्रा सूर्य नक्षत्र- अश्विनी चंद्रनक्षत्र- आद्रा बोग॰ : मेष अतिर्गंड कौलव (१२:०१ से तैतनुल) करण मिथुन चन्द्रराशि- सूर्य राशि॰ मेष शुभ मुहूर्त चोघडिया , दिन १४:०२ अशुभ राहूकाल १२:२६ 7/3706:02 07838 ೩೫ यम ्घंटा 0७:३8 09:14 3%& अमृत 0७:३8 09814 ೩೫ गुली काल १०:५०  128266 काल 0९:१५ - १०:५० अशुभ अभिजित १२:०० १२:५१ अशुभ ೩೫7 10:50 १२:२६ शुभ रोग १२१२६ = १५:०२ अशुभ दूर मुहूर्त १२:००  १२:५१ अशुभ उद्वेग १४:०२ 09:10 3&& 40407842 १५:३७ अशुभ प्रदोष १८:४९ 21804 ೩೫ 17813 ೩೫ 15837 18849 ೩೫ সUঙ1813 आपका दिन शुभ और मंगलमय हो Radlheliadliee - ShareChat
#🪔शंकराचार्य जयंती📿 आदिगुरु शंकराचार्य जन्मोत्सव विशेष: जानें आदिगुरु शंकराचार्य की कहानी श्री आदिगुरु शंकराचार्य जी का जन्म वैशाख शुक्ल पंचमी के दिन केरल के कालड़ी में हुआ था, इसी उपलक्ष्य में वैशाख मास की शुक्ल पंचमी के दिन श्री आदि गुरु शंकराचार्य जी का प्राकट्योत्सव मनाया जाता है। https://www.radheradheje.com/adi-guru-shankaracharya-in-hindi/
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Adi Guru Shankaracharya: जानें आदि शंकराचार्य की कहानी
महर्षि दयानंद सरस्वती जी ने अपनी पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश में लिखा है कि आदि शंकराचार्यजी का काल लगभग 2200 वर्ष पूर्व का है। दयानंद सरस्वती जी 138 साल पहले हुए थे। आज के इतिहासकार कहते हैं कि आदि शंकराचार्य का जन्म 788 ईस्वी में हुआ और उनकी मृत्यु 820 ईस्वी में। मतलब वह 32 साल जीए। अब हम असली बात समझते हैं। आचार्य शंकर का जन्म वैशाख शुक्ल पंचमी तिथि ई. सन् 788 को तथा मोक्ष ई. सन् 820 स्वीकार किया जाता है, परंतु सुधन्वा जो कि शंकर के समकालीन थे, उनके ताम्रपत्र अभिलेख में शंकर का जन्म युधिष्ठिराब्द 2631 शक् (507 ई०पू०) तथा शिवलोक गमन युधिष्ठिराब्द 2663 शक् (475 ई०पू०) सर्वमान्य है। 
*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 20 अप्रैल 2026* *⛅दिन - सोमवार* *⛅विक्रम संवत् - 2083* *⛅अयन - उत्तरायण* *⛅ऋतु - ग्रीष्म* *⛅मास - वैशाख* *⛅पक्ष - शुक्ल* *⛅तिथि - तृतीया प्रातः 07:27 तक, तत्पश्चात् चतुर्थी प्रातः 04:14 अप्रैल 21 तक, तत्पश्चात् पंचमी* *⛅नक्षत्र - रोहिणी मध्यरात्रि 02:08 तक तत्पश्चात् मृगशिरा* *⛅योग - सौभाग्य शाम 04:11 तक तत्पश्चात् शोभन* *⛅राहुकाल - प्रातः 07:38 से सुबह 09:14 से तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 06:02* *⛅सूर्यास्त - 06:50 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - पूर्व दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:33 से प्रातः 05:17 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:00 से दोपहर 12:52 (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:03 से मध्यरात्रि 12:48 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️व्रत पर्व विवरण - मातङ्गी जयंती, श्री बसवेश्वर जयंती, विनायक चतुर्थी,अमृतसिद्धि योग, सर्वार्थसिद्धि योग (अहोरात्रि)* *🌥️विशेष - चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* https://whatsapp.com/channel/0029VaARDIOAojYzV7E44245 *🔹कब कहां और कैसे सोना चाहिए🔹* #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #💮आज का पंचांग एवं मुहूर्त💫 *🔸हमारे शास्त्रों में मुनष्य की दिन चर्या के बारे में सुबह से लेकर रात में सोते तक के नियमों का वर्णन मिलता है। शास्त्रों के अनुसार रात में जब दिनभर की थकान को दूर करने के लिए हम शयन करने जा रहे होते हैं तो कब और कैसे शयन करना चाहिए, कहां शयन करना चाहिए और कहां नहीं। यशस्वी, निरोग और दीर्घायु जीवन के लिए सोते समय इन बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए।* *🔸1- मनुस्मृति में कहा गया है कि सूने तथा निर्जन घर में अकेला नहीं सोना चाहिए। देव मन्दिर गर्भगृह और श्मशान भूमि में भी नहीं सोना चाहिए।* *🔸2- विष्णुस्मृति के अनुसार, किसी सोए हुए मनुष्य को भूलकर भी अचानक नहीं जगाना चाहिए।* *🔸3- चाणक्यनीति के अनुसार, विद्यार्थी, नौकर और द्वारपाल यदि ये अधिक समय से सोए हुए हों तो इन्हें समय पर तुरंत जगा देना चाहिए।* *🔸4- देवीभागवत एवं पद्मपुराण में कहा गया है कि- स्वस्थ मनुष्य को आयुरक्षा हेतु ब्रह्ममुहुर्त में उठना चाहिए। बिल्कुल अंधेरे कमरे में नहीं सोना चाहिए।* *🔸5- अत्रिस्मृति के अनुसार, भीगे (गीले) पैर कभी नहीं सोना चाहिए। सूखे पैर सोने से लक्ष्मी (धन) की प्राप्ति होती है।* *🔸6- महाभारत के अनुसार, टूटी खाट पर तथा जूठे मुंह भूलकर भी नहीं सोना चाहिए।* *🔸7- गौतम धर्म सूत्र के अनुसार, "नग्न होकर/निर्वस्त्र" नहीं सोना चाहिए।* *🔸8- आचारमय़ूख में लिखा है कि- पूर्व दिशा की ओर सिर करके सोने से विद्या, पश्चिम की ओर सिर करके सोने से प्रबल चिन्ता, उत्तर की ओर सिर करके सोने से हानि व मृत्यु तथा दक्षिण की ओर सिर करके सोने से धन व आयु की प्राप्ति होती है।* *🔸9- दिन में कभी नहीं सोना चाहिए। परन्तु ज्येष्ठ मास में दोपहर के समय 1 मुहूर्त (48 मिनट) के लिए सोया जा सकता है। (दिन में सोने से रोग घेरते हैं तथा आयु का क्षय होता है) ।* *🔸10- ब्रह्मवैवर्तपुराण के अनुसार, दिन में तथा सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय सोने वाला रोगी और दरिद्र हो जाता है।* *🔸11- सूर्यास्त के एक प्रहर (लगभग 3 घण्टे) के बाद ही शयन करना चाहिए।* *🔸12- बायीं करवट सोना स्वास्थ्य के लिये लाभकारी है।* *🔸13- दक्षिण दिशा में पांव करके कभी नहीं सोना चाहिए। यम और दुष्ट देवों का निवास रहता है। कान में हवा भरती है। मस्तिष्क में रक्त का संचार कम को जाता है, स्मृति- भ्रंश, मौत व असंख्य बीमारियां होती है।* *🔸14- हृदय पर हाथ रखकर, छत के पाट या बीम के नीचे और पांव पर पांव चढ़ाकर निद्रा न लें।* *🔸15- शय्या (पलंग) पर बैठकर खाना-पीना बहुत अशुभ होता है एवं सोते सोते पढ़ने से नेत्र ज्योति घटती है, इसलिए ऐसा नहीं करना चाहिए।* *🔸16- माथे पर तिलक लगाकर कभी नहीं सोना चाहिए।* #monday #god #lordshiva #harharmahadev #panchang #prosperity #healthylifestyle #keytosuccess #sadguru #blessings #mantra #jaishreeram #radheradheje #facebookviral #fbviral #trendingnow
🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स - आज का पंचांग मास- वैशाख, पक्ष  शुक्ल wwwradheradheje com 6-| वसंत सोमवार নিনiক 20-042026 तिथि- तृतीया (०७:२७ से चतनुर्थी ) नक्षत्र- रोहिणी नक्षत्र- अश्विनी चूर्रः रोहिणी 78151- मेष बोग॰ { सौभाग्य 47(07:2734[) करण चन्द्र राशि- वृषभ सूर्य राशि॰ मेष मुहूर्त ೩೫ चोघडिया , दिन राहूकाल 0७:३9 09:15 3%& 306:03 07839 ೩೫ यम ्घंटा १०:५० १२:२६ अशुभ 09:15 3%& ಊH07839 பளி काल १४४०२ शुभ 09:१५ : 15:37 १०:५० शुभ अभिजित १२:०१ रोग १०:५०  12:52 ೩೫ १२:२६ अशुभ ೯ಟ೯rೆ 12.52 0&112:26 १३:४३ अशुभ १४:०२ अशुभ दूर मुहूर्त १५:२५ १६:१६ अशुभ १५४३७ शुभ 214:02 464718:55 २०:२१ अशुभ १७४१३ शुभ @Iಖ15837 प्रदोष १८४४९ 21803 ೩೫ 3;717813 18849 ೩೫ ऑा सातंगी जन्मोत्सव की शुभकामनाएं RadheRadlefe आज का पंचांग मास- वैशाख, पक्ष  शुक्ल wwwradheradheje com 6-| वसंत सोमवार নিনiক 20-042026 तिथि- तृतीया (०७:२७ से चतनुर्थी ) नक्षत्र- रोहिणी नक्षत्र- अश्विनी चूर्रः रोहिणी 78151- मेष बोग॰ { सौभाग्य 47(07:2734[) करण चन्द्र राशि- वृषभ सूर्य राशि॰ मेष मुहूर्त ೩೫ चोघडिया , दिन राहूकाल 0७:३9 09:15 3%& 306:03 07839 ೩೫ यम ्घंटा १०:५० १२:२६ अशुभ 09:15 3%& ಊH07839 பளி काल १४४०२ शुभ 09:१५ : 15:37 १०:५० शुभ अभिजित १२:०१ रोग १०:५०  12:52 ೩೫ १२:२६ अशुभ ೯ಟ೯rೆ 12.52 0&112:26 १३:४३ अशुभ १४:०२ अशुभ दूर मुहूर्त १५:२५ १६:१६ अशुभ १५४३७ शुभ 214:02 464718:55 २०:२१ अशुभ १७४१३ शुभ @Iಖ15837 प्रदोष १८४४९ 21803 ೩೫ 3;717813 18849 ೩೫ ऑा सातंगी जन्मोत्सव की शुभकामनाएं RadheRadlefe - ShareChat
#MaaMatangi2026 जानें माॅं मातंगी मन्त्र साधना, माॅं मातंगी साधना समस्त प्रकार के भौतिक सुख प्रदान करती है समस्त जगत जिस शक्ति से चलित है, उसी शक्ति की दस स्वरूप हैं ये दस महाविद्याएँ, जिनके नौवें क्रम में भगवती मातंगी का नाम आता है। भगवान शिव के मतंग रूप में उनकी अर्द्धांगिनी होने के कारण ही उनकी संज्ञा मातंगी रूप में विख्यात हुई #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स https://www.radheradheje.com/astrology-mantra-maa-matangi-sadhana-mantra-maa-matangi-sadhana-method-matangi-armor-original-armor-psalm/
अक्षय तृतीया पौराणिक महात्म्य एवं शीघ्र विवाह और धन प्राप्ति के लिए शुभ उपाय 〰〰🌼🌼〰〰🌼🌼〰〰🌼🌼〰〰🌼🌼〰〰 हिन्दुओ के प्रमुख त्योहार में से एक अक्षय तृतीया इस वर्ष 19 अप्रैल रविवार के दिन मनाई जाएगी जानिए इस दिन विशेष की कुछ महत्वपुर्ण जानकारी। वैशाख शुक्ल तृतीया को अक्षय तृतीया कहते हैं, यह सनातन धर्मियों का प्रधान त्यौहार है, इस दिन दिये हुए दान और किये हुए स्त्रान, होम, जप आदि सभी कर्मोंका फल अनन्त होता है - सभी अक्षय (जिसका क्षय या नाश ना हो) हो जाते हैं ; इसी से इसका नाम अक्षय हुआ है, अक्षय तृतीया अभिजीत मुहुर्त 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ स्वयंसिद्ध साढेतीन मुहूर्त के रुप में अक्षय तृतीया का बहुत अधिक महत्व है। धर्म शास्त्रों में इस पुण्य शुभ पर्व की कथाओं के बारे में बहुत कुछ विस्तार पूर्वक कहा गया है. इनके अनुसार यह दिन सौभाग्य और संपन्नता का सूचक होता है. दशहरा, धनतेरस, देवउठान एकादशी की तरह अक्षय तृतीया को अभिजीत, अबूझ मुहुर्त या सर्वसिद्धि मुहूर्त भी कहा जाता है. क्योंकि इस दिन किसी भी शुभ कार्य करने हेतु पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं पड़ती. अर्थात इस दिन किसी भी शुभ काम को करने के लिए आपको मुहूर्त निकलवाने की आवश्यकता नहीं होती. अक्षय अर्थात कभी कम ना होना वाला इसलिए मान्यता अनुसार इस दिन किए गए कार्यों में शुभता प्राप्त होती है. भविष्य में उसके शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। हिन्दू समुदाय के अतिरिक्त जैन धर्म के लोग भी इस तिथि को बहुत महत्व देते है। इस दिन बिना पंचांग या शुभ मुहूर्त देखे आप हर प्रकार के मांगलिक कार्य जैसे विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, वस्त्र आभूषण आदि की खरीदारी, जमीन या वाहन खरीदना आदि को कर सकते है। पुराणों में इस दिन पितरों का तर्पण, पिंडदान या अन्य किसी भी तरह का दान अक्षय फल प्रदान करता है। इस दिन गंगा में स्नान करने से सभी पाप नष्ट हो जाते है। इतना ही नहीं इस दिन किये जाने वाला जप, तप, हवन, दान और पुण्य कार्य भी अक्षय हो जाते है। आज के दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों उच्च राशि मे होते है। अतः मन और आत्मा दोनों से बलवान रहते है,तो आज आप जो भी कार्य करते है वो मन और आत्मा से जुड़ा रहता है ऐसे में आज का किया पूजा पाठ और दान पुण्य बहुत महत्वपूर्ण और प्रभावी होते है। इसी तिथि को नर - नारायण, परशुराम और हयग्रीव - अवतार हुए थे; इसलिये इस दिन इनका जन्मोत्सव भी मनाया जाता है तथा इसी दिन त्रेतायुग भी आरम्भ हुआ था, अतएव इसे मध्याह्न व्यापिनी ग्रहण करना चाहिये, परंतु परशुरामजी प्रदोष काल में प्रकट हुए थे; इसलिये यदि द्वितीया को मध्याह्न से पहले तृतीया आ जाये तो उस दिन अक्षय तृत्तीया, नर - नारायण जन्मोत्सव, परशुराम जन्मोत्सव और हयग्रीव जन्मोत्सव सब सम्पन्न की जा सकती हैं और यदि द्वितीया अधिक हो तो परशुराम - जन्मोत्सव दूसरे दिन होता है। यदि इस दिन गौरीव्रत भी हो तो ' गौरी विनायकोपेता ' के अनुसार गौरीपुत्र गणेश की तिथि चतुर्थी का सहयोग अधिक शुभ होता है। अक्षयतृत्तीया बड़ी पवित्र और महान् फल देने वाली तिथि है, इसलिये इस दिन सफलता की आशा से व्रतोत्सवादि के अतिरिक्त वस्त्र, शस्त्र और आभूषणादि बनवाये अथवा धारण किये जाते है तथा नवीन स्थान, संस्था एवं समाज वर्ष की तेजी - मंदी जानने के लिये इस दिन सब प्रकार के अन्न, वस्त्र आदि व्यावहारिक वस्तुओं और व्यक्ति विशेषों के नामों को तौलकर एक सुपूजित स्थान में रखते हैं और दूसरे दिन फिर तौलवर उनकी न्यूनाधिकता से भविष्य का शुभाशुभ मालूम करते हैं, अक्षयतृत्तीया में तृत्तीया तिथि, सोमवार और रोहिणी नक्षत्र ये तीनों हों तो बहुत श्रेष्ठ माना जाता है, किसान लोग उस दिन चन्द्रमाके अस्त होते समय रोहिणी का आगे जाना अच्छा और पीछे रहे जाना बुरा मानते हैं !! स्त्रात्वा हुत्वा च दत्त्वा च जप्त्वानन्तफलं लभेत् !! ( भारते ) यत्किञ्चिद् दीयते दानं स्वल्पं वा यदि वा बहु ! तत् सर्वमक्षयं यस्मात् तेनेयमक्षया स्मृता !! जैनियों में अक्षय तृतीया की मान्यताएँ 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ हिंदुओं के साथ साथ जैन समुदाय में भी अक्षय तृतीया का महत्व है. जैन धर्म में यह दिन उनके प्रथम चौबीस तीर्थंकर में से एक, भगवान ऋषभदेव से जुड़ा है. ऋषभदेव ही बाद में जा कर भगवान आदिनाथ के नाम से प्रसिद्ध हुए. ऋषभदेव जैनी भिक्षु थे. इन्होंने ही जैन धर्म में“आहराचार्य– जैनी साधुओं तक आहार (भोजन) पहुंचाने का तरीका” प्रचारित किया था। जैनी भिक्षु कभी खुद के लिए भोजन नहीं पकाते तथा कभी भी किसी से कुछ नहीं मांगते, जो कुछ भी उन्हें लोग प्रेम से दे देते, वे उसे खा लेते.अक्षय तृतीया के पीछे जैन समुदाय में बहुत ही रोचक कथा है. ऋषभदेव ने अपना राज्य पाठ अपने 101 पुत्रों के बीच बाँटते हुए संसार की मोह माया त्याग दी. उन्होने छः महीने तक बिना भोजन तथा पानी के तपस्या की और फिर उसके बाद वे भोजन की आवश्यकता में ध्यान से बाहर बैठ गए. यह जैनी संत आहार की प्रतीक्षा करने लगे। लोगों ने ऋषभदेव को राजा समझकर उन्हें सोना, चाँदी, हीरे, जवाहरात, हाथी, घोड़े, कपड़े और कुछ ने तो अपने राजा को खुश करने के लिए अपनीपुत्री तक दान में दे दी। परंतु ऋषभदेव को यह सब नहीं चाहिए था, वे तो सिर्फ भोजन के एक कौर की चाह में थे. इसलिए ऋषभदेव फिर से एक साल की तपस्या के लिए चले गए और उन्हें सालभर तक उपवास रखना पड़ा. फिर एक साल बाद राजा श्रेयांश हुए जिन्होने अपने “पूर्व-भाव-स्मरण” (पिछले जन्म के विचार जानने की शक्ति) से ऋषभदेव के मन की बात समझी और उनका उपवास तुड़वा कर उन्हें गन्ने का रस पिलाया. यह दिन अक्षय तृतीया का दिन था. उस दिन से आजतक तीर्थंकर ऋषभदेवके उपवास का महत्व समझते हुए जैन समुदाय अक्षय तृतीया के दिन उपवास रखकर गन्ने के रस से अपना उपवास खतम करते हैं. इस प्रथा को“पारणा”कहते हैं। अक्षयतृतीया के दान एवं खरीददारी 〰〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ राशि के अनुसार करें इसकी खरीदारी 👇🐐👇🐂👇💏👇💮👇🐅👇👩 मेष 🐐 सोना, पीतल। वृष 🐂 चांदी, स्टील। मिथुन 👫 सोना, चांदी , पीतल। कर्क 🦀 चांदी, वस्त्र। सिंह 🐅 सोना, तांबा। कन्या 👩 सोना, चांदी, पीतल। तुला ⚖️ चांदी, इलेक्ट्रॉनिक्स, फर्नीचर। वृश्चिक 🐉 सोना, पीतल। धनु 🏹 सोना, पीतल, फ्रिज, वाटर कूलर। मकर 🐊 सोना, पीतल, चांदी, स्टील। कुंभ 🍯 सोना, चांदी, पीतल, स्टील, वाहन। मीन 🐬 सोना, पीतल, पूजन सामग्री व बर्तन। ग्रहों से सम्बंधित दान: 〰️〰️〰️〰️〰️〰️ सूर्य👉 लाल चंदन, लाल वस्त्र, गेहूं, गुड़, स्वर्ण, माणिक्य, घी व केसर का दान सूर्योदय के समय करना लाभप्रद होता है। चंद्रमा👉 चांदी, चावल, सफेद चंदन, मोती, शंख, कर्पूर, दही, मिश्री आदि का दान संध्या के समय में फलदायी है। मंगल👉 स्वर्ण, गुड़, घी, लाल वस्त्र, कस्तूरी, केसर, मसूर की दाल, मूंगा, ताम्बे के बर्तन आदि का दान सूर्यास्त से पौन घंटे पूर्व करना चाहिए। बुध👉 कांसे का पात्र, मूंग, फल, पन्ना, स्वर्ण आदि का दान अपराह्न में करें। गुरु👉 चने की दाल, धार्मिक पुस्तकें, पुखराज, पीला वस्त्र, हल्दी, केसर, पीले फल आदि का दान संन्ध्या के समय करना चाहिए। शुक्र👉 चांदी, चावल, मिश्री, दूध, दही, इत्र, सफेद चंदन आदि का दान सूर्योदय के समय करना चाहिए। शनि👉 लोहा, उड़द की दाल, सरसों का तेल, काले वस्त्र, जूते व नीलम का दान दोपहर के समय करें। राहु👉 तिल, सरसों, सप्तधान्य, लोहे का चाकू व छलनी व छाजला, सीसा, कम्बल, नीला वस्त्र, गोमेद आदि का दान रात्रि समय करना चाहिए। केतु👉 लोहा, तिल, सप्तधान, तेल, दो रंगे या चितकबरे कम्बल या अन्य वस्त्र, शस्त्र, लहसुनिया व बहुमूल्य धातुओं में स्वर्ण का दान निशा काल में करना चाहिए। अक्षयतृतीया व्रत -विधि 〰〰🌼〰〰🌼〰〰 इस दिन उपर्युक्त तीनों जन्मोत्सव एकत्र होने से व्रती को चाहिये कि वह प्रातःस्त्रानादि से निवृत्त होकर ''ममाखिलपापक्षयपूर्वक सकलशुभफलप्राप्तये भागवत्प्रीत्यर्थं सकल कामना संसिध्यर्थं देवत्रयपूजनमहं करिष्ये '' ऐसा संकल्प करके भगवान का यथाविधि षोडशोपचार से पूजन करे, उन्हें पञ्चामृत से स्त्रान करावे, सुगन्धित द्रव्य चढ़ाकर पुष्पमाला पहनावे और नैवेद्य में नर - नारायण के निमित्त सेके हुए जौ या गेहूँ का ' सत्तू ', परशुराम के निमित्त कोमल ककड़ी और हयग्रीव के निमित्त भीगी हुई चने की दाल अर्पण करे, बन सके तो उपवास तथा समुद्र स्त्रान या गङ्गा स्त्रान करे और जौ, गेहूँ, चने, सत्तू, दही - चावल ईख के रस और दुध के बने हुए खाद्य पदार्थ ( खाँड़, मावा, मिठाई आदि ) तथा सुवर्ण एवं जलपूर्ण कलश, धर्मघट, अन्न, सब प्रकार के रस और ग्रीष्म ऋतु के उपयोगी वस्तुओं का दान करे तथा पितृश्राद्ध करे और ब्राह्मण भोजन भी करावे, यह सब यथाशक्ति करने से अनन्त फल होता है !! यः पश्यति तृतीयायां कृष्णं चन्दनभूषितम् ! वैशाखस्य सिते पक्षे स यात्यच्युतमन्दिरम् !! युगादौ तु नरः स्त्रात्वा विधिवल्लवणोदधौ ! गोसहस्त्रप्रदानस्य फलं प्राप्रोति मानवः !! यवगोधूमचणकान् सक्तु दध्योदनं तथा ! इक्षुक्षीरविकाराश्च हिरण्यं च स्वशक्तितः !! उदकुम्भान् सरकरकान् सन्नान् सर्वरसैः सह ! ग्रैष्मिकं सर्वमेवात्र सस्यं दाने प्रशस्यते !! 'गन्धोदकतिलैर्मिश्रं सान्नं कुम्भं फलान्वितम् । पितृभ्यः सम्प्रदास्यामि अक्षय्यमुपतिष्ठतु !! अक्षय तृतीया की पौराणिक प्रचलित कथा 〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰 अक्षय तृतीया की अनेक व्रत कथाएँ प्रचलित हैं। ऐसी ही एक कथा के अनुसार प्राचीन काल में एक धर्मदास नामक वैश्य था। उसकी सदाचार, देव और ब्राह्मणों के प्रति काफी श्रद्धा थी। इस व्रत के महात्म्य को सुनने के पश्चात उसने इस पर्व के आने पर गंगा में स्नान करके विधिपूर्वक देवी-देवताओं की पूजा की, व्रत के दिन स्वर्ण, वस्त्र तथा दिव्य वस्तुएँ ब्राह्मणों को दान में दी। अनेक रोगों से ग्रस्त तथा वृद्ध होने के बावजूद भी उसने उपवास करके धर्म-कर्म और दान पुण्य किया। यही वैश्य दूसरे जन्म में कुशावती का राजा बना। कहते हैं कि अक्षय तृतीया के दिन किए गए दान व पूजन के कारण वह बहुत धनी प्रतापी बना। वह इतना धनी और प्रतापी राजा था कि त्रिदेव तक उसके दरबार में अक्षय तृतीया के दिन ब्राह्मण का वेष धारण करके उसके महायज्ञ में शामिल होते थे। अपनी श्रद्धा और भक्ति का उसे कभी घमंड नहीं हुआ और महान वैभवशाली होने के बावजूद भी वह धर्म मार्ग से विचलित नहीं हुआ। माना जाता है कि यही राजा आगे चलकर राजा चंद्रगुप्त के रूप में पैदा हुआ। स्कंद पुराण और भविष्य पुराण में उल्लेख है कि वैशाखशुक्ल पक्ष की तृतीया को रेणुका के गर्भ से भगवान विष्णु ने परशुराम रूप में जन्म लिया। कोंकण और चिप्लून के परशुराम मंदिरों में इस तिथि को परशुराम जयंती बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है। दक्षिण भारत में परशुराम जयंती को विशेष महत्व दिया जाता है। परशुराम जयंती होने के कारण इस तिथि में भगवान परशुराम के आविर्भाव की कथा भी सुनी जाती है। इस दिन परशुराम जी की पूजा करके उन्हें अर्घ्य देने का बड़ा माहात्म्य माना गया है। सौभाग्यवती स्त्रियाँ और क्वारी कन्याएँ इस दिन गौरी-पूजा करके मिठाई, फल और भीगे हुए चने बाँटती हैं, गौरी-पार्वती की पूजा करके धातु या मिट्टी के कलश में जल, फल, फूल, तिल, अन्न आदि लेकर दान करती हैं। मान्यता है कि इसी दिन जन्म से ब्राह्मण और कर्म से क्षत्रिय भृगुवंशी परशुराम का जन्म हुआ था। एक कथा के अनुसार परशुराम की माता और विश्वामित्र की माता के पूजन के बाद प्रसाद देते समय ऋषि ने प्रसाद बदल कर दे दिया था। जिसके प्रभाव से परशुराम ब्राह्मण होते हुए भी क्षत्रिय स्वभाव के थे और क्षत्रिय पुत्र होने के बाद भी विश्वामित्र ब्रह्मर्षि कहलाए। उल्लेख है कि सीता स्वयंवर के समय परशुराम जी अपना धनुष बाण श्री राम को समर्पित कर संन्यासी का जीवन बिताने अन्यत्र चले गए। अपने साथ एक फरसा रखते थे तभी उनका नाम परशुराम पड़ा। शादी में हो रही बाधा दूर करने के उपाय 〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰 इस उपाय को अक्षय तृतीया के दिन किया जाता है। इस दिन अक्षय मुहूर्त माना गया है। यह शुभ मुहूर्त है। यह उपाय रात के समय में किया जाता है। 1👉 आप को एक चौकी या पटिए पर पीला कपड़ा बिछाना चाहिए और पूर्व दिशा की तरफ मुंह करके बैठ जाए। 2👉 पूजा स्थल पर मां पार्वती का चित्र रख लें। 3👉 चौकी पर एक मुट्ठी गेहूं रख दें। 4👉 गेहूं की ढेरी पर विवाह बाधा निवारण विग्रह (यंत्र) स्थापित करने के बाद चंदन अथवा केसर से तिलक लगा दें। यह पूरी प्रक्रिया ठीक से होने के बाद हल्दी की माला से इस मंत्र का जाप करना चाहिए। युवतियों के लिए यह मंत्र ऊं गं घ्रौ गं शीघ्र विवाह सिद्धये गौर्यै फट्। युवक करें इस मंत्र का जाप पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम। तारणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोदभवाम।। इस मंत्र की तीन-तीन माला 7 दिनों तक नियमित जपना चाहिए। अंतिम दिवस को इस सामग्री को मंदिर में ले जाकर देवी पार्वती के चरणों में समर्पित कर दें। इसे श्रद्धा और विश्वास से करने पर शीघ्र ही विवाह हो जाएगा। यह सिद्ध प्रयोग है, इसलिए मन में कोई संदेह न रखें। नहीं तो यह प्रभावशाली नहीं रहेगा। अन्य सौभाग्य वर्धक उपाय 〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰 1👉 आकस्मिक धन प्राप्ति के लिए अक्षय तृतीया से प्रारंभ करते हुए माता लक्ष्मी के मंदिर में प्रत्येक शुक्रवार धूपबत्ती व गुलाब की अगरबत्ती दान करने से जीवन में अचानक धन प्राप्ति के योग बनते 2👉 धनधान्य की वृद्धि के लिए अक्षय तृतीया को एक मुट्ठी बासमती चावल सर से 11 बार ऊसर कर बहते हुए जल में श्री महालक्ष्मी का ध्यान करते हुए व श्री मंत्र का जप करते हुए जल प्रवाह कर दें। आश्चर्यजनक लाभ होगा। 3👉 ऋण से मुक्ति के लिए अक्षय तृतीया पर कनकधारा यंत्र की लाल वस्त्र पर पूजा घर में स्थापना करें। पंचोपचार से पूजा करें। 51 दिन तक श्रद्धा से यंत्र का पाठ करें। धीरे-धीरे ऋण कैसे उतर गया, यह पता भी न चलेगा। 4👉 स्फटिक के श्रीयंत्र को पंचोपचार पूजन द्वारा विधिवत स्थापित करें। माता लक्ष्मी का ध्यान करें, श्रीसूक्त का पाठ करें। 5👉 जितना संभव हो सके, मंत्र ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्नयै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी: प्रचोदयात् का कमलगट्टे की माला से नियमित जप करें। नियमित रूप से एक गुलाब अर्पित करते रहें। इस प्रकार पूजा करके ऐसे श्रीयंत्र को आप इस दिन व्यावसायिक स्थल पर भी स्थापित कर सकते हैं। माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। 6👉 अक्षय तृतीया का व्रत रखकर और गर्मी में निम्न वस्तुओं जैसे- छाता, दही, जूता-चप्पल, जल का घड़ा, सत्तू, खरबूजा, तरबूज, बेल का सरबत, मीठा जल, हाथ वाले पंखे, टोपी, सुराही आदि वस्तुओं का दान करने से भाग्योन्नति में बाधा पहुचाने वाली समस्याओं से मुक्ति मिलती है। 7👉 अक्षय तृतीया के दिन 11 कौड़ियों को लाल कपडे में बांधकर पूजा स्थान में रखने से देवी लक्ष्मी आकर्षित होती हैं। देवी लक्ष्मी के समान ही कौड़ियां भी समुद्र से उत्पन्न हुई हैं। अक्षय तृतीया के विषय मे अन्य रोचक जानकारी 〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰 👉 मान्यता के अनुसार त्रेता युग के शुरू होने पर धरती की सबसे पावन माने जानी वाली गंगा नदी इसी दिन स्वर्ग से धरती पर आई. गंगा नदी को भागीरथ धरती पर लाये थे. इस पवित्र नदी के धरती पर आने से इस दिन की पवित्रता और बढ़ जाती है और इसीलिए यह दिन हिंदुओं के पावन पर्व में शामिल है. इस दिन पवित्र गंगा नदी में डुबकी लगाने से मनुष्य के पाप नष्ट हो जाते हैं। 👉 यह दिन पृथ्वी के रक्षक श्री विष्णुजी को समर्पित है. हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार विष्णुजी ने श्री परशुराम के रूप में धरती पर अवतार लिया था. इस दिन परशुराम के रूप में विष्णुजी छटवी बार धरती पर अवतरित हुए थे, और इसीलिए यह दिन परशुराम के जन्मदिवस के रूप में भी मनाया जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार विष्णुजी त्रेता एवं द्वापरयुग तक पृथ्वी पर चिरंजीवी (अमर) रहे. परशुराम सप्तऋषि में से एक ऋषि जमदगनी तथा रेणुका के पुत्र थे. यह ब्राह्मण कुल में जन्मे और इसीलिए अक्षय तृतीय तथा परशुराम जयंती को सभी हिन्दू बड़े धूमधाम से मनाते हैं। 👉 यह दिन रसोई एवं पाक (भोजन) की देवी माँ अन्नपूर्णा का जन्मदिन भी माना जाता है. अक्षय तृतीया के दिन माँ अन्नपूर्णा का भी पूजन किया जाता है और माँ से भंडारे भरपूर रखने का वरदान मांगा जाता है. अन्नपूर्णा के पूजन से रसोई तथा भोजन में स्वाद बढ़ जाता है। 👉 महाभारत में अक्षय तृतीया की एक और कथा प्रचलित है. इसी दिन दुशासन ने द्रौपदी का चीरहरण किया था. द्रौपदी को इस चीरहरण से बचाने के लिए श्री कृष्ण ने कभी न खत्म होने वाली साड़ी का दान किया था। 7👉 अक्षय तृतीया के पीछे हिंदुओं की एक और रोचक मान्यता है. जब श्री कृष्ण ने धरती पर जन्म लिया, तब अक्षय तृतीया के दिन उनके निर्धन मित्र सुदामा, कृष्ण से मिलने पहुंचे. सुदामा के पास कृष्ण को देने के लिए सिर्फ चार चावल के दाने थे, वही सुदामा ने कृष्ण के चरणों में अर्पित कर दिये परंतु अपने मित्र एवं सबके हृदय की जानने वाले अंतर्यामी भगवान सब कुछ समझ गए और उन्होने सुदामा की निर्धनता को दूर करते हुए उसकी झोपड़ी को महल में परिवर्तित कर दिया और उसे सब सुविधाओं से सम्पन्न बना दिया. तब से अक्षय तृतीया पर किए गए दान का महत्व बढ़ गया। 👉 दक्षिण प्रांत में इस दिन की अलग ही मान्यता है. उनके अनुसार इस दिन कुबेर (भगवान के दरबार का खजांची) ने शिवपुरम नामक जगह पर शिव की आराधना कर उन्हें प्रसन्न किया था. कुबेर की तपस्या से प्रसन्न हो कर शिवजी ने कुबेर से वर मांगने को कहा. कुबेर ने अपना धन एवं संपत्ति लक्ष्मीजी से पुनःप्राप्त करने का वरदान मांगा. तभी शंकरजी ने कुबेर को लक्ष्मीजी का पूजन करने की सलाह दी. इसीलिए तब से ले कर आजतक अक्षय तृतीया पर लक्ष्मीजी का पूजन किया जाता है. लक्ष्मी विष्णुपत्नी हैं इसीलिए लक्ष्मीजी के पूजन के पहले भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. दक्षिण में इस दिन लक्ष्मी यंत्रम की पूजा की जाती है, जिसमें विष्णु, लक्ष्मीजी के साथ – साथ कुबेर का भी चित्र रहता है। 👉 सतयुग और त्रेता युग का प्रारम्भ भी इसी दिन हुआ था । 👉 ब्रह्माजी के पुत्र अक्षय कुमार का अवतरण भी अक्षयतृतीया के दिन हुआ था । 👉 प्रसिद्ध तीर्थ स्थल श्री बद्री नारायण जी का कपाट अक्षयतृतीया के दिन खोला जाता है। 👉 बृंदावन के बाँके बिहारी मंदिर में साल में केवल अक्षयतृतीया ही के दिन श्री विग्रह चरण के दर्शन होते है अन्यथा साल भर वो बस्त्र से ढके रहते है । 5👉 अक्षय तृतीया के दिन ही महर्षि वेदव्यास ने महाभारत लिखना आरंभ की थी. इसी दिन महाभारत के युधिष्ठिर को “अक्षय पात्र” की प्राप्ति हुई थी. इस अक्षय पात्र की विशेषता थी, कि इसमें से कभी भोजन समाप्त नहीं होता था. इस पात्र के द्वारा युधिष्ठिर अपने राज्य के निर्धन एवं भूखे लोगों को भोजन दे कर उनकी सहायता करते थे. इसी मान्यता के आधार पर इस दिन किए जाने वाले दान का पुण्य भी अक्षय माना जाता है अर्थात इस दिन मिलने वाला पुण्य कभी खत्म नहीं होता. यह मनुष्य के भाग्य को सालों साल बढाता है। एवं इसी दिन महाभारत का युद्ध समाप्त भी हुआ था। 👉 भारत के उड़ीसा में अक्षय तृतीया का दिन किसानों के लिए शुभ माना जाता है. इस दिन से ही यहाँ के किसान अपने खेत को जोतना शुरू करते हैं। 👉 अलग अलग प्रांत में इस दिन का अपना अलग ही महत्व है. बंगाल में इस दिन गणेशजी तथा लक्ष्मीजी का पूजन कर सभी व्यापारी द्वारा अपनी लेखा जोखा (ऑडिट बूक) की किताब शुरू करने की प्रथा है. इसे यहाँ “हलखता” कहते हैं। 1👉 पंजाब में भी इस दिन का बहुत महत्व है. इस दिन को नए मौसम के आगाज का सूचक माना जाता है. इस अक्षय तृतीया के दिन जाट परिवार का पुरुष सदस्य ब्रह्म मुहूर्त में अपने खेत की ओर जाते हैं. उस रास्ते में जितने अधिक जानवर एवं पक्षी मिलते हैं, उतना ही फसल तथा बरसात के लिए शुभ शगुन माना जाता है। #🔯अक्षय तृतीया पर विशेष लक्ष्मी पूजन📿🙏 #🔯अक्षय तृतीया पर विशेष उपाय📿🛐 #🔔अक्षय तृतीया Status⏳ 〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰
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कुबेर उपासना विधि: जानें धनदायक श्री कुबेर उपासना संक्षिप्त विधि और मंत्र #🔯अक्षय तृतीया पर विशेष उपाय📿🛐 #🔯अक्षय तृतीया पर विशेष उपाय📿🛐 #🔯अक्षय तृतीया पर विशेष लक्ष्मी पूजन📿🙏 #🔯अक्षय तृतीया पर विशेष लक्ष्मी पूजन📿🙏 https://www.radheradheje.com/kubera-worship-method-dhandayak-shri-kuber-upasana-brief-method-and-mantra/
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#🤝अक्षय तृतीया की शुभकामनाएं🫂 #🔔अक्षय तृतीया Status⏳
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*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 19 अप्रैल 2026* *⛅दिन - रविवार* *⛅विक्रम संवत् - 2083* *⛅अयन - उत्तरायण* *⛅ऋतु - वसंत* *⛅मास - वैशाख* *⛅पक्ष - शुक्ल* *⛅तिथि - द्वितीया सुबह 10:49 तक तत्पश्चात् तृतीया* *⛅नक्षत्र - भरणी सुबह 07:10 तक, तत्पश्चात् कृत्तिका प्रातः 04:35 अप्रैल 20 तक, तत्पश्चात् रोहिणी* *⛅योग - आयुष्मान रात्रि 08:02 तक तत्पश्चात् सौभाग्य* *⛅राहुकाल - शाम 05:13 से शाम 06:48 से तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 06:03* *⛅सूर्यास्त - 06:49 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - पश्चिम दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:33 से प्रातः 05:18 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:01 से दोपहर 12:52 (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:03 से मध्यरात्रि 12:48 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️व्रत पर्व विवरण - त्रेता युगादि तिथि, अक्षय तृतीया, त्रिपुष्कर योग, परशुरामजी का प्राकट्य दिवस* *🌥️विशेष - द्वितीया को बृहती (छोटा बैंगन या कटेहरी) खाना निषिद्ध है एवं तृतीया को परवल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* https://whatsapp.com/channel/0029VaARDIOAojYzV7E44245 *🔹गर्मी के प्रभाव से सुरक्षा हेतु – प्रकृति के उपहार🔹* #💮आज का पंचांग एवं मुहूर्त💫 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स *🥥नारियल पानी :- नारियल का पानी पित्तशामक, स्वादिष्ट, स्निग्ध और ताजगी प्रदान करनेवाला है । यह प्यास को शांत कर ग्रीष्म ऋतु की उष्णता से सुरक्षा करता है । अत: गर्मियों में नारियल पानी का सेवन विशेष लाभदायी है ।* *🔸लू लगने पर नारियल पानी के साथ काला जीरा पीस के शरीर पर लेप करने से लाभ होता है ।* *🔸प्रतिदिन नारियल खाने व नारियल पानी पीने से शारीरिक शक्ति का विकास होता है, वीर्य की तेजी से वृद्धि होती है । ( अष्टमी को नारियल न खायें । )* *🔸मूत्र में जलन होने पर पिसा हरा धनिया तथा मिश्री नारियल पानी में मिला के पीने से जलन दूर होती है ।* *🥒खीरा : - खीरा शरीर को शीतलता प्रदान करता है । इसमें बड़ी मात्रा में पानी और खनिज तत्त्व पाये जाते हैं ।* *अत: इसके सेवन से शरीर में खनिज तत्त्वों का संतुलन बना रहता हैं । यह मूत्र की जलन शांत करता है एवं यकृत ( लीवर ) के लिए भी हितकारी है । खीरा भूख बढाने के साथ ही आँतों को सक्रिय करता हैं ।* *🔸अधिक पढने – लिखने, चित्रकला, संगणक व सिलाई का काम करने से आँखों में थकावट होने पर खीरे के दुकड़े काटकर आँखों पर रखें । इससे उनको आराम मिलता है तथा थकावट दूर होती है ।* *🍋नींबू और खीरे 🥒 का रस मिलाकर लगाने से धूप से झुलसी हुई त्वचा ठीक होती है ।* *🍉तरबूज :- ग्रीष्म ऋतुमें प्यास की अधिकता से मुक्ति दिलाता है तरबूज । इसके सेवन से शरीर में लू का प्रकोप कम होता है और बेचैनी से रक्षा होती है ।* *तरबूज के रस में सेंधा नमक और नींबू का रस मिलाकर पीने से लू से सुरक्षा होती है ।* *🔸गर्मी के प्रकोप से मूत्रावरोध होने पर तरबूज का रस पिलाने से मूत्र शीघ्र निष्कासित होता है ।* *🔸तरबूज के छोटे – छोटे टुकड़ों पर थोडा – सा जीरा चूर्ण और मिश्री डाल के सेवन करने से शरीर की उष्णता दूर होती है ।* *☘️धनिया : - धनिया ग्रीष्म ऋतू में अधिक प्यास के प्रकोप को शांत करता है ।* *🔸१० ग्राम सूखा धनिया व ५ ग्राम आँवला चूर्ण रात को मिटटी के पात्र में १ गिलास पानी में भिगो दें । प्रात: मसलकर मिश्री मिला के छान के पियें । यह गर्मी के कारण होनेवाले सिरदर्द व मूँह के छालों में हितकर हैं । धनिया पीसकर सिर पर लेप करने से भी आशातीत लाभ होगा । इससे पेशाब की जलन, गर्मी के कारण चक्कर आना तथा उलटी होना आदि समस्याएँ दूर होती हैं ।* #sunday #god #lordsurya #panchang #prosperity #healthylifestyle #keytosuccess #sadguru #blessings #mantra #jaishreeram #radheradheje #facebookviral #fbviral #trendingnow
💮आज का पंचांग एवं मुहूर्त💫 - आज का पंचांग मास- वैशाख, पक्ष शुक्ल wwwradheradhejecom Rze ಹೊ रविवार fিনiক 19-04-2026 तिथि- द्वितीया (१०१४९ से नृतीया ) नक्षत्र॰ भरणी   (O७:०९ से कुत्तिका) सूर्य नक्षत्र- अश्विनी 45785- भरणी बोग॰ : मेष आयुष्मान करण = कौलव (१०:४९ से तैतुल) चन्द्र राशि॰ मेष (१२३३० से वृषभ) सूर्य राशि॰ मेष मुहूर्त चोघडिया , दिन ೩೫ राहूकाल १७४१३  ತಷ[ 06:04 - 07840 3987 18848 37997 यम घंटा १२१२६ १४:०२ अशुभ चर0७:४0 09:१५ शुभ णुली काल १५:३७ " 3I3 लाभ 09:15-10:५1 शुभ अभिजित १२:०१ १२:५२ शुभ अमृत १०:५१ १२:२६ शुभ दूर मुहूर्त १७:०६  १७:५७ अशुभ काल १२:२६ १४:०२ अशुभ ೯೫17851 १९८१७ अशुभ शुभ १४:०२ १५:३७ शुभ प्रदोष १८:४८ 15:37 २१:०३ शुभ १७४१३ अशुभ उद्वेग १७:१३ १८:४8 अशुभ हादिक तृतीया 3&& शुभकामनाएं 05 RadheRadlefe आज का पंचांग मास- वैशाख, पक्ष शुक्ल wwwradheradhejecom Rze ಹೊ रविवार fিনiক 19-04-2026 तिथि- द्वितीया (१०१४९ से नृतीया ) नक्षत्र॰ भरणी   (O७:०९ से कुत्तिका) सूर्य नक्षत्र- अश्विनी 45785- भरणी बोग॰ : मेष आयुष्मान करण = कौलव (१०:४९ से तैतुल) चन्द्र राशि॰ मेष (१२३३० से वृषभ) सूर्य राशि॰ मेष मुहूर्त चोघडिया , दिन ೩೫ राहूकाल १७४१३  ತಷ[ 06:04 - 07840 3987 18848 37997 यम घंटा १२१२६ १४:०२ अशुभ चर0७:४0 09:१५ शुभ णुली काल १५:३७ " 3I3 लाभ 09:15-10:५1 शुभ अभिजित १२:०१ १२:५२ शुभ अमृत १०:५१ १२:२६ शुभ दूर मुहूर्त १७:०६  १७:५७ अशुभ काल १२:२६ १४:०२ अशुभ ೯೫17851 १९८१७ अशुभ शुभ १४:०२ १५:३७ शुभ प्रदोष १८:४८ 15:37 २१:०३ शुभ १७४१३ अशुभ उद्वेग १७:१३ १८:४8 अशुभ हादिक तृतीया 3&& शुभकामनाएं 05 RadheRadlefe - ShareChat